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बुधवार, मई 11, 2011

खिलाड़ियों को भी गोद लेने की पहल हो

इंडिया क्लासिक के साथ दो बार भारतश्री का खिताब जीतने वाले अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर पी. सालोमन का मानना है कि प्र्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिस तरह से खेल संघों को गोद दिलाने की पहल की है, वैसी ही पहल पॉवर गेम के खिलाड़ियों को गोद दिलाने के लिए करनी होगी। बकौल सालोमन ऐसा करने से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता संभव है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए बहुत ज्यादा खर्च लगता है। प्रस्तुत है उनसे की गई बातचीत के अंश।
0 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए क्या जरूरी है?
00 हमारे खेल में सबसे पहले तो प्रायोजक जरूरी है। बॉडी बिल्डिंग जैसे पॉवर गेम में प्रायोजक नहीं मिल पाते हैं, क्योंकि इसमें खर्च बहुत लगता है। ऐसे में एक ही रास्ता है कि खिलाड़ियों को उद्योगों को गोद दिलाने का काम किया जाए। उद्योगों के गोद लेने पर खिलाड़ियों को मदद मिलेगी तो वे जरूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होंगे।
0 प्रदेश में ऐसे कितने खिलाड़ी हैं जो मदद मिलने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हो सकते हैं?
00 हमारे खेल में मेरे साथ ही सुमित राय चौधरी, राजकिशोर झा और सचिन मिश्रा को अगर उद्योगों को गोद दिलाया जाए तो हम लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम कर सकते हैं।
0 आप कितनी बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले हैं?
00 मुझे पिछले साल पहले जर्मनी में मिस्टर यूनिवर्स में खेलने का मौका मिला, वहां मुझे 8वां स्थान मिला। इसके बाद यूरोपियन कप में खेला जहां मैं छठे स्थान पर रहा।
0 क्या निकट भविष्य में और कहीं खेलने जाने वाले हैं?
00 कल्याण में पिछले माह इंडिया क्लासिक का खिताब जीतने के कारण मुझे लेग्क्समबर्ग में 4 जून 2011 को होने वाले विश्व कप में खेलने का मौका मिला है। इस चैंपियनशिप के लिए पहली बार मुझे प्रायोजक नसीब हुआ है क्योंकि मैं विजेता बना। मुंबई की एक कंपनी मेरा पूरा खर्च उठा रही है।
0 अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए कितनी डाइट की जरूरत होती है?
00 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर टॉप टेन में आना है तो यह मानकर चलिए कि डाइट पर ही करीब एक लाख रुपए मासिक खर्च आता है। हम लोग जो सप्लिमेंट लेते हैं वे बहुत महंगे होते हैं। कोई भी खिलाड़ी अब दो किलो चावल तो खा नहीं सकता है। इसकी तुलना में दो चमच से काम चल जाता है। प्रोटीन और कार्बो के लिए बहुत ज्यादा खर्च होता है।
0 राष्ट्रीय स्तर के लिए क्या दरकार होती है?
00 राष्ट्रीय स्तर के लिए अगर आपको खिताब तक पहुंचना है तो यह मानकर चलिए की कम से कम 40 हजार रुपए मासिक का खर्च करना होगा।
0 अपने राज्य में प्रशिक्षकों की क्या स्थिति है?
00 बॉडी बिल्डिंग में कोई ऐसा प्रशिक्षक नहीं है जिसकी मदद से कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल हो सके।
0 प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ी क्या करते हैं?
00 जूनियर खिलाड़ियों को तो सीनियर खिलाड़ी प्रशिक्षण दे देते हैं, लेकिन हम जैसे सीनियर खिलाड़ियों को बाहर जाना पड़ता है।
0 बाहर प्रशिक्षण लेने पर कितना खर्च आता है?
00 अच्छे प्रशिक्षक की सेवाएं लेने पर एक माह में 25 हजार लग जाते हैं। सप्ताह में तीन दिन प्रशिक्षण दिया जाता है। 12 दिन के लिए 25 हजार की राशि खर्च करनी पड़ती है। इस राशि में करीब 17 हजार प्रशिक्षण के और 8 हजार की राशि हमें डाइट में क्या लेना है, उसकी जानकारी के लिए जाते हैं।
0 आप किस विभाग में हैं, और उसमें खेलों के लिए क्या सुविधाएं हैं?
00 मैं पुलिस विभाग में हूं। खेलों के लिए हमारे विभाग में बहुत सुविधाएं हैं। खिलाड़ियों को विभाग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने पर पदोन्नति भी मिलती है। मैं दो बार भारतश्री बना हूं और अभी इंडिया क्लासिक का खिताब भी जीता है। मुझे भी जल्द पदोन्नत करके   उपनिरीक्षक बनाया जाना वाला है, इसके लिए डीजीपी विश्वरंजन और एडीजी रामनिवास प्रयासरत हैं। उम्मीद है बहुत जल्द मुझे पदोन्नत किया जाएगा।

