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मंगलवार, जून 30, 2009

शाइनी ही बलात्कारी-तेरा क्या होगा अनुपमा प्यारी

शाइनी आहूजा को ही अंतत: अपनी नौकरानी से बलात्कार करने का दोषी पाया गया है। उनके डीएनए टेस्ट से यह बात साफ हो गई है कि शाइनी ने ही बलात्कार किया था। अब ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि उनकी उस बड़बोली बीबी का क्या होगा जिन्होंने मीडिया के सामने दावा किया था कि उनके पति ऐसा कर ही नहीं सकते हैं।


जब शाइनी की नौकरानी का बयान आया था तभी यह बात तय हो गई थी कि शाइनी ने ही बलात्कार किया है। लेकिन कानून में जब तक सारे साक्ष्य सामने नहीं आते हैं किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता है। वैसे अब भी इस बात का दावा नहीं किया जा सकता है कि शाइनी पर अदालत में आरोप साबित हो ही जाएगा। अपने देश की अदालतों में कुछ भी असंभव नहीं है। हो सकता है कि शाइनी को बचाने के लिए कोई तिक्कड़म निकालने का काम कर ही लिया जाए। यह तो बाद की बात है लेकिन वर्तमान में तो डीएनए टेस्ट के बाद यह बात साबित हो गई है कि शाइनी ने ही बलात्कार किया था।
डीएनए रिपोर्ट का खुलासा किया गया है जिसमें अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमिताभ गुप्ता ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट में पीड़ित के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है कि अभिनेता ने अपनी नौकरानी के साथ दुष्कर्म किया था। इसके साथ ही रक्त और मूत्र के नमूनों से पता चलता है कि कथित अपराध के समय अभिनेता शराब या नशीली दवाइयों के प्रभाव में नहीं था। शाइनी अभी आर्थर रोड जेल में हैं।

उधर, रायगढ़ जिले में रोहा की रहने वाली पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उसके विभिन्न अंगों पर चोट के निशान थे। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार पीड़ित का वजन सिर्फ 38 किलोग्राम है जबकि आहूजा का वजन 76 किलोग्राम है। ऐसे में आहूजा ने आसानी से नौकरानी को अपने कब्जे में कर लिया होगा। आहूजा ने एक सत्र अदालत में जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि याचिका पर सुनवाई प्रक्रिया के तहत होगी। आहूजा दो जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें उसी दिन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। अभिनेता ने अपनी जमानत याचिका में दलील दी है कि उससे आगे पूछताछ की जरूरत नहीं है और मामले में जरूरी सभी वैज्ञानिक परीक्षण पूरे हो गए हैं।


पुलिस अधिकारी ने जिस तरह से बताया है कि शाइनी की नौकरानी का वजन महज 38 किलो है और शाइनी का वजन 76 किलो है। ऐसे में शाइनी की पत्नी अनुपमा ही यह बताएं कि कैसे 38 किलो के वजन वाली लड़की उनके 76 किलो वाले पति के साथ बलात्कार कर सकती हैं, जैसा कि अनुपमा ने अपने बयान में कहा था कि महिलाएं भी बलात्कार कर सकती हैं। अब तो कम से कम उनको अपने बयान के लिए माफी मांग लेनी चाहिए और उनको शर्म करनी चाहिए कि उन्होंने बिना सोचे-समझे ऐसा बयान दिया था और पूरी नारी जाति को कटघरे में खड़ा करने का एक गुनाह किया था।

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शनिवार, जून 27, 2009

शाइनी की तो लग गई वाट..

