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गुरुवार, मार्च 11, 2010

हमारे साथ हरिभूमि में ही हैं एक दर्जन ब्लागर पत्रकार

छत्तीसगढ़ में ब्लागरों की बाढ़ आई हुई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा। छत्तीसगढ़ का डंका और ब्लाग जगत में बज रहा है और यह बात सभी जानते हैं। हम बता दें कि हमारे साथ हरिभूमि में काम करने वाले करीब एक दर्जन पत्रकार मित्र ब्लागर हैं। इनमें से कुछ नियमित लिखते हैं तो कुछ नियमित नहीं लिख पाते हैं। कुछ ब्लागर मित्र हमें देखकर ब्लागर बने हैं तो कुछ दूसरे मित्रों से प्रेरणा लेकर बने हैं। हमारा मकसद बस सभी को ब्लाग का नशा करवाना है।

हमें ब्लाग जगत में आए एक साल का समय हो गया है। हमने जब ब्लाग लिखना प्रारंभ किया था तब हमें मालूम नहीं था कि हमारे साथी भी इस रोग से ग्रस्त हो जाएंगे। हमारे साथ हरिभूमि में काम करने वाले एक कार्टूनिस्ट अनुराग ने यह रोग पाला। इसके बाद एक और ब्लागर मित्र और कार्टूनिस्ट अजय सक्सेना बने। इसके बाद तो मानो कारवां बढ़ते गया। वैसे कुछ मित्र पहले से भी लिख रहे हैं। हमारे साथ काम करने वाले पत्रकार मित्रों में चन्द्रकांत शुक्ला, विनोद डोंगरे, जितेन्द्र सतपथी, भरत योगी, तरूण झा, राकेश पांडेय, सतीश पांडेय, प्रफुल ठाकुर ब्लाग लिख रहे हैं। एक और मित्र जो अब हम लोगों के साथ काम नहीं करते हैं अतुल दुबे उन्होंने भी हरिभूमि में रहते ब्लाग लिखना प्रारंभ किया था। अभी हाल ही में हमारे साथ एक और नए साथी राजकुमार सोनी जुड़े हैं। कुल जमा एक दर्जन ब्लागर मित्र हमारे साथ ब्लाग लिख रहे हैं।
हम इन ब्लागर मित्रों के ब्लागों के लिंक देना चाहते थे पर फिलहाल हम ऐसा नहीं कर पा रहे हैं, जल्द ही हम सभी ब्लागर मित्रों के ब्लागों के लिंक भी देंगे।

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शनिवार, जनवरी 16, 2010

ब्लागरों में बेताबी बढ़ी-आने वाली है मिलन की घड़ी

अपने छत्तीसगढ़ के ब्लागरों में रविवार के इंतजार में बेताबी बढ़ गई है। इस दिन हम लोग रायपुर में मिलने वाले हैं। अब देखने वाली बात यही होगी कि इस दिन कौन-कौन से ब्लागर आते हैं। इधर अपने ब्लागर भाई महेश सिंहा जी ने अपने ब्लाग में एक जानकारी दी है कि उनकी रायपुर में तीन नए ब्लागरों से मुलाकात हुई है, ये ब्लागर भी संभवत: रविवार को ब्लागर मिलन में शामिल होंगे। वैसे कम से कम हमारी तो अब तक महेश सिंहा जी से भी रूबरू मुलाकात नहीं हो पाई है। रविवार को दूसरे सत्र में यानी 12 बजे के बाद मिलन का कार्यक्रम है। एक बजे सभी ब्लागर मित्र प्रेस क्लब रायपुर में एकत्रित होंगे और वहीं वह एक मिलन समारोह होगा। ऐसा लगता है कि इस बार भी भिलाई में हुई ब्लागर चिंतन बैठक की तरह ही रायपुर की बैठक में भी कुछ नए मित्रों से रूबरू होने का मौका मिलेगा।

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बुधवार, जनवरी 13, 2010

शराबी-शराबी से कब चिढ़ता है?

