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शनिवार, जनवरी 30, 2010

ब्लाग जगत से हमारा रिश्ता भी तीन साल पुराना है

ब्लाग जगत में भले हमारी पहचान बने हुए एक साल भी नहीं हुआ है, लेकिन हम बता दें कि ब्लाग जगत से हमारा रिश्ता भी करीब तीन साल पुराना है। हमने जुलाई 2007 में पहली बार हरफनमौला नाम से ब्लाग बनाकर ब्लाग जगत में कदम रखा था। इसके बाद एक ब्लाग राजकुमार ग्वालानी नाम से अक्टूबर 2008 में बनाया। लेकिन जहां तक नियमित लेखन का सवाल है तो हमने 3 फरवरी 2009 से खेलगढ़ और इसके बाद 23 फरवरी से राजतंत्र के माध्यम से नियमित लिखना प्रारंभ किया है जो अब तक जारी है और आगे भी हमेशा जारी रहेगा।

आप लोग सोच रहे होंगे कि आज हमें अचानक ब्लाग जगत से अपने पुराने रिश्ते की याद कैसे आ गई। हम इस बात का खुलासा करते भी नहीं लेकिन क्या करें हमारे एक ब्लागर मित्र ने हमें एक दिन जता दिया कि वे ब्लाग जगत में बहुत सीनियर हैं। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वे सीनियर हैं, लेकिन इसके लिए जताने की क्या जरूरत है। जब उन्होंने जता ही दिया है तो हम भी उनको बताना चाहते हैं कि भाई भले हमने ब्लाग जगत में अभी पहचान बनाई है, लेकिन जहां तक ब्लाग जगत से रिश्ते का सवाल है तो हमारा ब्लाग जगत से तो रिश्ता उसी दिन जुड़ गया था जब हमने हरफनमौला नाम से ब्लाग बनवाया था। हमारा यह ब्लाग बनाने का काम जयप्रकाश मानस जी ने किया था। तब हम वाकई में ब्लाग के बारे में कुछ नहीं जानते थे, उन्होंने ही हमसे कहा था कि आपकी खेलों में इतनी अच्छी पकड़ है और अपना इतना अच्छा लिखते हैं तो क्यों नहीं आप अपने लेखन को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का काम करते हैं। यही कहते हुए उन्होंने हमारा ब्लाग बना दिया। अब यह हमारा दुर्भाग्य ही रहा कि हम उस समय कुछ नहीं लिख सके। इसके पीछे कारण यह रहा कि हम यूनिकोड में लिख नहीं पाते थे, और साथ ही हमें समय भी नहीं मिलता था।

इसके बाद हमारी श्रीमती अनिता ग्वालानी ने एक दिन हमारा एक और ब्लाग राजकुमार ग्वालानी के नाम से अक्टूबर 2008 में बना दिया। इस ब्लाग में हमने 13 पोस्ट लिखी। लेकिन इसको भी हम नियमित नहीं रख सके। हमारे ये दोनों ब्लाग याहू की आईडी से बने थे। हमने जब अपनी पत्रिका खेलगढ़ को इंटरनेट पर डालने का मन बनाया तो इसी के लिए खेलगढ़ बनाया गया। यह ब्लाग की संरचना भी हमारी श्रीमती श्रीमती अनिता ग्वालानी ने की। इस ब्लाग का प्रारंभ 3 फरवरी 2009 को किया गया। इसके 20 दिन बाद ही हमने राततंत्र का प्रारंभ किया। अब तो हम इन दोनों ब्लागों में नियमित लिख रहे हैं। एक बात हम भी बता दें कि जब हमने ब्लाग जगत से नाता जोड़ा था तब बमुश्किल एक हजार ब्लागर भी नहीं लिखते थे, और उस समय एक मात्र एग्रीगेटर के रूप में नारद जाने जाते थे।

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बुधवार, जनवरी 27, 2010

1000 पोस्ट भी हो ही गई पूरी ....



ब्लाग जगत में हमें एक साल भी नहीं हुआ है और हमारी 1000 पोस्ट पूरी हो गई है। जब हमने ब्लाग जगत में 23 फरवरी 2009 को खेलगढ़ के माध्यम से कदम रखा था तब हमें मालूम नहीं था कि हमारे लिखने का कारवां इतना लंबा हो जाएगा। लेकिन ब्लागिंग के नशे में हम ऐसे फंसे हैं कि अब इसके बिना रहा नहीं जाता है। वैसे हम एक बात बता दें कि हमारे लिए ब्लाग की दुनिया कोई नई नहीं है। करीब तीन साल पहले हमने इस दुनिया में हरफनमौला नाम के ब्लाग के साथ कदम रखा था, पर तब हम इस ब्लाग को नियमित नहीं रख सके। इसके बाद अक्टूबर 2008 में राजकुमार ग्वालानी नाम से एक ब्लाग बनाया जो कि अब भी जिंदा है, पर इसमें भी हम नियमित नहीं लिख पाए, लेकिन खेलगढ़ के बाद राजतंत्र ने हमें एक नया मुकाम दिया है। आज राजतंत्र के कारण ही हमारी ब्लाग जगत में एक अलग पहचान है।

