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सोमवार, अप्रैल 11, 2011

ये इंसानी कुत्ता क्या बला है?

हमारी कल की एक पोस्ट एक इंसानी कुत्ता पीछे पड़ा है, क्या करें? पर एक ब्लागर मित्र ने हमसे फोन करके सवाल किया कि यार ये इंसानी कुत्ता क्या बला है? 
हमने उनको बताया कि जब बिना वजह कोई इंसान किसी के पीछे पड़ जाए और अनाप-शनाप कुछ लिखने लगे तो उसको कहते हैं इंसानी कुत्ता।
जिस तरह से कुत्तों की आदत होती है कहीं भी गंदगी करने की उसी तरह से इन इंसानी कुत्तों की भी आदत होती है किसी को भी बिना वजह परेशान करने की।
ऐसे इंसानी कुत्तों की ब्लाग जगत में भी कमी नहीं है, ऐसे ही इंसानी कुत्तों से हमारे वे ब्लागर मित्र ही नहीं बल्कि हम और न जाने कितने ऐसे ब्लागर हैं जो परेशान हैं, यही वजह है कि हमें इशारों में ही एक पोस्ट लिखनी पड़ी कि शायद उन इंसानी कुत्तों में कुछ इंसानित हो तो वे अपनी हरकतों से बाज आ जाए। हम उनसे यह उम्मीद इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे इंसानी कुत्ते हैं, और इंसान में इंसानित तो होती ही है, वैसे हमें लगता नहीं है कि ऐसे इंसानी कुत्ते बाज आ सकते हैं, लेकिन चूंकि हम इंसान हैं और इंसान भरोसा करने में विश्वास रखते हैं, इसलिए हमने भरोसे में एक पोस्ट लिखी थी। अब यह तो उन इंसानी कुत्तों पर है वि वे क्या सोचते हैं और करते हैं।
हमने तो ऐसे इंसानी कुत्तों से बचने के लिए अपने सभी ब्लागों में टिप्पणी के रास्ते ही बंद कर दिए हैं। कहते हैं न कि न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी, तो जब इंसानी कुत्तों के पास रास्ता ही नहीं रहेगा तो वे क्या करेंगे। वैसे हम जानते हैं कि ऐसे कुत्ते कहीं भी जाकर गंदगी कर सकते हैं, तो मित्रों ऐसे इंसानी कुत्तों से बचने के लिए टिप्पणियों का मोह हमारी तरह से छोड़ कर अपने लेखन पर ही ध्यान दें।
हम इस तरह की पोस्ट लिखते भी नहीं लेकिन क्या करें जब कोई सीमा से बाहर चला जाए तो उसको जवाब देना जरूरी होता है। हमें तो लगता है कि एक इंसानी कुत्ता बस इसी इंतजार में रहता है कि कब हम कुछ लिखें और कब वह आकर जहां स्थान मिले गंदगी करके चला जाए। ब्लाग चौपाल जैसे साफ-सुधरे ब्लाग को भी तो इस इंसानी कुत्ते से नहीं छोड़ा है। अब ऐसे में कोई क्या कर सकता है। न जाने इस इंसानी कुत्ते को हमसे क्या दुश्मनी है जो बिलकुल जाति दुश्मन की तरह हमारे पीछे पड़ा है। अगर कोई हमें इतना ही जाति दुश्मन समझता है तो सामने क्यों नहीं आता है, क्यों कर कायरों की तरह कुत्ते की खाल ओढ़कर भोंकने का काम कर रहा है। अगर वह कुत्ता नहीं शेर है तो अपनी असली पहचान के साथ सामने आकर हमारा मुकाबला करें। हम जानते हैं कि जो इंसान कुत्ते की खाल ओढ़े हुए है वह कभी सामने आने वाला नहीं है, संभवत: हम ही अपना समय खराब कर रहे हैं, लेकिन हम जानते हैं कि किसी के वार का जवाब न देना भी बुजदिली होता है, ऐसे में हम कभी भी जवाब देने में पीछे नहीं रहते हैं। 

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सोमवार, जनवरी 10, 2011

फर्जी आईडी पर लगे प्रतिबंध

ब्लाग जगत में हम जबसे आए हैं देख रहे हैं यहां काड़ी करने वाले काड़ीबाजों की कमी नहीं है। मालूम नहीं उनको ऐसा करके क्या मिलता है, लेकिन इतना तय है कि ये काड़ीबाज दिमागी रूप से विकलांग होते हैं। इनके पास सोचने-समझने की शक्ति तो होती नहीं है। बस दिमाग में यही बात रहती है कि किसी के भी अच्छे काम में अपनी टांग जरूर अड़ाए और उसे परेशान करने का काम करें। सो ये ऐसा ही करते हैं। इनका मकसद होता है लोगों को परेशान करना और लोग परेशान होते हैं। जब लोग परेशान होते हैं तो इनको बड़ा मजा आता है। मजा इसलिए आता है क्योंकि इनकी मानसिकता ही ऐसी रहती है। ऐसी  मौज लेने वाले हमेशा फर्जी आईडी बनाकर ही यह काम करते हैं, फर्जी आईडी पर वास्तव में प्रतिबंध जरूरी है, क्योंकि फर्जी आईडी से ही बड़े-बड़े अपराध भी हो रहे हैं।
अक्सर हमने देखा है कि ब्लाग जगत में लोग फर्जी आईडी बनाकर टिप्पणी करने का काम करते हैं। ऐसा काम करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से विकलांग होते हैं। अगर ये ऐसे नहीं होते हैं तो ये भी कुछ अच्छा करने के लिए सोचते न कि किसी के अच्छे काम में टांग अड़ाने का काम करते। लेकिन नहीं इनको ऐसा करके ही मजा आता है और ये अपने मजे के लिए दूसरों को परेशान करते हैं। हमें तो लगता नहीं है कि ऐसे मानसिक रूप से विकलांगों से कभी ब्लाग जगत को मुक्ति मिल पाएगी। कारण साफ है कि यहां आईडी बनाने के लिए किसी को अपने आईडी यानी पहचान बनाते की जरूरत नहीं होती है और जब तक यह सिलसिला चलता रहेगा मानसिक विकलांगों की मौज होती रहेगी।
हमारी समझ में नहीं आता है कि क्यों कर बिना किसी पहचान के नेट में किसी को भी फर्जी आईडी बनाने की छूट देकर रखी गई है। ऐसी फर्जी आईडी की वजह से अपराध भी पनप रहे हैं इसके बाद क्यों कर इसके ऊपर रोक लगाने का काम किया जाता है। लगता है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार है। अगर कभी कोई बड़ा हादसा हो गया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। वैसे कुछ बड़े हादसे तो हो चुके हैं। किसी की भी फर्जी आईडी बनाकर किसी को भी धमकी दे दें या फिर कहीं पर बम होने की सूचना दे दें। देश में जितने ब्लास्ट हुए हैं उनके पीछे भी फर्जी आईडी रही है, फिर क्यों कर मेल की सुविधा देने वाली कंपनियां बिना किसी पहचान पत्र के मेल आईडी बनाने पर प्रतिबंध नहीं लगाती है।