कोई शराबी भी किसी शराबी से चिढ़ सकता है, यह बात गले उतरने वाली नहीं लगती है। लेकिन ऐसा होता है। हमारे एक मित्र ने बताया कि किसी शराबी को तब काफी बुरा लगता है जब कोई सुबह-सुबह उसके घर पर पीके आ जाता है। ऐसे में उस शराबी की बातें सोचनीय रहती है। वह काफी खफा होते हुए कहता है कि साले सुबह-सुबह पी के आ जाते हैं।

हमारे एक मित्र ने बताया कि उनकी कालोनी में रहने वाले एक बंदे को बेभाव की पीने की आदत है। उनके कई मित्र ऐसे हैं जो कि उनकी तरह ही बेभाव की पीते हैं। कई बार ऐसा होता है कि उनके वे मित्र सुबह-सुबह की चढ़ा कर उनके घर आ जाते हैं। तब ऐसे में वे उन पर नाराज होते हैं और कहते हैं कि अबे सुबह-सुबह पी के आने की क्या जरूरत थी। वैसे वे जनाब भी कई बार सुबह-सुबह पीने से परहेज नहीं करते हैं।

अब जहां तक सुबह-सुबह पीने का सवाल है तो इसके बारे में पीने वाले कहते हैं कि यार जब रात को बहुत ज्यादा हो जाती है न तो सुबह-सुबह उतारने के लिए उतारा लेने के लिए पीनी पड़ती है। अब इस बात में कितनी सच्चाई है हम तो नहीं जानते हैं लेकिन कई पीने वालों को ऐसी बात करते हमने सुना है।

हमारे ब्लागर मित्र इस बारे में कुछ जानते हों तो जरूर अपने विचार बता सकते हैं। वैसे वे यह भी बताएं कि क्या उन्होंने भी किसी शराबी को किसी शराबी पर शराब पीने के कारण नाराज होते देखा है। कोई वाक्या याद आए तो जरूर बताएं।

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रविवार, जनवरी 10, 2010

ब्लागरों को आने लगी एक-दूजे की याद- जल्द होगी मुलाकात


छत्तीसगढ़ के ब्लागरों में एक दूसरे के प्रति कितना लगाव है इसका पता इसी बात से चलता है कि एक-दो दिन फोन पर बातें नहीं होती हैं तो ऐसा लगता है कि कुछ छूट सा गया है। इसी के साथ मिलने की कशिश भी रहती है। कल सुबह जब हमने बीएस पाबला जी का फोन खटखटाया तो उन्होंने कहा कि भई बहुत दिन हो गए अगले संडे को बैठा जाए और कुछ बतियाया जाए। हमने फौरन कहा कि जरूर बैठ जाएंगे। इसके बाद हमने ललित शर्मा जी और अनिल पुसदकर जी का भी फोन खटखटाया और उनको बताया कि अगले संडे बैठना है। अब अगले संडे को मुलाकात होगी और इस बार यह मुलाकात रायपुर में होगी।


ब्लाग बिरादरी में इस समय प्यार और स्नेह की ऐसी गंगा बह रही है जिसमें हर कोई नहाना चाहता है। अपने राज्य छत्तीसगढ़ के ब्लागरों में कुछ ज्यादा ही प्यार और स्नेह है कहा जाए तो गलत नहीं होगा। छत्तीसगढ़ के ब्लागरों का प्यार और स्नेह अपने दिनेश राय द्विवेदी जी के साथ रवि रतलामी और अलबेला खत्री देख और महसूस कर चुके हैं। वैसे हमें श्री द्विवेदी जी से मिलने का मौका तो नहीं मिला है, पर उनके बारे में अपने ब्लागर मित्रों से जरूर सुना है। जब श्री द्विवेदी जी का छत्तीसगढ़ आना हुआ था तब हम ब्लाग जगत में नहीं आए थे। लेकिन हमें रवि रतलामी के साथ अलबेला खत्री जी से जरूर मिलने का मौका मिला है।


