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शुक्रवार, अप्रैल 15, 2011

हमें कभी नहीं रही टिप्पणियों की भूख- टिप्पणियों के बिना हमारे ब्लाग नहीं जाएंगे सूख

एक फोन आया भाई ब्लाग चौपाल में खोल दें टिप्पणी के रास्ते
हमने कहा- कैसे खोल दें हम इसके रास्ते
इंसानी कुत्ते तो इंसानियत की भाषा भी नहीं जानते
जो लोग इंसानियत को नहीं मानते
वे ही हैं सबको परेशान करने की ठानते
हमारी ये बातें मित्र तुम क्यों नहीं मानते
अगर हम फिर से खोल देंगे रास्ते
पड़ जाएंगे गंदी टिप्पणियों से वास्ते
हमें कभी नहीं रही टिप्पणियों की भूख
टिप्पणियों के बिना हमारे ब्लाग नहीं जाएंगे सूख
पर हमें मित्रों के विचार न मिलने का जरूर होता है दुख
पर क्या करें इंसानी कुत्ते इससे ही होते हैं खुश
पर हमने टिप्पणियों के रास्ते बंद करके
कर दिए हैं उनके सारे मंसूबे फुस
जिनको देने हैं अपने सुंदर विचार
खुली हुई है हमारे मेल की बहार
आप आकर बरसाएं वहां अपना प्यार
हमसे भी मिलेगा प्यार के बदले प्यार
दुनिया में प्यार लेना और देना चाहिए
नफरत से वास्ता नहीं रखना चाहिए 

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गुरुवार, फ़रवरी 17, 2011

वास्तव में कुत्ते की दुम है यह यलो

हमने बड़े-बड़े बेशर्म और घटिया इंसान देखें हैं लेकिन यलो जैसा वाहियात इंसान नहीं देखा। राजतंत्र में आने का तो अब दम नहीं है इसलिए बिना वजह ब्लाग चौपाल में अपने कुत्ते की दुम हिलाने आ जाते हैं। हमारी बहुत चिंता है तो क्यों नहीं अपने नकाब से बाहर आते हैं। हम लिखे न लिखें तुम्हारी सेहत को क्या फर्क पड़ रहा है। क्या गंदगी करने के लिए और कोई जगह नहीं मिल रही है। हमें लग रहा है कि हमें अब ब्लाग चौपाल में भी टिप्पणी का रास्ता बंद करना पड़ेगा ताकि यलो जैसी कुत्ते की दुम को गंदगी करने का मौका न मिल सके। चलो खुश हुए न कुत्ते की दुम की हम आ गए हैं लिखने के लिए। मजबूरी में हमें इतने खराब शब्दों का प्रयोग करना पड़ा है, लेकिन क्या करें कहते हैं न कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते, तो हम भी क्या करें। 

