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शनिवार, अक्टूबर 16, 2010

कामनवेल्थ में खेलना सपने जैसा

कामनवेल्थ के पैरालंपिक की तैराकी में खेलकर लौटीं प्रदेश की अंजनी पटेल को कामनवेल्थ में खेलना सपने जैसा लगता है। वह कहती हैं कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उनको कामनवेल्थ जैसी बड़ी स्पर्धा में खेलने का मौका मिलेगा।  वह कहती हैं कि अगर मुङो सुविधाएं मिलती तो मैं जरूर वहां से पदक लेकर लौटतीं।
दिल्ली से लौटने के बाद यहां पर चर्चा करते हुए अंजनी ने बताया कि वह कामनवेल्थ की तैराकी के ५० मीटर के साथ १०० मीटर की फ्रीस्टाइनल में खेलीं। यहां उनको दोनों वर्गों में आठवां स्थान मिला। पूछने पर वह कहती हैं कि उनको पदक इसलिए नहीं मिल सका क्योंकि अपने राज्य में तैराकी की उतनी सुविधाएं नहीं हैं। वह बताती हैं कि वह जांजगीर-चांपा के एक छोटे से गांव  बलौदा के गरीब परिवार से संबंध रखने वाली खिलाड़ी हैं। वह बताती हैं कि उनको अभ्यास करने के लिए बिलासपुर में रहना पड़ता है। बकौल अंजनी उनको बिलासपुर के जिलाधीश सोनमणी बोरा से बहुत मदद मिली है जिसकी वजह से उनका कामनवेल्थ में खेलने का सपना पूरा हुआ। वह बताती हैं कि उनको श्री बोरा की वजह से हर माह दो हजार पांच सौ रुपए की खेलवृत्ति मिलती है।
अंजनी पूछने पर कहती हैं कि जिन स्थानों पर उनके जैसे खिलाड़ी रहते हैं वह सरकार को सुविधाएं दिलानी चाहिए। उनको इस बात का भी मलाल है कि राज्य के विकलांग तैराकी संघ को अब तक राज्य सरकार ने मान्यता नहीं मिली है। वह बताती हैं कि अब तो राज्य में पैरालंपिक संघ भी बन गया है ऐसे में सरकार को हमारे संघ को मान्यता देनी चाहिए। वह बताती हैं कि उनके जिले जांजगीर में ही ६० से ज्यादा विकलांग तैराक हैं। अंजनी ने पूछने पर बताया कि वह २००५ से तैराकी कर रही हैं और कई बार राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेल चुकी हैं। वह कहती हैं कि उनकी जैसी खिलाडिय़ों को अगर राज्य सरकार से सुविधाएं मिले तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम राज्य का नाम रौशन कर सकती हैं। उन्होंने पूछने पर कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनको कामनवेल्थ में खेलने का मौका मिलेगा।