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मंगलवार, दिसंबर 14, 2010

शेर की खाल पहनने से कुत्ता शेरा नहीं हो जाता

एक कहावत है हाथी चले बाजार, कुत्ते भोंके हजार। यह कहावत पूरी तरह से उन नामाकुलों पर खरी उतरती है जो बिना वजह दूसरों के फटे में टांगे अड़ाने का काम करते हैं। न जाने क्यों कर अच्छे खासे ब्लाग जगत को गंदा करने के लिए कुत्तों की फौज खड़ी हो गई है। अब ये कुत्ते कितनी भी गंदगी करें और भोंके इससे क्या फर्क पड़ता है उन हाथियों को जो लेखन में मस्त रहते हैं। एक तरफ हमारे ब्लागर मित्र लेखन में मस्त हैं तो दूसरी तरफ उनसे जलने वाले इतने ज्यादा पस्त हैं कि वे अपनी भड़ास निकालने के लिए रोज नए-नए नामों से कुत्तागिरी करने आ जाते हैं ब्लागों में गंदगी फैलाने के लिए। लेकिन ऐसे कुत्तों से खबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भले कोई अपना नाम छत्तीसगढ़ शेर रख ले लेकिन यह सच्चाई है कि कोई शेर की खाल पहनने से शेर नहीं बन जाता है, कुत्ता को कुत्ता ही रहता है।
हम नहीं चाहते थे कि किसी भी तरह की असभ्य भाषा के साथ कुछ लिखे, लेकिन अब इसका क्या किया जाए कि ऐसे लोग सभ्य भाषा को हम लोगों की कमजोरी समझ लेते हैं। ब्लाग में मॉडरेशन लगाने के बाद अब हमें थोड़ी सी राहत तो मिली है, लेकिन कुत्तागिरी करने वाले बाज नहीं आए हैं। हम जानते हैं कि ये बाज भी नहीं आएंगे। कहते हैं कि कुत्तों की एक खास आदत होती है, वे उसी खास आदत से ही अपने शरीर का पानी का छोड़ते हैं। अब उस आदत को अगर वे छोड़ दें तो उनको कुत्ता कौन कहेगा। कुत्ते तो कुत्तागिरी ही करेंगे, उनसे गांधीगिरी की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अब कल की ही बात करें तो एक जनाब छत्तीसगढ़ शेर के नाम से हमारे ब्लाग में आए और अपनी गंदगी फैलाने के लिए छोड़ गए थे अपने गंदे शब्दों का कचरा। अब कोई कचरा छोड़ेगा तो उस कचरे का हश्र भी तो कचरा ही होगा, सो हमने भी उसे डाल दिया कचरा पेटी में।
अपने को शेर कहने का इतना ही दम है तो क्यों नहीं अपने असली नाम से सामने आते हैं ऐसे कुत्तेबाज। इस जनाब की कोई प्रोफाइल ही नहीं है। यानी एक और फर्जीबाज सामने आए हैं। खैरे ऐसे फर्जीबाजों की कुत्तागिरी से कुछ होने वाला नहीं है। न जाने क्यों ऐसे कुत्तेबाज ब्लाग जगत को गंदा करने के लिए आ जाते हैं। इसमें कोई दो मत नहीं है कि जब भी किसी ब्लागर के लेखन की तारीफ होने लगती है तो ऐसे कुत्तेबाज आ जाते हैं, कुत्तागिरी करने। वैसे हम इतना जानते हैं कि हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन इसके बाद भी न जानें क्यें कर ऐसे लोगे हमारे पीछे पड़े रहते हैं। इसका तो हमें एक ही कारण नजर आता है कि हमने गुटबाजी से जबसे किनारा किया है, ऐसे कुत्तों की फौज हमारे पीछे पड़ गई है। लेकिन ऐसे कुत्तों से हमें निपटना अच्छी तरह से आता है। हम किसी की कुत्तागिरी से अपना काम छोडऩा वाले नहीं है। हमने जो काम प्रारंभ किया है, उसे जब तक संभव होगा जारी रखेंगे। काफी कम समय होने के बाद भी हम अपना काम कर रहे हैं और करते रहेंगे।