बलात्कार के आरोप में फंसे फिल्म स्टार शाइनी आहूजा की वाट लगनी अब तय हो गई है। नौकरानी ने जज के सामने जो बयान दिया और मेडिकल रिपोर्ट में जिन बातों का खुलासा हुआ है उसके बाद उनका बचना कठिन है। ऐसे में यह बात भी है कि अब उनकी बड़बोली पत्नी अनुपमा आहूजा का क्या होगा। उन्होंने कुछ समय पहले काफी आत्मविश्वास के साथ मीडिया के सामने यह दावा किया था कि उनके पति बेकसूर हैं और उनको फंसाया जा रहा है। अनुपमा ने तो यहां तक कह दिया था कि महिलाएं बलात्कार क्यों नहीं कर सकती हैं। उनके कहने का सीधा सा मतलब यह था कि उनके पति ने नौकरानी का बलात्कार नहीं किया है, बल्कि उनका बलात्कार हुआ है। अब यह बात साफ हो गई है कि शाइनी ने ही बलात्कार किया था और उनकी नीयत बहुत पहले से अपनी नौकरानी पर थी। नौकरानी की मेडिकल रिपोर्ट के साथ उनका जज के साथ दिया गया बयान इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि शाइनी ने बलात्कार किया है। अब ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि अनुपमा का क्या होगा। पति का पक्ष लेना अच्छी बात है लेकिन पति के ऊपर अंधा विश्वास करना घातक ही होता है और अनुपमा के साथ यही हुआ है।

शाइनी आहूजा मामले में उनके चाहने वालों के लिए एक बुरी खबर यह है कि शाइनी पर अब बलात्कार का आरोप साबित होना तय है। इसी के साथ यह भी तय हो गया है कि शाइनी की नीयत अपनी नौकरानी पर काफी पहले से खराब थी। नौकरानी ने अदालत में अपनी मौसी के साथ जाकर जो बयान दिया है उस पर गौर करने से साफ हो जाता है कि शाइनी ही बलात्कारी हैं। बकौल नौकरानी शाइनी ने बलात्कार के एक दिन पहले यानी 13 जून को उसको एक टंकी का ढक्कन खोलने के लिए स्टूल पर चढऩे को कहा था। नौकरानी जैसे ही स्टूल में चढ़ी शाइनी ने उसे दबोचने के कोशिश की थी, तब नौकरानी ने उनको छूने से मना किया था। इसके अगले दिन ही शाइनी ने उसको पानी देने के बहाने अपने बेडरूम बुलाया और अपनी मनमर्जी करने में सफल हो गया। शाइनी ने नौकरानी के मुंह में तकिया रख दिया था जिससे वह चिल्ला न सके।


एक तरफ शाइनी की नौकरानी का जज के सामने अदालत में दिया गया यह बयान है तो दूसरी तरफ उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी है जिससे यह साबित होता है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक नौकरानी को जब पहले दिन मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया था तो डॉक्टरों ने देखा कि गुप्तांग में इतनी ज्यादा सूजन है कि उनकी जांच ही नहीं की जा सकती है, ऐसे में उसको पांच दिन बाद लाने के लिए कहा गया। नौकरानी ने अपने को बचाने के लिए जो विरोध किया जिसके कारण शाइनी की बाई कलाई में और अंगुलियों में चोट है, इस बात का खुलासा भी मेडिकल रिपोर्ट में हो चुका है। अब इतने सबूत के बाद यह सोचना मुश्किल है शाइनी बच सकता है।

शाइनी के मामले में इन सब बातों के खुलासे के बाद सबसे ज्यादा तरस उनकी पत्नी अनुपमा पर आ रहा है जिन्होंने काफी जोर-शोर से यह साबित करने की कोशिश की थी कि उनके पति तो सत्यवादी राजा हरिशचन्द्र जैसे हैं। बकौल अनुपमा शाइनी ऐसा कर ही नहीं सकते हैं। न तो वे शराब पीते हैं, न कोई नशा करते हैं फिर भला वे बलात्कार कैसे कर सकते हैं? अब यह अनुपमा को कौन समझाए कि बलात्कार करने के लिए किसी नशे की जरूरत नहीं होती है। बलात्कार करने की मानसिकता ही अपने आप में खतरनाक नशा है। जिस इंसान के दिमाग में इतना घिनौना नशा घर कर गया हो उसको और किसी नशे की जरूरत क्या है। अरे मैडम कुछ बोलने से पहले कम से कम अपने पति के उस बयान पर ही गौर कर लिया होता जिसमें उन्होंने कहा था कि सेक्स नौकरानी की सहमति से हुआ था।

शाइनी को यह बात मालूम थी कि शायद वे ऐसा बोलकर बच सकते हैं। संभवत: शाइनी को इस बात का भरोसा रहा होगा कि वे पैसों के दम पर नौकरानी का बयान इस तरह से दिलवाने में सफल हो जाएंगे। लेकिन फिलहाल वे ऐसा नहीं कर पाएं हैं। हो सकता है आगे ऐसा कुछ हो जाए। इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। लेकिन फिलहाल तो यह बात है कि आखिर अनुपमा का क्या होगा? जिन्होंने पूरी नारी जाति को ही कटघरे में खड़ा करते हुए कह दिया था कि महिलाएं बलात्कार क्यों नहीं कर सकती है? अब शाइनी के मामले में सबूत आने के बाद उनको बताना चाहिए कि अब उनका क्या कहना है। अब तो हर किसी का ऐसा मानना है कि बलात्कार के मामले में न सिर्फ शाइनी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, बल्कि अनुपमा को अब तो सामने आकर नारी जाति से क्षमा मांग लेनी चाहिए। लेकिन हमको नहीं लगता है कि वह ऐसा कुछ करेंगी। वह तो अब भी अपने पति को बचाने के लिए कुछ भी तिकड़म करने में जुटीं होंगी, आखिर वह एक पत्नी हैं और भी अपने पति पर अंधा विश्वास करने वाली पत्नी। फिर अगर उनके सामने भगवान भी आकर कह दें कि उनका पति दोषी है तो वह क्यों कर मानने लगीं। उनका पति तो खुद परमेश्वर है फिर किसी दूसरे परमेश्वर की बात क्यों मानी जाए।

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शनिवार, जून 20, 2009

मासूम बहन को भी नहीं छोड़ा बलात्कारी चचेरे भाईयों ने

बलात्कार करने वाले कितने बड़े दरिंदे होते हैं इसके कई उदाहरण मिलते रहते हैं। ऐसा ही एक भयानक उदाहरण उत्तर प्रदेश में सामने आया है जब चचेरे भाईयों के पास एक बहन को गिरवी के तौर पर रखा गया तो उन्होंने उस 11 साल की मासूम के साथ एक बार नहीं बल्कि लगातार दो माह तक बलात्कार किया। इस घटना के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार समाज के वो ठेकेदार हैं जिनके फरमान के कारण उस मासूम को चचेरे भाईयों के पास गिरवी रखा गया था।

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के खंडासा गांव में नट जाति का एक लड़का अपने ही समाज की लड़की से प्यार करता था। इनका प्यार दोनों के परिजनों को मंजूर नहीं था, ऐसे में इस प्रेमी युगल ने भागकर शादी करने का फैसला किया और दोनों गांव छोड़कर भाग गए। इस मामले की जानकारी होने पर गांव में लड़की के परिजनों की शिकायत पर पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने लड़के के पिता पर जहां 50 हजार रुपए जुर्माना ठोंक दिया, वहीं यह भी फरमान जारी किया कि जब तक लड़का लड़की को लेकर वापस नहीं आता है, लड़के की 11 साल की बहन को उसके चाचा के घर पर गिरवी के तौर पर रखा जाए। पंचायत ने संभवत: यह फैसला इसलिए किया था क्योंकि उसको ऐसा लगा कि लड़की का मामला है ऐसे में लड़की को अपने चाचा के घर पर रखने में परेशानी नहीं होगी। लेकिन पंचायत के इस फैसले का मासूम लड़की के चचेरे भाईयों ने गलत फायदा उठाया और लड़की को अंजान स्थान पर ले गए और उसके साथ लगातार दो माह तक बलात्कार करते रहे। इधर भागे प्रेमी युगल के वापस आने के बाद भी पंचायत का फरमान जारी रहा। ऐसे में जब लड़के के पिता ने मामला पुलिस में दर्ज करवाया तब यह बात सामने आई कि लड़की को जिस चाचा के घर पर बतौर गिरवी रखा गया था, वहां से उसको दूसरे स्थान पर ले जाकर चचेरे भाई बलात्कार करते रहे। पुलिस ने इस मामले में बलात्कार के साथ अपरहरण का मामला दर्ज कर लिया है। लड़की के बयान पर चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। इस मामले से जुड़े पंचायत के सदस्य फरार हो गए हैं।