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शनिवार, अक्टूबर 09, 2010

कामनवेल्थ से लेंगे प्रेरणा

कामनवेल्थ के लिए जिस तरह के स्टेडियम बनाए गए हैं और वहां पर जिस तरह की ऐतिहासिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है, उससे छत्तीसगढ़ में होने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए हम प्रेरणा लेंगे।
यह बातें यहां पर चर्चा करते हुए अध्ययन दल के साथ नोडल अधिकारी के रूप में गए प्रदेश ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा ने कहीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और खेलमंत्री लता उसेंडी के निर्देश पर ही कामनवेल्थ में छत्तीसगढ़ का एक अध्ययन दल भेजा गया था। इस अध्ययन दल में खुद मुख्यमंत्री के साथ खेलमंत्री भी शामिल थीं। इसके अलावा खेल संचालक जीपी सिंह, प्रदेश लॉन टेनिस संघ के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के ओएसडी विक्रम सिंह सिसोदिया, प्रदेश ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान और खेल अधिकारी अजीत टोपो भी शामिल थे। श्री होरा ने बताया कि वास्तव में जैसी ऐतिहासिक व्यवस्था कामवनेल्थ में की गई है, वैसी व्यवस्था इससे पहले किसी भी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देखने को नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वे दक्षिण अफ्रीका में हुए टी-२० के विश्व कप में भी गए थे, पर वहां पर भी ऐसी व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि आयोजन को सफल बनाने के लिए दिल्ली में तीन हजार वालेनटियर रखे गए हैं। अंतरराष्ट्रीय आयोजन होने की वजह से एमबीए वालों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
श्री होरा ने बताया कि हमारे अध्ययन दल ने दिल्ली में सभी खेल परिसरों के साथ खेलगांव को भी देखा। उन्होंने बताया कि अध्ययन दल के साथ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जहां लॉन टेनिस के मैदान में लिएंडर पेस और सानिया मिर्जा का मैच देखा, वहीं खेलमंत्री लता उसेंडी ने जिम्नास्टिक, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, हॉकी के भी मुकाबले देखे।
श्री होरा ने बताया कि दिल्ली की व्यवस्था को देखकर आस्ट्रेलिया की लॉन टेनिस टीम के साथ आए एक कोच ने तो यहां तक कह दिया कि भारत में ओलंपिक होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ की माटी की महक उस समय महसूस हुई जब वहां पर बस्तर बैड की धुन गूंजी इसी के साथ पंडवानी का कार्यक्रम हुआ। उन्होंने बताया कि वहां की व्यवस्था से अध्ययन दल सरकार को अवगत कराएगा और राज्य में होने वाले ३७वें राष्ट्रीय खेलों के लिए बनने वाले स्टेडियम और खेलगांव में  इससे मदद मिलेगी। उन्होंने पूछने पर कहा कि दिल्ली जैसी सुरक्षा की जरूरत छत्तीसगढ़ में नहीं पड़ेगी, लेकिन मैदानों के लिए जिस तरह की व्यवस्था की गई है, उससे जरूर हमारे राज्य को मदद मिलेगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खेलों के लिए सबसे पहले राजधानी में ओलंपिक संघ का कार्यालय प्रारंभ करना है। इसके बाद राष्ट्रीय खेलों के लिए सचिवालय को प्रारंभ करवाना है। इसको जल्द प्रारंभ करने की मांग सरकार से की जाएगी, ताकि राष्ट्रीय खेलों की तैयारी प्रारंभ की जा सके। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खेलों का सारा संचालन खेल सचिवालय से होना है, इसके बिना काम में तेजी नहीं आएगी। 

