8वीं तक कोई नहीं होगा फेल-ये सरकार का कैसा खेल
ऐसे समय में जबकि स्कूली परीक्षाओं का दौर चल रहा है, अचानक एक खबर आई कि केन्द्र सरकार ने एक एक्ट एक अप्रैल से लागू करने का फैसला किया है जिसमें 8वीं तक कोई बच्चा फेल नहीं होगा। इसी के साथ परीक्षा भी नहीं ली जाएगी। ये शिक्षा के बोझ से बच्चों को मुक्त करने का कैसा खेल है, यह समझ से परे है। इस फैसले से यह बात तय है कि बच्चे पंगू हो जाएंगे और उनकी नजर में पढ़ाई की कोई कीमत नहीं दर जाएगी। सरकार की ऐसी सोच के पीछे मानसिकता क्या है यह बात भी समझ से परे है।
कल एक अखबार में छपी इस खबर पर नजरें पड़ीं कि अब पहली से 8वीं तक के छात्रों को परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी को बिना परीक्षा लिए ही पास कर दिया जाएगा। इसी के साथ शिक्षकों को जहां रोज 8 घंटे काम करना पड़ेगा, वहीं 13 साल के बच्चों को सीधे सातवीं में प्रवेश दिया जाएगा। इन सबको लागू करने के लिए केन्द्र सरकार ने एक एक्ट बनाया है जिसे देश भर में एक अप्रैल से लागू किया जाना है। इसे लागू करने के लिए अपने छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा विभाग जुटा हुआ है।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब स्कूली परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में कई बच्चों के साथ पालक भी परेशान हैं कि क्या हो रहा है। बच्चे इस बात से खुश हैं कि उनको परीक्षा से मुक्ति मिल जाएगी तो पालक इस बात से परेशान हैं कि सरकार के इस फैसले से तो बच्चे पढऩा ही बंद कर देंगे। जब बच्चों को फेल होने का ही डर नहीं रहेगा तो वे गंभीरता से पढ़ाई क्यों कर करेंगे। आज जब कोई बच्चा पढ़ाई नहीं करता है तो उसे पालक यह बोलकर डराने का काम करते हैं कि बेटा पढ़ाई नहीं करोगे तो फेल हो जाओगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि हर बच्चे में फेल होने का सबसे ज्यादा डर रहता है। परीक्षा में फेल होने के कारण कई बच्चे आत्महत्या जैसा काम कर डालते हैं।
अब जबकि परीक्षा ही नहीं होगी तो डर किस बात का। जब डर नहीं होगा तो पढ़ाई नहीं होगी, पढ़ाई नहीं होगी तो यह बात तय है कि बच्चे कमजोर हो जाएंगे। सरकार की इस सोच के पीछे का कारण समझ से परे है। सरकार को बच्चों के ऊपर से पढ़ाई का बोझ कम करने की जरूरत है, न की ऐसे गलत फैसले करने का। सरकार के इस फैसले से यह बात तय है कि हर बच्चे का बेस कमजोर रहेगा। जब 8वीं तक बच्चा बिना परीक्षा दिए पास हो जाएगा तो आगे उसके लिए परेशानी होनी तय है। 9वीं क्लास से जब परीक्षा का बोझ पड़ेगा तो ऐसे बच्चों को जरूर सबसे ज्यादा परेशानी होगी जो 8वीं क्लास तक को मजाक में लेंगे। इसमें संदेह नहीं है कि परीक्षा न होने के कारण ज्यादातर बच्चे 8वीं क्लास तक को मजाक में ही लेंगे। सरकार को अपने फैसले पर एक बार गौर करने की जरूरत है। सरकार का यह फैसला देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है। जिनके कंघों पर हम कल के भारत का सपना देखते हैं अगर उनके कंघे की कमजोर होंगे तो देश कैसे मजबूत होगा, यह अपने आप में सोचने वाली बात है।

