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शनिवार, सितंबर 03, 2011

विवादित खेल संघ मान्यता सूची में नहीं

राष्ट्रीय स्तर पर विवादित खेल संघों के साथ पंजीयन न करवाने वाले खेल संघों को केन्द्रीय खेल मंत्रालय की सूची से बाहर रखा गया है। ऐसे संघों में प्रमुख रूप से कराते का नाम है जिसका पिछले पांच साल से विवाद चल रहा है। प्रदेश का खेल विभाग ऐसे संघों की मान्यता समाप्त करने के बारे में लिखित शिकायत होने पर ही कार्रवाई की बात कहता है।
राष्ट्रीय पर कई खेल संघों के दो संघ होने के कारण विवाद की स्थिति बनने पर ऐसे संघों की मान्यता को केन्द्रीय खेल मंत्रालय ने समाप्त कर दिया है। खेल मंत्रालय की वेबसाइड में ऐसे संघों के पदाधिकारियों का नाम नहीं है और उनका स्थान खाली छोड़ दिया गया है। कराते संघ में सबसे ज्यादा लंबे समय से विवाद चल रहा है। कराते के साथ जिन अन्य खेलों में पदाधिकारियों का नाम खाली है, उनमें एसजीएफआई स्कूल फेडरेशन आॅफ इंडिया का भी नाम है। स्कूल फेडरेशन के भी राष्ट्रीय स्तर पर काफी समय से दो संघ काम कर रहे हैं। अन्य खेलों में शरीर सौष्ठव, ताइक्वांडो के नाम हैं।
केन्द्रीय खेल मंत्रालय की वेबसाइड से संघों के नामों से पदाधिकारियों के नाम न होने के बारे में खेल संचालक जीपी सिंह कहते हैं कि निश्चित ही कुछ संघों में विवाद के कारण जहां नाम नहीं हैं, वहीं मान्यता संबंधी जानकारी न देने वाले संघों के पदाधिकारियों के नाम भी नहीं रहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले तीन साल के लिए मान्यता मिलती थी, लेकिन अब हर साल मान्यता का नवीनकरण कराना पड़ता है।
प्रदेश में विवादित संघों की मान्यता समाप्त करने के सवाल पर वे कहते हैं कि विभाग के पास कहीं से लिखित में शिकायत आती है और कोई जानकारी दी जाती है, तभी कोई कार्रवाई संभव है।

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सोमवार, मई 23, 2011

प्रशिक्षकों का टोटा होगा छोटा

प्रदेश में खेल प्रशिक्षकों का टोटा छोटा करने की दिशा में खेल विभाग जुट गया है। विभाग ने थोक में प्रशिक्षक तैयार करने के लिए खेलों से जुड़े 65 लोगों को भोपाल में एनआईएस प्रमाणपत्र कोर्स करने भेजा है। इधर विभाग में चार नए प्रशिक्षक भी नियुक्ति किए गए हैं। यह सब छत्तीसगढ़ में होने वाले 37वें राष्ट्रीय खेलों को देखते हुए किया गया है।
प्रदेश में प्रशिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए खेल विभाग अब गंभीर हो गया है। खेल संचालक जीपी सिंह की पहल पर आदिम जाति कल्याण विभाग के खेल शिक्षकों के साथ खेल संघों से जुड़े खिलाड़ियों को भोपाल में 17 मई से प्रारंभ हुए पांच खेलों के छह सप्ताह के प्रमाणपत्र कोर्स के लिए भेजा गया है। इन सभी का खर्च खेल विभाग उठा रहा है। इधर विभाग ने पहले तीरंदाजी के एनआईएस कोच टेकलाल कुर्रे को उत्कृष्ट खिलाड़ी होने पर नियुक्त किया, फिर मई में तीन प्रशिक्षकों हॉकी के राकेश टोपो, रश्मि तिर्की और वालीबॉल के हरगुलशन सिंह को नियुक्ति किया है। अब खेल विभाग में पांच प्रशिक्षक हो गए हैं। विभाग में जो 2002 का सेटअप मंजूर हैं उसमें 8 प्रशिक्षकों के पद हंै। अभी तीन प्रशिक्षकों के पद खाली है। खेल संचालक जीपी कहते हैं कि वित्त विभाग से मंजूरी मिलते हैं ये पद भी भर दिए जाएंगे।
खेल विभाग ने जो नया सेटअप मंजूरी के लिए भेजा है,   उसमें प्रशिक्षकों के 54 पद मांगे हैं। विभाग ने हर जिले के लिए तीन प्रशिक्षक मांगे हैं जिसमें एक वरिष्ठ प्रशिक्षक, एक प्रशिक्षक और एक संविदा प्रशिक्षक शामिल हैं। राज्य में भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई के सात कोच प्रदेश में काम कर रहे हैँ। इनमें से दो रायपुर, दो बिलासपुर और दो राजनांदगांव में और एक कोच जशपुर में हैं।
हर खेल के प्रशिक्षक तैयार करेंगे
खेल संचालक जीपी सिंह बताते हैं कि भोपाल के साई सेंटर में सात खेलों का ही कोर्स होता है, लेकिन हम चाहते हैं कि हर खेल के हमारे पास प्रशिक्षक हों, ऐसे में हमने क्षेत्रीय निदेशक आरके नायडु से बात की है और उनसे जानकारी मांगी है कि अन्य खेलों के कोर्स कहां होते हैं। उन्होंने बताया कि जिन खेलों के कोर्स कोलकाता और पटियाला में होते हैं, वहां भी हम प्रदेश के लोगों को कोर्स करने भेजेंगे। श्री सिंह ने बताया कि पहले कदम पर पायका के 20 खेल जिनमें कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, वालीबॉल, फुटबॉल, भारोत्तोलन, कुश्ती, हैंडबॉल, हॉकी, ताइक्वांडो, सायक्लिंग, जूडो, तैराकी, टेबल टेनिसल, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, जिम्नास्टिक, मुक्केबाजी और वुशू शामिल हैं, इनके प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे।

