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मंगलवार, अगस्त 03, 2010

क्या उनके घर में मां-बहनें नहीं हैं?

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फ्रेडशिप डे के दिन धर्मसेना और बजरंग दल के युवाओं ने शहर की युवतियों और युवकों के साथ जो किया उसको लेकर पूरे शहर के साथ विधानसभा में भी बवाल मच गया। हर तरफ से बस एक ही सवाल दागा गया कि क्या ऐसा करने वालों के घरों में मां-बहनें नहीं हैं। तमाशाबीन बने पुलिस अफसरों के साथ नंगा नाच करने वालों पर भी अंतत: गाज गिरी। पुलिस वाले जहां निलंबति किए गए, वहीं संस्कृति के नाम पर नंगा खेल खेलने वालों को पुलिस ने रात भर घुम-घुम कर खोजा और पकड़ कर अदालत में पेश किया।
फ्रेडशिप डे के दिन रायपुर में धर्मसेना और बजरंग दल के गुंडों ने जो नंगा नाच खेला उसकी खबरें अखबारों प्रकाशित होने के बाद पूरा शहर जाग गया। इसी के साथ जाग गए विपक्षी नेता। एक तरफ से नागरिकों ने संबंधित थाना क्षेत्र का घेराव कर दिया, वहीं विपक्ष के नेताओं ने विधानसभा में बवाल मचा दिया कि यह कैसी कानून व्यवस्था है जो संस्कृति के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों को पकडऩे की बजाए सामने खड़े होकर तमाशा देखती है। इस मामले ने इतना ज्यादा तूल पकड़ा कि अंतत: तमाशाबीन बने तमाशा देखने वाले सभी पुलिस वालों को निलंबित किया गया। इसी के साथ गुंडागर्दी करने वाले सभी बजरंगियों को पकड़कर पहले थाने लाया गया इसके बाद उनको अदालत में पेश किया गया। पूरे शहर के लोग कल दिन भर एक ही सवाल करते रहे कि क्या ऐसी हरकतें करने वालों के घरों में मां-बहने नहीं हैं। हम एक बात बता दें कि अगर नंगा नाच करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हुई है तो उसके पीछे मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है। हमारी कल की पोस्ट में एक सज्जन ने टिप्पणी देते हुए कहा था कि फोटोग्राफरों ने गुंडागर्दी करने वालों को रोका क्यों नहीं। अगर फोटोग्राफर उनको रोकने में लगते तो वे तो अपना काम कर ही लेते, पर फोटो नहीं खींची जाती और फोटो नहीं खींची जाती तो वह छपती नहीं और अगर ऐसी फोटो छपती नहीं तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी नहीं होती। मीडिया ने जिस तरह के सवाल जवाब अफसरों ने लेकर मंत्रियों से किए उसी का नतीजा यह रहा कि पुलिस अफसरों को कार्रवाई करने मजबूर होना पड़ा।
चलिए कम से कम संस्कृति के नाम से खिलवाड़ करने वालों को जेल की हवा खाने से कुछ तो सबक मिलेगा। अब भविष्य में वे ऐसा करने से पहले जरूर सोचेंगे कि ऐसा करें या न करें। हम एक बात बता दें कि अक्सर ऐसा तमाशा करने वाले तमाशा करने से पहले प्रेस फोटोग्राफरों को फोन करके बुलाते हैं। एक अगस्त को भी उन्होंने ऐसा किया था, पर तब उनको यह मालूम नहीं था कि उनकी यही हरकतें उनको भारी पड़ जाएगी। फोटोग्राफर भी नहीं जानते थे कि ये इतनी ज्यादा नंगाई पर उतर आएंगे। हमारे एक फोटोग्राफर मित्र ने बताया कि बजरंगी तो युवक और युवतियों के सर के बाल कटवाकर उनको गंजा करना चाहते थे, फोटोग्राफरों ने उनको ऐसा करने से रोका। बहरहाल चलिए कभी तो बुरे काम का बुरा नतीजा सामने आया।

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सोमवार, अगस्त 02, 2010

फ्रेडशिप डे पर धर्मसेना के गुंडों का नंगा नाच

दोस्ती के दिन जो कुछ हमारे शहर में हुआ, वह वास्तव में बहुत दुखद है। धर्मसेना के गुंड़ों ने संस्कृति के नाम पर जिस तरह की गुड़ागर्दी की उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। क्या फ्रेडशिप डे पर भी उसी तरह से लगाम कसने की जरूरत आ पड़ी है जिस तरह की लगाम कसने का काम ये धर्म के ठेकेदार वेलन्टाइन डे पर करते हैं। वैसे तो किसी को भी दोस्ती या प्यार करने से रोकना अपराध है। लेकिन हमारे शहर में जब धर्मसेना के गुंडे पार्क में बैठे युवक-युवतियों के साथ मार-पीट कर रहे थे तब पुलिस वाले वहां खड़े तमाश देख रहे थे। धर्मसेना के गुंडों ने पूरे शहर में कल नंगा नाच खेला। सोचने वाली बात है कि क्या संस्कृति को बचाने का ठेका धर्मसेना ने ही ले रखा है।

क्या दोस्ती के दिन किसी के साथ ऐसा करना उचित है?
क्या दोस्ती करना अपराध है?
क्या एक लड़के और लड़की में दोस्ती का रिश्ता गलत है?
क्या लड़के और लड़की के बीच प्यार की ही रिश्ता होता है? 

ब्लागर मित्र अपने विचारों से जरूर अवगत कराए।

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