राजनीति के साथ हर विषय पर लेख पढने को मिलेंगे....

छत्तीसगढ़ी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
छत्तीसगढ़ी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, अक्टूबर 15, 2009

क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने में एतराज क्यों?



ब्लाग बिरादरी में लगता है लोगों को खालिस विवाद पैदा करने में ज्यादा रूचि हो गई है। एक तरफ धर्म युद्ध चल ही रहा है कि किसी जनाब को अब क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने पर एतराज होने लगा है। सोचने वाली बात यह है कि कोई किसी भी भाषा में लिखे किसी का क्या जाता है। वैसे भी आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि कोई किस भाषा में लिखेगा, जब अपने देश में हर क्षेत्रीय भाषा को अलग दर्जा प्राप्त है तो फिर क्यों कोई ऐसा करने की हिमाकत कर रहा है और कह रहा है कि आप क्षेत्रीय भाषा में लिखना बंद करें। ऐसे बंदे को सामने आकर यह बताना चाहिए कि उनकी इस सोच के पीछे की मानसिकता क्या है, क्या खाली विवाद पैदा करना या फिर और कुछ।

हमारे एक ब्लागर मित्र हैं ललित शर्मा उनको कई भाषाओं में लिखने में महारथ हासिल है। वे अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा के साथ भोजपुरी और हरियाणवी में भी लिखते हैं। अचानक दो दिनों पहले उनका फोन आया कि भाई साहब अब ये ब्लाग बिरादरी में ऐसा कौन सा बंदा आ गया है जिसको अब भोजपुरी और हरियाणवी में लिखने में दिक्कत होने लगी है। एक टिप्पणी चर्चा वाले चिट्ठे में किसी ने ऐसा लिखा है कि क्षेत्रीय भाषाओं में लिखना बंद होना चाहिए। हमने शर्मा जी को समझाया कि छोडि़ए न लोगों का तो काम है विवाद पैदा करना आप तो बस लिखते रहिए वैसे भी अच्छा काम करने वालों के ही पीछे लोग पड़ते हैं। अगर आप काम ही नहीं करेंगे तो कोई क्यों आपके पीछे पड़ेगा।

शर्मा जी को तो हमने समझा दिया, पर यहां पर सोचने वाली बात यह है कि आखिर किसी को क्यों कर क्षेत्रीय भाषा में लिखने में आपत्ति है। हमारे देश के संविधान में सभी क्षेत्रीय भाषाओं को जब भाषा का दर्जा दिया गया है तो फिर वो कौन है जो संविधान के खिलाफ जाकर यह तय करने का काम कर रहा है कि क्षेत्रीय भाषाओं में लेखन बंद हो। क्या वो बंदा विश्व के ब्लाग जगत का मालिक है? जो उनकी बातों को मानने के लिए लोग बाध्य हैं। बिना किसी तर्क के किसी भी भाषा पर उंगली उठाने की हिमाकत करना गलत है। अगर किसी को लगता है कि क्षेत्रीय भाषा में लिखना ठीक नहीं है तो पहले यह बात तो सामने आए कि आखिर क्यों ठीक नहीं है। हर क्षेत्रीय भाषीय चाहता है कि उनकी भाषा को ज्यादा से ज्यादा लोग जाने और पहचाने फिर क्यों कर कोई एतराज कर रहा है।

वैसे भी अपना देश ऐसा है जहां कदम-कदम पर भाषा और बोली बदल जाती है, हमारे देश की यही विविधता तो इसे महान बनाती है। भारत ही तो विश्व में एक ऐसा देश है जहां पर हर समुदाय, धर्म और भाषा के लोग एक साथ रहते हैं। अब यह बात अलग है कि इनके बीच में बैर पैदा करने का काम कुछ स्वार्थी लोग करते हैं, पर इनको सफलता नहीं मिल पाती है। अपनी ब्लाग बिरादरी में काफी समय से साम्प्रदायिकता का जहर फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, पर इसको सफलता मिलने वाली नहीं है, यह बात अच्छी तरह से ऐसा करने वालों को समझ लेनी चाहिए। अपने देश के हिन्दु और मुस्लिम यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि उनको आपस में लड़ाने का काम कुछ स्वार्थी लोग ही करते हैं। ऐसे में ऐसे लोगों की दाल गलने वाली नहीं है।

जब ऐसे स्वार्थी लोगों की दाल यहां नहीं गलती है तो फिर क्षेत्रीय भाषा पर नजरें टेड़ी करने वाले की दाल कैसे गलेगी। ऐसे बंदों पर ध्यान देना ही बेकार है, जिसको जिस भाषा में लिखने का मन है वह लिखे। अपने ललित शर्मा जी तो काबिले तारीफ हैं कि वे छत्तीसगढ़ के होने के बाद भीभोजपुरी और हरियाणवी में लिखने का काम कर रहे हैं। ऐसा काम करने वालों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है न कि ऐसे लोगों को डराने का काम करना चाहिए। वैसे अपने शर्मा जी डरने वालों में से नहीं है, लेकिन कोई भी किसी बात से विचलित जरूर हो जाता है, शर्मा जी भी विचलित हो गए थे। हमारा मानना है कि शर्मा जी जैसे किसी भी ब्लागर को विचलित होने की जरूरत नहीं है आप स्वतंत्र देश के स्वतंत्र नागरिक है और जिस भी भाषा में चाहे अपने विचार रख सकते हैं आप को ऐसा करने से अपने देश का संविधान भी नहीं रोक सकता है फिर कोई बंदा क्या चीज है।

तो लगे रहे अपने लेखन में। जय हिन्द, जय भारत, जय छत्तीसगढ़।

Read more...

