रहे न किसी की झोली खाली- ऐसी हो सबकी दीवाली
आज है दीपों का पर्व दीवाली
हर आंगन में दीप चले
हर घर में हो खुशहाली
सब मिलकर मनाए
भाई चारे से दीवाली
रहे न किसी की झोली खाली
ऐसी हो सबकी दीवाली
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई
जब सब हैं हम भाई-भाई
तो फिर काहे करते हैं लड़ाई
दीवाली है सबके लिए खुशिया लाई
आओ सब मिलकर खाए मिठाई
और भेद-भाव की मिटाए खाई
हर आंगन में दीप चले
हर घर में हो खुशहाली
सब मिलकर मनाए
भाई चारे से दीवाली
रहे न किसी की झोली खाली
ऐसी हो सबकी दीवाली
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई
जब सब हैं हम भाई-भाई
तो फिर काहे करते हैं लड़ाई
दीवाली है सबके लिए खुशिया लाई
आओ सब मिलकर खाए मिठाई
और भेद-भाव की मिटाए खाई


