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मंगलवार, जून 30, 2009

आस्था का सैलाब

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संत आसाराम बापू के दो दिनों तक चले प्रवचन में आस्था का सैलाब देखने को मिला। बापू को सुनने के लिए हजारों की संख्या में उनके चाहने वाले पूरे राज्य के साथ दूसरे राज्यों के भी आए। मैदान में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। बापू के सत्संग का लाभ लेने मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह के साथ विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, गृहमंत्री ननकीराम कंवर, संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू भी पहुंचे। उक्त जन प्रतिनिधियों ने बापू से आशीर्वाद लेने के बाद प्रदेश की सुख और समृद्धि के लिए काम करने का वचन भी दिया।



प्रवचन देते हुए बापू ने कहा कि सुख बाहर की चीज नहीं है, वर्तमान का अनादर कर भविष्य के सुख की लालसा करना संभव नहीं। आपका वर्तमान सच्चिदानंद परमात्मा का है। जो भूतकाल की बात करते हैं , वे ईश्वर का अनादर करते हैं । भविष्य में ये मिले, जहां-वहां जाऊंगा, यदि सोचते हैं तो यह भी परमात्मा का अनादर होता है। घर में आए महात्मा को छोड़कर बाहर से आए किसी अन्य का सम्मान करना भी अनादर है। भगवान के साथ संबंध रहेगा तो मनुष्य की जीवन धारा बदल जाएगी। शरीर मरता है आत्मा सनातन है। वर्तमान में कितना बड़ा भी दुख आ जाए उसे भगा सकते हैं यदि परमात्मा की स्मृति कर लें। ईश्वर के स्वभाव और चेतना का तिरस्कार करके वर्तमान का अनादर कर भविष्य के सुख की आशा करना फालतू मन की बदमाशी है। अभी का चेतन ज्ञान स्वरुप है, सनातन स्वरुप है, जो भूतकाल की बात करते हैं वे भी ईश्वर का अनादर करते हैं । सुख बाहर की चीज नहीं है जो अभागा जीवन सोच-सोच कर पक्षतावा करते हैं ऐसे लोग और उनकी सात पीढिय़ां दुख भोगती हैं। जो आपको अच्छा नहीं लगता वो दूसरो को कैसे अच्छा लगेगा, आप चाहते हैं कोई आपको न ठगे तो आप दूसरों को न ठगे ऐसे में अंतरआत्मा अपने गौरव में प्रकटेगा। भक्ति और साधना के कई तरीके होते हैं, गौरव भक्ति और भगवान का संबंध भक्ति। यदि भगवान को साक्षी मानकर भक्ति करते हैं तो राग, द्वेष, निंदा, ईष्र्या खत्म हो जाते हैं। शरीर के मरने से संबंध खत्म नहीं हो जाता, शरीर मरता है आत्मा सनातन है। वर्तमान का संबंध सच्चिदानंद परमात्मा से है जो वर्तमान में है और भविष्य में भी रहेगा। जिसका संबंध भगवान से हो गया उसे दवाओं के सहारे जीवन नहीं जीना पड़ेगा। जिसका जीवन जीवनदाता के साथ जुड़ा है तो वह स्वास्थ्य रहेगा ही। किताबों से ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती, पोथी पढ़-पढ़कर सफलता नहीं हासिल की जा सकती, यदि सत्संग के दिव्य वाणी ग्रहण कर लिया तो भगवान के प्रति प्रेम वैसे ही आ जाएगा। तब पान मसाला, सिगरेट और क्लबों में जीवन नष्ट नहीं करना पड़ेगा।



