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मंगलवार, सितंबर 08, 2009

अपराध से कोसों दूर एक गांव-जहां कभी नहीं पड़े पुलिस के पांव

क्या आप अपने देश में एक ऐसे गांव की कल्पना कर सकते हैं जहां पर अपराध न होता हों, न कोई शराब पीता हो, और जहां कभी पुलिस के पांव भी न पड़े हों। आपको कल्पना करने की जरूरत नहीं है हम आपको हकीकत में एक ऐसे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपराध से अब तक अछूता है। इस गांव के सारे छोटे-बड़े मामले गांव की पंचायत में ही निपटा लिए जाते हैं। इस गांव में बरसों से युधिष्ठिर के आसन पर बैठकर सरपंच फैसला करते हैं।

हम यहां पर बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के उस नक्सल क्षेत्र बस्तर के चारामा के एक गांव उड़कुडा की जहां पर आज तक पुलिस के पांव नहीं पड़े हैं और यहां का एक भी मामला कभी कोर्ट तक नहीं गया है। करीब ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव में महर्षि वेद व्यास के संत स्वभाव और धर्मराज युधिष्ठिर की बड़ी छाप है। गांव वालें इन्हीं के चरण चिन्हों पर चल रहे हैं और कोई भी मामला आपस में मिलकर ही निपटा देते हैं। गांव का एक-एक आदमी इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि पुलिस, कोर्ट-कचहरी के चक्कर से हासिल कुछ नहीं होता है, ऐसे में कोई भी मामला कोई कोर्ट तक ले जाने के बारे में सोचता ही नहीं है।

गांव में जहां पंचायत की बैठक में किसी भी मामले का फैसला किया जाता है, वहां पर संत महर्षि व्यास की मूर्ति है। इसी मूर्ति के पास में धर्मराज युधिष्ठिर का आसन है। यह आसन जोगी गुफा के पास है। इसी गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसी गुफा में महर्षि व्यास अपने शिष्य युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को ज्ञान देते थे। इस गुफा के पास आज भी शिष्यों के बैठने का स्थान है। युधिष्ठिर जहां पर बैठते थे, उस आसन का ग्रामीण बहुत सम्मान करते हैं। बताया जाता है कि अज्ञातवाश के समय पांडव बस्तर आए थे और यहां एक साल तक रहे थे।

अब इस गांव का कोई भी फैसला पंचायत में होता है तो इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि यहां के लोग कम पढ़े-लिखे हैं। इस गांव से निकले कई लोग बड़े पदों पर भी हैं। गांव का कमलेश जूरी जज, जोहर कश्यप कमिश्नर, कोर्राम एसपी और श्याम लाल गोटा डॉक्टर हैं।

गांव में अपराध नहीं होते हैं तो उसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी है गांव में कोई शराब नहीं भी नहीं पीता है। गांव में शराब पर पूरी तरह से बंदिश है। अगर कोई इस नियम को तोड़ता है और शराब पीकर हुल्लड़ करता है तो उसे पंचायत में पांच सौ रुपए का जुर्माना किया जाता है। इसी तरह से किसी के शराब पीने की जानकारी होने पर उसको 200 रुपए का अर्थ दंड दिया जाता है। हैं न एक सपनों का गांव। काश देश का हर गांव ऐेसा हो जाता तो कितना अच्छा होता।

10 टिप्पणियाँ:

tina मंगल सित॰ 08, 08:52:00 am 2009  

सुखद किंतु आश्चर्यजनक है कि अपने देश में भी कोई गांव ऐसा है।

Udan Tashtari मंगल सित॰ 08, 08:52:00 am 2009  

काश देश का हर गांव ऐसा हो जाता ..सपना सा लगता है!!

rohan मंगल सित॰ 08, 09:08:00 am 2009  

देश में जहां हर तरफ भ्रष्टाचार और अपराध के सिवा कुछ नहीं है, वहां ऐसे गांव की जानकारी एक उम्मीद की किरण जगाती है कि आज भी अपने देश में ऐसे लोग हैं जिनका अपराध से कोसों दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। जानकारी के लिए आपका आभार।

जी.के. अवधिया मंगल सित॰ 08, 09:25:00 am 2009  

धन्यवाद ग्वालानी जी! आपने छत्तीसगढ़ के गौरव को एक बार फिर उजागर किया है।

neha मंगल सित॰ 08, 09:30:00 am 2009  

सच में भारत का हर गांव ऐसा हो जाए तो अपना देश फिर से सोने की चिडिया बन सकता है।

pranav मंगल सित॰ 08, 09:54:00 am 2009  

मित्र कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे हैं, ऐसे किसी गांव पर यकीन करने को मन नहीं होता है।

guru मंगल सित॰ 08, 10:00:00 am 2009  

लाजवाब गांव के बारे में बताया गुरु

राजकुमार ग्वालानी मंगल सित॰ 08, 10:06:00 am 2009  

प्रणव जी,
यह कोई मजाक नहीं हकीकत है, आप चाहे तो छत्तीसगढ़ के इस गांव जाकर देख सकते हैं। मजाक करने के लायक यह बात नहीं है, बड़ा ही गंभीर मामला है, वैसे भी हमें गंभीर मामलों में मजाक करने की आदत नहीं है।

ranju मंगल सित॰ 08, 01:56:00 pm 2009  

राम राज्य वाल गांव की जानकारी देने के लिए आभार

Vivek Rastogi बुध सित॰ 09, 08:29:00 am 2009  

काश ये पांडव भारत में हर जगह घूमे होते। :)

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