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रविवार, नवंबर 14, 2010

2100 पोस्ट हो गई और पता भी नहीं चला

हमारी 2100 पोस्ट पूरी हो गई और हमें पता भी नहीं चला। ये पोस्ट हमारे तीन नियमित ब्लागों के साथ एक सांझा ब्लाग को मिलाकर हुईं हैं। कल की बात है हम जल्दी उठ गए थे। खाली समय था तो सबसे पहले इस समय का उपयोग करते हुए हम कुछ ब्लागों के फालोअर बने। इसके बाद सोचा चलो यार देखें कि आज की तारीख में हमारी कितनी पोस्ट हो गई है तो सबको जोड़ा तो मालूम हुआ कि पोस्ट का आंकड़ा 2100 के पार हो चुका है।
ब्लाग जगत में आए हम अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं और इस बीच हम अपने तीन नियमित ब्लागों का संचालन कर रहे हैं। सबसे पहले हमने खेलगढ़ से ब्लाग लेखन की शुरुआत की थी। इसके बाद आया राजतंत्र का नंबर। और फिर हम पहले जुड़े ललित शर्मा के एक सांझा चर्चा वाले ब्लाग 4 वार्ता से। इस ब्लाग में हमने 29 पोस्ट लिखी। इसके बाद जब हमें लगा कि ब्लाग जगत की गुटबाजी को दूर करने के लिए कुछ पहल करनी चाहिए तो हमने एक और सांझा ब्लाग ब्लाग चौपाल का आगाज किया। इस ब्लाग को करीब 6 माह होने वाले हैं। इस ब्लाग में अब तक हमने तक 157 पोस्ट लिखी है। अब जहां तक खेलगढ़ का सवाल है तो इसमें कल की तारीख तक 1277 पोस्ट हो चुकी थीं। राजतंत्र में 640 पोस्ट लिखी गई है। हमारा इस समय सबसे प्रचलित ब्लाग राजतंत्र है। हमें जिस तरह का प्यार, स्नेह और आर्शीवाद ब्लागर मित्रों के साथ पाठकों का मिला है, वहीं हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। वैसे हमें अपने रास्ते से विचलित करने के लिए कई मित्रों ने फर्जी आईडी से तरह-तरह की टिप्पणी करने का काम किया। ऐसे में हमने राजतंत्र में मॉडरेशन का सहारा लिया है। अब हम सुखी हैं। बहरहाल उम्मीद है कि ब्लागर मित्रों का प्यार, स्नेह और आर्शीवाद हमेशा मिलता रहेगा और हम इसी तरह से लिखते रहेंगे।

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रविवार, अक्टूबर 24, 2010

2000 पोस्ट हो गई और पता भी नहीं चला

हमारे ब्लागों को मिलाकर कब की 2000 पोस्ट पूरी हो गई है और हमें पता भी नहीं चला। कल रात को कुछ समय मिला तो सोचा कि चलो देखते हैं हम कहां तक पहुंचे तो ब्लागों की पोस्ट जोडऩे पर मालूम हुआ कि 2000 पोस्ट कब की पार हो चुकी है।
हमने ब्लाग जगत में खेलगढ़ और राजतंत्र के माध्यम से पिछले साल फरवरी में कदम रखा था। इन दो ब्लागों के बाद हमने दो साझा ब्लागों में भी लिखना प्रारंभ किया। ये साझा ब्लाग थे, पहला ब्लाग 4 वार्ता और दूसरा ब्लाग चौपाल। ब्लाग 4 वार्ता में तो हमने 29 पोस्ट लिखी लेकिन ब्लाग चौपाल में हम लगातार लिख रहे हैं और ब्लागों की चौपाल सजाने का काम कर रहे हैं। ब्लाग चौपाल में हम अब तक 136 पोस्ट लिख चुके हैं। अब जहां तक राजतंत्र का सवाल है तो इसमें हमने 620 पोस्ट लिखी है। सबसे ज्यादा पोस्ट खेलगढ़ में लिखी गई है। आज की तारीख में इसमें 1235 पोस्ट हो चुकी है। आज की पोस्ट को मिलाकर अब तक हम 2020 पोस्ट लिख चुके हैं। खेलगढ़   में भी हमारी 1200 पोस्ट कब पार हुई मालूम नहीं हो सका। वैसे भी इन दिनों बहुत कम समय मिल रहा है, ब्लागिंग के लिए। लेकिन समय कम होने के बाद भी हम अपने ब्लाग में लगातार लिखने के साथ ब्लाग चौपाल को कायम रखे हुए हैं।