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सोमवार, मई 16, 2011

आधुनिक तरीके से तैयार होंगे खिलाड़ी

प्रदेश के खिलाड़ियों को आधुनिक तरीके से तैयार करने की योजना पर खेल विभाग काम कर रहा है। इसके लिए आस्ट्रेलिया और भारतीय क्रिकेटरों को तैयार करने वाले स्टैनली सल्डाना को खेल विभाग ने एक योजना बनाने के लिए कहा है।
आस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड के साथ भारतीय क्रिकेट बोर्ड के खिलाड़ियों की वीडियो क्लीपिंग तैयार करके उनको निखारने का काम करने वाले मुंबई की एक कंपनी के स्टैनली सल्डाना ने खेल संचालक जीपी सिंह से मुलाकात करके उनको बताया कि   अगर आधुनिक तरीके से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी तैयार किया जाए तो इसका बहुत फायदा हो सकता है। खेल संचालक ने उनकी बातों को ध्यान से सुनने के बाद उनको एक योजना बनाकर देने कहा ताकि वे इस योजना को सरकार के सामने रख सके।
खेल संचालक ने उनको बास्केटबॉल के कुछ खिलाड़ियों की रिकार्डिंग करने के लिए कहा ताकि उनको मॉडल के रूप में सरकार के सामने पेश किया जा सके। इसके लिए श्री सल्डाना को प्रदेश महिला बास्केटबॉल टीम के अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल से मिलने कहा गया। श्री सल्डाना ने बताया कि वे खिलाड़ियों की रिकार्डिंग करके उनके हर एक्शन पर प्रशिक्षक के साथ मिलकर चर्चा करते हैं और रिपोर्ट तैयार करते हैं कि खिलाड़ी कहां पर सही हैं और कहां पर गलत हैं। खिलाड़ियों की खामियों को दूर करे उनको निखारा जाता है। उन्होंने बताया कि अपने देश में किसी भी खेल में खिलाड़ियों की रिकार्डिंग नहीं की जाती है जिसके कारण मालूम नहीं हो पाता है कि वे कहां गलत हैं। अगर हर खेल में रिकार्डिंग करने की व्यवस्था हो जाए तो हर खेल के खिलाड़ियों को तराशा जा सकता है।
खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि हम योजना बनाकर सरकार के सामने पेश करेंगे। अगर हमारी योजना को मंजूरी मिल जाती है तो हर खेल में इस नीति को अपना कर प्रदेश के खिलाड़ियों को निखारा जाएगा।


