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बुधवार, जून 22, 2011

स्टेडियम तैयार होते ही आईपीएल के मैच कराएंगे

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का बचा काम पूरा होते ही हमारा संघ आईपीएल के कुछ मैचों की मेजबानी लेगा। बड़े मैचों के आयोजन की राह में स्टेडियम का अधूरा काम है। अधूरा काम जल्द पूरा कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भी चर्चा हो चुकी है।
ये बातें छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया ने कहीं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि हम तो दो साल पहले ही आईपीएल के मैच की मेजबानी लेने तैयार थे। उस समय बीसीसीआई से अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम को मैचों के लिए उपयुक्त भी माना था। लेकिन तब आईपीएल देश से बाहर जाने के कारण हम मेजबानी से वंचित रह गए थे। हमारा प्रयास फिर से आईपीएल के मैचों के मेजबानी लेने का है, लेकिन अब तक स्टेडियम में काफी काम बचा है। स्टेडियम में मुख्य रुप से इंटीरियर का काम बचा है। इसका काम जैसे ही पूरा होगा हम फिर से मेजबानी का दावा करेंगे। उन्होंने बताया कि स्टेडियम लोक निर्माण विभाग को सौंपा जा चुका है और अब उम्मीद है कि जल्द ही सारा काम पूरा हो जाएगा।
श्री भाटिया ने बताया कि बीसीसीआई से एक राष्ट्रीय कोच प्रदेश के खिलाड़ियों को तैयार करने जल्द आएंगे। इस कोच की सेवाएं संघ दो साल के लिए लेगा और हर वर्ग के खिलाड़ियों को उनसे प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हमारे खिलाड़ी प्रदर्शन कर रहे हैं उससे उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ को जल्द ही बीसीसीआई से स्थाई मान्यता मिल जाएगी और छत्तीसगढ़ की भी रणजी टीम बनेगी।

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सोमवार, मई 25, 2009

मैदान में ही छलकने लगे जाम-क्रिकेट का क्या होगा हे.. राम

इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे संस्करण में भले मैचों की चर्चा कम रही हो लेकिन विवादों की चर्चा ज्यादा रही है। इस संस्करण में जहां एक तरफ कई युवा चेहरे सामने आए, वहीं हमेशा विवादों में रहने वाले शेन वार्न ने इस बार ऐसा कारनामा कर दिया जिसके बारे में सोच कर ही शर्म आती है। लेकिन इसमें वार्न का कोई दोष इसलिए नहीं है क्योंकि उनके देश में कभी खेल को न तो पूजा जा सकता है और न ही इसकी इबादत की जा सकती है जैसी की भारत में की जाती है। वार्न ने जिस तरह से एक मैच में मैदान में ही दर्शकों से बीयर लेकर पीने का काम किया, वह निहायत की घटिया और शर्मनाक काम था। इसके लिए वार्न को भले किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन क्रिकेट को पूजने वाले देश भारत में जरूर इसको सही नजरिए ने नहीं देखा गया है। क्रिकेट के हर विशेषज्ञ की नजर में वार्न की यह हरकत माफी के काबिल नहीं है। लेकिन इसका क्या किया जाए कि क्रिकेट में ऐसा करने वालों के लिए सजा का कोई प्रावधान ही नहीं है। अईपीएल के इस संस्करण को वैसे भी खेल के नाम से कम और अश्लीलता के नंगे नाच और वार्न की इस हरकत के कारण ही ज्यादा याद रखा जाएगा। वार्न की हरकत से तो लगता है कि अब वास्तव में आईपीएल से क्रिकेट की बर्बादी के दिन प्रारंभ हो गए हैं। वैसे भी आईपीएल महज एक नौटंकी के सिवा कुछ नहीं है। इस नौटंकी में काम करने वालों के मनोरंजन के लिए ही तो चियर्स गर्ल्स रखी जाती हैं।