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सोमवार, अक्टूबर 04, 2010

राजतंत्र में पोस्ट की शतकों का सिक्सर

हमारे ब्लाग राजतंत्र ने कल शतकों का सिक्सर लगाते हुए 600 पोस्ट पूरी कर ली। इसी के साथ हमारे सभी ब्लागों की पोस्ट को मिलाकर अब हमारे कदम 2000 पोस्ट की तरफ बढ़ गए हैं।
राजतंत्र का आगाज हमने फरवरी 2009 में किया था। तब से लेकर अब तक हमने लगातार इसमें पोस्ट लिखने का काम किया है। एक दो अवसरों को छोड़कर हम लगातार लिख रहे हैं। हमें इस बीच पाठकों और ब्लाग बिरादरी का बहुत ज्यादा प्यार और स्नेह मिला है। हमारा ब्लाग राजतंत्र आज की तारीख में चिट्ठा जगत में टॉप 40 में शामिल हैं और समय वरीयता क्रम में 26वें स्थान पर है। हमारे ब्लाग को जहां 45 हजार से ज्यादा पाठक मिले हैं, वहीं हमारी पोस्ट पर 4824 टिप्पणियां मिली हैं।
इधर हमारे सभी ब्लागों को मिलाकर हमारी पोस्ट का आंकड़ा कब का 1900 पार करके 2000 की तरफ बढ़ गया है। संभवत: इस माह हम 2000 के आंकड़े को पार कर जाएंगे। हमारा एक ब्लाग खेलगढ़ में इस समय 1184 पोस्ट हो गई है। एक सांझा ब्लाग ब्लाग 4 वार्ता में हमने 29 पोस्ट लिखी थी। एक और सांझा वार्ता के ब्लाग ब्लाग चौपाल में 117 पोस्ट लिख चुके हैं। राजतंत्र में आजकी पोस्ट के साथ 601 पोस्ट हो गई है। कुल मिलाकर अब तक 1931 पोस्ट हो गई है। हम उम्मीद करते हैं कि हमें पाठकों के साथ ब्लाग बिरादरी का प्यार इसी तरह से मिलते रहेंगे।

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मंगलवार, अगस्त 31, 2010

1800 पोस्ट के करीब

हम अब 1800 पोस्ट के करीब पहुंच गए हैं। हमने ब्लाग जगत में जब पिछले साल फरवरी से खेलगढ़ के जरिए कदम रखा था तब हम नहीं जानते थे कि हमें ब्लाग बिरादरी का इतना ज्यादा प्यार मिलेगा कि हमारी उंगलियां कम्प्यूटर पर एक्सप्रेस की तरह दौडऩे लगेंगी। आज सबसे ज्यादा पोस्ट हमारी खेलगढ़ में 1110 हो गई है। इसके बाद प्रारंभ किए हमारे ब्लाग राजतंत्र में हमने अब तक 568 पोस्ट लिखी है। एक सांझा ब्लाग ब्लाग 4 वार्ता में हमने 29 पोस्ट लिखी थी। अब एक और सांझा चर्चा के ब्लाग ब्लाग चौपाल में हमने अब तक 85 पोस्ट लिखी है। कुल मिलाकर अब हमारी पोस्ट 1792 तक पहुंच गई है। बस दो दिनों के अंदर ही हमारी पोस्ट का आंकड़ा 1800 के पार हो जाएगा। ब्लागर मित्रों के साथ हमारे पाठकों का जो हमें प्यार, स्नेह और आर्शीवाद मिला है उसके लिए हम सबके आभारी हैं, और आशा करते हैं कि ऐसा ही प्यार हमेशा बनाए रखेंगे।

