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भारतीय ओलंपिक संघ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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रविवार, दिसंबर 05, 2010

राज्य ओलंपिक संघ समाप्त होंगे!

भारतीय ओलंपिक संघ ने देश के सभी राज्यों के ओलंपिक संघ को समाप्त करने की कवायद प्रारंभ कर दी है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से मार्गदर्शन लेने के बाद संघ ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर उनके मत मांगे हैं कि क्या करना चाहिए। संघ की सामान्य सभा में इस बात का फैसला किया जाएगा कि क्या होना चाहिए। संघ ने राष्ट्रीय खेल संघों के मतदान के अधिकार भी कम करने की मानसिकता बनाई है। संघ की मानसिकता के खिलाफ पूरे देश में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ ने भी इस बात का विरोध करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ को पत्र लिखा है।
भारतीय ओलंपिक संघ ने छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों को एक पत्र भेजा है जिसमें लिखा गया है कि संघ अपने संविधान में संशोधन करना चाहता है। नए संविधान में राज्य के ओलंपिक संघों को किसी भी तरह के मतदान के अधिकार से वंचित करते हुए संघ को ही समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसी के साथ राष्ट्रीय खेल संघों के मतदान के अधिकार में भी कटौती की बात है। अब तक राष्ट्रीय खेल संघों को भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में तीन मत देने का अधिकार है। इसे कम करके एक किया जा रहा है।   संघ के ऐसा करने के पीछे के कारण के बारे में जानकार बताते हैं कि संघ के अध्यक्ष के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ही भारतीय ओलंपिक संघ ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ को एक पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा था कि वह अपने संविधान में इस तरह का संशोधन करना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन ने इसके जवाब में भारतीय ओलंपिक को लिखा कि वह सामान्य सभा बुलाकर बहुमत के आधार पर संशोधन कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से मिले मार्गदर्शन के बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने अपने संविधान में परिवर्तन करने का मन बनाया और सभी राज्यों को पत्र लिख कर उनके विचार मांगे हैं कि क्या होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ ने जताया विरोध
भारतीय ओलंपिक संघ ने जो फैसला करने का मन बनाया है, उसका छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ ने विरोध करते हुए पत्र लिखा है। संघ के सचिव बशीर अहमद खान ने बताया कि भारतीय ओलंपिक संघ के संविधान में कहीं नहीं है कि राज्य संघों की मान्यता समाप्त की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमने सुङााव दिया है कि राज्य ओलंपिक संघ को समाप्त करने की बजाए उसको दो के स्थान पर एक ही मत का अधिकार दिया जाए। अभी राज्य ओलंपिक संघों को दो मतों का अधिकार है। इसी के साथ खेलों के राष्ट्रीय फेडरेशन को तीन मतों को अधिकार है, इसे दो कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि ओलंपिक संघ के संविधान में यह है कि खेल संघों से राज्य ओलंपिक संघों को कम मतों का अधिकार होना चाहिए। मप्र ओलंपिक संघ के सचिव एसआर देव ने भी बताया कि उनके राज्य संघ को भी भारतीय ओलंपिक संघ का पत्र मिला है।
पूरे देश में हो रहा है विरोध
ओलंपिक संघ से जुड़े पदाधिकारी बताते हैं कि भारतीय ओलंपिक संघ के इस कदम का पूरे देश में विरोध हो रहा है कि सभी राज्यों के ओलंपिक संघ एक हो गए हैं। जब भी दिल्ली में सामान्य सभा की बैठक होगी तो संविधान में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूर होने नहीं दिया जाएगा।
राष्ट्रीय खेलों का क्या होगा?
अगर राज्य के ओलंपिक संघों को समाप्त कर दिया जाता है तो राष्ट्रीय खेलों का क्या होगा। राष्ट्रीय खेलों के आयोजन का जिम्मा राज्य ओलंपिक संघों का होता है। राज्य संघ की मेजबानी लेकर सरकार के साथ मिलकर इसका आयोजन करते हैं।
भारतीय ओलंपिक भी समाप्त हो
राज्य ओलंपिक संघ ही नहीं रहेगा तो भारतीय ओलंपिक संघ की क्या जरूरत रहेगी। खेलों से जुड़े लोग कहते हैं कि अगर राज्य ओलंपिक संघ समाप्त किए जाते हैं तो फिर भारतीय ओलंपिक संघ की क्या जरुरत है। राज्य ओलंपिक संघों में इस बार तो लेकर बहुत नाराजगी है कि भारतीय ओलंपिक संघ अपनी मनमर्जी कर रहा है और राज्य संघों को समाप्त करने की साजिश कर रहा है।