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मंगलवार, नवंबर 02, 2010

क्या कभी काड़ीबाजों से मुक्त होगा ब्लाग जगत

ब्लाग जगत में हम जबसे आए हैं देख रहे हैं यहां काड़ी करने वाले काड़ीबाजों की कमी नहीं है। मालूम नहीं उनको ऐसा करके क्या मिलता है, लेकिन इतना तय है कि ये काड़ीबाज दिमागी रूप से विकलांग होते हैं। इनके पास सोचने-समझने की शक्ति तो होती नहीं है। बस दिमाग में यही बात रहती है कि किसी के भी अच्छे काम में अपनी टांग जरूर अड़ाए और उसे परेशान करने का काम करें। सो ये ऐसा ही करते हैं। इनका मकसद होता है लोगों को परेशान करना और लोग परेशान होते हैं। जब लोग परेशान होते हैं तो इनको बड़ा मजा आता है। मजा इसलिए आता है क्योंकि इनकी मानसिकता ही ऐसी रहती है।
अक्सर हमने देखा है कि ब्लाग जगत में लोग फर्जी आईडी बनाकर टिप्पणी करने का काम करते हैं। ऐसा काम करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से विकलांग होते हैं। अगर ये ऐसे नहीं होते हैं तो ये भी कुछ अच्छा करने के लिए सोचते न कि किसी के अच्छे काम में टांग अड़ाने का काम करते। लेकिन नहीं इनको ऐसा करके ही मजा आता है और ये अपने मजे के लिए दूसरों को परेशान करते हैं। हमें तो लगता नहीं है कि ऐसे मानसिक रूप से विकलांगों से कभी ब्लाग जगत को मुक्ति मिल पाएगी। कारण साफ है कि यहां आईडी बनाने के लिए किसी को अपने आईडी यानी पहचान बनाते की जरूरत नहीं होती है और जब तक यह सिलसिला चलता रहेगा मानसिक विकलांगों की मौज होती रहेगी।
हमारी समझ में नहीं आता है कि क्यों कर बिना किसी पहचान के नेट में किसी को भी फर्जी आईडी बनाने की छूट देकर रखी गई है। ऐसी फर्जी आईडी की वजह से अपराध भी पनप रहे हैं इसके बाद क्यों कर इसके ऊपर रोक लगाने का काम किया जाता है। लगता है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार है। अगर कभी कोई बड़ा हादसा हो गया तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। वैसे कुछ बड़े हादसे तो हो चुके हैं। किसी की भी फर्जी आईडी बनाकर किसी को भी धमकी दे दें या फिर कहीं पर बम होने की सूचना दे दें। देश में जितने ब्लास्ट हुए हैं उनके पीछे भी फर्जी आईडी रही है, फिर क्यों कर मेल की सुविधा देने वाली कंपनियां बिना किसी पहचान पत्र के मेल आईडी बनाने पर प्रतिबंध लगाती है।

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शनिवार, अगस्त 28, 2010

जब दोस्त ही पीछे से वार करें तो क्या करें

अचानक एक बात सामने आयी कि हम ब्लाग जगत में जिसे अपना दोस्त समझते थे, वही महाशय पीछे से वार कर रहे थे। हमें जब यह बात मालूम हुई तो हमें यकीन नहीं हुआ। लेकिन यह बात सच है। बहरहाल हमें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, वैसे भी हम जानते हैं कि आज के जमाने में किसी पर भी आंखें बंद करके भरोसा करना बेकार है। उसने जो किया वह भुगतेगा, हमारा क्या बिगाड़ लेगा वह। चलिए यह तो अच्छा हुआ कि उसकी असलीयत जल्द सामने आ गयी, वैसे आज के जमाने में दो मुंहे लोगों की कमी नहीं है। ऐसे लोगों से सभी ब्लागर मित्रों को सावधान रहना चाहिए।

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बुधवार, जून 09, 2010

क्या हैं आपके विचार


यहां कोई नहीं करता किसी से प्यार
धोखे और फरेब का सजा है बाजार
हर किसी को है बस पैसों से ही प्यार
क्या हैं इस बारे में आपके विचार
हमें जरूर बताएं आप सभी
ब्लाग जगत के दोस्त-यार

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रविवार, जून 06, 2010

क्या पापा का कोई बाप नहीं है ब्लाग जगत में

ब्लाग जगत के कई ब्लागर मित्र किसी पापा नाम के एक ऐसे गंदे इंसान से परेशान हैं जो इंसान किसी के भी ब्लाग में गंदगी करके चल देता है। यह गंदा इंसान हमारे ब्लाग में भी आया, हमने तो उसे कह दिया है कि ऐसे गंदे लोगों को मुंह लगाना हम पसंद नहीं करते हैं जिनकी कोई जात और औकात का पता न हो। अगर दम है तो अपनी औकात के साथ सामने आए फिर बात करें। इसके बाद भी यह गंदा इंसान एक फिर से हमारे ब्लाग में आया। हमने फिर से उसे दुत्कारने के साथ ललकारा कि औकात है तो अपने सही वजूद के साथ सामने आए। हम तो यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि आखिर यह गंदा इंसान कहां का है। हम तकनीकी रूप से उतने जानकार नहीं हंै। ऐसे में हम ब्लागर मित्रों से यह पूछ रहे हैं कि क्या इस पापा का कोई बाप अपने ब्लाग जगत में नहीं है जो यह पता लगा सके कि आखिर यह गंदा इंसान कौन है। इसके पहले हमारे ब्लाग में कोई तहसीलदार नाम से आता था, इसका पता हमने लगा लिया था। पता चलने के बाद इसका आना बंद हो गया तो अब एक नए नाम से कोई गंदगी फैलाने का काम कर रहा है। इस गंदगी फैलाने वाले इंसान को रोकना जरूरी है। इसको रोकने का काम कौन कर सकता है यह काम, जरूर बताए। 