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शुक्रवार, अगस्त 20, 2010

दुश्मन दोस्तों ने किया मजबूर माडरेशन लगाने

हम अपने ब्लाग राजतंत्र में माडरेशन लगाने के खिलाफ थे, लेकिन हमारे दुश्मन दोस्तों ने ही हमें मजबूर कर दिया है कि हम माडरेशन लगा दें। हम बता दे कि हमारे ही बीच के कुछ मित्रों ने फर्जी आईडी बनाकर लगातार हमें परेशान करने का काम किया है। हमने लगातार इन बातों को नजरअंदाज करने का काम किया, लेकिन इसके बाद भी ऐसे दुश्मन दोस्त बाज नहीं आ रहे हैं। हम जानते हैं कि ऐसी हरकतें कौन कर रहे हैं। अगर  ऐसी हरकतें करके वे लोग खुश हो रहे हैं और उनको लगता है कि हम विचलित होकर ब्लाग जगत से किनारा कर लेंगे तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है।
हम जानते हैं कि हमने जब से ब्लाग जगत को गुटबाजी से उबारने के इरादे से ब्लाग चौपाल का आगाज किया है, गुटबाजी करने वाले हमारे दुश्मन दोस्त बहुत ज्यादा खफा हैं। वे खफा होते हैं खफा रहे हमारी बला से। हमें जब किसी गुटबाजी से कोई मतलब नहीं है तो हम क्यों कर ऐसे लफड़े में पड़े। हम तो ब्लाग चौपाल में जो भी ब्लाग नजर आते हैं उनको शामिल करने का प्रयास करते हैं। एक प्रयास यह भी रहता है कि एक ही ब्लाग को लगातार शामिल न करें। नए-नए ब्लागों तक जाने का प्रयास रहता है। इसमें हम ज्यादा सफल तो नहीं पा रहे हैं क्योंकि हमारे पास समय की कमी है, लेकिन इसके बाद भी हम कोशिश करते हैं। एक बात और यह कि हम टिप्पणियों के पीछे भागते नहीं है। हमने पहले सोचा था कि हम टिप्पणियों का रास्ता ही बंदज कर देंते हैं, लेकिन फिर लगा कि शायद यह ठीक नहीं होगा, क्योंकि चंद मतलबी लोगों की वजह से हर किसी को अपने विचार रखने से रोकना ठीक बात नहीं है। ऐसे में हमने फिलहाल अपने ब्लाग में माडरेशन लगाने का फैसला किया है। अगर जरूरत हुई तो हम टिप्पणियों का रास्ता भी बंद कर सकते हैं। हम ब्लाग जगत में सिर्फ और सिर्फ कुछ अच्छा करने आए हैं न की गुटबाजी करने और गुटबाजी फैलाने के लिए आए हैं।

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मंगलवार, अगस्त 10, 2010

विवादों से क्यों है इतना प्यार-जरा कोई तो हमें बताए यार

आज जब हम ब्लाग चौपालमें चर्चा करने बैठे तो देखा कि दो ब्लागर मित्रों में जंग छिड़ी हुई है। इस जंग में एक तरफ वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी खड़े हैं तो दूसरी तरफ संजीत त्रिपाठी। हमें यह देखकर अफसोस हुआ कि अपने पत्रकार मित्र भी ऐसी जंग में शामिल हैं। ब्लाग जगत में तो हमेशा से विवाद होते रहे हैं। लोगों को न जाने विवादों से क्यों कर इतना प्यार है। अगर इतना ही प्यार लोग एक दूसरे के प्रति दिखाते तो शायद नफरत के लिए कोई स्थान ही नहीं रहता। लेकिन इसका क्या किया जाए कि यहां तो प्यार के लिए भी समय कम है और लोग नफरत के लिए इतना समय निकाल लेते हैं।
आखिर ऐसी बिना सिर पैरे की लड़ाई से किसका भला होता है। क्यों कर लोग बिना वजह- बिना सोचे समझे किसी के भी ब्लाग में कुछ भी टिप्पणी करने से बाज नहीं आते है। हमारे ब्लाग में भी एक कोई पतित पावन साहब काफी समय से कभी मखन वाली टिप्पणियां तो कभी बिना सिर पैरे की टिप्पणियां कर रहे हैं। हम लगातार उनको नजर अंदाज कर रहे हैं। पता नहीं लोगों को क्या मजा आता है ऐसा करने में। इंटरनेट पर सुविधा मिली है तो उसका सही उपयोग करना चहिए, पर अपने मित्र फर्जी आईडी बनाकर मजा लेने का काम करते हैं। हम तो ऐसी फर्जी आईडी बनाकर टिप्पणी करने वालों को मानसिक रोगी समझते हंै। अगर ये मानसिक रोगी नहीं होते तो अपने नाम से टिप्पणी करते फिर वह भले अच्छी होती है या अलोचनात्मक होती। आलोचना करना गलत नहीं है, लेकिन आलोचना करने के पीछे ठोस वजह भी होनी चाहिए। अगर मुझे लगता है कि फला को परेशान करना है तो बना ली एक फर्जी आईडी और दे रहे हैं दनादन कुछ भी टिप्पणी। बहरहाल हम तो बस इतना चाहते हैं कि कम से कम अपने पत्रकार मित्रों को ऐसी किसी जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। आप दोनों समझदार हंै, क्यों कर अपनी ही बदनामी कर रहे हैं। यहां तो लोगों को बिना टिकट का तमाशा देखने में मजा आता है। मजा लेने वाले मजा लेंगे लेकिन सजा तो आपको मिलनी है। किसी भी समस्या का हल खुली जंग नहीं होता है। खुली जंग में तह उतरना चाहिए जब लगे कि सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमारा काम था मित्र होने के नाते सलाह देना अब इसे मानना न मानना आपका काम है। 