बहरहाल यहां हम बात कर रहे हैं अपने राज्य के ब्लागरों की। अपने राज्य के ब्लागरों में ज्यादातर ब्लागरों की एक-दूसरे से बात होते रहती है। यदा-कदा कभी भी कार्यक्रम बन जाता है और चार-छह ब्लागरों की एक महफिल कभी भिलाई में तो कभी रायपुर में जम जाती है। काफी समय से कोई बैठक नहीं हो पाई है। दिसंबर में भिलाई की चितंन बैठक के बाद लंबा समय हो गया है ऐसा लगता है। ऐसे में जबकि कल सुबह को हमें पाबला जी की याद आई तो हमने खटखटा दिया उनका फोन। उधर से फोन उठाते साथ पाबला जी अपने अंदाज में कहते हैं नमस्कार राजकुमार जी। नमस्कार के बाद बातों का सिलसिला चलता है तो हम उनसे पूछते हैं कि हमारे राजतंत्र का नया चोला कैसा लगा। पाबला जी बताते हैं कि अभी वे राजतंत्र को ठीक से नहीं देख पाए हैं।


बातों ही बातों में वे कहते हैं कि अगले रविवार को बैठना है। हम हामी भर देते हैं। वे कहते हैं कि इस बार रायपुर में बैठने की योजना है। हम कहते हैं ठीक है। वे बताते हैं कि ललित शर्मा जी से भी बात हो गई है। हम कहते हैं ठीक है आप लोग भिलाई-दुर्ग के जितने भी ब्लागर आना चाहें आ जाएं फिर प्रेस क्लब या फिर कहीं भी महफिल जम जाएगी।


पाबला जी से बात करने के बाद हम ललित शर्मा का भी फोन खटखटा देते हैं। उनसे करीब १० मिनट बात होती है। वे भी बताते हैं कि पाबला जी से बात हुई है अगले रविवार को बैठना है। वे कहते हैं कि हम उस दिन रायपुर आ जाएंगे। हमने कहा ठीक है। शाम को हमने अनिल पुसदकर जी का भी फोन खटखटाया और सबसे पहले उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा कि क्या हाल है। उन्होंने बताया कि अभी तो स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। इसके बाद हमने उनको बताया कि अगले रविवार को पाबला जी अपने भिलाई के ब्लागर साथियों के साथ आने वाले हैं। अनिल जी ने भी कहा कि ठीक है।


अब सबको अगले रविवार का इंतजार है ताकि सब एक-दूसरे को गले लगाकर जादू की झप्पी ले सके। वैसे अपने छत्तीसगढ़ के सभी ब्लागर उडऩ तश्तरी यानी समीर लाल और अजय कुमार झा जी का भी इंतजार कर हैं कि वे भी जल्द आएं तो उनसे जादू की ङाप्पी लेने का मौका मिले।

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रविवार, अक्टूबर 04, 2009

नापसंद के चटके वाला बाक्स बैर ही पैदा करेगा

ब्लागवाणी वालों ने ऐलान किया है कि अब पसंद के साथ नापसंद के चटके वाला भी एक बाक्स बनाया जाएगा। एक तो सोचने वाली बात यह है कि इस बक्से की जरूरत क्या है? अगर ऐसा किया जाता है तो यह बात तय है कि इस बक्से से फायदा तो नहीं होगा बल्कि उल्टे ब्लागरों के बीच बैर जरूर पैदा हो जाएगा। अगर हमें कोई ब्लागर पसंद नहीं है तो हम बार-बार उसके ब्लाग में जाकर नापसंद वाले बाक्स में चटका लगा देंगे। ऐसे में क्या ब्लागरों में आपस में दुश्मनी नहीं होगी। हमारा ऐसा मानना है कि ऐसे किसी भी बाक्स को प्रारंभ करने से ब्लागवाणी को गंभीरता से इस दिशा में सोच लेना चाहिए कि इसका नतीजा कितना घातक हो सकता है। अगर हमें किसी का लिखा पसंद ही नहीं है तो यही काफी है कि हम उसे पढ़ेंगे ही नहीं, फिर अलग से नापसंद का चटका लगाने की क्या जरूरत है।

इस बारे में ब्लाग बिरादरी के मित्र क्या सोचते हैं जरूर बताएं ताकि ब्लागवाणी वालों को भी मदद मिल सके और सोचना पड़े कि उनको नापसंद के चटके वाला बाक्स लगाना चाहिए या नहीं?

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