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रविवार, मई 23, 2010

हमारे कम्प्यूटर ने तोड़ दिया दम-जल्द ठीक करवा लिए इसलिए नहीं है गम

घर से फोन आया कि न जाने क्या हो गया है घर के सारे के सारे इलेक्ट्रानिक सामानों की जान जा रही है। सबसे पहले कूलर, फिर कम्प्यूटर, टीवी और फिर पंखों के साथ कई सीएफएल उड़ गए। ये सब बिजली वालों की मेहरबानी से हुआ। अचानक घरों में 220 वोल्ट के स्थान पर 440 वोल्ट की सप्लाई आ गई और हमारी कालोनी के कई घरों के न जाने कितने इलेक्ट्रानिक सामानों की जान चली गई।
बात दो दिन पुरानी है। हम खेल विभाग में समाचार के लिए गए हुए थे कि अचानक घर से फोन आया कि कूलर में चिंगारी निकलने के बाद कम्प्यूटर में एक विस्फोट जैसा हुआ और कम्प्यूटर भी बंद हो गया। इस घटनाक्रम से हमारे बच्चे स्वप्निल राज ग्वालानी और सागर राज ग्वालानी बहुत डर गए थे। हम तुरंत घर पहुंचे। वैसे हमारी समझ मेें आ गया था कि आज बिजली वालों का कहर हमारे घर पर गिरा है। जब हम घर पहुंचे तो हमने जैसे ही किसी भी कमरे का सीएफएल चालू किया, वह उड़ गया। हमारे दो पंखें भी उड़ चुके थे। फ्रिज श्रीमती जी की सतर्कता के कारण बच गया। उनको लगा कि शायद इसका भी नंबर आ सकता है ऐसे में उन्होंने उसको बंद करके उसका स्विच निकाल दिया जिसके कारण वह बच गया।
अब ऐसे में जहां हमने सबसे पहला काम कूलर बनाने वाले मिस्त्री को बुलाने का किया, वहीं कम्प्यूटर इंजीनियर को भी बुलावा लिया। हमारे लिए फिलहाल ये दो प्रमुख सामान थे जिनके बिना रहना संभव नहीं था। कूलर वाले ने आकर जहां तुरंत कूलर का एगजाज बदल दिया, वहीं कम्प्यूटर वाले ने आकर कम्प्यूटर को एक घंटे में ही ठीक कर दिया। कम्प्यूटर के साथ हमारा साउंड बाक्स भी उड़ गया है जो अब तक नहीं बन पाया है। वैसे हमारे टीवी का डीटीएच भी उड़ गया है। उसको हम फिलहाल इसलिए ठीक नहीं करवा रहे हैं क्योंकि हमारे बालक की अभी परीक्षा है। उसका हाथ टूट गया था ऐसे में वह चार पेपर नहीं दे पाया था, ऐसे में उसको जून में परीक्षा देनी है।
हमने जब अचानक घरों के सामान के उडऩे का कारण पता लगाया तो मालूम हुआ कि जिस ट्रासंफार्मर से हमारे घर के साथ ही अनेकों घरों में सप्लाई गई है उस का तेल पूरी तरह से सूख गया था जिसके कारण घरों में 220 के स्थान पर 440 वोल्ट की सप्लाई चली गई और कई घरों के इलेक्ट्रानिक उपकरणों के बारह बज गए। हमने जहां इस खबर को अपने अखबार में हरिभूमि में प्रमुखता से छपवाया, वहीं अब हम लोग इस तैयारी में है कि अपने नुकसान की भरपाई के लिए बिजली विभाग के खिलाफ उपभोक्ता फोरम जाएं। कालोनी में जिनके घरों में नुकसान हुआ है उनसे बात हो रही है। बात होने के बाद फैसला किया जाएगा कि क्या करना है।
जहां हमें एक तरफ घर के सामानों के नुकसान होने का गम है, वहीं इस बात की खुशी है कि हमने अपने कम्प्यूटर को तुरंत ठीक करवा लिया और हमें ब्लाग जगत से ज्यादा समय के लिए दूर नहीं रहना पड़ा।

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सोमवार, अप्रैल 05, 2010

कांटों के बदले दो फूल-कांटे बोने वाला अपनी हरकतों में ही जाएगा झूल

हमें एक बात समझ में नहीं आती है कि क्यों कर लोग बिनावजह किसी की भी टांग खींचने का काम करते हैं। हम सीधे सड़क पर जा रहे हैं और कोई बेवजह हमसे आकर उलझ जाए तो इसे क्या समझा जाए। क्या किसी की टांग खींचने में सुख मिलता है। हमें तो नहीं लगता है कि ऐसा हो सकता है, लेकिन न जाने क्यों लोग फिर भी ऐसा काम करते हैं।  हम जानते हैं ऐसी हरकतें करने वालों को अगर किसी तरह का प्रतिउत्तर न दिया जाए तो जरूर एक दिन इनको अपनी हरकतों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हमारे कहने का मतलब यह है कि कोई हमें  कांटे देता है तो हम उसे इसके बदले में फूल देने चाहिए। फूल देने चाहिए का मतलब है कि हम उनकी किसी भी गलत हरकत का जवाब ही न दें।