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शुक्रवार, जुलाई 16, 2010

कल हमारी 1600 पोस्ट पूरी होगी

हमारे पहले ब्लाग खेलगढ़   ने आज पोस्ट में 1000वां आंकड़ा छू लिया है। इसी ब्लाग को हमने पिछले साल फरवरी में प्रारंभ किया था। वैसे अब हमारे ब्लागों राजतंत्र, ब्लाग चौपाल के साथ एक सांझा ब्लाग ब्लाग 4 वार्ता को मिलाकर हमारी पोस्ट का आंकड़ा 1600 पहुंचने वाला है। कल हमारी पोस्ट की आंकड़ा 1600 हो जाएगा।
आज हम सोच रहे थे कि किस पर लिखा जाए तभी हमारे नजरें अपने खेलगढ़ पर पड़ी तो देखा कि इसमें 1000 पोस्ट पूरी हो गई है। हालांकि हमारे इस ब्लाग के ज्यादा पाठक नहीं है, लेकिन हमने इस ब्लाग को अपने राज्य की खेल गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय जगत तक पहुंचाने के लिए प्रारंभ किया था और इसे अब तक कायम रखा है। हम अपने इस ब्लाग को हमेशा जारी रखने का प्रयास करेंगे। हमारे दूसरे ब्लाग राजतंत्र में 500 से ज्यादा पोस्ट हो गई है और इस समय उसमें पोस्ट का आंकड़ा 525 है। इसी के साथ हमारे एक चर्चा वाले ब्लाग ब्लाग चौपाल में पोस्ट का आंकड़ा 42 तक पहुंच गया है। इसी के साथ हमने ललित शर्मा के ब्लाग ब्लाग 4 वार्ता में 29 पोस्ट लिखी है। कुल मिलाकर अब हम 1600 के आंकड़े से महज चार कदम दूर है और यह दूरी संभवत: कल ही समापत हो जाएगी और हमारी पोस्ट का आंकड़ा 1600 हो जाएगा।