ब्लाग जगत से हमारा रिश्ता यूं तो तीन साल पुराना है, लेकिन हम अपने इस रिश्ते को एक साल का ही मानते हैं। हमने ब्लाग जगत में नियमित लेखन का प्रारंभ 3 फरवरी से तब किया जब खेलगढ़ में हमने पहली पोस्ट लिखी। इसके बाद एक और ब्लाग राजतंत्र प्रारंभ किया। इस ब्लाग में हमने लिखने की शुरुआत 23 फरवरी से की है। तब से लेकर अब तक हम लगातार बिना रूके लिख रहे हैं। कोई भी दिन ऐसा नहीं रहा है जब हमने राजतंत्र में कोई पोस्ट नहीं लिखी है। अभी इसमें लिखते हुए एक साल भी नहीं हुआ है और इस ब्लाग ने ब्लाग जगत में अपनी एक विशेष पहचान बना ली है। राजतंत्र की बात करें तो इसमें हमने आज की पोस्ट को मिलाकर अब तक 357 पोस्ट लिखी है। इन पोस्टों पर हमें 3479 टिप्पणियां मिली हैं। इसी के साथ इस ब्लाग में हमें 28800 पाठक मिले हैं। हमारे इस ब्लाग के जहां 46 समर्थक हैं, वहीं इसका सक्रियता क्रमांक 26 जनवरी की तारीख में चिट्ठा जगत में 42 है।

अब जहां तक खेलगढ़ की बात है तो इस ब्लाग में हमने अब तक 644 पोस्ट लिखी है। इन पोस्टों पर हमें महज 160 टिप्पणियां ही मिली हैं। इस ब्लाग को पाठक भी काफी कम मिले हैं। कुल 5017 पाठकों ने इस ब्लाग को देखा है। इस ब्लाग के 15 समर्थक हैं। हमने इस ब्लाग को यह सोचकर प्रारंभ किया था कि अपने राज्य की खेल गतिविधियों से समूचे संसार को अवगत करवा सके। यह काम तो हम नियमित करते रहेंगे फिर भले इस ब्लाग को ज्यादा पाठक न मिले।

बहरहाल हमें इस बात की खुशी है कि हमारे ब्लाग राजतंत्र ने काफी कम समय में इतना अच्छा काम किया है कि आज उसकी एक अलग पहचान है। हम इसके लिए अपने सभी ब्लागर मित्रों के तहे दिल से आभारी है और उम्मीद करते हैं कि हमें उनका प्यार और स्नेह इसी तरह से मिलता रहेगा। हमारी कोशिश होगी कि जब राजतंत्र का एक साल पूरा हो तो खेलगढ़ और राजतंत्र को मिलाकर हमारी पोस्ट का आंकड़ा 11 सौ तक पहुंच जाए।

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रविवार, जनवरी 17, 2010

एक साल में एक हजार पोस्ट किसके खाते में है

अब जबकि हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर हमारी एक हजार पोस्ट का आंकड़ा पूरा होने वाला है, इसी के साथ ब्लाग जगत में हमें कदम रखे अगले माह एक साल हो जाएगा, तो हमारे मन में एक विचार आया कि क्यों न जाना जाए अपने ब्लागर मित्रों में किनके खाते में एक साल में एक हजार पोस्ट लिखने का रिकॉर्ड है।

अगर आप जानते हों कि और किसी ने भी ऐसा रिकॉर्ड कायम किया है तो जरूर बताएं।

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मंगलवार, जनवरी 12, 2010

1000 पोस्ट का आंकड़ा अब दूर नहीं ...

हमारे ब्लाग खेलगढ़ में शतकों का सिक्सर पूरा हो गया है। राजतंत्र में भी तिहरा शतक पूरो हो चुका है और अब हमारे इन दोनों ब्लागों का मिलाकर 1000 पोस्ट का आंकड़ा जल्द पूरा होने वाला है।

ब्लाग जगत में हमें कदम रखे कुल जमा 11 माह का समय हुआ है। अगले माह हमारे ब्लागों राजतंत्र और खेलगढ़ का एक साल पूरा हो जाएगा। लेकिन इसके पहले हम बता दें कि खेलगढ़ में हमारे शतकों का सिक्सर पूरा हो चुका है। आज की तारीख में खेलगढ़ में हमारे खाते में 614 पोस्ट हो चुकी है। इन पोस्टों में हमें 155 टिप्पणियां मिली हैं और इस ब्लाग को 48 सौ से ज्यादा पाठक मिले हैं। इस ब्लाग का सक्रियता में 214 वां स्थान है। खेलगढ़ में हम औसतन रोज दो से तीन पोस्ट लिखते हैं।

अब जहां तक राजतंत्र का सवाल है तो इसमें हम एक ही पोस्ट लिख पाते हैं। हमारा ब्लाग राजतंत्र खेलगढ़ से ज्यादा लोकप्रिय है। इस ब्लाग ने हमें एक अलग पहचान देने का काम किया है। इस ब्लाग में हमने तिहरा शतक पूरा कर कर लिया है और अब इसमें 400 पोस्ट की तरफ कदम बढ़ गए हैं। बहुत ही जल्द हमारे दोनों ब्लागों को मिलाकर 1000 पोस्ट का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। इस समय दोनों ब्लागों को मिलाकर 953 पोस्ट हो चुकी हैं।

इस समय राततंत्र में हमारी 339 पोस्ट पूरी हो चुकी हैं। इन पोस्ट में हमें 27,650 पाठक मिले हैं और 3338 टिप्पणियां मिली हैं। हमारे इस ब्लाग का कल की तारीख में सक्रियता में 37वां स्थान था। हमारी 148 पोस्टों की अन्य ब्लागों में चर्चा हुई है। हमारे दोनों ब्लागों में आने वाले पाठकों के साथ सभी ब्लागरों मित्रों के हम तहे दिल से आभारी हैं जिन्होंने हमें इतना प्यार और स्नेह दिया है। उम्मीद है ऐसा ही प्यार और स्नेह हमेशा बनाए रखेंगे।

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बुधवार, जनवरी 06, 2010

कैसा है हमारे राजतंत्र का नया चोला

कल जब हम रात को करीब 12.15 बजे घर पहुंचे तो हमारी धर्मपत्नी ने घर में घुसते साथ एक खुशखबरी सुनाई कि आपके राजतंत्र का चोला बदल दिया है। हमें नींद तो बहुत आ रही थी, पर राजतंत्र के नए चोले को देखने का मोह त्याग नहीं सके और बैठ गए कम्प्यूटर पर। राजतंत्र खोलते ही हमारे सामने इसका जो नया रूप आया, वह बहुत पसंद आया।