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मंगलवार, जुलाई 20, 2010

भारतीय ओलंपिक संघ ने भी माना अनिल वर्मा ही अध्यक्ष

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा ही हैं।  यह बात मानते हुए भारतीय ओलंपिक संघ ने डॉ. अनिल वर्मा के साथ छत्तीसगढ़ के खेल विभाग को भी एक पत्र भेजा है। पिछले माह छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव बशीर अहमद खान ने एक अवैध बैठक आयोजित करके अध्यक्ष को हटाने का काम किया था। इस बैठक के अवैध होने के बाद भी वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरूचरण सिंह होरा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया था।
भारतीय ओलंपिक संघ के निदेशक एएसवी प्रसाद के हस्ताक्षर से १७ जुलाई को जारी एक पत्र आज डॉ. अनिल वर्मा को मिला है, जिसमें लिखा गया है कि डॉ. अनिल वर्मा ही छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं और वहां पर किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। इसी के साथ श्री वर्मा को छत्तीसगढ़ में होने वाले ३७वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी करने के लिए भी कहा गया है।
इस पत्र के मिलने के बाद अब यह बात हो गई है कि डॉ. अनिल वर्मा को हटाने के लिए जिस बैठक का आयोजन भिलाई में किया गया था, उस बैठक को भारतीय ओलंपिक संघ भी नहीं मानता है। भारतीय ओलंपिक संघ के सामने इस बात का खुलासा कर दिया गया कि किस तरह से छत्तीसगढ़ फम्र्स रजिस्टार सोसायटी के पंजीयक द्वारा बैठक को अवैध करार दिए जाने के बाद भी बैठक की गई और बैठक में अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पारित करके वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरूचरण सिंह होरा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।
मैं भी मानता हूं डॉ. वर्मा को अध्यक्ष
अवैध बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए गुरूचरण सिंह होरा का अब भारतीय ओलंपिक संघ से पत्र आने के बाद कहना है कि जब हमारा सर्वोच्च संघ ही डॉ. वर्मा को अध्यक्ष मान रहा है तो मैं कौन होता हूं इंकार करने वाला है। भारतीय ओलंपिक संघ का फैसला मुङो भी मान्य है। अगर आईओए भिलाई की बैठक को मान्य नहीं समङाता है तो कोई बात नहीं। हमें आईओए का जो भी फैसला है मंजूर हैं।
मैं नहीं मानता अध्यक्ष
प्रदेश संघ के महासचिव बशीर अहमद खान का कहना है कि भले डॉ. वर्मा को भारतीय ओलंपिक संघ ने अध्यक्ष माना है, पर मैं नहीं मानता हूं। यह पूछने पर क्या आप आईओए के फैसले के खिलाफ हैं, उन्होंने कहा कि जिस पत्र में आईओए के महासचिव राजा रणधीर सिंह के हस्ताक्षर नहीं हंै उस पत्र को मैं नहीं मानता।
पत्र खेल विभाग को मिला है
प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक जीपी सिंह ने पूछने पर बताया कि उनके विभाग को ई-मेल से एक पत्र भारतीय ओलंपिक संघ से मिला है जिसमें डॉ. अनिल वर्मा को अध्यक्ष बताया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे विभाग को प्रदेश ओलंपिक संघ में किसी भी तरह के वैधानिक बदलाव की कोई जानकारी नहीं है।

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मंगलवार, मई 25, 2010

अध्यक्ष-सचिव का कार्यकाल तय करने वाला नियम जल्द लागू हो

प्रदेश के कई खेल संघ चाहते हैं कि राज्य में खेल संघों के अध्यक्ष और सचिव के कार्यकाल तय करने वाला नियम जल्द लागू हो। महाराष्ट्र में इस नियम के लागू होने के बाद यहां के खेल संघों का ऐसा मानना है कि प्रदेश की खेलमंत्री लता उसेंडी को इस दिशा में पहल करते हुए यह नियम लागू करवाने की पहल करनी चाहिए। वैसे खेल विभाग ने केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा नियम लागू करते ही इस नियम को राज्य में लागू करने के लिए एक प्रस्ताव बनाकर प्रदेश के मंत्रालय को भेज दिया है। 
भारतीय ओलंपिक संघ भले केन्द्रीय खेल मंत्रालय के खेल संघों पर लगाम लगाने वाले नियम को खारिज कर चुका है और आईओए के इस फैसले  से प्रदेश का ओलंपिक संघ सहमत भी है। लेकिन जहां तक प्रदेश के खेल संघों का सवाल है तो खेल संघों में इस बात को लेकर एक राय नहीं है। कुछ खेल संघों को छोड़कर ज्यादातर खेल संघों के अध्यक्ष और सचिव इस पक्ष में हैं कि यह नियम लागू होना ही चाहिए। वालीबॉल संघ के सचिव मो. अकरम खान ने एक बार फिर से कहा कि वे पहले ही कह चुके हैं कि यह नियम बिलकुल ठीक है और वे इस नियम को राज्य में लागू करवाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि अगर आज यह नियम लागू हो और कल हमारे संघ का चुनाव होता है तो वे अपना पद छोडऩे के लिए तैयार हैं।