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गुरुवार, जुलाई 01, 2010

कंप्यूटर की मर गई मां-हमारी पोस्ट की निकल कई जां

बात परसों की है, जब हम दोपहर को घर आए तो देखा की कंप्यूटर चालू नहीं हो रहा है। सारे जतन करके देख लिए, पर सफलता नहीं मिली। थक हार कर कंप्यूटर के इंजीनियर को फोन लगाया। वे आए उन्होंने भी प्रयास किया कि कंप्यूटर ठीक हो जाए, लेकिन नहीं हो सका। उन्होंने शंका जताई कि लगता है इसकी मां की निधन हो गया है। यानी मदर बोर्ड उड़ गया है। हमने कहा देख लें क्या हुआ है। वे कंप्यूटर की सीपीयू निकाल कर ले गए।
शाम को हमने इंजीनियर को फोन लगाकर पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने बताया कि मदर बोर्ड की जांच चल रही है। रात तक कुछ मालूम नहीं हुआ। दूसरे दिन यानी कल दोपहर को खबर मिली कि मदर बोर्ड काम नहीं कर रहा है दूसरा लगाना पड़ेगा। हमने कहा जल्दी से दूसरा लगाकर कंप्यूटर चालू कर दें। उन्होंने कहा ठीक है। कंप्यूटर को इंजीनियर जब ठीक करके शाम को चार बजे लाने वाले थे तो हमने सोचा चलो यार आज शाम को ही राजतंत्र में पोस्ट लिखने के साथ ब्लाग चौपाल
में चर्चा कर लेंगे। लेकिन वाह री किस्मत बिजली चली गई। इंजीनियर साहब आए और कंप्यूटर को लगाकर चले गए। रात को मालूम हुआ कि इंटरनेट की काम नहीं कर रहा है। हमने फिर इंजीनियर को फोन खटखटाया उन्होंने रात में आकर इंटरनेट चालू कर दिया, सोचा कि रात में कुछ लिखा जाए, लेकिन फिर मन नहीं हुआ। बहरहाल कंप्यूटर की मां के निधन के कारण हमें एक दिन ब्लाग जगत से दूर रहना पड़ा जिसका हमें अफसोस है।

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बुधवार, जून 23, 2010

अंजोर दास हो या मूलचंदानी हमें कोई फर्क नहीं पड़ता जानी-क्योंकि हम हैं राजकुमार ग्वालानी

हमने जब से ब्लाग जगत में भाई चारा लाने के लिए ब्लाग चौपाल का आगाज किया है तभी से कई अवांछित लोग हमारे पीछे पड़ गए हैं। कभी किसी नाम से तो कभी किसी नाम से फर्जी आईडी से टिप्पणी करके हमें डराने का काम करते हैं। लेकिन हम बता दें कि हमने जो काम अपने हाथ में लिया है उसे हम छोडऩे वाले नहीं है। अब कल की ही बात करें तो हमारे ब्लाग राजतंत्र के साथ ब्लाग चौपाल में पहले कोई अंजोर दास फिर मूलचंदानी अवतरित हुए। इनकी टिप्पणियों की तरफ हमारे मित्रों ने ध्यान दिलाया।
हम बता दें कि

अंजोर दास हो या मूलचंदानी
हमें कोई फर्क नहीं पड़ता जानी
क्योंकि हम हैं राजकुमार ग्वालानी
जिसके सामने ऐसे लोग भरते हैं पानी
ज्यादा तीन-पांच करने वालों को
हम याद दिला देते हैं नानी
जिसने भी हमसे पंगा लेना की ठानी
उसको है हमेशा मुंह की खानी
पहले तहलसीदार फिर पापा आए
हमारे एक ही फटके में जाने कहां गए
अब अंजोर दास और मूलचंदानी आए
क्या हम इनकी अब न बजाए
इसके पहले की हम इनकी बजाए
अच्छा है ये खुद ही भाग जाए

