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मंगलवार, सितंबर 01, 2009

राज्यपाल नरसिम्हन के छत्तीसगढ़ी प्रेम को सलाम

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने खेल पुरस्कार समारोह में अपना उद्बोधन छत्तीसगढ़ी में देकर सबको आश्चर्य में डाल दिया। ऐसे समय में जबकि आज अपने देश की राष्ट्रभाषा ही काफी उपेक्षित नजर आती है एक गैर हिन्दी भाषीय राज्य से संबंध रखने वाले राज्यपाल का ऐसा प्रयास वास्तव में सराहनीय है। उनके छत्तीसगढ़ी प्रेम के लिए हम उनको प्रदेश की दो करोड़ जनता के साथ सलाम करते हैं। छत्तीसगढ़ को आज इस बात पर गर्व है कि उनको एक ऐसे राज्यपाल मिले हैं जो उनके राज्य की भाषा की न सिर्फ कदर करते हैं बल्कि उससे प्यार भी करते हैं। यह उनके छत्तीसगढ़ी से प्यार का ही नतीजा है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ी में अपनी बात कही।


खेल दिवस के दिन जब राज्यपाल के कार्यक्रम को अपने अखबार के लिए हम कवर करने गए थे तब हमको भी यह मालूम नहीं था कि वहां पर राज्यपाल हमारे साथ पूरे छत्तीसगढ़ की जनता को अपना कायल कर लेंगे। वैसे राज्यपाल के तो हम करीब दो साल पहले से ही कायल हैं। कारण यह कि जब वे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बने थे तो उनके बारे में ऐसा कहा गया था कि वे गैर हिन्दी भाषीय राज्य के हैं और उनको हिन्दी नहीं आती है। लेकिन जब उनके कदम छत्तीसगढ़ में पड़े तो मालूम हुआ कि उनके बारे में जो बताया गया था वह बिलकुल गलत है और वे न सिर्फ हिन्दी में बोलते हैं बल्कि बहुत अच्छा बोलते हैं। हमें याद है जब वे यहां आएं थे तब हम दैनिक देशबन्धु में समाचार संपादक थे। हमने जब उन रिपोर्टर से पूछा जो राज्यपाल के आगमन पर विमानतल गए थे कि राज्यपाल की हिन्दी कैसी है तो उन्होंने बताया कि राज्यपाल से उन्होंने पूछा था कि उनकी हिन्दी कैसी है, तो उन्होंने हिन्दी में जवाब देते हुए कहा कि अब आप ही तय कर लें कि मेरी हिन्दी कैसी है।


दरअसल में जब वे छत्तीसगढ़ नहीं आए थे तो उनके बारे में लगातार यही कहा गया और कुछ अखबारों में खबरें में छपीं कि राज्यपाल तो अंग्रेजी में ही बोलते हैं। ऐसे में अंग्रेजी न जानने वाले मंत्रियों और विधायकों को परेशानी हो सकती है। यही वजह रही कि हमने उनके आगमन पर रिपोर्टिंग करने जाने वाले रिपोर्टर से यह कहा था कि इस बारे में उनसे जरूर पूछा जाए। आज राज्यपाल नरसिम्हन को छत्तीसगढ़ में करीब दो साल से ज्यादा समय हो गया है और हमें भी उनके कई कार्यक्रमों में जाने का मौका मिला है। हम जब भी उनके कार्यक्रमों में गए हैं उनकी हिन्दी ने हमें प्रभावित किया है। जब वे हिन्दी में बोलते हैं तो कहीं से यह नहीं लगता है कि वे गैर हिन्दी भाषीय राज्य के हैं।


खैर हिन्दी बोलना एक अलग बात है, पर छत्तीसगढ़ी में बोलना आसान नहीं है। लेकिन इस कठिन काम को भी राज्यपाल ने कर दिखाया। उन्होंने जिस तरह के छत्तीसगढ़ी में भाषण दिया है उसके बाद यह बात आसानी से समझी जा सकती है कि वास्तव में यह उनका छत्तीसगढ़ी के प्रति लगाव ही है जिसके कारण उन्होंने छत्तीसगढ़ी में अपना उद्बोधन दिया। अगर राज्यपाल के स्थान पर कोई मंत्री ऐसा करता तो जरूर एक बार कहा जा सकता था कि वे जनता के बीच में लोकप्रिय होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। अब अपने राज्यपाल को कोई चुनाव तो लडऩा नहीं है कि वे ऐसा करेंगे। ऐसे में एक ही बात लगती है कि सच में वे छत्तीसगढ़ी से लगाव रखते हैं। उनके इस लगाव को हम नमन करते हैं।


आज राज्यपाल नरसिम्हन से उन लोगों को सबक और प्रेरणा लेने की जरूरत है जो राष्ट्र भाषा हिन्दी का मान करने की बजाए अपमान करते हैं। जब एक गैर हिन्दी भाषा राज्य का इंसान दूसरे राज्य की भी भाषा में बोल सकते हैं तो फिर लोगों को राष्ट्रभाषा में बोलने में क्यों शर्म आती है। आज अपने देश को नरसिम्हन जैसे लोगों की ही जरूरत है जो लोगों में जागरूकता पैदा कर सकें कि राष्ट्रभाषा से बढ़कर कुछ नहीं होता है।

6 टिप्पणियाँ:

tina मंगल सित॰ 01, 08:55:00 am 2009  

वाकई में राज्यपाल नरसिम्हन एक मिसाल है। गैर भाषीय राज्य के होने के बाद भी उनका हिन्दी के बाद छत्तीसगढ़ी से लगाव काबिले तारीफ है।

बेनामी,  मंगल सित॰ 01, 09:37:00 am 2009  

अंग्रेजी के गुलामों को देश से बाहर कर देना चाहिए।

बेनामी,  मंगल सित॰ 01, 09:37:00 am 2009  

राष्ट्रभाषा का अपमान करने वाले तो देशद्रोही होते हैं।

anu मंगल सित॰ 01, 10:06:00 am 2009  

अंग्रेजी के पीछे भागने वालों के लिए यह एक सबक है कि अगर मन में चाह हो तो कोई भी भाषा कठिन नहीं होती है।

devend,  मंगल सित॰ 01, 01:18:00 pm 2009  

राष्ट्रभाषा का अपमान करने वालों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।

Nitish Raj बुध सित॰ 02, 03:29:00 am 2009  

वाह भई छत्तीसगढ़ी में भाषण दिया फिर तो उनकी सराहना होनी ही चाहिए। हिंदी में भी आज कल बहुत नहीं देते भाषण।

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