ओरिजनल चाय...
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अधिकारियों के पास मिलने जाने वालों को ओरिजनल चाय का स्वाद तब नसीब होता है जब वहां के अधिकारी चपरासी को संकेत देते हैं कि जो मिलने आए हैं, वे खास हैं, इनके लिए ओरिजनल चाय लाए। इस ओरिजनल चाय का खुलासा एक अधिकारी ने इस तरह से किया कि शिक्षा विभाग के नीचे चाय दुकानों में जो चाय मिलती है, वह दो किस्म की होती है। एक चाय वह जिसकी कीमत पांच रुपए है, उसे ओरिजनल कहा जाता है। दूसरी चाय वह जिसकी कीमत तीन रुपए है, वह काम चलाऊ चाय है। यानी काम चलाऊ लोगों के लिए यह चाय आती है, और खास लोगों के लिए ओरिजनल चाय। एक जमाना वह था जब किसी भी दफ्तर में जब चाय नहीं मंगानी रहती थी तो चपरासी से कहा जाता था, चाय लाना ना। यानी चाय मंगवाने के लिए बस कहा गया है, लाने के लिए नहीं।
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