जिन्हें समझा सम्मान के लायक-वही निकले नालायक
क्रिकेट का नशा ऐसा है जो पूरे विश्व के सर चढ़कर बोलता है। जहां एक तरफ लोगों में क्रिकेट का नशा है तो दूसरी तरफ क्रिकेटरों में पैसों का नशा है। क्रिकेट के मोहजाल में अपने देश के सर्वोच्च सम्मान भी फंसे नजर आते हैं। लेकिन पद्मश्री जैसे सम्मान की भी कद्र ये क्रिकेटर नहीं करते हैं। अगर वास्तव में इनको अपने देश के इन सम्मानों की कद्र होती तो कभी भी भारतीय टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और हरभजन सिंह इस सम्मान को लेने के लिए अपने सारे काम छोड़कर आते, लेकिन नहीं ये तो उस दिन पैसे कमाने में लगे थे। ऐसे खिलाडिय़ों को तो कभी ऐसा सम्मान नहीं देना चाहिए और सम्मान का अपमान करने वाले इन क्रिकेटरों को सजा भी मिलनी चाहिए। वास्तव में देखा जाए तो पद्मश्री के हकदार तो अपने ओलंपियन विजेन्द्रर और सुशील कुमार थे, पर इनको सम्मान देने वालों ने इस लायक नहीं समझा और जिनको लायक समझा वे ही नालायक निकले और सम्मान की कद्र तक नहीं की।
अपने क्रिकेटर पैसों के पीछे कितने दीवाने हैं इसका एक और बड़ा उदाहरण सामने आ गया है। आज पूरे देश में इसी बात की चर्चा है कि आखिर भारतीय टीम के वे कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी जिनको सभी एक ऐसा कप्तान मानते हैं जो पूरी टीम को साथ लेकर चलते हैं, वे कैसे पद्मश्री सम्मान लेने नहीं आए और शूटिंग करते रहे। यही बात हरभजन सिंह के लिए भी कही जा रही है। वैसे हरभजन सिंह तो शुरू से ही पैसों के दीवाने रहे हैं। उनकी यह बात गले उतरने वाली नहीं है कि वे उस दिन पारिवारिक काम में व्यस्त थे। ऐसा भी क्या काम जो देश का सर्वाेच्च सम्मान लेने भी आदमी न जा सके। हरभजन एक बार पैसों के मोह में ही सिख होने के बाद रैप पर बॉल खोलकर उतरे थे जिसके कारण उनकी काफी आलोचना हुई थी। अब वे पद्मश्री सम्मान लेने न पहुंचने के कारण आलोचना के शिकार हो रहे हैं। हरभजन और धोनी की हरकत पर जहां पर एक तरफ खेल मंत्री गिल साहब खफा हैं, वहीं पूरे देश की खेल बिरादरी भी नाराज है। अब तो हर तरफ से एक ही आवाज आ रही है, ऐसे खिलाडिय़ों को सजा मिलनी चाहिए। हरभजन और धोनी के मामले में ओलंपियन विजेन्दर का कहना है कि मैं सम्मान का अपमान करने वालों के खिलाफ हूं। विजेन्दर का ऐसा मानना है कि पद्मश्री पुरस्कार के हकदार वे और उनके साथ ओलंपिक में पदक जीतने वाले सुशील कुमार भी थे, लेकिन हमको इस लायक नहीं समझा गया और जिनको लायक समझा गया उन्होंने सम्मान का कितना बड़ा अपमान किया यह सबने देखा है। वास्तव में भारत में जो पुरस्कार दिए जाते हैं उन पुरस्कारों में क्रिकेटरों पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि ऐसा होना नहीं चाहिए। क्रिकेटरों तो अपने को देश से बढ़कर समझने लगे हैं ऐसा करने वालों क्रिकेटरों को सजा मिलनी ही चाहिए। अब होना तो यह चाहिए कि धोनी और हरभजन सिंह को इस सम्मान से वंचित कर दिया जाए। लेकिन लगता नहीं है कि अपनी सरकार ऐसा साहस दिखा पाएगी।
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