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शनिवार, जनवरी 08, 2011

अब तेरा क्या होगा रे पीलिया .....

हूं... कितने ब्लागर थे?
सरदार एक ब्लागर
एक ब्लागर ...
और तुम साले इतनी बार फर्जी आईडी बनाने के बाद भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके।
इसकी सजा मिलेगी.. बराबर मिलेगी
बोलो कितनी गोली है इसके अंदर
सरदार छह गोली...
गोली छह और फर्जी आईडी के नाम न जाने कितने
बहुत बेइंसाफी है ये..
तेरा क्या होगा पीलिया...
सरदार मैंने आपके कहने से ही ये नाम रखा था
तो अब नाम बदल डाला
बदल डाला सरदार
क्या नया नाम रखा है रे
सरदार जब बार-बार काड़ीबाज.. काड़ीबाज कहा जा रहा है तो इस बार काड़ीबाज के नाम से ही आईडी बना ली है।
हां...हां.. हां..
बहुत खूब
कोई असर हुआ इस नाम का..
सरदार अब तक तो नहीं हुआ
क्यों...
सरदार उसने दूसरे ब्लाग में भी मॉडरेशन लगा लिया है।
क्या इसका कोई तोड़ नहीं है
नहीं है सरदार..
कोई बात नहीं... तुम अपना काम करते रहो
या तो तुम परेशान हो जाओगे या वो ब्लागर परेशान हो जाएगा
ठीक है सरदार मैं अपना काम जारी रखूंगा
अगर वो परेशान न हो तो कोई दूसरा ब्लागर तलाश लेना
यहां बहुत से ऐसे मुर्गे हैं जो परेशान किए जा सकते हैं।

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बुधवार, नवंबर 10, 2010

एक और खुले सांड का ब्लाग जगत में अवतरण

ब्लाग जगत में एक और खुले सांड यानी काड़ीबाज उस्तादजी का अवतरण हुआ है। वैसे इस नाम के तीन-तीन काड़ीबाजों के होने की जानकारी मिली है जो किसी के भी ब्लाग में जाकर कुछ भी टिप्पणी करने का काम कर रहे हैं। जिनके ब्लाग में मॉडरेशन लगा है वे तो सुरक्षित हैं, लेकिन जिनके ब्लाग खुले हैं उनके ब्लागों में ऐसे कई खुले सांड चले आते हैं गंदगी करने के लिए।
कुछ दिनों पहले ही हमारे ब्लाग में एक उस्तादजी नाम से किसी काड़ीबाजी ने टिप्पणी की थी। हमने ध्यान नहीं दिया, फिर से ये महाशय दो दिन पहले हमारे ब्लाग में आए। हमने कल ही इस बारे में अपने ब्लागर मित्र ललित शर्मा से चर्चा की तो मालूम हुआ कि उस्ताद के नाम से एक नहीं बल्कि तीन-तीन आईडी बनी हुई है और इस फर्जी नाम से कोई सांड ब्लागों में गंदगी फैलाने का काम कर रहा है। अब इन खुले सांडों से बचने का एक ही उपाय नजर आता है कि ब्लागर मित्र अपने ब्लागों में मॉडरेशन लगा ले। हम वैसे इसके खिलाफ थे, लेकिन जब देखा कि ब्लाग जगत में विचरण करने वाले खुले सांड गंदगी फैलाने से बाज नहीं आने वाले हैं तो हमने गंदगी से अपने को बचाने के लिए अंतत: मॉडरेशन का सहारा लिया। अब हमें इस बात की कोई फिक्र नहीं रहती हैं कि कौन क्या टिप्पणी कर रहा है। जिनकी टिप्पणी ठीक लगती है उसे प्रकाशित करते हैं जो ठीक नहीं लगती है उसे डाल देते हैं कचरा पेटी में। वैसे कोई स्वस्थ्य आलोचना करे तो ऐसी टिप्पणी से किसी को परहेज नहीं होता है, लेकिन यहां तो ऐसे-ऐसे काड़ीबाज हैं, जो बिना वजह किसी को भी परेशान करने का काम करते हैं। हम एक बात साफ कर दें कि काड़ीबाज का मतलब होता है बिना किसी मतलब के दूसरे के काम में अपनी टांग अड़ाना। हमारे एक मित्र ने कहा कि यार बहुत लोग काड़ीबाज का मलतब समझते नहीं हैं, इसलिए हम काड़ीबाज का अर्थ बता रहे हैं। तो आप भी ऐसे काड़ीबाजों और खुले सांडों से सावधान रहने के लिए अपने ब्लाग को सुरक्षित करने का काम करें और मॉडरेशन लगा लें।