कैरम संघ के सचिव विजय कुमार भी कहते हैं कि खेल संघों के लिए यह  नियम ठीक है। हम लोग भी बरसों से संघ के पद का बोङा लेकर परेशान हैं। हम लोग अपनी खुशी से पद पर नहीं हैं। अब इसका क्या किया जाए कि संघ में हमें योग्य मानकर बार-बार चुन लिया जाता है। अगर संघ में नए लोग आएंगे तो जरूर संघ का फायदा होगा। फिर हम लोग तो संघ की मदद करने के लिए बैठे ही हैं। कराते संघ के अजय साहू कहते हैं कि खेल संघों के पदों पर लगातार बने रहने का मतलब नहीं है। बदलाव तो होना ही चाहिए। फुटबॉल संघ से जुड़े मुश्ताक अली प्रधान कहते हैं कि केन्द्र सरकार ने जो कदम उठाया है, वह कदम वास्तव में सराहनीय है। बरसों से संघों पर कब्जा जमाकर बैठे पदाधिकारियों को अपने पद का मोह त्यागकर दूसरों को मौका देना चाहिए। अगर संघों के पदाधिकारियों की तरह खिलाड़ी भी यह सोचे कि वही खेलते रहेंगे तो नए खिलाडिय़ों को मौैका कैसे मिलेगा। खेल संघों के पदाधिकारियों को भी खेल भावना का परिचय देते हुए संघों के पदों का मोह छोड़ देना चाहिए। फुटबॉल संघ के दिवाकर थिटे कहते हैं कि हमारे राज्य फुटबॉल संघ में हमेशा बदलाव हुआ है और अध्यक्ष और सचिव बदलते रहे हैं। बिना बदलाव के संघ को मजबूत नहीं किया जा सकता है।

प्रदेश ओलंपिक संघ के संरक्षक और नेटबॉल संघ के अध्यक्ष विधान मिश्रा का मानना है कि केन्द्र सरकार ने जो नियम बनाया है तो उस नियम के पीछे कारण है। वास्तव में राष्ट्रीय खेल संघों के पदों पर बरसों से पदाधिकारी जम हुए हैं। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि इस नियम के छत्तीसगढ़ में लागू होने से कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है। हमारे राज्य में खेल संघों के बीच ऐसा भाई-चारा है कि यहां तो किसी भी तरह का विवाद नहीं होगा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के खेल संघों के पदाधिकारी तो संघों की अदला-बदली भी कर सकते हैं। इससे जहां नए खेलों का अनुभव मिलेगा, वहीं जो पदाधिकारी खेलों का भला कना चाहते हैं वे खेलों का भला करने का काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बात तय है कि इस नियम से खेल माफिया का काम करने वालों को जरूर परेशानी हो सकती है। श्री मिश्रा ने साफ कहा कि क्यों कर अपने राज्य के खेल संघों के पदाधिकारी दुबले होने का काम कर रहे हैं। हमने राज्य में ऐसे कितने संघ हैं जिनके पदाधिकारियों को सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा पर जाने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि अपने राज्य के संघों के पदाधिकारियों को तो देश में ही टीमों के साथ मौका नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि इस नियम से राष्ट्रीय संघों के पदाधिकारियों के पेट में जरूर दर्द हो रहा है जिसके कारण इसका विरोध हो रहा है। टेबल टेनिस संघ के अध्यक्ष शरद शुक्ला कहते हैं कि हमारे संघ में भी लगातार पदाधिकारी बदलते रहे हैं। संघों में एक ही पद पर बने रहना का मतलब नहीं होता है।
ज्यादातर खेल संघों के पदाधिकारी कहते हैं कि इस नियम को प्रदेश में लागू करवाने के लिए खेलमंत्री लता उसेंडी को पहल करनी चाहिए। उन्होंने अगर ऐसा कर दिया इसमें कोई दो मत नहीं है कि उनका नाम खेल जगत के इतिहास में दर्ज हो जाएगा। खेलमंत्री को खेल संघों के पदाधिकारियों ने सलाह देते हुए कहा कि उनको इस नियम को जल्द लागू करवाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से बात करनी चाहिए।
ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन नहीं
खेलों के जानकारों ने एक बार फिर दावा किया है कि भारतीय ओलंपिक संघ ओलंपिक  चार्टर के उल्लंघन होने की गलत दुहाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक चार्टर में अध्यक्ष का कार्यकाल १२ साल और सचिव का कार्यलय ८ साल तय किया गया है। जानकार साफ कहते हैं कि केन्द्रीय खेल मंत्री एमएस गिल ने अगर यह नियम लागू करवाया है तो कुछ सोच समङा कर ही करवाया है। केन्द्रीय खेल मंत्रालय ने भी अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक चार्टर का अवलोकन कर लिया है। अब यह बात अलग है कि भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारी खेल संघों को गुमराह करने के लिए यह बात कह रहे हैं कि ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन किया जा रहा है।

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