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शुक्रवार, जून 18, 2010

1500 पोस्ट के करीब हैं हम

हमारे ब्लाग राजतंत्र के साथ खेलगढ़   को मिलाकर हमारी पोस्ट का आंकड़ा कब का 1400 पार कर गया है। इसी के साथ खेलगढ़ का आंकड़ा 900 के पार हो गया है। बहुत दिनों से सोच रहे थे कि इस पर लिखे लेकिन दूसरे विषयों के कारण इस पर लिखना ही नहीं हो रहा था। वैसे अब हमारी पोस्ट का आंकड़ा 1500 के करीब पहुंच गया है। हमने चर्चाओं के दो ब्लागों ब्लाग 4 वार्ता के साथ ब्लाग चौपाल में ही अब तक 45 पोस्ट लिख ली है। इस समय हमारी पोस्ट का आंकड़ा 1475 तक पहुंच गया है और एक सप्ताह के अंदर ही हम 1500 के पार होंगे।
ब्लाग जगत में हमें एक साल से ज्यादा समय हो गया है और इस समय में हमने लिखने की रफ्तार को कम करने की बजाए बढ़ाने का ही काम किया है। पहले हम राजतंत्र और खेलगढ़ में ही लिखते थे। राजतंत्र की बात करें तो हमारा यही ब्लाग सबसे आगे है। इस समय इस ब्लाग में 500 का आंकड़ा करीब है। इसमें हमने आज की पोस्ट सहित 498 पोस्ट लिखी है। हमारा यह ब्लाग चिट्ठा जगत में 34वें स्थान पर है। इस ब्लाग के जहां 63 समर्थक हैं, वहीं 39560 पाठक इस ब्लाग को देख चुके हैं। अब खेलगढ़ की बात करें तो इस ब्लाग में हमने अब तक 932 पोस्ट लिखी है और हमारा यह ब्लाग 124वें नंबर पर है।
इन दो ब्लागों के बाद हमने चर्चा के पहले ब्लाग के रूप में ब्लाग 4 वार्ता में चर्चा का आगाज किया। इसमें हमने 29 पोस्ट लिखी है। इधर हमने ब्लाग चौपाल में लिखना प्रारंभ किया है। इसमें अब तक हमने 16 पोस्ट लिखी है। कुल मिलाकर अब हम 1500 से महज 25 कदम दूर है और यह दूर महज पांच दिनों में पूरी हो जाएगी ऐसी उम्मीद है।
हमें ब्लाग जगत में जो प्यार और स्नेह मिला है उसके लिए हम अपने ब्लागर मित्रों के साथ पाठकों के भी तहे दिल से आभारी है। संभवत: यह  आप सबका प्यार है जिसके कारण हम लगातार लिखने की रफ्तार को तेज किए जा रहे हैं, वरना ब्लाग जगत में गंदें लोगों की भी कमी नहीं है। ऐसे लोगों ने हमें ब्लाग जगत से अलग करने की कई बार कोशिश की है, कई बार हमारा मन भी विचलित हुआ है, लेकिन हमने ब्लाग जगत से किनारा न करने का फैसला किया है और इस फैसले पर हम हमेशा कायम रहेंगे यह वादा करते हैं।

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मंगलवार, जून 15, 2010

पांच घंटे में ठीक हुआ इंटरनेट

कल दोपहर को जब हम घर खाना खाने के लिए आए तो देखा की इंटरनेट बंद है। चेक किया तो मालूम हुआ कि मॉडम काम नहीं कर रहा है। हमने तुरंत एयरटेल में फोन खटखटाया। उधर से कहा गया कि कल सुबह 10 बजे तक आपका नेट ठीक कर दिया जाएगा। हम परेशान हो गए यार अगर सुबह तक नेट ठीक होगा तो हम सुबह राजतंत्र में पोस्ट लिखने के साथ ब्लाग चौपाल में चर्चा कैसे करेंगे। लेकिन फोन कंपनी ने फुर्ती दिखाई और रात को आठ बजे हमारा नेट ठीक हो गया। हमने अपनी शिकायत तीन बजे की थी। वैसे आज तक ऐसा नहीं हुआ है कि हमें नेट के कारण किसी दिन पोस्ट लिखने से वंचित होना पड़ा है। हम धन्यवाद देते हैं एयरटेल का जिसके कारण हम आज की पोस्ट लिख रहे हैं और चर्चा कर रहे हैं।

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