हमने जब ब्लाग जगत में कदम रखा था तो हमें लगा था कि वास्तव में यह एक अच्छी दुनिया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह वास्तव में अच्छी दुनिया है। लेकिन किसी भी दुनिया में अच्छाई हो और वहां पर बुराई न हो यह संभव नहीं है। लेकिन कई बार मन इसलिए विचलित हो जाता है क्योंकि जिसे हम जानते भी नहीं हैं जिसके साथ हमारी कोई अन-बन भी नहीं है ऐसे लोग बिनावजह टांग खींचने का काम करते हैं। हमारा ब्लाग जगत में किसी से कोई पंगा नहीं है। अब यह बात अलग है कि कोई हमें अपना दुश्मन समझता हो तो बात अलग है। हमें लगता है कि कई लोगों की बिनावजह दुश्मन बनाने की आदत होती है। अगर ऐसा नहीं है तो क्यों कर लोग किसी के ब्लाग में अनाप-शनाप टिप्पियां करते हैं और वो भी फर्जी आईडी के माध्यम से।
हमने कुछ समय पहले तक अपने ब्लाग को पूरी तरह से खुला रखा था। माडरेशन हमने अब भी नहीं लगाया। हम ऐसा करना भी नहीं चाहते हैं लेकिन लगता है कि शायद ऐसा हमें भी करना पड़ेगा। न जाने वो कौन सा बंदा है जिसे हमसे अदावत है जो हमारी पोस्ट में अनाप-शनाप टिप्पणियां करने का काम करता है। हम कई बार देख चुके हैं और उनको नजरअंदाज भी कर रहे हैं। हम तो यहां पर इस विचार से चल रहे हैं अगर आपको कोई इंसान कुछ गलत चीज दे रहा है तो उसे आप ले ही नहीं तो वो चीज आपके पास आएगी ही नहीं। ऐसे में वो चीज उसी इंसान के पास रह जाएगी। अगर आपको कोई गाली देता है तो आप उस गाली को कबूल करेंगे तभी आपको दुख होगा। गाली देने वाला तो जरूर यह सोचकर खुश हो जाएगा कि उसने हमें गाली दे दी है, लेकिन जब उसको यह मालूम हो जाए कि हमने उसकी गाली को लिया ही नहीं है और वह उसी के पास रह गई है तो उसे दुख तो नहीं होगा, लेकिन गुस्सा जरूर आएगा और ऐसे गुस्से में जरूर वह और ज्यादा गालियां देने का काम करेंगे, यहां पर हम फिर से उसकी गालियों को कबूल नहीं करेंगे और वो सारी गालियां उसी की झोली में रह जाएगीं। तो मित्रों ऐसे इंसानों का कुछ किया नहीं जा सकता है, इसकी फितरत ही ऐसी है इनको लगता है कि दूसरों को परेशान करके सुखी रह सकते हैं। ऐसा सोचना इनकी बहुत बड़ी गलती है। कोई भी इंसान किसी को कष्ट देकर कभी सुख में नहीं सकता है। जिससे आपकी कोई अदावत नहीं है वह ऐसी हरकत करता है तो उसकी ऐसी हरकत उसी के लिए एक दिन घातक साबित होती है। जब उसकी हरकत का उसको प्रतिउत्तर नहीं मिलता है तो एक दिन इसी से दुखी हो जाता है। ऐसे लोगों की बातों का प्रतिउत्तर नहीं देना चाहिए। हम भी कोई प्रतिउत्तर नहीं दे रहे हैं हम अपने ब्लागर मित्रों को सचेत कर रहे हैं कि ऐसे लोगों की अपनी हरकतें करने दें एक दिन थक हार कर ये खुद अपनी हरकतों को बंद कर देंगे। अगर हम अपनी राह में कांटे बिछाने वालों की तरफ ध्यान ही नहीं देंगे तो वो कांटे हमें नजर ही नहीं आएंगे।

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रविवार, मार्च 28, 2010

क्या ब्लाग जगत में अच्छे लेखन की कद्र नहीं होती

ब्लाग जगत के बारे में एक बार नहीं कई बार कई ब्लागर मित्रों की एक राय अक्सर सुनने को मिलती है कि ब्लाग जगत में अच्छे लेखन की कद्र नहीं होती है। कभी-कभी हमें भी ऐसा लगता है। हमें इसलिए ऐसा लगता है क्योंकि हमें भी जब कोई पोस्ट लगती है कि यह अच्छी है तो उस पर कोई प्रतिक्रिया ही नहीं आती है, खासकर हमने देखा है कि खेलों की अच्छी पोस्ट की तो यहां पर कद्र होती ही नहीं है। ऐसे में भला कैसे कोई अच्छा लेखन कर सकता है।

ब्लाग जगत में जब हमने कदम रखा था तो हमने भी सोचा था कि यहां पर अच्छा लेखन पढऩे को मिलेगा, इसमें कोई दो मत नहीं है कि अच्छा लिखने वालों की कमी नहीं है, लेकिन इसका क्या किया जाए कि अच्छा पढऩे वालों के साथ उस पर प्रतिक्रिया देने वालों की जरूर कमी है। हम अब तक जितने भी ब्लागरों से मिले हैं, उनमें से ज्यादातर के मन में एक कसक रही है कि यार जब भी कुछ अच्छा लिखो तो उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, दूसरी तरफ कोई बकवास सी पोस्ट या फिर विवादस्पद पोस्ट लिख देता है तो उस पोस्ट में लोग टूट पड़ते हैं। इसका क्या मतलब निकाला जाए। हमें तो लगता है कि अगर अपने ब्लाग जगत में ऐसा ही चलते रहा तो एक दिन अच्छा लेखन बंद हो जाएगा और अच्छा लिखने वाले इससे किनारा कर लेंगे।

हमें भी उस समय बहुत अफसोस होता है जब खेल की कोई अच्छी खबर को हम अच्छा होने के कारण खेलगढ़ के स्थान पर राजतंत्र में पोस्ट करते हैं, हमने जब भी ऐसा किया है राजतंत्र में उस पोस्ट को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है। इसका क्या मतलब समझा जाए।

इस बारे में हमारे ब्लागर मित्र क्या सोचते हैं जरूर बताएं

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सोमवार, मार्च 15, 2010

सावधान... आपके ब्लाग में भी आ सकते हैं भूत-पिशाच

कल रात की बात है हम पीठ में दर्द होने के कारण जल्दी सो गए। रात को मोबाइल बजता रहा, पर क्या करें दर्द के कारण हम उठा नहीं पाए। वैसे हमें इस बात का अंदाज जरूर था कि रात को जरूर हमारे ब्लाग में हंगामा होगा, लेकिन हमने सोचा नहीं था कि इतने ज्यादा नंगे भूत-पिशाच धावा बोल देंगे। सुबह उठकर देखा तो मालूम हुआ कि हमारे ब्लाग में रात भर भूत-पिशाचों का खुला नंगा खेल चलता रहा। ऐसा खेल कभी भी किसी के भी ब्लाग में हो सकता है, इससे सावधान रहने की जरूरत है। हमने अब तक अपने ब्लाग में बेनामी का आप्शन खुला रखा था, लेकिन भूत-पिशाच की नंगाई के बाद कुछ मित्रों की सलाह पर बेनामी पर बेन लगा दिया है। वैसे हम किसी भी तरह के बेन के पक्ष में नहीं रहते हैं, लेकिन भूत-पिशाच से बचने के लिए हम कोई नीबू-मिर्ची अपने कम्प्यूटर में लगाना नहीं चाहते हैं।