हम काफी दिनों से राजतंत्र का चोला बदलने के बारे में सोच रहे थे। हमारे कई मित्रों को शिकायत थी कि राजतंत्र खुलने में काफी समय लगता है। ऐसे में सोच रहे थे कि इसका चोला बदल दिया जाए। लेकिन हम क्या करते, एक तो हमें यह सब आता नहीं है, और दूसरा यह कि हमारे पास समय भी नहीं है। वैसे भी हमारे राजतंत्र का सारा लेआउट तय करने का काम हमारी धर्मपत्नी ही करती हैं, हम तकनीकी मामले में अनाड़ी ही हैं। हमें तो बस लिखना ही आता है, बाकी सब हम नहीं जानते हैं। हमने काफी समय से पत्नी जी से कह रखा था कि राजतंत्र का गेटअप बदलना है, पर उनका भी क्या कसूर, घर के काम से समय मिले तब तो राजतंत्र का चोला बदला जाता।

अचानक उन्होंने कल समय निकाला और बैठ गईं हमारी बिटिया स्वप्निल के साथ राजतंत्र को एक नया रूप देने के लिए। मां-बेटी ने मिलकर राजतंत्र का जो चोला बदला है, वह आप सबके सामने है। अब यह तो आप लोगों को बताना है कि यह चोला कैसा है। इसी के साथ हम ब्लाग बिरादरी के मित्रों के साथ अपने पाठकों से यह भी जानना चाहते हैं कि अब राजतंत्र खुलने में परेशानी तो नहीं हो रही है। आपके विचारों का स्वागत है।

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शनिवार, दिसंबर 05, 2009

पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक



हमारे ब्लाग राजतंत्र में पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक पूरा हो चुका है। इसी के साथ अब हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर 850 पोस्ट हो चुकी है। ये पोस्ट महज 10 माह में पूरी हुई है। इसी के साथ हमको इन दोनों ब्लागों में करीब 29 हजार पाठक मिले हैं और करीब 3000 हजार टिप्पणियों से हमारे ब्लागर मित्रों और पाठकों ने अपना स्नेह बरसाया है।

आज से करीब 10 माह पहले फरवरी में हमने ब्लाग जगत में खेलगढ़ के माध्यम से कदम रखा था। इसके बाद हमने एक और ब्लाग राजतंत्र बनाया। आज हमें इस बात की खुशी है कि हम इन दो ब्लागों के माध्यम से समाज और देश के लिए कुछ कर पा रहे हैं। हम राजतंत्र की बात करें तो यह एक ऐेसा ब्लाग है जिसे काफी कम समय में ही ब्लाग बिरादरी और पाठकों का बहुत ज्यादा प्यार और स्नेह मिला है। इस ब्लाग की जिंदगी 9 माह की है और इतने कम समय में हमने इस ब्लाग पर 300 से ज्यादा पोस्ट लिखी है जिसे 24 हजार से ज्यादा पाठकों ने पढ़ा है। इसी के साथ इस ब्लाग का वरीयता में इस समय 50 वां स्थान है। इस ब्लाग की पोस्टों पर करीब 3000 टिप्पणियां मिली हैं। इस ब्लाग का 22 से ज्यादा चिट्ठों में उल्लेख हो चुका है और 100 से ज्यादा पोस्टों की चर्चा हो चुकी है। इसी के साथ हमारे इस ब्लाग की कई पोस्टों को कई समाचार पत्रों ने प्रकाशित किया है।

अब खेलगढ़ की बात करें तो हमने 10 माह में सबसे ज्यादा 547 पोस्ट खेलगढ़ में ही लिखी है। इन पोस्टों पर हमें करीब 150 टिप्पणियां मिली हैं, और इस ब्लाग को चार हजार चार सौ से भी ज्यादा पाठक मिले हैं। इसी के साथ इसका वरीयता क्रम भी 230 है। खेलगढ़ को भले कम पाठक मिले हैं, पर हमें इस बात का कोई अफसोस नहीं है। हमें इस बात की खुशी है कि अपने राज्य के खेलों को एक नई दिशा देने का जो काम हम कर रहे
हैं
वह धीरे-धीरे ही सही पर सफल हो रहा है।

हमारे दोनों ब्लागों को मिलाकर 850 पोस्ट हो गई हैं। अब हमारे कदम 1000 वीं पोस्ट की तरफ हैं। बहुत जल्द यह आंकड़ा भी हम प्राप्त कर लेंगे।


हम जब ब्लाग जगत में आए थे, तब हमें मालूम नहीं था कि हमें यहां पर इतना ज्यादा प्यार मिलेगा कि हमें लिखने के लिए अपनी दिनचर्या को भी बदलना पड़ेगा। हम बताना चाहते हैं कि प्रेस के काम के बाद हमें रात को एक बजे के बाद ही सोना नसीब होता है। ऐसे में पहले हम सुबह 9 बजे के बाद ही उठते थे, लेकिन जब से ब्लाग लिखने लगे हैं हमें 6 से 7 बजे के बीच उठाया पड़ता है क्योंकि सुबह 10.30 बजे प्रेस जाना पड़ता है मीटिंग में। इसके बाद प्रारंभ हो जाती है, रोज की खबरों के लिए मशक्कत।

हम उन सभी ब्लागर मित्रों के साथ पाठकों और उन मित्रों के तहे दिल से आभारी हैं जो हमारे ब्लाग पर अपनी नजरें इनायत करते हैं और अपने प्यार के रूप में टिप्पणियों की बरसात करते हैं। हम आशा करते हैं कि हमें ब्लाग बिरादरी के साथ पाठकों का इसी तरह से प्यार और स्नेह मिलता रहेगा। इसी उम्मीद के साथ विदा होते हैं कि कल फिर से नई पोस्ट के साथ हाजिर होंगे।