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मंगलवार, सितंबर 28, 2010

दम है तो मेरा मेघा से मुकाबला करवा लें

जिस तरह की राजनीति करके मुझे कामनवेल्थ की नेटबॉल टीम से बाहर किया गया, उससे मैं हैरान हूं। मुङो यह कहने में थोड़ी सी भी झिझक नहीं है कि वास्तव में सत्ता से ज्यादा राजनीति तो खेल में होती है। मैं यह दावे से साथ कह सकती हूं कि मुझे सोची समझी साजिश के तहत टीम की विदेशी कोच के जाते ही टीम से बाहर किया गया है। मैं अंतिम समय तक अपने हक के लिए लड़ते रहूंगी। मैं दावे के साथ कहती हूं कि फेडरेशन में दम है तो मेघा से मेरा मुकाबला करवा लें।
ये बातें यहां पर दिल्ली से लौटने के बाद प्रीति बंछोर ने कहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मेरा खेल रहा है और मैं भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर में लगातार ढाई साल तक रही हूं उसके बाद तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकती थी कि मुङो टीम से बाहर कर दिया जाएगा। पूछने पर उन्होंने बताया कि टीम की मुख्य कोच श्रीलंका की मेरी मर्सिल लूज्ड को अपने बेटे की तबीयत खराब होने की वजह से ३१ अगस्त को अपने देश लौटना पड़ा था। एक दिन बाद एक सितंबर को घोषित की गई टीम में मेरा नाम १२ खिलाडिय़ों में था। लेकिन इसके बाद साजिश करके अचानक मुङो २४ सिंतबर को टीम से बाहर कर दिया गया। मुझे अब तब फेडरेशन ने टीम से बाहर करने का सही कारण नहीं बताया है। प्रीति ने बताया कि फेडरेशन के अध्यक्ष गुरबीर सिंह का इस बारे में कहना है कि उनको इसलिए बाहर किया गया है क्योंकि यह पहले से तय था कि अगर मेघा चौधरी डोपिंग के आरोप से बरी हो जाती हैं तो उनके स्थान पर प्रीति को बाहर जाना पड़ेगा। प्रीति का कहना है कि फेडरेशन ने टीम घोषित करते समय इस तरह की किसी भी शर्त के बारे में उसे नहीं बताया था, अब भी उसे नहीं बताया गया है कि उसे क्यों टीम से बाहर किया गया है।
मेघा से मुकाबला करवा लें
प्रीति का कहना है कि वह नेटबॉल फेडरेशन को खुली चुनौती दे रही हैं कि वे उनका मेघा चौधरी के साथ सीधा मुकाबला करवा लें। बकौल प्रीति मैं भी गोल अटैक और गोल शूटर की पोजीशन में खेलती हूं और मेघा भी। लेकिन मेघा पिछले डेढ़ माह से चोटग्रस्त हैं और वह किसी भी कीमत में गोल अटैक का काम नहीं कर सकती है, इसके लिए बहुत ज्यादा दौडऩा पड़ता है। 
कोच की वजह के किया गया बाहर
प्रीति बंछोर ने सीधे तौर पर टीम के सहायक कोच अमित शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब उनकी साजिश की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा कि अमित शर्मा गाजियाबाद के हैं और मेघा चौधरी भी उनके शहर की हैं। अपने शहर की लड़की को टीम में स्थान दिलाने के लिए ही अमित शर्मा ने फेडरेशन के अध्यक्ष गुरबीर सिंह के साथ मिलकर यह काम किया है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं है कि फेडरेशन को देश की प्रतिष्ठा से कोई मतलब नहीं है। फेडरेशन के लिए उप्र देश से बढ़कर हो गया है।
अब राज्यपाल से ही उम्मीद
प्रीति बंछोर का कहना है कि अब उनको अपने राज्य के राज्यपाल शेखर दत्त से ही उम्मीद है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में उन्होंने दो दिनों तक राज्यपाल से मिलने की कोशिश की पर सफलता नहीं मिल सकी। कांग्रेसी  नेता मोतीलाल वोरा से जरूर मुलाकात हुई, उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण के डीजी से बात करके उनको इस मामले में दखल देने कहा है। इसी के साथ प्रीति ने बताया कि वह केन्द्रीय खेलमंत्री एमएस गिल तक भी अपनी शिकायत पहुंची चुकी है। 
मुझे अपने राज्य पर गर्व है
प्रीति ने कहा कि उनको अपने राज्य की सरकार के साथ राज्य के नेटबॉल संघ और मीडिया पर गर्व है कि उनका सबने साथ दिया। प्रीति कहती हैं कि वह हताश जरूर है, पर निराश नहीं हैं। अंतिम समय तक लडऩे का इरादा रखने वाली प्रीति कहती हैं कि मेरा इरादा मजबूत है और मैं किसी भी कीमत में पीछे हटने वाली नहीं हूं। अंत में वह कहती हैं कि किस्मत ने साथ दिया तो जरूर टीम में वापसी होगी। पूछने पर वह कहती हैं कि खेल छोडऩा का तो कताई सवाल नहीं उठता है। अब तो मैं ज्यादा मेहनत करके सबको दिखाना चाहता हूं कि मुझमें कितना दम है।


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