आईपीएल के दूसरे संस्करण की विदाई हो गई है। पहली बार आईपीएल दक्षिण अफ्रीका में खेला गया। इस संस्करण को भी भले आयोजक भारत में हुए आयोजन की तरह की सफल बता रहे हैं पर यह बाद जग जाहिर है कि यह आयोजन उतना सफल नहीं रहा है। इस आयोजन में सफलता के गीत कम और विवादों के राग ज्यादा गूंजे हैं। अगर सबसे बड़े विवाद की बात की जाए तो वह विवाद शेन वार्न का मैदान में बीयर पीना रहा है। इसको हालांकि मीडिया में उतनी तव्वजो नहीं दी गई, लेकिन भारत में वार्न की हरकत की जरूर तीखी प्रतिक्रिया रही और उनको खेल विशेषज्ञों ने जरूर आड़े हाथों लिया। वार्न की यह हरकत काबिले माफी नहीं है। वैसे वार्न माफी मांगने वाले भी नहीं हैं क्योंकि उनकी सेहत पर मैदान में शराब पीने से कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है। जिस देश में मैच देखते हुए शराब पीने की परंपरा हो उस देश के खिलाड़ी से यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वह शराब को मैदान से दूर रख सकता है। यह आयोजन अगर भारत में होता तो यहां कभी ऐसी अशोभनीय हरकत का सवाल ही नहीं उठता था। भारत के किसी मैदान में कोई बीयर लेकर जा ही नहीं सकता है। ऐसे में यह तो संभव ही नहीं था कि कोई दर्शक वार्न जैसे किसी खिलाड़ी को बीयर आफर करता।


एक तरफ जहां वार्न की वजह से क्रिकेट शर्मसार हुआ है, वहीं चियर्स गर्ल्स के नंगे नाच से भी इसकी साख पर बटा लगा है। वैसे आयोजक चियर्स गर्ल्स को इसलिए रखते हैं ताकि जहां मैदान में दर्शकों का मनोरंजन हो सके, वहीं मैच के बाद खिलाड़ी चाहे तो उनका भी मनोरंजन हो सके और वह भी उस तरीके से जिस तरीके से वे चाहें। वैसे भी खिलाड़ी मैच के बाद विदेशों में क्लबों में जाकर क्या-क्या करते हैं यह बात जगजाहिर है। क्रिकेटर आज पूरी तरह से सभ्यता के दायरे से बाहर होते जा रहे हैं। विदेशी खिलाडिय़ों की तो बात ही छोडि़एं अपने भारतीय खिलाड़ी भी वैसे ही हो गए हैं।


विवादों की कड़ी में शाहरूख खान और सौरभ गांगुली का विवाद भी चर्चा में रहा है। यह बात अलग है कि इनका विवाद खुलकर सामने नहीं आया, लेकिन यह बात तय है कि शाहरूख की टीम की जो दुर्गति हुई है उसके पीछे सबसे बड़ा कारण सौरभ गांगुली से टीम की कमान वापस लेना रहा है। कोलकाता टीम के एक खिलाड़ी ने यह बात साफ तौर पर कह भी दी कि अगर टीम की कमान दादा के हाथों में रहती तो टीम का यह हाल नहीं होता और टीम कभी अंतिम स्थान पर नहीं आती। इसमें कोई मत नहीं है कि दादा टीम के हर खिलाड़ी की क्षमता जानते हैं। यह दादा के बस की ही बात थी कि उन्होंने भारतीय टीम को भी अपनी कप्तानी में एक नई ऊंचाईयां दी थी। ऐसे कप्तान से आईपीएल जैसी सीरीज में कप्तानी वापस लेना निश्चित ही शाहरूख की सबसे बड़ी भूल थी। अपनी टीम की दुर्गति देखकर अब शाहरूख भी उस दिन को कोस रहे होंगे जिस दिन उन्होंने गांगुली से कप्तानी वापस ली थी।
अब अगर आयोजन की बात की जाए तो भारत के लिए यह आयोजन सिर्फ इस लिहाज से ठीक रहा है कि इस आयोजन में भी भारत के कुछ नए सितारे उभर कर सामने आए हैं। जिन सितारों का नाम आज क्रिकेट प्रेमियों की जुबान पर चढ़ गया है उनमें प्रमुख रूप से मनीष पांडे, टीएस सुमन, शादाबा जकाती, नमन ओझा, रजत भाटिया और कामरान के नाम हैं। इनके अलावा रोहित शर्मा लीग के सर्वश्रेष्ठ अंडर 23 खिलाड़ी बनकर सामने आए हैं। इन खिलाडिय़ों को भविष्य में भारतीय टीम में स्थान जरूर मिल सकता है। आयोजन में एक सुखद पहलू यह रहा कि इस बार भारतीय मैदानों की तरह महज बल्लेबाजों का ही नहीं बल्कि गेंदबाजों का भी जलवा रहा, तभी तो मात्र 20 ओवर के मैच में तीन गेंदबाजों से हेट्रिक बनाने का कमाल दिखाया।

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सोमवार, मई 04, 2009

वोट नहीं नोट

दक्षिण अफ्रीका में अपनी आईपीएल टीम को छोड़कर किंग खान यानी शाहरुख खान जब भारत लौटे थे तो उन्होंने इसके पीछे का कारण मतदान यानी वोट को बताया था कि वे मतदान करना चाहते हैं इसलिए लौटे हैं। लेकिन हकीकत का पर्दाफाश तो इसके बाद हुआ कि जवाब वास्तव में वोट देने की मोहब्बत में नहीं बल्कि नोट कमाने की चाह में भारत लौटे थे।