हमने कल एक पोस्ट लिखी थी क्या ब्लाग जगत में भी मठाधीशों का राज है। कल रात को जब हम प्रेस से वापस घर आए तो देखा कि कुश जी की एक टिप्पणी आई थी। अब यह टिप्पणी उनकी थी या नहीं इसका दावा हम इसलिए नहीं कर सकते हैं क्योंकि इस टिप्पणी के जवाब में जब हमने टिप्पणी की तो रात को कई नंगे भूत-पिशाच हमारे ब्लाग में तांडव करने आ गए। अब कहते हैं कि भूत-पिशाच ऐसे होते हैं जो किसी का भी रूप ले लेते हैं। ऐसे में ब्लाग जगत के भूत-पिशाचों ने भी हमारे यानी राजकुमार ग्वालानी, समीर लाल, अजय कुमार झा, अखिल कुमार, अनिल पुसदकर, सूर्यकांत गुप्ता, कुश, अरविंद मिश्र और न जाने किन-किन का भेष बदलकर टिपियाने का नंगा खेल खेला।

जब हमारे ब्लाग में रात को यह नंगा खेल चल रहा था तो हमारे कुछ मित्र बहुत परेशान हुए और उन्होंने हमसे संपर्क करने का प्रयास किया, पर हम अपने पीठ के दर्द के कारण आराम कर रहे थे। सुबह को उठे तो देखा कि किस तरह की नंगाई की गई है हमारे ब्लाग में। हमें मालूम नहीं था कि ब्लाग जगत में भी भूत-पिशाचों का इतना बड़ा बसेरा है।
बहरहाल हमने अपने कुछ मित्रों की सलाह पर भूत-पिशाचों द्वारा की गई हैवानियत को अपने ब्लाग से मिटाने का काम कर दिया है। जिनके नाम से ऐसी हैवानियत की गई है, वे तो जरूर परेशान हुए होंगे। हमारे एक जानकार मित्र ने बताया कि ऐसा तांडव तो ब्लाग जगत के भूत-पिशाच यदा-कदा करते रहते हैं इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। वैसे हम कभी परेशान नहीं होते हैं हम जानते हैं कि जहां अच्छाई होती है, वहां पर बुराई होती है, ऐसे बुरे लोगों से हमारा पाला हमेशा पड़ता है, भूत-पिशाचों को ठिकाने लगाना हम जानते हैं। लेकिन हम अपने उन नए साथियों को सावधान करना चाहते हैं जो ब्लाग जगत में नए हैं कि इन भूत-पिशाचों से सावधान रहना अगर आपने अपने घर का दरवाजा खुला रखा तो ये आकर कभी भी नंगाई कर सकते हैं। ऐसे में हमने भी अपने मित्रों की सलाह पर अब अपने घर का दरवाजा पूरा तो नहीं लेकिन किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए जरूर बंद कर दिया है जिसे हम नहीं जानते हैं, यानी अब बेनामी हमारे ब्लाग पर बेन हैं। वैसे हम ऐसा करना नहीं चाहते थे, लेकिन क्या करें एक कहावत है कि नंगों से खुदा डरता है तो फिर हम तो इंसान हैं।

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रविवार, मार्च 14, 2010

क्या ब्लाग जगत में भी मठाधीशों का राज है

हमें भी अब ऐसा लगने लगा है कि शायद ब्लाग जगत में मठाधीशों का राज है जो किसी नए ब्लागर को तेजी से आगे बढ़ता देखना पसंद नहीं करते हैं। यह बात हमने एक बार नहीं कई बार महसूस की है। हमने जब इसके पहले दो बार चिट्ठा जगत पर सवालिया निशाना लगाया तो हमें मित्रों ने कहा कि आप तो बस लिखते रहे, बाकी क्या हो रहा है उस पर ध्यान न दे। लेकिन क्या यह उस स्थिति में संभव है जब आपको इस बात का अहसास हो कि आपके साथ लगातार अन्याय हो रहा है। हमें तो नहीं लगता है कि अन्याय के खिलाफ बोलना गलत है। हमारा ऐसा मानना है कि अन्याय के खिलाफ न बोलना गलत है। हम लगातार आहत हो रहे हैं और कोई हमें यह नसीहत दे कि इससे कुछ नहीं होता है तो यह बात गलत है।

हमने बहुत सोचा कि इस मुद्दे पर न लिखा जाए, लेकिन आखिर कब तक बर्दाश्त किया जाए। हमने कुछ दिनों पहले जब एक पोस्ट लिखी थी कि छत्तीसगढ़ के तीन ब्लागर चिट्ठा जगत के टॉप 40 में पहली बार आए हैं। तो दूसरे ही दिन हमारे एक मित्र का फोन आया कि कर दिया न सब गुडग़ोबर। हमने उनके पूछा कि क्यों नाराज हो रहे हैं मित्र तो उन्होंने कहा कि करवा दिया न अपने मित्रों को टॉप 40 से बाहर। हम समझ गए कि वे चिट्ठा जगत की बात कर रहे हैं। हमने अपने उन मित्र को यह समझाने का प्रयास किया कि मित्र टॉप में चल रहे कई ब्लागर नहीं लिख रहे थे, ऐसे में जब हमने पोस्ट लिखी तो उनको लगा कि यार हम पीछे हो गए हैं, ऐसे में वे सक्रिय हो गए और उन्होंने लिखा तो वे आगे हो गए। इस पर उन्होंने कहा कि टॉप 40 में आने का ठिठोरा पिटने की क्या जरूरत थी। हमने उनसे कहा कि आज का जमाना बताने का है मित्र। और इसमें बुरा क्या है कि हमारे दूसरे मित्र सक्रिय हो गए लिखने के लिए और वे आगे आ गए। उनके हवाले और प्रविष्ठियां हमसे ज्यादा है।