संत आसाराम बापू ने बताया कि दूसरों के हित की भावना से आत्म संतोष और आत्म तृप्ति होनी चाहिए, उन्होंने इस संबंध में द्रोपदी का प्रसंग भी सुनाया। संबंध में स्वीकार के लिए दोनों तरफ से सहमति की आवश्यकता होती है, अब यदि कोई यह सोचे कि उसे भगवान की सहमति चाहिए तो उन्हें यह जान लेना चाहिए कि भगवान पहले ही बोल चुके हैं और उनसे संबंध जोड़ चुके हैं कि सभी मेरे प्यारे हैं अब आपको तय करना है कि शाश्वत सत्य से संबंध रखना है या संसार के काल्पनिक माया से। उन्होंने कहा कि भविष्य में सुखी रहने की कल्पना कभी नहीं करेंगे, वर्तमान में कितना बड़ा भारी भी दुख आ जाए तो उसे भगा सकते हैं आप केवल इतना पक्का कर लें और आप उसे स्वीकार लें जो आपका परम मित्र है उसकी स्मृति मात्र से ही सारे दुख दूर हो जाएंगे। जीवन दाता से यदि जीवन धारा जुड़ी रहेगी तो ज्ञान का प्रकाश बढ़ेगा।


बापू ने गौरव भक्ति के संबंध में बताया कि हे प्रभु तेरी कैसी लीला है कि गाय और भैंस हरी घास खाकर सफेद दूध देती है, पानी से अंगुर की रस बनती है, अन्न खाने से रक्त-मांसपेशी मजबूत होती है यह गौरव भक्ति है। नित्य-नवीन रस प्रकट होगा, गौरव की स्मृति करके आप भगवान के गौरव से गौरन्वित हो सकते हैं। यदि गौरव भक्ति, भगवान का संबंध भक्ति होगी तो परमार्थ बढिय़ा होगा। भरोसा परमात्मा से करें संबंध परमात्मा से रखे, बहु-बेटे, मित्र, साथी, बेटी से यदि सुख मिलने का भरोसा रखते हैं तो खबरदार हो जाइये। बेटे-बेटियों को पढ़ाइये, लिखाईये ऐसे करके अपना कर्तव्य पूरा की जाए। भरोसा ईश्वर पर करें, वर्तमान ईश्वर स्वरुप आनंद पर करें, यदि स्विस बैंक में करोड़ों रुपये भी जमा हो तो भरोसा न करें। भारत जैसा सात्विक और अपनत्व वाला देश पूरे विश्व में कोई नहीं है। हजार वर्ष की तप से भी वह फल नहीं मिलता जो कि अपनत्व और परमात्मा से संबंध की स्वीकृति और विश्रांति से मिलता है।

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सोमवार, जून 29, 2009

वेलेंनटाइन डे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए

संत आसाराम बापू ने साधकों को सचेत करते हुए कहा कि यदि भारत बचेगा तो विश्व बचेगा, उन्होंने कुछ सामाजिक विकृतियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि आज साढ़े बारह लाख कन्याएं स्कूल जाने से पहले गर्भवती हो जाती है। उन्होंने कहा कि वेलेंनटाइन डे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, प्यार या मोहब्बत को प्रदर्शित करने का यह एक गलत प्रदर्शन है। गणपति ने भी माता-पिता की पूजा की थी और जो प्यार उन्हें मिला वह एक शिक्षा है। माता-पिता की सेवा और प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है। केक काटकर, मोमबत्ती बुझाकर आप प्रकाश से अंधकार की ओर जाते हैं यदि जीवन में प्रकाश लाना है तो आप जितने वर्ष के हो चुके हैं उतने दिए भगवान के मंदिर में जलाए तो जीवन शक्ति में वृद्धि होगी। भगवान के लिए प्रसाद व भोग लगाकर बांटे तो ज्ञान, बुद्धि, कर्म सुखदायी होगा। दिव्य प्रेरणा से ही बच्चों में अच्छी भावनाएं जागृत होती है। संत आसाराम बापू ने कहा कि भगवत नाम में अद्भूत शक्ति है, आत्मा और परमात्मा का मिलन सत्संग से मिलता है। भगवान का नाम जिसके जीवन में जुड़ गया वह धनभाग है। अगर भगवान से जुड़े हंै तो भगवत नाम की अनुभूति भी करेंगे और अगर नहीं जुड़े हैं तो आप अनाथ है। इस जनम का क्या अगले जनम का पाप मिटाने की शक्ति भी भगवत मंत्र में हैं।

साइंस कालेज मैदान में दो दिवसीय सत्संग कार्यक्रम में संत आसाराम बापू मंच पर पहुंचे समूचा मैदान ऊँ नमो: भगवते वासुदेवाय से गूंज उठा और सैकड़ों-हजारों हाथ हरि ऊँ, हरि ऊँ के साथ साधक झूमने लगे। कुछ ही देर में बापू ने उन्हें शांत करते हुए कहा कि मिनी कुंभ है रायपुर, उन्होंने अपने अंदाज में पूछा क्या हाल है रायपुर वालों। आज के इस कार्यक्रम को हिन्दुस्तान के लोग ही नहीं बल्कि कनाडा, यू।के. जैसे और भी दर्जनों देशों के लोग वेबसाइट पर देख रहे हैं और इसके बाद उन्होंने एकाग्रचित लोगों को अपनी ओजस्वी वाणी में बांधा। उन्होंने कहा कि भगवत नाम में एक अद्भूत शक्ति है जो हर प्रकार की दुर्बलताओं को भगा देता है। जिनके जीवन में गुरु मंत्र होता है उन्हें यह अहसास रहता है कि उसके पीछे कर्नल, बिग्रेडियर जैसे मजबूत आश्रय है। यदि कोई भय दिखाता है तो इस अद्भूत शक्ति मात्र से भय दिखाने वाले के बंदूक की गोली खत्म हो जाती है लेकिन भगवत नाम का उच्चारण नहीं। उन्होंने कहा कि थोड़ा सा धन या पद मिले तो लोगों के मन में अहंकार आ जाता है, लोभ, मोह, क्रोध नहीं करना चाहिए, धन या बुद्धि का गर्व न करें। उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेेयी जैसे लोग भी उनके सत्संग में एक सामान्य आदमी की तरह बैठे है और एक अच्छे आदमी के उन्नत होने के लिए यही सही है।


भगवान का नाम जिसके जीवन में जुड़ा है वह धनभाग है, अगर आप भगवान से जुड़े है तो ही इसकी अनुभूति करेंगे और अगर नहीं तो आप अनाथ है। यदि भगवान से जुड़े है, जुड़े रहेंगे तो साथ नहीं झूठता और आपका बेड़ा पार है। ज्ञान, प्रेम, चेतना सत्संग से ही मिलता है, आत्मा-परमात्मा का मिलन भी सत्संग से मिलता है। आत्मा परमात्मा है, भगवत शक्ति, भक्ति, प्रेम को लाने से ही यह मिलता है। दुनिया का कोई भी स्कूल या कालेज वह प्रमाण पत्र नहीं दे सकता जिससे वह आनंद मिलता हो जितना कि सत्संग में आने से मिलता है। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि यदि मैं झूठ बोलूं तो तुम मरो। मंत्रों की अपनी अलग शक्ति होती है विभिन्न मंत्रों की शक्ति और महिमा उन्होंने साधकों को बताई। मंत्र के साथ-साथ प्राणायाम के फायदे उन्होंने गिनाए तथा प्रत्यक्ष रुप से प्राणायाम कराकर उसकी विधि भी उन्होंने बताई।

बापू ने दवाओं को भूकंप से भी ज्यादा घातक बताया, उन्होंने कहा कि मंत्र में इतनी शक्ति है कि ब्लडप्रेशर, हार्ट अटेक से भी बचा जा सकता है। अंग्रेजी दवाओं का उपयोग कर लोग मर जाते है। मंत्रों में आत्मिक शक्ति है पीड़ा से दवा कुछ राहत जरुर पहुंचा सकती है लेकिन रोग नहीं भगा सकती। रोग भगाने का हथियार गुरु मंत्र से ही मिलेगा इसलिए कहा गया है ''नाशै रोग हरै सब पीड़ा, जपत निरंतर हनुमंत वीरा। तिलक लगाने की जगह पर ओमकार का ध्यान करें तो बुद्धि विकसित होगी। निर्भय गुरु नाम के मंत्र का आश्रय है। नियम-निष्ठा यदि जीवन में रखें तो भय, रोग, शोक, चिंता, पाप दूर हो जाते है। ईश्वर की कामना मात्र से आपकी चेतना एकाग्र होगी।

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