अपराध से कोसों दूर एक गांव-जहां कभी नहीं पड़े पुलिस के पांव
क्या आप अपने देश में एक ऐसे गांव की कल्पना कर सकते हैं जहां पर अपराध न होता हों, न कोई शराब पीता हो, और जहां कभी पुलिस के पांव भी न पड़े हों। आपको कल्पना करने की जरूरत नहीं है हम आपको हकीकत में एक ऐसे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपराध से अब तक अछूता है। इस गांव के सारे छोटे-बड़े मामले गांव की पंचायत में ही निपटा लिए जाते हैं। इस गांव में बरसों से युधिष्ठिर के आसन पर बैठकर सरपंच फैसला करते हैं।
हम यहां पर बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के उस नक्सल क्षेत्र बस्तर के चारामा के एक गांव उड़कुडा की जहां पर आज तक पुलिस के पांव नहीं पड़े हैं और यहां का एक भी मामला कभी कोर्ट तक नहीं गया है। करीब ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव में महर्षि वेद व्यास के संत स्वभाव और धर्मराज युधिष्ठिर की बड़ी छाप है। गांव वालें इन्हीं के चरण चिन्हों पर चल रहे हैं और कोई भी मामला आपस में मिलकर ही निपटा देते हैं। गांव का एक-एक आदमी इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि पुलिस, कोर्ट-कचहरी के चक्कर से हासिल कुछ नहीं होता है, ऐसे में कोई भी मामला कोई कोर्ट तक ले जाने के बारे में सोचता ही नहीं है।
गांव में जहां पंचायत की बैठक में किसी भी मामले का फैसला किया जाता है, वहां पर संत महर्षि व्यास की मूर्ति है। इसी मूर्ति के पास में धर्मराज युधिष्ठिर का आसन है। यह आसन जोगी गुफा के पास है। इसी गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसी गुफा में महर्षि व्यास अपने शिष्य युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को ज्ञान देते थे। इस गुफा के पास आज भी शिष्यों के बैठने का स्थान है। युधिष्ठिर जहां पर बैठते थे, उस आसन का ग्रामीण बहुत सम्मान करते हैं। बताया जाता है कि अज्ञातवाश के समय पांडव बस्तर आए थे और यहां एक साल तक रहे थे।
अब इस गांव का कोई भी फैसला पंचायत में होता है तो इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि यहां के लोग कम पढ़े-लिखे हैं। इस गांव से निकले कई लोग बड़े पदों पर भी हैं। गांव का कमलेश जूरी जज, जोहर कश्यप कमिश्नर, कोर्राम एसपी और श्याम लाल गोटा डॉक्टर हैं।
गांव में अपराध नहीं होते हैं तो उसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी है गांव में कोई शराब नहीं भी नहीं पीता है। गांव में शराब पर पूरी तरह से बंदिश है। अगर कोई इस नियम को तोड़ता है और शराब पीकर हुल्लड़ करता है तो उसे पंचायत में पांच सौ रुपए का जुर्माना किया जाता है। इसी तरह से किसी के शराब पीने की जानकारी होने पर उसको 200 रुपए का अर्थ दंड दिया जाता है। हैं न एक सपनों का गांव। काश देश का हर गांव ऐेसा हो जाता तो कितना अच्छा होता।