इस मामले में देखा जाए तो गलती उन समाज के ठेकेदारों की है जो एक प्रेमी युगल को शादी करने की इजाजत नहीं देते हैं। मामला अलग-अलग समाज का होता तो एक बार बात समझ में आती लेकिन एक ही समाज के लड़के और लड़की को शादी की इजाजत देने में क्या परेशानी ? एक तो शादी की इजाजत नहीं दी गई और लड़के और लड़की ने भागकर शादी कर ली तो इधर पंचायत ने एक ऐसा फरमान जारी किया जिसके कारण एक 11 साल की मासूम की जिंदगी ही उजड़ गई। ऐसी और न जाने कितनी घटनाएं होती हैं जो सामने नहीं आ पाती हैं। समाज की गलत परम्पराओं की सूली पर हमेशा महिला की ही बलि ली जाती है। इस घटना ने भी एक बार फिर से यह बात साबित कर दी है कि आज की नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित अपने घर-परिवार में ही है।

पति के सामने ही गैंग रेप

मप्र की राजधानी भोपाल की एक घटना सामने आई है कि एक महिला के साथ उसके पति के सामने ही कार में चार युवकों ने गैंग रेप किया। इस दंपति ने रात में इस कार से लिफ्ट मांगी थी। दंपति को कार में लिफ्ट देने के बाद कार में सवार चार युवकों ने महिला के पति पर रिवाल्वर टिका दी और महिला के साथ चलती कार में ही बलात्कार करते रहे। यहां पर सोचने वाली बात है कि उस पीडि़त दंपति को भी सावधानी बरतनी थी। किसी भी अंजान युवकों से रात के समय में लिफ्ट मांगना वैसे भी खतरनाक होता है। ऐसे में उस दंपति को कोई दूसरा साधन देखना था। ऐसा नहीं है कि लोगों को मालूम नहीं है। आज हर अखबार में कहीं न कहीं ऐसी घटनाओं की खबरें छपती रहती हैं। रोज एक नहीं कई महिलाएं और मासूम बच्चियां बलात्कार की शिकार हो रही हैं। ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि सावधानी बरती जाए। थोड़ी सी चूक का नतीजा क्या होता है, यह बताने की जरूरत नहीं है। आज लगता है कि समाज का पूरी तरह से पतन हो गया है। यह सबके लिए चिंतन का विषय है कि आखिर बलात्कार जैसे घिनौने अपराध से देश और समाज को कैसे बचाया जाए।

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बुधवार, जून 17, 2009

हर दूसरे घर में हैं बलात्कारी दरिंदे

अभी कुछ दिनों से लगातार अखबार और टीवी चैनलों की सुर्खियों में बलात्कार करने वाले एक हीरो की चर्चा है। चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि बलात्कार जैसा अपराध करने वाला यह बंदा एक फिल्म स्टार है। ऐसे में सुर्खियों का बनना लाजिमी है। अब यह बात अलग है कि शाइनी आहूजा ने बलात्कार किया है, या नहीं। यह तो बाद में मालूम होगा। लेकिन इसमें कोई दो मत नहीं है कि आज हर दूसरे घर में बलात्कार करने वाले दरिंदे मौजूद हैं। आज की नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित अगर कहीं है तो वह उसका अपना घर या फिर वह स्थान है जहां पर वह काम करती है। काम करने वाली नौकरानियों का हाल तो सबसे बुरा है कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सच्चाई यही है कि हर दूसरी नौकरानी भी बलात्कार या फिर यौन शोषण का शिकार होती है।

अचानक यह खबर आई कि फिल्म स्टार शाइनी आहूजा ने अपने घर पर काम करने वाली 18 साल की नौकरानी के साथ बलात्कार किया है। जैसे ही यह खबर फैली सब सकते में आए गए। इसी के साथ आया अखबारों, चैनलों के साथ ब्लाग जगत में भूचाल। हर कोई अपना-अपना राग अलापने लगा। शाइनी ने तो अपना अपराध भी कबूल कर लिया, ऐसी खबर भी आई। अपराध कबूल करने के बाद उनको पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। शाइनी के बयान पर गौर करें तो उन्होंने अपना अपराध कबूल नहीं किया है, बल्कि यह माना है कि उन्होंने अपनी नौकरानी के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं। और ये संबंध उसकी मर्जी से बनाए हैं। यह अलग मुद्दा है कि उनकी नौकरानी ने उन पर बलात्कार का आरोप क्यों लगाया है। यह सब मालूम करना पुलिस का काम है। मुद्दा यह है कि शाइनी ने चाहे बलात्कार किया हो या फिर अपनी नौकरानी के साथ उसकी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए हों, है तो कुल मिलाकर यह गलत ही।