शुक्रवार, जुलाई 10, 2009

हर छत्तीसगढ़ वासी को नाज है रवि रतलामी पर


आज के कम्प्यूटर के जमाने में अब लगता है कोई भी काम असंभव नहीं है। अगर इंसान में लगन हो तो वह कुछ भी कर सकता है। एक समय हिन्दी में विंडोज सपने जैसा लगता था। लेकिन यह आ गया। इसके बाद होड़ लग गई अन्य भाषाओं में विंडोज बनाने की। लेकिन यह बात कम से कम छत्तीसगढ़ में रहने वाले उन कम्प्यूटरों के महारथियों ने भी नहीं सोची थी कि जो कम्प्यूटर का अपने को मास्टर समङाते हैं कि वे छत्तीसगढ़ी में विंडोज बनाने का काम करें। लेकिन छत्तीसगढ़ में २० साल तक रहने वाले रविशंकर श्रीवास्तव यानी रवि रतलामी जी के दिमाग में जरूर यह बात थी कि वे छत्तीसगढ़ी में विडोंज बनाए और उन्होंने यह काम कर भी दिखाया है। रवि जी पर जहां छत्तीसगढ़ रहवासियों को नाज है, वहीं छत्तीसगढ़ महतारी जरूर ऐसा सोच रहीं होंगी कि हर घर में रवि जैसा लाल हो जो अपनी महतारी का ऐसा ही सम्मान करे।


जब रवि रतलामी जी के रायपुर आने की खबर मिली थी, तब हमें भी नहीं मालूम था कि रवि जी ने छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐसा काम किया है जैसा काम करने का साहस छत्तीसगढ़ का कोई सपूत नहीं कर पाया। हम तो उनसे एक वरिष्ठ ब्लागर होने के नाते मिलना चाहते थे ताकि उनके ज्ञान का हमें भी कुछ लाभ दो सके। उनके आने की खबर के बाद अनिल पुसदकर जी से बात करके यह तय किया गया कि एक वरिष्ठ ब्लागर होने के नाते उनका प्रेस क्लब बुलाकर सम्मान किया जाए। कार्यक्रम तय हो गया था कि उनको १० जुलाई को शाम को प्रेस क्लब में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में बुलाया जाएगा। वे यहां पर जिस कार्यक्रम के लिए आए थे वह कार्यक्रम दोपहर को होना था।


दोपहर को करीब तीन बजे सबसे पहले जब हमने बीएस पाबला जी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि वे तो निरंजन धर्मशाला पहुंचने वाले हैं और अनिल पुसदकर जी भी वहीं हैं। हमने अनिल जी को फोन लगाया तो वे अपने चिरिपरिचित अंदाज में बोले अबे कहां है तू। हमने बताया कि भईया घर पर है और खाना खाकर सीधे पहुंच रहे हैं। हम खाना खाकर करीब ३.३० बजे पहुंचे तो देखा कि रवि जी के साथ अनिल जी और पाबला जी के साथ संजीव तिवारी जी बातों में लगे थे। वहां परिचय हुआ। और पांच मिनट बाद ही यह तय हो गया कि प्रेस क्लब चलकर बैठते हैं। तब तक संजीत त्रिपाठी भी आ गए थे। सबसे पहले रवि जी को प्रेस क्लब में घुमाया गया, इसके बाद प्रेस क्लब में महफिल जमी। चूंकि रवि जी के कार्यक्रम में समय था, ऐसे में ब्लाग जगत से जुड़ी बातों का दौर चल पड़ा। इस दौर में मालूम हुआ कि रवि जी ने छत्तीसगढ़ी में विडोंज बनाया है।
इस विडोंज के बारे में उन्होंने प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में बताया कि कैसे उन्होंने इसके लिए ६ माह तक मेहनत करके इसको तैयार किया है। वास्तव में रवि जी ने छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐसा काम कर दिया है जैसा काम करने की हिम्मत छत्तीसगढ़ के किसी कम्प्यूटर के जानकार ने नहीं की। रवि जी पर हर छत्तीसगढ़ी को नाज है। एक दिन ऐसा आएगा जब रवि जी का छत्तीसगढ़ी के लिए किया गया योगदान स्वर्ण अक्षरों मे लिखा जाएगा।


रवि जी ने छत्तीसगढ़ी के लिए इता बड़ा काम किया है और वे इतने ज्यादा सहज हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता है। हमें लगता है कि अगर रवि जी के स्थान पर यह काम किसी और ने किया होता तो अपनी महिमा का बखान करने का कोई मौका नहीं गंवाता। एक पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि वे छत्तीसगढ़ सरकार से क्या चाहते हैं। तो उनका सीधा सा जवाब था कि वे तो बस इतना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ी के इस विंडोज को छत्तीसगढ़ के हर स्कूल और कॉलेज के साथ हर गांव तक पहुंचाने का काम सरकार करे ताकि जो लोग अंग्रेजी और हिन्दी नहीं जानते हैं वे भी इस विंडोज के माध्यम से कम्प्यूटर को चलाने में सफल हो सकें। इस विंडोज के बारे में उन्होंने बताया कि इसको नेट से भी डाउनलोड किया सकता है।

बहरहाल रवि जी जो काम छत्तीसगढ़ी के लिए किया है उनके लिए हम पूरी छत्तीसगढ़ी बिरादरी की तरफ से उनका नमन करते हैं और आशा करते हैं कि रवि जी इसी तरह से काम करते रहे जो काम अपने देश का नाम विश्व में रौशन करने वाले हों।

Read more...
Related Posts with Thumbnails

ब्लाग चर्चा

मेरी ब्लॉग सूची

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP