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मंगलवार, अक्टूबर 05, 2010

दिल्ली जाते-जाते रह गए

करीब 22 साल बाद दिल्ली जाने का एक मौका हाथ लगा था, पर वह भी हाथ से निकल गया और दिल्ली जाना स्थगित हो गया। कुछ दिनों से ख्याली पुलाव पक्का रहे थे कि दिल्ली जाएंगे तो ये करेंगे, वो करेंगे। लेकिन सभी अरमानों पर पानी फिर गया।
दिल्ली में अभी कामनवेल्थ खेल हो रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर से अपने राज्य की खेलमंत्री लता उसेंडी ने कहा कि आप और आपके साथी पत्रकार अगर दिल्ली जाना चाहते हैं तो हम व्यवस्था करवा देते हैं। इधर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष गुरूचरण सिंह होरा भी बार-बार कहते रहे हैं कि हम लोग दिल्ली आ जाए। तब अचानक कार्यक्रम बना कि हम लोग 10 अक्टूबर को विमान से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। लेकिन इसके पहले कि हम लोगों का कारवां दिल्ली के लिए कूच करता, हमने सोचा कि यार पहले एक बार इस बात का पता कर लिया जाए कि आखिर वहां पर व्यवस्था किस तरह की है। जब हमने व्यवस्था के बारे में पता किया तो हमें वह व्यवस्था जमी नहीं। ऐसे में हमने अपने साथी पत्रकारों से बात की को सभी ने एक स्वर में जाने  इंकार कर दिया और हम लोगों को दिल्ली जाना रद्द हो गया।
इस समय दिल्ली में कामनवेल्थ खेलों के कारण इतनी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था है कि वहां पर किसी खास की भी पूछ-परख नहीं है। एक विदेशी उच्चायुक्त को भी उद्घाटन समारोह में रोक दिया गया था। ऐसे में जबकि कामनवेल्थ खेलों के लिए अब किसी भी तरह के मीडिया पास बनने की संभावना दूर-दूर तक नहीं थी तो वहां जाने से क्या फायदा। वहां एक दर्शक के रूप में हम लोगों का जाने का कोई इरादा नहीं था, हम लोग तो वहां रिपोर्टिंग करने के लिए जाने वाले थे, और रिपोर्टिंग दर्शकदीर्घा में बैठकर तो हो नहीं सकती, यही एक सबसे कारण रहा जिसके कारण हम लोगों ने दिल्ली जाना रद्द कर दिया।

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रविवार, मार्च 21, 2010

दिल्ली पर पाकिस्तान का कब्जा

यह हैरान और परेशान करने वाली बात है, लेकिन हकीकत है कि दिल्ली पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया है। यह कब्जा पाकिस्तान ने अपने दम पर नहीं बल्कि भारत के ही दम पर किया है। भारतीय रेलवे के एक विज्ञापन में यह शर्मनाक बात सामने आई है कि इस विज्ञापन में दिल्ली को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है। यही नहीं कोलकाता को बंगाल की खाड़ी में बताया गया है। यह सब किसी छोटे से विज्ञापन में नहीं बल्कि एक नई ट्रेन के आरंभ होने के मौके पर दिए गए बड़े-बड़े विज्ञापनों में दिखाया गया है जिसमें रेल मंत्री ममता बनर्जी की भी बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी थीं। इतना सब होने के बाद अब तक इस मामले में न तो किसी पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही रेल मंंत्री या फिर भारत सरकार ने इस पर कोई खेद जताया है। इस मामले के लिए विज्ञापन एजेंसी को बलि का बकरा बनाया गया। इसका मतलब साफ है कि अगर दिल्ली पर पाकिस्तान का कब्जा हो भी जाए तो अपनी सरकार को क्या फर्क पड़ता है।

आज सुबह अचानक एक खबर पर नजरें पड़ीं कि दिल्ली पाकिस्तान में। हम भी चौक गए कि यार यह रातों-रात क्या हो गया जो पाकिस्तान ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया। हमें लगा कि ऐसा तो नहीं कि हम सोते रहे और रात को पाकिस्तान ने हमला करके दिल्ली तक कब्जा कर लिया। वैसे यह बात कभी संभव नहीं हो सकती है, पाकिस्तान एक क्या सात जन्मों तक दिल्ली तक पहुंच ही नहीं सकता है। अब इसका क्या किया जाए कि पाकिस्तान के सपनों को कम से कम कागजों में ही सच करने का काम हमारे देश के लोगों ने ही कर दिखाया है। दरअसल महाराजा एक्सप्रेस नाम से एक लक्जरी ट्रेन कल से कोलकाता से प्रारंभ हुई है। इस ट्रेन को रेल मंत्री ममता बनर्जी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ऐसे में जब  इसके लिए भारतीय रेलवे ने विज्ञापन जारी किए तो सभी विज्ञापनों में ट्रेन का जो रूट दिखाया गया है, उस रूट वाले नक्शे में ही दिल्ली को पाकिस्तान और कोलकाता को बंगाल की खाड़ी में दिखाया गया है। इस विज्ञापन के छपने के बाद काफी हंगामा हुआ है।

इतना सब होने के बाद भी रेलवे का कोई अधिकारी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। इस मामले के लिए विज्ञापन एजेंसी को बलि का बकरा बना दिया गया है। सारा दोष विज्ञापन एजेंसी पर डाल दिया गया है और रेलवे के अधिकारी ने इस तरह से क्षमा मांगने का काम किया है, मानो वह कोई अहसान कर रहे हैं। सोचने वाली बात है कि जब विज्ञापन रेलवे का है तो सबसे पहली गलती किसकी है। रेलवे ने इतने गंभीर विज्ञापन को प्रकाशित होने से पहले चेक कैसे नहीं किया। यह कैसे संभव है कि चेक करने के बाद विज्ञापन एजेंसी दिल्ली को पाकिस्तान में कर देगी। जैसे की रेलवे के जन संपर्क अधिकारी कह रहे हैं। कुल मिलाकर रेलवे के अधिकारियों का यह बचने का नाटक है। एक तो इस सारे मामले में खुद रेल मंत्री को सार्वजनिक रूप से पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए, फिर इस मामले में दोषी अधिकारियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। यह तो सरासर देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ है। इससे बड़ा अपमान अपने देश का हो ही नहीं सकता है। जिस पाकिस्तान के मंसूबों को कभी भी हमारे जवानों से पूरा होने नहीं दिया उनके मंसूबों को एक बार भले ही कागजों में पूरा तो कर दिया गया। इस बात को लेकर पाकिस्तान में तो जरूर जश्न का माहौल होगा कि चलो यार कागजों में ही सही हमारा कब्जा दिल्ली पर तो हो ही गया।

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