शाइनी जैसे अभिनेता अगर ऐसे करते हैं तो आम आदमी क्या करता होगा यह सोचने वाली बात है। अगर सच्चाई पर नजरें डाली जाएं तो आज हर घर में काम करने वाली दूसरी नौकरानी या तो बलात्कार की शिकार होती है या फिर उसका किसी भी तरह से यौन शोषण किया जाता है। अब यह शोषण चाहे उनको डरा कर किया जाता हो या फिर पैसों के दम पर। ज्यादातर मामले इसलिए सामने नहीं आ पाते हैं क्योंकि बलात्कार और यौन शोषण करने वाले दरिंदे ऐसी नौकरानियों की गरीबी की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके हाथ में कागज के वो हरे-हरे नोट रख देते हैं जिनकी जरूरत सबको रहती है खासकर गरीबी में जीवन यापन करने वालों को। ऐसे में उन शिकार हुई महिलाओं को अपना मंहु बंद करना पड़ता है। जब महिलाओं का मुंह बंद हो जाता है तो ऐसे में हवस के पुजारियों के हौसले और बढ़ जाते हैं और उनके शिकार करने की भूख भी बढ़ जाती है। ऐसे में लगातार शिकार बढ़ते जाते हैं।


यह तो घर में काम करने वाली गरीब नौकरानियों की बातें हैं। लेकिन इससे आगे की बात की जाए तो आज ऐसा कौन सा दफ्तर है और कौन सा क्षेत्र है जहां पर महिलाओं के साथ अनाचार नहीं होता है। सबसे ज्यादा असुरक्षित कहीं महिलाएं हैं तो वो उनका अपना खुद का घर है। आज तो बाप भी सांप बन गए हैं और अपनी बेटियों को ही हवस का शिकार बनाने से पीछे नहीं हटते हैं। घर परिवार में ऐसा कोई नाते रिश्तेदार नहीं है जो महिलाओं को अपनी हवस का शिकार नहीं बनता है। आज लगता है कि समाज का पूरी तरह से पतन हो चुका है और इस समाज को सुधारने काफी कठिन है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर लगातार चिंतन के साथ ठोस कदम भी उठाने की जरूरत है। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि बलात्कार या यौन शोषण का शिकार होने वाली महिलाओं को ठीक उसी तरह से सामने आना पड़ेगा जिस तरह से शाइनी की नौकरानी सामने आईं हैं। उसकी हिम्मत की दाद देनी चाहिए कि उन्होंने एक स्टार के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत की है।

अगर उसकी मंशा सही है तो सबको उसका साथ देना चाहिए। मंशा सही होने की बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई बार कई शातिर लड़कियां अपने मतलब के लिए ऐसा करने का काम करती हैं। कई उदाहरण हैं जब किसी का किसी से सौदा नहीं पटा है तो उस पर बलात्कार का आरोप लगाकर उसको कटघरे में खड़ा कर दिया गया है। जिस तरह से शाइनी के पक्ष में उनकी पत्नी के साथ और लोग खड़े हुए हैं उससे एक बार संदेह होता है फिर शाइनी के बयान को भी नहीं भूलना चाहिए जिसमें उन्होंने यह कहा है कि उन्होंने नौकरानी की मर्जी से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। किसी भी मामले में हर पहलू पर गौर करने के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचना चाहिए। और अदालत भी यही करेगी। यह नहीं कि किसी पर आरोप लगा नहीं कि उसको चढ़ा दिया जाए सूली पर। अगर वास्तव में कोई अपराधी है तो उसको सजा दिलाने के लिए पूरे समाज को एकजुट हो जाना चाहिए। शाइनी भी अगर वास्तव में अपराधी हैं तो उनके खिलाफ देश भर की महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी उनके खिलाफ खड़े होना चाहिए। समाज के विरोध के बिना बलात्कार और यौन शोषण जैसा घिनौना अपराध करने वालों का कुछ बिगडऩे वाला नहीं है। जिसके साथ अनाचार होता है उसको कोर्ट में वकीलों के सामने क्या-क्या सहना पड़ता है यह बताने की बात नहीं है। इसी डर से भी ज्यादातर मामले सामने नहीं आ पाते हैं। इस मामले में काफी कुछ लिखा जा सकता है और कई ऐसे मामले हैं जिनकी चर्चा बाद में हम जरूर करेंगे। फिलहाल इतना ही। शेष बातें एक छोटे से ब्रेक के बाद।