अब हवाले और प्रविष्ठियों की बात सामने आई है तो यहां पर हमें आज तक चिट्ठा जगत की एक बात समझ नहीं आई है कभी तो हवाले और प्रविष्ठियां जुड़े जाते हैं कभी नहीं जुड़ते हैं। हमने इस मुद्दे पर दो बार पहले लिखा तो हमारे वरिष्ठ मित्रों ने सलाह दी कि इस तरफ ध्यान देने की जरूरत नहीं है, चिट्ठा जगत तो स्वचलित है। माना कि चिट्ठा जगत स्वचलित है फिर ऐसा कैसे होता है कि कभी कोई लिंक जुड़ता है कभी नहीं जुड़ता है। हमारे साथ कई बार नहीं लगातार ऐसा हो रहा है। नया उदाहरण दो दिन पहले का है। ललित शर्मा जी के नए ब्लाग 4 वार्ता में हमारे ब्लाग की चर्चा होने के बाद भी यह चर्चा हमारे हवाले में नहीं जोड़ी गई। अब इसे आप क्या कहेंगे। हमारे कई मित्रों का ऐसा मानना है कि वास्तव में ब्लाग जगत में कुछ ऐसे मठाधीश बैठे हैं जो नए ब्लागरों को खासकर ऐसे ब्लागरों को आगे बढऩे से रोकने का काम करते हैं जो तेजी से बढ़ रहे हैं। चलिए ऐसा ही सही, उनको हम अपना काम करने दें और हम अपना काम करते हैं देखते हैं कौन सफल होता है। वैसे भी अब तक हमारे साथ न जाने कितनी बार अन्याय हो चुका है, हमने भी सोच लिया है कि कम से कम हम तो अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज जरूर बुलंद करेंगे फिर चाहे किसी को बुरा लगे तो लगे हमारी बला से।

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मंगलवार, जनवरी 12, 2010

1000 पोस्ट का आंकड़ा अब दूर नहीं ...

हमारे ब्लाग खेलगढ़ में शतकों का सिक्सर पूरा हो गया है। राजतंत्र में भी तिहरा शतक पूरो हो चुका है और अब हमारे इन दोनों ब्लागों का मिलाकर 1000 पोस्ट का आंकड़ा जल्द पूरा होने वाला है।

ब्लाग जगत में हमें कदम रखे कुल जमा 11 माह का समय हुआ है। अगले माह हमारे ब्लागों राजतंत्र और खेलगढ़ का एक साल पूरा हो जाएगा। लेकिन इसके पहले हम बता दें कि खेलगढ़ में हमारे शतकों का सिक्सर पूरा हो चुका है। आज की तारीख में खेलगढ़ में हमारे खाते में 614 पोस्ट हो चुकी है। इन पोस्टों में हमें 155 टिप्पणियां मिली हैं और इस ब्लाग को 48 सौ से ज्यादा पाठक मिले हैं। इस ब्लाग का सक्रियता में 214 वां स्थान है। खेलगढ़ में हम औसतन रोज दो से तीन पोस्ट लिखते हैं।

अब जहां तक राजतंत्र का सवाल है तो इसमें हम एक ही पोस्ट लिख पाते हैं। हमारा ब्लाग राजतंत्र खेलगढ़ से ज्यादा लोकप्रिय है। इस ब्लाग ने हमें एक अलग पहचान देने का काम किया है। इस ब्लाग में हमने तिहरा शतक पूरा कर कर लिया है और अब इसमें 400 पोस्ट की तरफ कदम बढ़ गए हैं। बहुत ही जल्द हमारे दोनों ब्लागों को मिलाकर 1000 पोस्ट का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। इस समय दोनों ब्लागों को मिलाकर 953 पोस्ट हो चुकी हैं।

इस समय राततंत्र में हमारी 339 पोस्ट पूरी हो चुकी हैं। इन पोस्ट में हमें 27,650 पाठक मिले हैं और 3338 टिप्पणियां मिली हैं। हमारे इस ब्लाग का कल की तारीख में सक्रियता में 37वां स्थान था। हमारी 148 पोस्टों की अन्य ब्लागों में चर्चा हुई है। हमारे दोनों ब्लागों में आने वाले पाठकों के साथ सभी ब्लागरों मित्रों के हम तहे दिल से आभारी हैं जिन्होंने हमें इतना प्यार और स्नेह दिया है। उम्मीद है ऐसा ही प्यार और स्नेह हमेशा बनाए रखेंगे।

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बुधवार, दिसंबर 30, 2009

11 माह में 905 पोस्ट

ब्लाग जगत में हमें अभी एक साल नहीं हुआ है, लेकिन यह 2009 का वह साल बस जाने ही वाला है जिस साल में हमने ब्लाग बिरादरी में कदम रखा था। यहां हमने फरवरी में खेलगढ़ के साथ राजतंत्र के माध्यम से कदम रखा था। हमने अपने 11 माह के ब्लागर जीवन में अब तक अपने दोनों ब्लागों में 905 पोस्ट लिखी है। हमें ब्लाग बिरादरी का ऐसा प्यार मिला है जिसकी कल्पना हमने नहीं की थी।

2009 का साल एक दिन बाद चला जाएगा। ऐसे में हमने सोचा कि इस साल का अपना लेखा-जोखा ब्लाग बिरादरी से साझा कर लिया जाए। हमने ब्लाग जगत में फरवरी में खेलगढ़ के माध्यम से कदम रखा था। इस माह में हमने खेलगढ़ के लिए 57 पोस्ट लिखी। अपना दूसरा ब्लाग राजतंत्र हमने प्रारंभ तो फरवरी में ही कर लिया था, पर इस माह इसमें हम महज तीन पोस्ट ही लिख सके। अगले माह मार्च में जहां खेलगढ़ में हमने 45 पोस्ट लिखी, वहीं राजतंत्र में मात्र 8 पोस्ट ही लिख सके। राजतंत्र ने रफ्तार पकडऩे का काम अप्रैल में तब किया जब हमें चाणक्य को यूनीकोड में बदलने का तरीका मिला। इसके बाद हमने राजतंत्र में जो लिखना प्रारंभ किया तो अब तक लिख रहे हैं। हमें खेलगढ़ से ज्यादा इस ब्लाग में प्यार मिला है। राजतंत्र में हमने अब तक 325 पोस्ट लिखी है। इन पोस्टों को जहां 26470 पाठक मिले हैं, वहीं इन पोस्टों पर 3228 टिप्पणियां मिली हैं। इसी के साथ हमारा यह ब्लाग चिट्ठा जगत की रेटिंग में आज की तारीख में 41वें स्थान पर है। हमारे इस ब्लाग की 138 पोस्ट की चर्चा दूसरे ब्लागों में हमारे ब्लागर मित्रों ने की है।