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सोमवार, नवंबर 16, 2009

खेलगढ़ पांच सैकड़ा पार, राजतंत्र तिहरे शतक के करीब

देखते ही देखते हमारे ब्लाग खेलगढ़ ने पोस्ट का पांच सैकड़ा पार कर लिया है। हमने ब्लाग जगत में इसी ब्लाग के माध्मय से फरवरी में कदम रखा था। तब से लेकर अब तक इस ब्लाग को कम पाठकों और नहीं के बराबर टिप्पणियों के बाद भी जिंदा रखा है। दूसरी तरफ हमारे दूसरे ब्लाग राजतंत्र में लिखने का सिलसिला यूं तो फरवरी में ही प्रारंभ कर दिया था, लेकिन इसमें नियमित लेखन अप्रैल से ही कर रहे हैं। इस ब्लाग को काफी कम समय में बहुत ज्यादा स्नेह और प्यार मिला है। इस ब्लाग में तिहरा शतक होने वाला है। अभी यह 280वीं पोस्ट है।

हम जब ब्लाग जगत में आए थे तब हमें भी नहीं मालूम था कि हम इसमें इतने ज्यादा रम जाएंगे। लेकिन इसका नशा ऐसा चढ़ा है कि शराब का भी नशा क्या होगा इसके सामने। आज हमारे ब्लाग खेलगढ़ में 500 से ज्यादा पोस्ट हो गई है। इस ब्लाग में रोज हम दो से ज्यादा पोस्ट देते हैं, इसके बाद भी एक दुखद पहलू यह है कि इस ब्लाग के पाठक कम हैं। लगता है कि खेलों को अपने ब्लाग जगत में ज्यादा पसंद नहीं किया जाता है। लेकिन इससे हमारे उत्साह में कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है। हमारे इस ब्लाग को रोज जितने पाठक मिल रहे हैं उसी से हमें संतोष है। हमारे राज्य के खेल की खबरों को एक मंच देने का काम हमने किया है और इस ताउम्र जारी रखने का प्रयास रहेगा।

इधर हमारे दूसरे ब्लाग राजतंत्र को बहुत ज्यादा स्नेह, प्यार और दुलार मिला है। इसके लिए हम अपने ब्लागर मित्रों और सभी पाठकों के तहे दिल से आभारी हैं। हमारे इस ब्लाग में पोस्ट का तिहरा शतक संभवत: अगले माह तक पूरा हो जाएगा। लेकिन खेलगढ़ और राजतंत्र को मिलाकर 800 पोस्ट बस होने ही वाली है। यह आंकड़ा एक दो दिनों में पार हो जाएगा। खेलगढ़ में इस समय 514 पोस्ट और राजतंत्र में 280 पोस्ट हो गई है बस एक सिक्सर की दरकार है और यह सिक्सर हम दो दिनों में लगा ही देंगे।

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सोमवार, अक्टूबर 26, 2009

9 माह में 700 पोस्ट, 25 हजार पाठक, 2700 टिप्पणियां


हमारे दो ब्लागों राजतंत्र के साथ खेलगढ़ को मिलाकर 700 से ज्यादा पोस्ट पूरी हो गई है। ये पोस्ट हमने महज 8 माह में लिखी है। इन पोस्टों को जहां करीब 25 हजार पाठकों ने देखा है, वहीं 2700 टिप्पणियां मिली हैं। इसी के साथ हमारा राजतंत्र ब्लाग इस समय टॉप 100 में शामिल होकर 60वें नंबर पर काबिज है। खेलगढ़ इस समय 236 नंबर पर है।

हमने आज से करीब 9 माह पहले ब्लाग जगत में खेलगढ़ के माध्यम से कदम रखा था। इसके बाद हमने एक और ब्लाग राजतंत्र बनाया। आज हमें इस बात की खुशी है कि हम इन दो ब्लागों के माध्यम से समाज और देश के लिए कुछ कर पा रहे हैं। खेलगढ़ में हमने 9 माह में सबसे ज्यादा 467 पोस्ट लिखी है। इन पोस्टों पर हमें महज 124 टिप्पणियां मिली हैं, और इस ब्लाग को चार हजार से ही ज्यादा पाठक मिल पाए हैं। इसी के साथ इसका वरीयता क्रम भी 236 है। खेलगढ़ को भले कम पाठक मिले हैं, पर हमें इस बात का कोई अफसोस नहीं है। हमें इस बात की खुशी है कि अपने राज्य के खेलों को एक नई दिशा देने का जो काम हम कर रहे हैं, वह धीरे-धीरे ही सही पर सफल हो रहा है। इसकी सफलता का इससे भी पता चलता है कि इस ब्लाग की चर्चा दैनिक हिन्दुस्तान में हो चुकी है।

अब हम राजतंत्र की बात करें तो यह एक ऐसा ब्लाग है जिसे काफी कम समय में ही ब्लाग बिरादरी और पाठकों का बहुत ज्यादा प्यार और स्नेह मिला है। इस ब्लाग की जिंदगी 8 माह की है और इतने कम समय में हमने इस ब्लाग पर 255 पोस्ट लिखी है जिसे 20 हजार से ज्यादा पाठकों ने पढ़ा है। इसी के साथ इस ब्लाग का वरीयता में इस समय 60वां स्थान है। इस ब्लाग की पोस्टों पर 2565 टिप्पणियां मिली हैं। इस ब्लाग का 20 से ज्यादा चिट्ठों में उल्लेख हो चुका है। इसी के साथ हमारे इस ब्लाग की कई पोस्टों को कई समाचार पत्रों ने प्रकाशित किया है।

हम जब ब्लाग जगत में आए थे, तब हमें मालूम नहीं था कि हमें यहां पर इतना ज्यादा प्यार मिलेगा कि हमें लिखने के लिए अपनी दिनचर्या को भी बदलना पड़ेगा। हम बताना चाहते हैं कि प्रेस के काम के बाद हमें रात को एक बजे के बाद ही सोना नसीब होता है। ऐसे में पहले हम सुबह 9 बजे के बाद ही उठते थे, लेकिन जब से ब्लाग लिखने लगे हैं हमें 6 से 7 बजे के बीच उठाया पड़ता है क्योंकि सुबह 11 बजे प्रेस जाना पड़ता है मीटिंग में। इसके बाद प्रारंभ हो जाती है, रोज की खबरों के लिए मशक्कत।

हम उन सभी ब्लागर मित्रों के साथ पाठकों और उन मित्रों के तहे दिल से आभारी हैं जो हमारे ब्लाग पर अपनी नजरें इनायत करते हैं और अपने प्यार के रूप में टिप्पणियों की बरसात करते हैं। हम आशा करते हैं कि हमें ब्लाग बिरादरी के साथ पाठकों का इसी तरह से प्यार और स्नेह मिलता रहेगा। इसी उम्मीद के साथ विदा होते हैं कि कल फिर से नई पोस्ट के साथ हाजिर होंगे।

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शुक्रवार, अक्टूबर 23, 2009

नहीं खुल रहे थे ब्लाग-जानकारी लेने लोग करते रहे भागमभाग

आज अचानक 11.30 बजे के आस-पास सारे ब्लागों की बोलती बंद हो गई। हम जब घर से प्रेस गए और मीटिंग निपटाने के बाद ब्लाग खोलने का प्रयास किया तो हमारा राजतंत्र नहीं खुला। हमने कई बार प्रयास किया, पर नहीं खुला, फिर हमने अपने दूसरे ब्लाग खेलगढ़ को खोलने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। इसके बाद हमने ब्लागवाणी से और कई ब्लागों को खोलने का प्रयास किया, पर कोई भी ब्लाग नहीं खुला। गुगल से भी प्रयास सफल नहीं हुआ। तब तक अपने मित्र ललित शर्मा जी का फोन आया कि भईया हमारा ब्लाग खुल ही नहीं रहा है। हमने उनको बताया कि शर्मा जी घबराने की जरूरत नहीं है, सिर्फ आपका ही नहीं बल्कि किसी का भी ब्लाग नहीं खुल रहा है। हमने कई ब्लागों को खोलने का प्रयास किया, पर कोई नहीं खुल रहा है, सभी की बोलती बंद है, जरूर कोई तकनीकी खामी है, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी।

यह खामी अब ठीक हो चुकी है। यह खामी कब ठीक हुई हम ठीक-ठीक तो नहीं बता सकते पर जब 11.30 बजे के बाद हमने दो बजे अभी ब्लाग खोला तो खुल गया। अब सारे ब्लाग खुल रहे हैं। हो सकता है ब्लाग बिरादरी के और भी कई मित्र परेशान रहे हों और यह सोच रहे हों कि कहीं उनके ब्लाग में तो ताला नहीं लगा दिया गया। जरूर कई लोगों ने ब्लाग बंद होने का राज जानने अपने शर्मा जी की तरह ही भागमभाग की होगी। लेकिन अब सब खुल जा सिम सिम हो गया है।

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शुक्रवार, सितंबर 04, 2009

पांच माह में 200 पोस्ट, 16,050 पाठक, 1991 टिप्पणियां

राजतंत्र पर नियमित रूप से लिखते हुए करीब पांच माह हो गए हैं। यूं तो इस ब्लाग का आगाज फरवरी 2009 के अंत में किया था, पर फरवरी और मार्च में ज्यादा कुछ नहीं लिख सके। अप्रैल से जो नियमित लिखना प्रारंभ किया तो बिना एक दिन का नागा किए लगातार लिख रहे हैं। कल ही हमारे ब्लाग पर पोस्ट का दोहरा शतक यानी 200 पोस्ट पूरी हुई है। इसी के साथ हमें इन पोस्टों के लिए जहां 16,050 पाठक मिले, वहीं हमारे मित्रों से 1991 टिप्पणियों ने नवाजा है। इस बीच हमें ब्लाग बिरादरी के साथ अपने मित्रों का अपार प्यार और स्नेह मिला है। कई बार मित्रों ने यह भी कहा कि यार किस-किस विषय पर बिना वजह लिखते रहते हो, न जाने क्यों लफड़ों में पड़ते रहते हो, पर क्या करें हमें गलत बात पसंद नहीं सो हो जाता है कई बार किसी विषय में लोगों से पंगा। पंगे से याद आया कि वैसे भी ब्लाग जगत में अपना आगाज एक तरह से पंगे से ही हुआ था, जब हमने कपड़ों के लफड़ों पर लिखा था। तब भी हमारे मित्रों और शुभचिंतकों ने कहा कि ये क्या लफड़ा है। हमने उनको समझाया था कि यार यह तो जिंदगी का एक हिस्सा है, जरूरी नहीं है कि जो बातें हमें पसंद न हों उससे सब सहमत हों। वैसे इसे पंगे का नाम देना ही गलत है। इसे एक तरह से स्वस्थ्य बहस का नाम दिया जाना उचित होगा। किसी भी विषय में अगर विचार मेल न खाएं तो उसको पंगे का रूप देना भी नहीं चाहिए, जैसा कि अपनी ब्लाग बिरादरी में कई बार दे दिया जाता है। ब्लाग बिरादरी में भी हमने देखा है कि भारत-पाकिस्तान जैसी स्थिति आ जाती है। लोग सारी सीमाएं पार कर जाते हैं। वास्तव ब्लाग जगत एक परिवार है जिसमें सबको मिलकर रहना है। वैसे भी अपने हिन्दी जगत का ब्लाग परिवार काफी छोटा है। अभी से यह हाल रहा तो आगे न जाने क्या होगा।