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मंगलवार, जून 16, 2009

बुरी नजर वाले तेरा मुंह गोरा

अरे.. अरे.. चौक गए न आप भी कि हम ये क्या कह रहे हैं। आज अचानक एक वाहन के पीछे फिर से यह लिखा दिख गया कि बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। आज भी राह चलते अक्सर ट्रकों, बसों और किसी भी चार चक्के वाले वाहन में यह एक मुहावरा लिखा दिख जाता है। हमने इस मुहावरे को देखने के बाद सोचा यार हमेशा यही लिखा मिलता है कि बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। लेकिन जहां तक हमें याद है कि अभी मुंबई में अपनी नौकरानी के साथ बलात्कार करने वाले यानी बुरी नजर रखने वाले शाइनी आहूजा का तो मुंह गोरा है। और भी न जाने ऐसे कितने दरिंदे हैं जो बलात्कार करने या फिर यौन शोषण करने का काम करते हैं। ऐसा करने वाले ज्यादातर लोगों के मुंह तो गोरे ही होते हैं। फिर यह क्यों कहा जाता है कि बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। हमें तो लगता है कि खामखा में बेचारे काले मुंह वालों को बुरा कहा जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी काले मुंह वाले अच्छे हो सकते हैं, लेकिन बुरी नजरों के जितने मामले सामने आते हैं उनमें तो 80 प्रतिशत से ज्यादा गोरे मुंह वाले होते हैं। हमें तो लगता है कि अब इस मुहावरे को बदल कर बुरी नजर वाले तेरा मुंह गोरा रख देना चाहिए। भले मुहावरे का मतलब यह होता है कि बुरी नजर रखने वाले को लानत यानी उसका मुंह काला। लेकिन कितने लोगों का आज तक मुंह काला हुआ है।

बलात्कार और यौन शोषण करने वालों पर आपको कल राजतंत्र
में एक पोस्ट पढऩे को मिलेगी.. हर दूसरे घर में हैं बलात्कारी दरिंदे