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रविवार, अगस्त 08, 2010

दो पैसे में टेबल क्लाथ

टेंट के किराए में एक नया अध्याय जोड़ते हुए खेल विभाग ने पैसों में निविदा आमंत्रित करके इस निविदा में ही शासन के ५० लाख से ज्यादा की बचत कर दी है। इस निविदा में दस रुपए के किराए में मिलने वाला टेबल क्लाथ अब महज एकऔर दो पैसे में मिल रहा है। इसी के साथ कुल २८ सामानों की निविदा में शासन का लाखों बचाने में खेल विभाग सफल हो गया है। खेल विभाग की इस निविदा के बाद राज्य शासन के अन्य विभागों में हड़कंप मच गया है।
खेल विभाग ने अपने विभाग की फिजूलखर्जी पर लगाम लगाने के लिए पहली बार राज्य स्तर पर टेंट के लिए निविदा निकाली। इस निविदा की  खासियत यह रही है कि इसे अन्य विभागों की तरह रुपए में न मंगाकर पैसों में मंगाया गया। इसका यह फायदा हुआ है कि जो सामग्री रुपए में किराए में ली जाती थी वह अब पैसों में मिल रही है। खेल विभाग ने इस निविदा पर एक माह तक मेहनत करने के बाद अंतत: पूरे राज्य के १८ जिलों में होने वाले सभी आयोजनों में टेंट लगाने का जिम्मा एमपी किराया भंडार को दिया गया है। इसी फर्म ने जहां २८ सामानों में सबसे ज्यादा सामानों के लिए सबसे कम रेट दिए थे, वहीं अन्य सामानों के जिन फर्मों के रेट सबसे कम हैं, उन सामानों को भी उसी कम रेट में देने की सहमति देने पर ठेका इस फर्म को दे दिया गया है।
जिस फर्म को काम दिया गया है उस फर्म ने जहां १० रुपए के किराए पर मिलने वाले टेबल क्लाथ को एक से सात दिनों के लिए दो पैसे में देना मंजूर किया है, वहीं सात दिनों से ज्यादा के लिए किराया एक पैसे रखा है। इसी तरह से जिस कुर्सी का किराया पहले पांच रुपए देना पड़ता था, वह कुर्सी महज ९० पैसे किराए पर मिल रही है। खिलाडिय़ों के लिए बिस्तर में गद्दा, चादर और तकिया पहले १५ रुपए के किराए पर लेना पड़ता था, लेकिन अब यह तीन रुपए में मिलेगा। इसी तरह से स्टेज चेयर १२ रुपए की बजाए एक रुपए दस पैसे, दरी ८ रुपए के स्थान पर १९ पैसे में, सोफा २२ रुपए के स्थान पर २.८० रुपए, वीआईपी चेयर १० रुपए के स्थान पर १.८० रुपए, सफेद पर्दा दो रुपए के स्थान पर १४ पैसे, शामियाना वाटर प्रफू तीन रुपए स्क्वैयर फीट के स्थान पर २९ पैसे स्क्वैयर फीट, डोम वाटर प्रफू ८ रुपए के स्थान पर ४.१० रुपए स्क्वैयर फीट में लगेगा। कुल मिलाकर २८ सामानों में बहुत ज्यादा का फर्क आया है। टेंट व्यापार से जुड़े लोगों के साथ खेल विभाग के भी कई जानकारों का साफ कहना है कि इस एक निविदा से ही शासन को करीब ५० लाख से ज्यादा की बजत एक साल में हो जाएगी।
दूसरे विभागों मचेगा हड़कंप
खेल विभाग की निविदा के बाद एक बात तय मानी जा रही है कि अब उन विभागों के लिए परेशानी खड़ी होने वाली है जो विभाग पैसों के स्थान पर रुपए में निविदा मंगाकर शासन के लाखों रुपए का नुकसान करते हैं।
फिजूलखर्ची बचाने की पहल:खेल संचालक
खेल संचालक जीपी सिंह ने बताया कि वे जबसे खेल विभाग में आए हैं देख रहे हैं कि टेंट के नाम से बहुत ज्यादा फिजूलखर्ची की जा रही है। इसी पर लगाम लगाने के लिए पैसों में निविदा मंगाकर एक फर्म को साल भर  राज्य के हर जिले में खेल विभाग के होने वाले कार्यक्रमों में टेंट लगाने का जिम्मा दिया गया है। 


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