बहरहाल हम किसी को कोई नसीहत देना नहीं चाहते हैं। वैसे भी आज-कल देखा जाए तो नसीहत महंगाई की तरह ही महंगी हो गई है, क्यों इसे मुक्त में जाया किए जाए। हमें इतने कम समय में इतने ज्यादा प्यार और स्नेह के साथ मार्गदर्शन के लिए भी हम ब्लाग बिरादरी के मित्रों के साथ अन्य उन मित्रों के भी आभारी हैं जो हमारा ब्लाग नियमित पढ़ते हैं। ब्लाग पढऩे वालों में हमारे कई ऐसे मित्र भी शामिल हैं, जिनको ब्लाग लेखन से कोई मतलब नहीं है लेकिन चूंकि वे हमारे मित्र हैं इसलिए नियमित रूप से न सिर्फ हमारा ब्लाग पढ़ते हैं, बल्कि टिप्पणियां करने के साथ कई बार सुझाव भी देते हैं कि इस विषय पर क्यों नहीं लिखते हैं। हमारे ऐसे मित्र अपने राज्य छत्तीसगढ़ में ही नहीं पूरे देश में हैं, जिनके सुझाव आते हैं जो हमसे लगातार फोन पर भी बात करते हैं। संभवत: यह उनका मार्गदर्शन, सुझाव और प्यार है जिसने हमें इस मुकाम तक पहुंचाया है, हम सभी के तहे दिल से आभारी हैं। हमें आशा ही नहीं विश्वास है कि ऐसा ही प्यार और स्नेह सदा बना रहेगा। इसी आशा के साथ कल तक के लिए विदा लेते हैं। कल फिर मिलेंगे एक नए लेख के साथ।

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शुक्रवार, जून 26, 2009

पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक

हमारे एक मित्र ने कल रात को मोबाइल की घँटी बचाई और जब बातों का सिलसिला प्रारंभ हुआ तो उन्होंने कहा कि यार तू कौन से जमाने में जीता है और कौन सी मिट्टी का बना है। बात हमारी समझ में आई नहीं हमने कहां अबे सीधे-सीधे बक न क्या बकना चाहता है। फिर उसने घुमाने वाली कही कि तुम साले सुधर नहीं सकते जैसे कॉलेज के जमाने में थे, वैसे ही अब भी हो। आखिर हो न अलग टाइप के पत्रकार। हमने कहां बहुत हो गया यार सीधे-सीधे बताते हो या हम काट दें मोबाइल। हमारा ऐसा बोलना था कि वो आ गया लाइन पर और उसने जो बात बोली वह बात ठीक तो है, पर हम क्या करें हमारी ऐसी आदत नहीं है कि हम जो करें उसके बारे में बोलें। दरअसल हमारे कॉलेज के वे मित्र हमारे ब्लाग की बात कर रहे थे और उन्होंने ही हमारा ध्यान इस तरफ दिलाने का प्रयास किया कि हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक कब का हो चुका है।

हमारे मित्र ने जब यह बात कही तो हमने उससे कहा कि तो क्या हो गया अगर नाबाद तिहरा शतक पूरा हो गया है। क्या अपने वीरेन्द्र सहवाग के पेट में दर्द हो रहा है या फिर अपने ब्रायन लारा को डर लगने लगा है कि कहीं उनका पांच सौ का रिकॉर्ड न टूट जाए। वैसे तुम जानते हो कि हम लिखेंगे तो पांच सौ क्या एक हजार रनों का भी रिकॉर्ड टूट सकता है। और रही बात यह सब बताने की तो इसमें बताने वाली क्या बात है। यह तो सबको दिख रहा है कि हमारी कितनी पोस्ट हो गई है। इस पर उसने तपाक से कहा अबे गधे तू कब सुधरेगा, आज के जमाने में बिना बताए किसी को कुछ मालूम नहीं होता है। और अगर मालूम होता भी है तो कोई बताता नहीं है। हमने कहा कि फिर तू क्यों राग अलाप रहा है कि हमारी पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक हो गया है और लिखने की गाड़ी पूरी रफ्तार से दौड़ी जा रही है।

अरे यार तेरे से बात करना ही मूर्खता है। अबे में तूझे इसलिए बता रहा हूं क्योंकि कोई चाहे या न चाहे लेकिन मैं तेरा सबसे अच्छा और पुराना दोस्त होने के नाते चाह रहा हूं कि तू एक पोस्ट लिखे जिसमें यह बताए कि तेरी पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक पूरा हो गया है। मैंने कहा कि अगर न लिखूं तो। उसने कहा कि कैसे नहीं लिखेगा बे.. जब सब लिखते हैं तो तूझे लिखने में क्या परेशानी है। मैंने कहा क्या जो सब लोग करते हैं वह करना जरूरी है। उसने कहा कि दिक्कत क्या है। हमने कहा कि दिक्कत-विक्कत कुछ नहीं है, यार तू तो जानता है कि मुझे यह सब पसंद नहीं आता है। तूझे क्या लगता है कि क्या मुझे मालूम नहीं था कि मेरी कब 100वीं पोस्ट खेलगढ़ में पूरी हुई फिर 200 वीं पोस्ट हुई अब खेलगढ़ ही तिहरे शतक की तरफ चल पड़ा है। राजतंत्र में भी शतक कुछ समय पहले पूरा हुआ है।