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गुरुवार, अप्रैल 09, 2009

कलयुगी बाप-बन रहे हैं सांप

आज सुबह-सुबह फिर अखबार में यह खबर आई की छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रहने वाला एक और कलयुगी बाप सांप बन गया और हवस की अंधी आग में उसने अपनी बेटी को ही डस लिया। यह बाप तो ऐसा था जो लगातार 10 साल से अपनी बेटी को अपने जहर से कांटने का काम कर रहा था। जब बात बर्दाश्त से बाहर हो गई तो अंत में बेटी ने लोक-लाज की परवाह किए बिना अपने उस बाप को जो सांप बन गया था समाज के सामने करने का साहस दिखाया। परिणाम यह रहा कि उस सांप को कुचलने के लिए उस युवती के परिजन पील पड़े। इस एक घटना के कुछ समय पहले ही छत्तीसगढ़ के एक शहर बेमेतरा में भी ऐसी ही घटना हुई थी जब एक बेटी ने अपने बाप पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। आज देश का कोई भी शहर नहीं बचा है जहां पर कलयुगी बाप सांप न बन रहे हैं। इसी के साथ यह बात भी सामने आती रही है कि ज्यादातर महिलाओं के साथ उनके रिश्तेदार ही बलात्कार करने का काम करते हैं। महिला आयोग ने भी यह बात मानी है कि आज नारी अगर सबसे ज्यादा असुरक्षित कहीं है तो वह अपने ही घर की चार-दीवारी में है। सेक्स की अंधी दौड़ में आज लोग रिश्तों को भी भूल गए हैं। बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को भी आज के कलयुगी बाप अब लगातार कंलकित करने लगे हैं। इनको बाप कहने की बजाए सांप कहना ज्यादा उचित है। आज छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक 21 वर्षीय युवती के साथ हुई घटना सामने आई। इस घटना में युवती ने जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उसका सगा बाप उसके साथ तब से बलात्कार कर रहा है जब महज 11 साल की थी। समाज के डर से उसने यह बात किसी को नहीं बताई। आज जबकि उसने इस बात का खुलासा कर दिया है तो युवती के आरोप को उसकी मां ही नकार रही है। इधर कलयुगी बाप को जब उसके रिश्तेदारों से मार-मार कर अधमरा कर दिया तो इस बारे में युवती ने कहा कि उसके रिश्तेदार चाहते हैं कि उसका बाप मर जाए ताकि उसका बयान न लिया जा सके और मेरा आरोप लगत साबित हो जाए। युवती का कहना है कि उसके बाप का बयान जरूरी है। ठीक इसी तरह की एक और घटना कुछ समय पहले तब सामने आई थी जब बेमेतरा की एक युवती ने घर से भाग कर अपने प्रेमी से शादी कर ली थी और आरोप लगाया था कि उसके साथ उसका बाप काफी समय से बलात्कार करते रहा है। इस युवती के आरोप को उसके बाप के साथ मां से मीडिया के सामने रो-रोकर गलत बताया था। यह सोचने वाली बात है कि आखिर एक युवती क्यों कर अपने सगे बाप पर ही ऐसा आरोप लगाएगी। इसमें कोई दो मत नहीं है कि आज के कलयुगी बापों की हवस की शिकार युवतियां लगातार बन रही हैं। कानून में इन बलात्कारी बापों के लिए कोई कड़ी सजा नहीं है। ऐसे बापों को तो मुस्लिम देशों के कानून की तरह से सजा मिलनी चाहिए। होना तो यह चाहिए कि बाप-बेटी के रिश्ते को अपवित्र करने वाले ऐसे सांपों को खुले आम फांसी दे देनी चाहिए। लेकिन इसका क्या किया जाए कि अपने देश में ऐसा कोई कानून नहीं है। आज यही वजह है कि बलात्कार के लिए ज्यादा कड़ा कानून न होने के कारण ही नारी आज अपने ही नाते-रिश्तेदारों ही हवस का शिकार ज्यादा बन रही है। महिला आयोग की बातों पर गौर करें को आयोग भी मानता है कि ज्यादातर मामलों में महिलाएं अपने घरों में यौन शोषण का शिकार होती हैं, और लोक-लाज के डर से वो सामने नहीं आ पाती हैं। जो महिलाएं सामने आती हैं, उन पर कई तरह के दबाव रहते हैं। फिर जब मामला अदालत में जाता है तब उस पीडि़त महिला से अपने वकील कैसे-कैसे सवाल करते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। इन्हीं सब बातों का ध्यान करते हुए ही अंतत: महिलाओं को अत्याचार बर्दाश्त करने पड़ते हैं। लेकिन ऐसा करके वो ठीक नहीं करती हैं, आज वह समय आ गया है जब अपने खिलाफ होने वाले अत्याचार के लिए महिलाओं को अपनी आवाज उठानी ही पड़ेगी। और जो भी ऐेसे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाए उसका पूरे समाज को साथ देना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता है और समाज के लोग ही ऐसी महिलाओं को दबाने का काम करते हैं। धन्य हैं वो लड़कियां जिन्होंने इस बात का खुलासा किया है कि उनके बाप वास्तव में कितने बड़े सांप हैं जो उनको ही डसने का काम कर रहे हैं। सोचने वाली बात है कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है। आखिर ऐसा क्या कारण है जो लोग हवस की आग में रिश्तों को भी ताक में रख देते हैं। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण ऐसी गंदी फिल्में हैं जिनको देखकर लोग बेकाबू हो जाते हैं और अपनी सेक्स की भूख को मिटाने के लिए किसी को भी अपना शिकार बना लेते हैं। ऐसी फिल्में देखने वालों को जब अपने ही घर में एकांत में रिश्ते की कोई भी युवती, महिला मिल जाती है तो उसको वो शिकार बनाने से पीछे नहीं हटते हैं। घरों का एकांत आज नारी जाति के लिए ज्यादा घातक साबित हो रहा है।

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