लग जाऊं तुम्हारे गले ऐसा इंतजाम करो ...
चांदनी रात का जरा दीदार करो
हसीन शमा है रात का जरा सा प्यार करो ।
हटाकर अपने चेहरे से काली जुल्फों को
इक नजर देखने का हसीन गुनाह करो ।
क्यों है छाया तुम्हारी नजरों में बेगानापन
मेरी मोहब्बत का जरा का इतबार करो ।
अपनी आंखों को दे कर थोड़ी सी जहमत
नजरों से मिलाकर नजरें बातें करो ।
तुम्हारी नजरों को चमन की बहारें चुमें
लग जाऊं तुम्हारे गले ऐसा इंतजाम करो ।
मेरे सपनों की शहजादी प्रियतमा
तुम हमारे प्यार का सपना साकार करो ।
Read more...
हसीन शमा है रात का जरा सा प्यार करो ।
हटाकर अपने चेहरे से काली जुल्फों को
इक नजर देखने का हसीन गुनाह करो ।
क्यों है छाया तुम्हारी नजरों में बेगानापन
मेरी मोहब्बत का जरा का इतबार करो ।
अपनी आंखों को दे कर थोड़ी सी जहमत
नजरों से मिलाकर नजरें बातें करो ।
तुम्हारी नजरों को चमन की बहारें चुमें
लग जाऊं तुम्हारे गले ऐसा इंतजाम करो ।
मेरे सपनों की शहजादी प्रियतमा
तुम हमारे प्यार का सपना साकार करो ।






