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शनिवार, नवंबर 06, 2010

एक दिन में 100 टिप्पणी की और बने 50 ब्लागों के फालोअर

दीपावली के दिन कल हमने ब्लाग जगत में एक अलग तरह से दीपावली का आनंद लिया। हमने इस दिन दो बार में दो-दो घंटे का समय निकाला और 100 से ज्यादा ब्लाग में जाकर टिप्पणी की और कम से कम 50 ब्लागों के फालोअर बने।
हमें वैसे भी काफी कम समय मिल पाता है, ब्लाग देखने के लिए। ऐसे में जबकि कल दीपावली की छुट्टी थी तो हमने सबसे पहले राजतंत्र में पोस्ट लिखने के बाद ब्लाग चौपाल में चौपाल सजाने का काम किया और बैठ गए ब्लागों को देखने के लिए। पहली ही बैठक में हमने कम से कम 50 से ज्यादा ब्लाग देखे और उनमें टिप्पणी की। इसी के साथ हम 25 ब्लागों में फालोअर बन गए। इसके बाद फिर से हमने दोपहर में समय निकाला और फिर से वही किया। इस बार हमने 50 से ज्यादा ब्लागों में जाकर टिप्पणी की और एक बार फिर से कम से कम 25 ब्लागों के फालोअर बने। ब्लागों के फालोअर बनने का हमें एक फायदा यह होगा कि जब हम रोज ब्लाग चौपाल में चौपाल सजाने बैठेगे तो हमें ज्यादा से ज्यादा ब्लागों को पोस्ट को देखने और उनको चौपाल में शामिल करने का मौका मिलेगा। हम सोचते हैं कि काश ऐसा समय हमें मिलता रहे तो हम ब्लागों को देखने के साथ ज्यादा ब्लागों के फालोअर बने ताकि ज्यादा से ज्यादा नए ब्लागों के लिंक हम अपनी चौपाल में दे सकें।

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बुधवार, अक्टूबर 14, 2009

100 रुपए में ले 50 हजार के पटाखों का मजा

दीपावली के पटाखे तो दशहरे से ही फूटने लगे हैं। ऐसे में जबकि अब दीपावली बस आने ही वाली है, ऐसे में हमें बरसों पुराना का जोक याद आ रहा है जो हम अपने ब्लाग बिरादरी के मित्रों के लिए पेश कर रहे हैं। यह जोक जाने-माने हांस्य अभिनेता जानी लीवर का है जो उन्होंने काफी पहले सुनाया था। वैसे इस जोक को उनके अंदाज में सुनने में मजा आता है फिर भी हम बता रहे हैं कि कैसे आप भी 100 रुपए खर्च करके 50 हजार के पटाखों का मजा ले सकते हैं।

एक मद्रासी भाई के घर के पास में एक कंजूस सिंधी भाई रहते हैं। दीपावली के समय में उनके घर से दे दना दना पटाखों की आवाजें लगातार आती हैं। मद्रासी भाई हैरान हो जाते है और सोचते हैं कि यार ये सिंधी भाई तो बहुत ज्यादा कंजूस हैं फिर उनके घर में इतने पटाखे आखिर फूट कैसे रहे हैं आखिर बात क्या है? कम से कम 50 हजार के पटाखे तो फोड़ दी दिए होंगे? क्या अपने सिंधी भाई की लाटरी लग गई है?

मद्रासी भाई से रहा नहीं जाता है और वे पहुंच जाते हैं कि जानने के लिए कि आखिर माजरा क्या है।

मद्रासी भाई सिंधी भाई से पूछते हैं- चेला रामानी जी आखिर बात क्या है इतने ज्यादा पटाखे फोड़ रहे हैं कम से कम 50 हजार के पटाखे तो फोड़ ही दिए होंगे। क्या बात है क्या कोई लाटरी वाटरी लग गई है क्या?

सिंधी भाई- अना तू चरया (पागल) हो गया है, क्या बात करता है यार हम भेड़ा 50 हजार का फटाखा फोड़ेगा। अरे बाबा साई हम 100 रुपए का पटाखा लाया और उसको फोड़ा और टेप में रिकॉर्ड कर लिया। अरे बाबा अब हम उसी टेप का कैसेट बजाता है नी। समझा की नहीं।

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