लेकिन इन बातों को बताने से फायदा क्या है। मित्र ने कहा फायदा-वायदा तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैंने कई लोगों को देखा है बताते हुए कि आज की पोस्ट उनकी 100वीं पोस्ट है। बस मैं भी चाहता हूं कि तू भी ऐसा कर। लेकिन तू बताएगा इससे क्या होगा क्या? अरे यार तू अपने बारे में नहीं तो कम से कम मेरे बारे में तो सोच। जैसे मैं कॉलेज के जमाने में अपने मित्रों को बताता था कि देखो मेरे मित्र राजकुमार का लेख उस अखबार में छपा है या जब तुमने शुरू में अखबार में काम करना प्रारंभ किया था तब मैं कैसे दोस्तों को बताता था कि देख यार राजकुमार ने क्या मस्त रिपोर्ट छापी है। बस मैं चाहता हूं कि तू अपने ब्लाग के बारे में लिखे तो मैं आज भी उसी तरह से अपने दोस्तों तो यह बताऊं कि देखो मेरे दोस्त राजकुमार ने ब्लाग में पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक पूरा कर लिया है। क्या तू अपने दोस्त की इतनी सी बात नहीं मान सकता है। चल ठीक है हम तेरी बात मान लेते हैं, लेकिन पहली और आखिर बार होगा, इसके बाद तू फिर मुझे यह मत कहना कि अब हम 400 और 500 पोस्ट होने की बात भी लिखूं। उसने कहा ठीक है न बे, पहले तू एक बार लिख तो सही।

अब दोस्त ने इतने अधिकार से यह बात कही थी तो लिखना ही था, सो हमने भी लिख दिया कि पोस्ट में हमारा नाबाद तिहरा हो चुका है और अभी हम ब्लाग की क्रीज पर टडे हुए हैं। वैसे आउट होने वाले बल्लेबाज तो हम हैं नहीं। हो सकता है कि किसी कारण से ब्रेक लेना पड़ जाए, वैसे अब तक ऐसी नौबात आई नहीं है। और भगवान न करे ऐसी नौबात आए। हम तो अपनी जिंदगी की अंतिम सांस तक कुछ ऐसा लिखने की तमन्ना रखते हैं जिससे किसी न किसी का भला हो। किसी का दिल दुखे ऐसी कोई पोस्ट हम कभी भी लिखना पसंद नहीं करेंगे।

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बुधवार, जून 24, 2009

प्रिंस पहेली....

हम राजतंत्र के रायपुर के अंतरराष्ट्रीय चैनल से इस चैनल के मेजबान राजकुमार यानी की प्रिंस लिख रहे हैं। हम आज आपको ले जाने वाले हैं पहेली की एक ऐसी दुनिया में जिसका नाम हमने काफी सोचने के बाद प्रिंस पहेली रखा है। यह पहेली हमारी तब की धरोहर है जब हम कॉलेज में पढ़ते थे। तब हमने इस पहेली को कई लोगों के सामने रखा था, पर इसका जवाब नहीं मिल पाया था। आज जब हम ब्लाग जगत से जुड़े हैं और देख रहे हैं कि यहां पर धड़ाधड़ पहेलियों का दौर चल रहा है तो सोचा क्यों न हम भी एक ऐसी पहेली सबके सामने रखे दें जो सबके दिमाग की दही जमा दे। तो तैयार हो जाएं अपने दिमाग के घोड़ों को दौडऩे के लिए क्योंकि अब आने वाली है आपके सामने प्रिंस पहेली जिसका हल बताना आसान नहीं है। हम पहेली के हल के लिए फिलहाल एक सप्ताह का समय तय कर रहे हैं। आपको अपने दिमाग के घोड़ों को एक सप्ताह तक दौडऩा है। जब आपके दिमागी घोड़े मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे तब हम बताएंगे आपको प्रिंस पहेली का हल। तो चले सवाल की तरफ....हमारा सवाल है...

हमें सोने के 100 हार बनवाने हैं।

हर हार होगा 10-10 तोले का।

हमें हार चूंकि जल्द चाहिए ऐसे में हम हार एक सोनार के स्थान पर 10 सोनारों को बनाने देते हैं।

एक-एक सोनार को दिए जाते हैं 10-10 तोले के 10-10 हार बनाने के लिए।

लोचा तब होता है जब हारों की डिलवरी के एक दिन पहले पता चलता है कि एक सोनार चोरी कर रहा है और 10 की बजाए 9-9 तोले के हार बना रहा है।

अब आपको उस चोर को पकडऩा है। चोर को पकडऩे के लिए हर सोनारे के हारे तौलने से ही चोर को पकडऩे का आसान तरीका है। लेकिन चोर को पकडऩे के लिए आपको हारों को एक बार तोलकर ही उस चोर को पकडऩा है। याद रहे तोल सिर्फ एक बार होगी। और हारों को तोलना भी जरूरी है। अब आपको बताना यह है कि किस तरह से मात्र एक बार तोलकर चोर को पकड़ा जा सकता है।

तो शुरू हो जाए अपने दिमाग के घोडों को दौडऩे के लिए।

हमें इंतजार रहेगा आपके जवाबों का ।

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मंगलवार, जून 02, 2009

हमको तो नशा है ब्लागिंग का जनाब...

