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सोमवार, नवंबर 09, 2009

क्या इस्लाम में 15 निकाह भी जायज है?

आज अचानक एक खबर पर नजर पड़ी कि उप्र के ज्योतिफूले नगर के एक जनाब अब्दुल वहीद ने 1960 से लेकर पिछले साल तक 15 निकाह किए और वो भी महज इसलिए कि उनको किसी बीबी से औलाद नसीब नहीं हो रही थी। एक तो यह सोचने वाली बात है कि क्या किसी को इस्लाम 15 निकाह करने की इजाजत देता है? नहीं देता है तो फिर ऐसे काफिर के खिलाफ कोई फतवा जारी करने की हिम्मत कोई क्यों नहीं करता। दूसरी बात यह कि क्या उन जनाब को यह बात मालूम नहीं थी कि बच्चा पैदा करने की क्षमता होने पर ही तो बच्चा होता। यह तो अपने को मर्द साबित करने की एक घिनौनी हरकत के सिवाए कुछ नहीं है। क्या ऐसे गुनाहगार के लिए इस्लाम में कोई सजा नहीं है। क्या ऐसे इंसान को बर्दाश्त करना इस्लाम सिखाता है?

अब्दुल साहब ने पहली बार 1960 में डिडौली इलाके के सहसपुर की नफीसा से निकाह किया। नफीसा के इंतकाल के बाद 18 बीघा जमीन के स्वामी अब्दुल साहब ने 1965 में हया से निकाह किया। इनसे निकाह के 7 साल बाद भी औलाद न होने पर जनाब ने 1972 में तीसरा निकाह बिहार की कुलसुम से किया। लेकिन दो साल बाद भी औलाद की चाह पूरी न होने पर 1974 में चौथा निकाह निशा फातिमा के किया। इसके बाद 77 में सकीना, 80 में परवीन, 83 में शहनाज,89 में जलीना, 94 में नूरजहां, 95 में दिलबरी, 98 में आसमीन, 2001 में हूरबानो और 2008 में फरजाना से निकाह किया। 15 निकाह के बाद भी इन जनाब को कोई औलाद नहीं हुई। 66 साल के हो चुके इस जनाब ने जो कारनामा किया है, उसके लिए इस्लाम में क्या कोई सजा नहीं है? क्या इस्लाम को मनाने वालों को यह बात मालूम नहीं है कि औलाद पैदा करने की क्षमता मर्द में होती है। अगर इन जनाब में क्षमता होती तो क्या किसी भी औरत से बच्चा नहीं होता। इन्होंने जिन 15 औरतों से निकाह किया, वे सबकी सब तो बांझ नहीं हो सकती है। ऐसे में यह बात साफ लगती है कि अपने जनाब अब्दुल साहब ने कोई औलाद की खातिर नहीं बल्कि अपनी हवस की खातिर 15 औरतों का इस्तेमाल किया।

औरतों की बहुत ज्यादा इज्जत करने की बात इस्लाम में की जाती है, क्या ऐसे ही इज्जत की जाती है? क्या ऐसा घिनौना काम करने वाले अब्दुल वहीद के खिलाफ कोई फतवा जारी करने की हिम्मत किसी में नहीं है। वंदेमातरम के खिलाफ तो फतवा जारी हो सकता है, लेकिन 15 जिंदगियां तबाह करने वाले अब्दुल के खिलाफ कोई फतवा जारी नहीं हो सकता है। क्या इस्लाम इतने ज्यादा निकाह की इजाजात देता है? नहीं तो फिर क्यों नहीं ऐसे इंसान के खिलाफ कोई सजा देने का काम करते हैं इस्लाम के चाहने वाले।

इसका जवाब है किसी के पास, कि अब्दुल वहीद के खिलाफ क्या करेंगे इस्लाम के चाहने वाले?

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