अब जहां तक खेलगढ़ का सवाल है तो हमने इस ब्लाग में अब तक सबसे ज्यादा 580 पोस्ट लिखी है। इस ब्लाग में हमें अब तक पांच हजार पाठक भी नहीं मिले हैं, टिप्पणियां 147 मिली हैं। इसका चिट्ठा जगत की वरीयता में 195वां स्थान है।

बहरहाल हम ब्लाग जगत से जुड़कर काफी खुश हैं कि चलो हमें इसके माध्यम से कई मित्र बनाने का मौका मिला है। इन मित्रों की बातें फिर करेंगे। फिलहाल इतना ही। हम अपने उन सभी ब्लागर मित्रों के साथ पाठकों के तहे दिल से आभारी हैं जिन्होंने हमारे ब्लाग के लिए अपना कीमती समय दिया है और अपान प्यार तथा स्नेह बरसाया है।

अंत में सभी ब्लागर मित्रों और पाठकों को आने वाले नए साल की शुभकामनाएं और प्यार भरी बधाई

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मंगलवार, अक्टूबर 13, 2009

नंगे के साथ क्यों हो रहे हैं नंगे

ब्लाग जगत में पिछले कुछ दिनों से बहुत ही ज्यादा साम्प्रदायिकता का जहर घोलने का काम किया जा रहा है। ब्लाग बिरादरी को पूरी तरह से धर्म युद्ध का अखाड़ा बना दिया गया है। हर कोई बस अपने को सही और श्रेष्ठ साबित करने में लगा है। किसी के अपने को श्रेष्ठ मानने से कोई भला कैसे श्रेष्ठ हो सकता है। हमारा ऐेसा मानना है कि जिनको गंदगी करने की आदत है वे तो गंदगी करेंगे ही। अगर एक इंसान नंगा है और वो बाजार में कपड़े खोल कर खड़े हो जाता है, तो इसका यह मतलब कताई नहीं होता है कि हम भी कपड़े खोल कर नंगे हो जाएं। हमारा ब्लाग बिरादरी के मित्रों से आग्रह है कि हमें तो कम से कम हमाम में रहना चाहिए। अगर कोई हमाम से बाहर जाता है तो जाए, यह उसकी सोच है कि वह कपड़ों के बिना ज्यादा अच्छा लगेगा।

हमें काफी समय से लग रहा है कि अपना ब्लाग जगत एक गलत रास्ते पर चल पड़ा है, जहां देखो जिसे देखो धर्म के नाम पर जहर घोलने का काम किया जा रहा है। क्या जरूरत है कि किसी भी धर्म की बुराई करने की? हमें तो नहीं लगता है कि दुनिया में कोई मजहब बैर करने की बात सीखता है। इतना जरूर है कि धर्म के ठेकेदार जरूर अपने फायदे के लिए लोगों को आपस में लड़ाने का काम सदियों से करते रहे हैं। हमें लगता है कि ब्लाग बिरादरी में कुछ धर्म के ऐसे ही ठेकेदार आ गए हैं जो अपने स्वार्थ के लिए ब्लाग जगत को भी दूषित करने में लगे हैं। अब इससे पहले की यहां भी साम्प्रयादिकता का जहर पूरी धुल जाए हम लोगों को सचेत हो जाना चाहिए। अगर सचेत नहीं हुए तो वही हाल होगा जो अपने देश का हुआ था यानी हम लोग गुलाम बन जाएंगे एक ऐसी कौम के जिसका काम है लोगों को आपस में लड़ाना।

तो मित्रों हमें इस बात पर ध्यान देना बंद करना होगा कि कौन कितना गंदा लिख रहा है। हमें किसी ने एक बार एक बात बताई थी कि अगर कोई इंसान आप को गाली दे रहा है तो आप उसे कबूल ही न करें। जब आप उसकी गाली को कबूल ही नहीं करेंगे तो वह आपके आएगी ही नहीं। इसका मतलब है कि वह गाली उसी के पास रह जाएगी। अगर कोई किसी के धर्म के बारे में उल्टा-सीधा सोचता या फिर लिखता है तो किसी के लिखने मात्र से कोई धर्म कैसे खराब हो सकता है।

धर्म के नाम पर लोग सिर कटाने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जिनके सिर कटते हैं वे ऐसे लोग होते हैं जिनको ऐसा करने के लिए उकसाया जाता है, कभी भी धर्म के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वालों के सिर कटते देखे हैं क्या आपने? तो क्यों कर हम लोग ऐसे लोगों के हाथों की कठपुतली बनने का काम कर रहे हैं जिनका काम ही है इंसानों को बेवकूफ बनाकर कठपुतली की तरह नचाना।

ब्लाग जगत में हम लोग आए हैं तो अपने समाज, शहर, राज्य और देश के साथ इस सारी कायनात के लिए कुछ अच्छा करने के जज्बे के साथ अपना लेखन करें ताकि जब हम न रहे तो कम से कम हमारा नाम रहे। धर्म के नाम पर लिखकर लड़कर न तो कुछ हासिल होगा और न ही कोई हमें याद करेंगे। बाकी ज्यादा क्या लिखें, अपनी ब्लाग बिरादरी के लोग ज्ञानी और समझदार हैं। हमारे मन में एक बात आई सो हमने अपने ब्लाग बिरादरी से बांटने का काम किया है। आगे जिसकी जैसी इच्छा किसी को किसी की इच्छा के विपरीत तो चलाने का दम किसी में नहीं होता है। एक मित्र होने के नाते कोई भी हमारी तरह एक सलाह ही दे सकता है। अब उस सलाह को मानना न मानना तो सामने वाले पर निर्भर होता है।

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