हमने जब से ब्लागिंग जगत में कदम रखा है, इसने हमारी दिनचर्या को भी बदल दिया है। ब्लाग लिखने के कारण ही हमको जल्दी उठने की आदत डालनी पड़ी है। वरना कहां हम रात को एक बजे सोने के कारण 9 बजे से पहले उठते नहीं थे, लेकिन अब सुबह को 6 बजे उठ जाते हैं। कितना भी व्यस्त कार्यक्रम हो कम से कम लिखने के लिए समय निकाल ही लेते हैं। अगर हम ऐसा कर पा रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि हमको ब्लागिंग का नशा हो गया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि लिखने वालों को तो लिखने का नशा होता ही है। अब आप सोचेंगे कि यह लेखन में अचानक नशे की बात कहां से आ गई तो हम आपको बता दें कि कल हमने एक ब्लागर मित्र
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक की एक पोस्ट पढ़ी और उनकी इस पोस्ट के अंत में एक सवाल था कि क्या ब्लागिंग एक नशा है? इस सवाल ने ही हमें यह पोस्ट लिखने की प्रेरणा दी और हम लिखने बैठ गए।




नशा शराब में होता तो नाचती बोतल मैंकदे झूमते पैमानों में होती हलचल.. फिल्म शराबी के इस गाने में बहुत ज्यादा गहराई है। वास्तव में नशा शराब में नहीं होता है नशा होता है इंसान के दिमाग में और यह नशा शराब का ही नहीं किसी भी चीज का हो सकता है। अगर इंसान का दिमाग शराब को पानी समझ कर पिए तो उसको नशा ही नहीं होगा, लेकिन इंसान ऐसा नहीं कर पाता क्योंकि उसका दिमाग यह कभी नहीं मान सकता है कि शराब, शराब नहीं पानी है। गाने के बोल पर नजर डालें तो वास्तव में यह सोचने वाली बात है कि अगर शराब में नशा होता है तो फिर बोतल क्यों नहीं नाचती है, मैंकदे क्यों नहीं झूमते हैं। इस गाने में ही आगे बहुत सारी बातें है कि खिली-खिली हुई सुबह पर है शबनम का नशा... हवा पे खुशबू का, बादल पे है रिमझिम का नशा... नशा है सबमें मगर रंग नशे का है जुदा। इस गाने को लिखने वाले कवि ने बिलकुल सही लिखा है कि हर नशे का रंग जुदा होता है। उसी जुदा रंग का एक रूप है ब्लागिंग का नशा।


अगर सभी इसी तरह से काम का नशा करने लगे तो फिर शराब और दूसरे नशों की जरूरत की क्यों कर पड़े। हमें भी लगता है कि ब्लाग का नशा लग गया है, वरना रात को रोज प्रेस का काम समाप्त करके एक-दो बजे सोने के बाद ब्लाग लिखने के लिए ही हम सुबह जल्दी उठ जाते हैं। जब ब्लाग जगत से नहीं जुड़े थे तो देर तक सोते थे और 9 बजे से पहले कभी नहीं उठते थे, पर अब 6 बजे उठ जाते हैं। उठ ही नहीं जाते हैं बल्कि यह भी सोचकर रखना पड़ता है कि आज अपने ब्लाग बिरादरी के मित्रों को किस विषय का डोज देना है। खेलगढ़ के लिए तो हमें ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती हैं, लेकिन राजतंत्र के लिए सोचना पड़ता है।

हमारा ऐसा मानना है कि जिस काम को पूरी लगन और विश्वास के साथ लगातार किया जाए वह तो अपने आप ही नशा बन जाता है। वैसे तो लिखना ही अपने आप में सबसे बड़ा नशा है। जब आप लिखते हैं तो उसमें एक जुनून होता है। और आप चाहते हैं कि आपका यह जुनून सबके सामने भी आए। ऐसे में ब्लाग ने लिखने वालों को एक माध्यम दे दिया है। आज ब्लाग बिरादरी में लगातार लिखने वाले इसके नशे के आदी हो गए हैं। चलो कम से कम यह एक ऐसा नशा है जो लाभदायक है। अगर सभी इसी तरह से काम का नशा करने लगे तो फिर शराब और दूसरे नशों की जरूरत की क्यों कर पड़े। हमें भी लगता है कि ब्लाग का नशा लग गया है, वरना रात को रोज प्रेस का काम समाप्त करके एक-दो बजे सोने के बाद ब्लाग लिखने के लिए ही हम सुबह जल्दी उठ जाते हैं। जब ब्लाग जगत से नहीं जुड़े थे तो देर तक सोते थे और 9 बजे से पहले कभी नहीं उठते थे, पर अब 6 बजे उठ जाते हैं। उठ ही नहीं जाते हैं बल्कि यह भी सोचकर रखना पड़ता है कि आज अपने ब्लाग बिरादरी के मित्रों को किस विषय का डोज देना है। खेलगढ़ के लिए तो हमें ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती हैं, लेकिन राजतंत्र के लिए सोचना पड़ता है। रोज-रोज कुछ नया लिखने की और नया करने की तमन्ना हमारी पहले से रही है। इसलिए हम हमेशा ऐसा कुछ लिखने के चक्कर में रहते हैं जिससे किसी का भला हो और पढऩे वालों को कुछ अच्छा लगे और कुछ ज्ञान मिले। अगर हमारे लेखन से किसी का फायदा ही न हो तो ऐसा लेखन किस काम का। इंसान वो होता है जो इस दुनिया में किसी के काम आता है। वरना इंसानी जीवन ही व्यर्थ है। हमेशा हर किसी की मदद करनी चाहिए। आपके पास अगर कोई मदद मांगने आता है तो आपको खुश होना चाहिए कि भगवान ने आपको इस लायक बनाया है कि कोई आपसे मदद मांग रहा है, अगर आप नालायक होंगे तो कौन आएगा मदद मांगने?



बहरहाल हमारी दिनचर्या को ब्लागिंग ने जिस तरह से बदल दिया है वह इस बात का सबूत है कि ब्लागिंग एक लाजवाब और खुबसूरत नशा है जिसे हर कोई करना चाहेगा, इसे हर उस इंसान को करना चाहिए जिनको लेखन में थोड़ी सी भी रूचि है। अगर आपने अब तक ब्लागिंग का नशा नहीं किया है तो आईये आपका भी इस हसीन-सुंदर-खुबसूरत और लाजवाब नशे के सागर में स्वागत है। आईये और इसमें गोते लगाकर आप भी हो जाईये एक ऐसे नशे के आदी जो नहीं करता है किसी की बर्बादी। मिलते हैं एक दिन के ब्रेक के बाद।

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