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मंगलवार, अगस्त 24, 2010

खिताब भारतश्री का, काम हवलदार का

मध्यमवर्गीय परिवार के होने के बाद भी हवलदार रहते हुए पी. सालोमन ने एक बार नहीं बल्कि दो बार पश्चिम भारतश्री के साथ भारतश्री का खिताब अपने नाम किया है। इतना ही नहीं राज्य का सर्वोच्च खेल पुरस्कार शहीद राजीव पांडे भी उन्हें मिल चुका है, लेकिन इतना सब होने के बाद भी पुलिस विभाग पी. सालोमन को प्रमोशन के लायक नहीं मानता है। लंबे समय से प्रमोशन की राह देख रहे सालोमन को अब उम्मीद है कि संभवत: दूसरी बार भारतश्री का खिताब जीतने के बाद उनको प्रमोशन के लायक समङाा जाए।
अपने राज्य में खेल और खिलाडिय़ों को बढ़ाने के लिए प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह तो काफी कुछ कर रहे हैं, लेकिन इतना सब होने के बाद भी अपने ही घर में उपेक्षित होने वाले खिलाडिय़ों की कमी नहीं है। अब लगातार दूसरी बार भारतश्री का खिताब जीतने वाले भिलाई के पी. सालोमन की ही बात की जाए। २००५-०६ में राष्ट्रीय स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के बाद राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान शहीद राजीव पांडे से सम्मानित होने के बाद वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि उनको पुलिस विभाग में प्रमोशन मिल जाए, लेकिन अब तक उनको प्रमोशन नहीं दिया गया है। यह वास्तव में अपने राज्य का दुर्भाग्य है कि भारतश्री का खिताब दो बार जीतने वाले खिलाड़ी को हवलदार का काम करना पड़ रहा है। जानकारों की माने तो कायदे से उनको कम से कम अपने राज्य में तो सब इंसपेक्टर तो बना ही देना चाहिए। वैसे सालोमन अगर पंजाब में होते जरूर उनको अब तक इंसपेक्टर बना दिया गया होता। लेकिन यहां वे एक प्रमोशन के लिए तरस गए हैं।
सालोमन के खाते में इस समय राष्ट्रीय स्तर पर पांच स्वर्ण पदक हैं। इनमें से तीन तो उन्होंने पिछले साल जीते थे। एक स्वर्ण फेडरेशन कप में और दो राष्ट्रीय स्पर्धा में जीते। यह स्पर्धा जब भिंवाड़ी में हुई तो वहां दो स्वर्ण के साथ सालोमन ने पश्चिम भारतश्री और भारतश्री का खिताब भी जीता। भिंवाड़ी का ही इतिहास सालोमन ने रायपुर में २१ और २२ अगस्त को दोहराया है। मध्यमवर्गीय परिवार के होने के नाते सालोमन एक राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिर को जितनी टाइट मिलनी चाहिए उसका इंतजाम भी नहीं कर पाते हैं। उनको टाइट के लिए विभाग से आर्थिक मदद देने का आदेश भी हो गया है लेकिन यह मदद उनको मिल ही नहीं रही है। पूर्व में एक हजार रुपए मासिक देने का आदेश हुआ था, यह राशि तो कभी नहीं मिल सकी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीतने के बाद इस आदेश में संशोधन करते हुए इस राशि को दो हजार रुपए मासिक किया गया है, पर यह राशि भी एक बार भी नहीं मिली है। जहां तक टाइट का सवाल है तो एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को डाइट के लिए प्रतिदिन एक हजार रुपए खर्च करना पड़ता है।

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