दरअसल किंग खान को एक निजी समारोह में अपने डांस के जलवे दिखाने के लिए तीन करोड़ रुपए का ऑफर था। भला किंग खान इतने बड़े ऑफर को कैसे ठुकरा सकते थे। सो खान साहब वापस लौटे। अब जबकि उनको लौटना था तो उन्होंने इसके लिए बहाना बनाया कि उनको वोट देना है। अगर खान मियां यह कहते हुए लौटते की उनको एक डांस के लिए जाना है शायद यह सवाल खड़ा होता कि खान मियां को अपने डांस और फिल्मों से इतना ही ज्यादा लगाव है तो वे आखिर आईपीएल से क्यों जुड़े। मान गए किंग खान बहाने बनाना तो कोई आप से सीखे। अब यह आपको तय करना है कि वास्तव में किंग खान को वोट से मतलब है या फिर नोट से ।


आपके विचार आमंत्रित हैं।

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रविवार, अप्रैल 19, 2009

क्रिकेट का सजा बाजार- सट्टे का होने लगा कारोबार

इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के दूसरे संस्करण का बाजार दक्षिण अफ्रीका में सज गया है। उधर बाजर सजा है इधर सट्टे का कारोबार हो रहा है। सट्टा बाजार में इस समय चेन्नई की टीम विजेता के रूप में पहले नंबर पर चल रही है। इसका भाव ४.५० रुपए है। सबसे कम कीमत डेकन की है। इसका भाव ११ रुपए है। छत्तीसगढ़ में हर मैच पर इस समय करोड़ों का सट्टा लग रहा है। पहले मैच में ही सट्टा लगवाने वाले दो बुकी राजधानी में पकड़े गए हैं। आईपीएल के मैचों का आगाज अफ्रीका में हो चुका है। इसी के साथ सट्टा बाजार में टीमों के भाव भी खुल गए हैं। वैसे जैसे-जैसे मैचों के परिणाम सामने आएंगे, वैसे-वैसे टीमों के भाव में भी उतार-चढ़ाव आएगा। लेकिन शुरुआती दौर में सट्टा बाजार में जो भाव सामने आए हैं उनमें विजेता के रूप में चेन्नई की टीम को देखा जा रहा है। इस टीम के भाव इस समय ४.५० रुपए हैं। यानी इस टीम पर एक रुपए का दावा लगाने पर ४.५० रुपए मिलेंगे। दूसरे नंबर पर दिल्ली की टीम है जिसका भाव ४.७० रुपए है। तीसरे नंबर पर मुंबई की टीम का भाव ५.८५ रुपए, चौथे नंबर पर बेगलूर की टीम है जिसका भाव ७.२५ रुपए, पांचवें नंबर राजस्थान की टीम है जिसका भाव ८.०० रुपए, छठे नंबर पर पंजाब की टीम है जिसका भाव ८.२५ रुपए, सांतवें नंबर कोलकाता की टीम है जिसका भाव ८.५० रुपए और सबसे अंतिम याने आठवें नंबर डेकन की टीम है जिसका भाव ११ रुपए है। अगर यह टीम जीत जाती है तो इस टीम पर दाव लाने वाले को एक रुपए के एवज में ११ रुपए मिलेंगे। ये सारे भाव चैंपियनशिप प्रारंभ होने के पहले के हैं। अब जबकि चैंपियनशिप का आगाज हो चुका है मैचों के नतीजों के हिसाब से जहां विजेता टीमें बदलती रहेंगी, वहीं भाव भी कम ज्यादा होंगे। जानकारों की मानें तो आईपीएल के हर मैच पर प्रदेश में करोड़ों का सट्टा लगाया जा रहा है। राजधानी में जहां कई स्थानों के बुकी आकर काम कर रहे हैं, वहीं प्रदेश के कई बड़े बुकी पुलिस के डर से प्रदेश के बाहर जाकर भी अपना कारोबार कर रहे हैं।

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शनिवार, अप्रैल 11, 2009

चिदंबरम की गेंद पर मोदी बोल्ड

इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे संस्करण के भारत के बाहर जाने का कारण अब तक भारत सरकार के साथ गृहमंत्री पी. चिदंबरम के रूख को माना जा रहा था। इस बात को लेकर देश की पूरी खेल बिरादरी खफा थी कि क्रिकेट जैसे खेल को सरकार सुरक्षा नहीं दे पाई। लेकिन इसी के साथ एक बात यह भी थी कि क्रिकेट से पहले देश होता है। अब इधर अचानक गृहमंत्री ने इस बात का खुलासा किया है कि ललित मोदी के कारण ही आईपीएल भारत से बाहर गया है। वास्तव में जिस तरह का खुलासा गृहमंत्री ने किया है, उसके बाद तो यही लग रहा है कि ललित मोदी अपनी शर्तों पर ही आईपीएल का आयोजन देश में करवाना चाहते थे जो संभव नहीं था। अगर उनको वास्तव में भारत के खेल प्रेमियों से सरोकार होता तो जरूर वे आईपीएल को बाहर ले जाने से पहले कई बार सोचते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया तो इसका मतलब साफ है कि उनको खेल प्रेमियों से नहीं पैसों से ज्यादा मतलब है। वैसे भी आईपीएल में पैसों का ही बोलबाला है। आईपीएल को खेल से जोडऩा ही गलत है। यह तो महज तीन घंटे का सी क्लास के सिनेमा जैसा तमाशा है जिसमें खेल कम और चियर्स गल्र्स का डांस ज्यादा होता है।
गृहमंत्री पी. चिंदबरम ने अचानक इस बात का खुलासा किया है कि बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और आईपीएल के आयुक्त ललित मोदी के कारण ही आईपीएल को देश से बाहर जाना पड़ा है। बकौल श्री चिदंबरम श्री मोदी अगर आईपीएल को दो हिस्सों में करवाने में सहमत हो जाते तो आईपीएल को बाहर ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। आईपीएल के आयोजन को लेकर श्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर दबाव बनाने का अनावश्यक प्रयास भी किया। इसी के साथ उन्होंने सुरक्षा मामलों में राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की समस्याओं को समझने का प्रयास ही नहीं किया। श्री मोदी ने थोड़ा सा भी सुरक्षा व्यवस्था को समझने का प्रयास किया होता तो आईपीएल कभी देश के बाहर नहीं जाता। बहरहाल अब तो आईपीएल देश के बाहर चला गया है और इसका आयोजन द. अफ्रीका में हो रहा है। लेकिन यह एक दुखद बात है कि आईपीएल देश के बाहर हो रहा है और अपने देश के दर्शक आईपीएल के आयोजकों की मनमर्जी के कारण ही इसको देखने से वंचित रह जाएंगे। आईपीएल के पहले संस्करण के जोरदार सफल होने के बाद आईपीएल के दूसरे संस्करण का जब आयोजन करने का फैसला आयोजकों ने किया था तब उनको नहीं मालूम था कि इस आयोजन से पहले ऐसा कुछ हो जाएगा जिससे उनका यह आयोजन भारत में खटाई में पड़ जाएगा। संभवत: ऐसा होता भी नहीं। लेकिन एक तो भारत में होने वाले लोकसभा चुनाव ने आईपीएल का रास्ता रोका, फिर सवाल यह खड़ा हुआ कि क्या लोकसभा चुनाव के समय खिलाडिय़ों को वैसी सुरक्षा दी जा सकती है जैसी जरूरी है। खिलाडिय़ों को ज्यादा सुरक्षा देने की जरूरत इसलिए आन पड़ी क्योंकि आईपीएल के आयोजन से ठीक पहले पाकिस्तान में जिस तरह से लंकाई खिलाडिय़ों पर आतंकी हमला हुआ उस हमले के बाद यह बात तय हो गई कि आईपीएल का आयोजन बिना कड़ी सुरक्षा के संभव नहीं है। ऐसे में आयोजकों ने पूरा प्रयास किया कि सरकार उनको सुरक्षा देने का काम करे। केन्द्रीय गृहमंत्रालय के कहने पर आयोजकों ने दो बार कार्यक्रम में फेरबदल किया, लेकिन बात नहीं बनी। कार्यक्रम में एक और फेरबदल की जरूरत थी जिसके लिए आईपीएल के आयोजक राजी नहीं हुए। अगर आयोजक राजी हो जाते तो जरूर आईपीएल देश में होता, लेकिन यहां पर आयोजकों ने मनमर्जी की। जब आईपीएल को देश के बाहर ले जाने का फैसला किया गया था, उस समय ऐसा माना जा रहा था कि आयोजक सरकार को डराने का काम कर रहे हैं और सरकार को अंत में इसलिए झूकना पड़ेगा क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव हैं और ऐसे में क्रिकेट को सुरक्षा न दे पाने का एक मुद्दा भाजपा को मिल जाएगा। भाजपा के नेताओं ने इस बात को जोर-शोर से उछालने का काम भी किया। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो केन्द्र सरकार को कोसते हुए खिलाडिय़ों को सुरक्षा देने की गांरटी लेने की बात कह दी। अब यह बात अलग है कि मोदी जी अपने राज्य में आतंकी हमलों को नहीं रोक पाए थे और वे खिलाडिय़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की बात कह रहे हैं। ऐसी खोखली राजनीति किस काम की। क्या वास्तव में श्री मोदी ऐसी कोई ठोस बात कह सके जिससे उनकी बात पर भरोसा किया जाता। श्री मोदी को देश से ज्यादा क्रिकेट की इतनी ही चिंता थी तो उनको आईपीएल का सारा आयोजन गुजरात में करवाने के लिए आईपीएल के आयोजकों को तैयार कर लेना था। वैसे देखा जाए तो आईपीएल को लेकर भाजपा ने राजनीति करने का कोई मौका नहीं गंवाया। भाजपा नेताओं ने अपने पासे फेंककर केन्द्र सरकार को बोल्ड करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन तारीफ करनी होगी गृहमंत्री पी. चिदंबरम की जिन्होंने देश से ज्यादा महत्व क्रिकेट को नहीं दिया। माना कि भारत में क्रिकेट को पूजने की हद तक चाहा जाता है और लोग यहां पर सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी की मूर्ति लगाकर मंदिर बना लेते हैं, लेकिन इन सब बातों के कारण सुरक्षा को तो ताक पर नहीं रखा जा सकता है न। अगर खिलाडिय़ों को कम सुरक्षा देकर आयोजन को मंजूरी दे दी जाती और पाकिस्तान जैसी घटना हो जाती तो इसका जवाबदार कौन होता? तब आज वही लोग सरकार को कोसने का काम करते जो आयोजन के लिए सुरक्षा न देने पर सवाल उठा रहे थे। यह अपने आप में समझने वाली बात है कि जब विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में चुनाव हो रहे हैं तो उस चुनाव के लिए सुरक्षा के इंतजाम ज्यादा जरूरी है या फिर क्रिकेट के लिए सुरक्षा देना ज्यादा जरूरी है। और वो भी एक ऐसे क्रिकेट के आयोजन के लिए जो तीन घंटे के सी क्लास के सिनेमा से ज्यादा कुछ नहीं है। अगर यहां पर कोई विश्व कप की बात होती को एक बात समझ आती की विश्व कप तो पहले से तय था ऐसे में उसके लिए सुरक्षा के इंतजाम जरूरी है। लेकिन आईपीएल को कोई मजबूरी नहीं है। अगर वास्तव में गंभीरता से देखा जाए तो आईपीएल के आयोजन से खेल का क्या भला हो रहा है। इस आयोजन से आयोजन करने वालों के साथ खिलाडिय़ों पर ही पैसे बरसे रहे हैं। आम जनों की तो जेबें खाली हो रही हैं। आईपीएल के पहले संस्करण में यह बात का खुलकर सामने आई कि क्रिकेट में फिल्मी सितारों की घुसपैठ के कारण क्रिकेट एक तरह से बर्बादी की तरफ जा रहा है। मैचों के आयोजन के बीच में चियर्स गल्र्स को रखकर आयोजक दर्शकों को कौन का खेल दिखाना चाहते हैं यह तो वही बता सकते हैं। ऐसे सिनेमा को अगर वास्तव में अगर गृह मंत्रालय में सुरक्षा के लिहाज से मंजूरी न देने का काम किया गया है तो इसके लिए गृह मंत्रालय साधुवाद का पात्र है। फिर यह नहीं भूलना चाहिए कि अब गृहमंत्री ने इस बात का भी खुलासा कर दिया है कि आईपीएल के बाहर जाने के पीछे सुरक्षा से ज्यादा ललित मोदी का रूख रहा है।
वैसे इसमें कोई दो मत नहीं कि किसी भी देश के लिए चुनाव ज्यादा जरूरी होते हैं न की क्रिकेट जैसा कोई आयोजन। क्रिकेट को साल भर चलते रहता है और चलता रहेगा, लेकिन चुनाव तो पांच साल में एक बार होने हैं और जनता को अपना मत देना है। आईपीएल के भारत में न होने से जरूर दर्शकों में निराशा है लेकिन अब दर्शक इस बात को जान गए हैं कि आईपीएल सरकार की बेरूखी के कारण नहीं बल्कि आयोजकों की मनमर्जी के कारण बाहर गया है। ऐसे में भारतीय दर्शक कभी मोदी को माफ नहीं करेंगे।

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