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शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

मॉडरेशन का एक फायदा यह भी

हमने अपने ब्लाग राजतंत्र में जब से मॉडरेशन लगाया है, तब से हम कई तरह के फायदों में हैं। इनमें से एक फायदे के बारे में हमें अचानक मालूम हुआ जिससे हम अब तक अंजान थे। हमने जब मॉडरेशन नहीं लगाया था तो हमें यह कभी मालूम ही नहीं हो पाया कि हमारी पुरानी पोस्ट भी देखी जाती है और उस पर टिप्पणी आती है। लेकिन मॉडरेशन लगाने के बाद हमें यह सब मालूम हुआ।
कुछ दिन पहले हमने जब मॉडरेशन के इंतजार वाली टिप्पणियों को देखा तो हमें यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि कुछ टिप्पणियां ऐसी हैं जो हमारी काफी पुरानी पोस्ट के लिए आई थीं। इसके पहले हमें कभी यह मालूम ही नहीं हो सका कि हमारी पुरानी पोस्ट भी पढ़ी जाती है और लोग उस पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। हम तो यही समझते थे कि संभवत: 24 घंटे के बाद कोई पोस्ट पर नजरें डालता ही नहीं है। लेकिन मॉडरेशन की वजह से हमारा यह भ्रम दूर हो गया है। इसी के साथ अब हमें इस बात की बहुत खुशी है कि अवांछित लोग अब कम से कम टिप्पणी करने नहीं आ रहे हैं। वरना हमें भी काफी परेशान करके रखा गया था। हमें अपनी पुरानी पोस्टों पर भी अब लगातार टिप्पणियां नजर आ रही हैं। तो है न यह एक फायदे का सौदा, तो देर किस बात की है अगर आप भी अवांछित टिप्पणियों  से परेशान हैं अैरै जानना चाहते हैं कि आपकी पुरानी पोस्ट कब पढ़ी गई है और उसके बारे में लोगों के क्या विचार है तो तत्काल अपने ब्लाग में मॉडरेशन लगाने का काम करें।

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रविवार, अगस्त 22, 2010

ये पतित पावन है या रावण ...

हमारे ब्लाग में कोई बंदा काफी समय से पतित पावन के नाम से फर्जी आईडी बनाकर कुछ भी अनाप-शनाप टिप्पणियां कर रहा है। इनकी टिप्पणियों से ही परेशान होकर हमें मॉडरेशन का सहारा लेना पड़ा। इसके पहले भी कई ऐसे बेशर्म फर्जी आईडी से आए हैं, लेकिन इस पतित पावन जैसा बेशर्म हमने नहीं देखा है। हमें समझ में नहीं आता है कि ये पतित पावन है या रावण जो नहा-धोकर बेवजह हमारे पीछे पड़े हुए हैं। अरे भाई साहब या फिर बहनजी आप जो भी हैं, अगर आप हमारे दुश्मन हैं और दुश्मनी करने का दम रखते हैं तो अपने असली नाम और पहचान के साथ सामने आए न। अगर आप सामने आकर बात करें तो हम आपकी हर बात का जवाब देने को तैयार हैं। अगर सामने आने की हिम्मत नहीं है तो हम ऐसे लोग से न तो बात करना पसंद करते हैं और न ही इनकी बातों का जवाब देना।
आपकी टिप्पणी को प्रकाशित करना हमारे लिए जरूरी नहीं है, क्योंकि ब्लाग हमारा है हमें जो लगेगा कि ठीक है, उसी को प्रकाशित करेंगे आप अपनी असली पहचान के साथ सामने आकर टिप्पणी करें फिर उस टिप्पणी में हमारी कितनी भी आलोचना हो या फिर आप चाहे गालियां दें हम उसे जरूर प्रकाशित करेंगे यह हमारा वादा है। आप अच्छी तरह से जानते हैं कि आपने अगर अपनी असली पहचान के साथ कुछ भी उलटा सीधा लिखा तो उसका अंजाम क्या हो सकता है। दरअसल में आप एक डरपोक और वाहियात किस्म के इंसान हैं। या फिर कोई सनकी हैं जिनको किसी को भी परेशान करने में मजा आता है। हम जानते हैं कि आप कहां से आते हैं। हम यह भी जानते हैं कि आपकी मानसिकता क्या है।
आप बार-बार कहते हैं हम ऐसा कौन सा महान काम कर रहे हैं जिससे हमें रोकने का काम किया जा रहा है। वैसे तो कायदे से आप जैसे इंसान की इस बात का जवाब नहीं देना चाहिए, फिर भी हम बता दें कि हम कोई महान काम तो नहीं लेकिन ब्लाग जगत में फैली गुटबाजी को समाप्त करने की एक पहल पर काम कर रहे हैं। हमें तो लगता है जिनको यह पहल रास नहीं आ रही है उन्हीं में से आप भी एक हैं। लेकिन किसी को हमारी बात पसंद आए या न आए इससे हमें क्या। हमें लगा कि ब्लाग जगत बिना वजह गुटबाजी में अपना समय खराब कर रहा है। अगर गुटबाजी ही करनी है तो एकता की गुटबाजी करें। हम सभी को एक होकर ब्लाग जगत में कुछ अच्छा करने की दिशा में सोचना चाहिए। लेकिन कोई सोचेगा कैसे बीच में ये फर्जी आईडी बनाकर पतित पावन जैसे रावण जो सामने आ जाते हैं। अब ऐसे रावणों से निपटना तो हर किसी के बस में नहीं है न। खैर ऐसे रावणों को मारने वाले रामों की भी अपने देश में कमी नहीं है। भगवान ऐसे रावणों का भी भला करें जो दूसरों का हमेशा बुरा चाहते हैं।
तो मिस्टर पतित पावन हम फिर कह रहे हैं कि अगर दम है तो अपने असली वजूद के साथ सामने आकर बात करें। कभी पतित पावन, कभी तहसीलदार तो कभी मूलचंदानी  या फिर किसी भी नाम से आने से कुछ नहीं होता है। हमें न तो टिप्पणियों की भूख है न ही ब्लाग में लिखने की मजबूरी। हमें कोई छपास रोग नहीं है। हम बता दें कि हम रायपुर के एक प्रतिष्ठित अखबार में काम करते हैं और साथ ही एक पत्रिका भी निकालते हैं। हम जो चाहते हैं उसे अखबार और पत्रिका में लिख लेते हैं। लगता है कि आप ही कुंठित हैं क्योंकि आप कहीं कुछ लिख नहीं पाते हैं इसलिए लिखने वालों को ही परेशान करने का अभियान चला रखा है। करते रहे आप अपना काम, लेकिन अब आप कम से कम हमें परेशान नहीं कर पाएंगे। क्योंकि आपका लिखा अब कचरा दान में ही जाएगा, इसलिए अपना समय खराब करने से बेहतर है कि कोई दूसरा शिकार तलाश करें।

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