राजनीति के साथ हर विषय पर लेख पढने को मिलेंगे....

चरणदास महंत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चरणदास महंत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, मई 18, 2009

जोगी की राजनीति का अंत-अब चलेगा महंत का मंत्र

छत्तीसगढ़ में सबसे ताकतवर समझे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की राजनीति का लगता है अब अंत हो गया है। ऐसा कहने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि वे लाख कोशिशों के बाद भी जहां अपनी पत्नी को बिलासपुर लोकसभा से जीत दिलवाने में सफल नहीं हुए, वहीं कई सालों से वे जिन प्रदेशाध्यक्ष चरणदास महंत का विरोध करते रहे और प्रदेशाध्यक्ष पद से हटवाने के लिए शतरंजी चालें चलते रहे, वही महंत कोरबा से जीतने में सफल रहे। महंत को मिली सीट ही कांग्रेस की एक मात्र सीट है। ऐसे में अब यह तय लग रहा है कि कांग्रेस की आलाकमान श्रीमती सोनिया गाँधी की नजर में जहां महंत की कीमत बढ़ेगी, वहीं जोगी की पूछ-परख सोनिया के दरबार में कम हो जाएगी।



लोकसभा चुनाव में भले कांग्रेस के गठबंधन वाली यूपीए को सफलता मिली है, लेकिन जहां तक छत्तीसगढ़ का सवाल है तो यहां पर मुख्यमंत्री डा। रमन सिंह ने भाजपा को एतकरफा जीत दिलाने में सफलता प्राप्त की है। चुनाव परिणाम आने से पहले बिलासपुर सीट को लेकर लगातार दांवे किए जा रहे थे कि इस सीट पर श्रीमती रेणु जोगी का जीतना तय है। जो लोग अजीत जोगी को

हम याद करें राजनांदगांव का पिछला उपचुनाव जिसमें उन्होंने देवव्रत को जीत दिलाने का काम किया था। ऐसे में जबकि मैदान में उनकी पत्नी थी तो यह कैसे नहीं सोचा जाता कि वे उनके लिए कुछ नहीं करेंगे। उन्होंने तो अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन इसका क्या किया जाए कि अब प्रदेश की जनता पर जोगी के जादू का असर नहीं होता है। अब तो यहां की जनता चाऊर वाले बाबा की शरण में चली गई है।

जानते हैं उनका भी ऐसा मानना था कि जोगी अपनी पत्नी को जीत दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि जोगी जिसके सिर पर हाथ रखते हैं उसकी जीत हो जाती है। ऐसा माजरा कई बार देखने को मिला है। हम याद करें राजनांदगांव का पिछला उपचुनाव जिसमें उन्होंने देवव्रत को जीत दिलाने का काम किया था। ऐसे में जबकि मैदान में उनकी पत्नी थी तो यह कैसे नहीं सोचा जाता कि वे उनके लिए कुछ नहीं करेंगे। उन्होंने तो अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन इसका क्या किया जाए कि अब प्रदेश की जनता पर जोगी के जादू का असर नहीं होता है। अब तो यहां की जनता चाऊर वाले बाबा की शरण में चली गई है। ऐसे में श्रीमती जोगी उन दिलीप सिंह जूदेव से हार गईं जिन पर एक समय सांसद रहते हुए पैसे लेने का आरोप लगा था। तब दुनिया भर के टीवी चैनलों में उनको पैसे लेते हुए दिखाया गया था और उन्होंने पैसे लेते हुए कहा था ऐ पैसे तू खुद तो नहीं लेकिन खुद से कम नहीं।

बहरहाल एक तरफ जहां जोगी अपनी पत्नी को जीत नहीं दिला सके, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस को एक मात्र जीत दिलाकर कांग्रेस की इज्जत बचाने का काम उन चरणदास महंत ने किया है जिनको लेकर लंबे समय तक जोगी ने लड़ाई लड़ी और अंत में उनको प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटवाकर धनेन्द्र साहू को अध्यक्ष बनवाने में सफलता प्राप्त की। वैसे महंत को पूरी तरह से किनारे लगवाने का काम जोगी नहीं कर पाए थे। महंत को सोनिया दरबार से कार्यकारी अध्यक्ष का पद जरूर मिला। अब जबकि उन्हीं महंत ने छत्तीसगढ़ में सोनिया मईया की लाज रखने का काम किया है तो ऐसे में यह बात तय है कि सोनिया के दरबार में महंत की कीमत बढ़ जाएगी और जोगी की घट जाएगी। अब तो ऐसा लगने लगा है कि जोगी की राजनीति का छत्तीसगढ़ में अंत हो गया है। यह बात तय है कि अब महंत के पास जो मौका है उनको वे भुनाने का काम करेंगे और अपने सारे मंसूबे पूरे करने में जुट जाएंगे। अब महंत के खिलाफ जोगी खेमे की चलने वाली नहीं है। महंत के चाहने वाले तो उनको मंत्री भी बनाने की मांग करने लगे हैं। अगर उनको मंत्री पद से नवाज भी दिया जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

Read more...
Related Posts with Thumbnails

ब्लाग चर्चा

मेरी ब्लॉग सूची

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP