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मंगलवार, जून 23, 2009

अग्नि वर्षा का देते थे झांसा-ग्रामीणों ने पहरा देकर फांसा

शैतानी शक्ति का खौफ दिखाकर ग्रामीणों को ठगने की योजना बनाई थी 13 साल के संतोष साहू ने छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक गांव जहां पर रोज रात को पैरावट में आग लग रही है और सारे ग्रामीण परेशान हैं। आखिर ये क्या हो रहा है? पिछले दो माह से ऐसा कोई दिन खाली नहीं जा रहा है जब ऐसा नहीं हो रहा है। एक तरफ पैरावट में आग लग रही है तो दूसरी तरफ गांव के कुत्तों की मौत पर मौत हो रही है। ग्रामीण परेशान हैं और उनको लग रहा है कि किसी शैतानी शक्ति का साया गांव पर पड़ गया है। ऐसे में एक नहीं कई तांत्रिकों का सहारा लिया जाता है, इसी के साथ वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों का दल भी गांव का दौरा करता है, पर हरकतें बंद नहीं होती हैं। सांसद से साथ पुलिस से भी मदद की गुहार लगाई जाती है, पुलिस के पहरे के बाद भी कुछ नहीं हो पाता है। ऐसे में एक पत्रकार इस घटना की सच्चाई जानने गांव जाता है और सारी घटना को समझने के बाद उस पत्रकार को संदेह होता है कि इस घटना के पीछे दो नाबालिग बच्चों का हाथ है और वह अपना यही संदेह अपने अखबार में जता देता है। इस खबर के बाद ग्रामीण सचेत होते हैं और रात को चुप-चाप पहरा दिया जाता है। पहरे का लाभ मिलता है और राकेट के बहाने अग्नि वर्षा होने की बात गांव भर में फैलाने वाला 13 साल का संतोष साहू अपने साथी 14 साल के जितेन्द्र साहू के साथ पकड़ा जाता है। इसके बाद राज खुलता है कि यह महज 13 साल का बच्चा इतना शातिर है कि गांव वालों को शैतानी शक्ति का डर दिखाकर लाखों रुपए कमाने की जुगत में था। संतोष अपने को बहुत बड़ा तांत्रिक साबित करना चाहता था।


छत्तीसगढ़ के गांवों में तंत्र-मंत्र का ज्यादा बोलबाला है और भोले-भाले ग्रामीण शैतानी शक्तियों से बहुत ज्यादा खौफ खाते हैं। गांव का रिश्ता टोनही और न जाने किस-किस तरह की शैतानी शक्तियों से होता है। अब शैतानी शक्तियां होती हैं या नहीं होती है, यहां पर वह मुद्दा नहीं है। यहां पर बात हो रही है कि किस तरह से एक गांव में महज 13 साल का एक शातिर बच्चा संतोष साहू गांव वालों में शैतानी शक्ति की दहशत पैदा करके लाखों रुपए कमाना चाहता था। धमतरी जिले के ग्राम अरौद में संतोष ने ऐसी दहशत फैला रखी थी कि सारे ग्रामीण परेशान थे। संतोष ने तंत्र-मंत्र से लाखों रुपए कमाने की योजना बनाई और इस योजना में एक और लड़के जितेन्द्र और उसके पिता बंसत साहू को शामिल कर लिया। इसके बाद प्रारंभ हुआ राकेट से अग्नि वर्षा का खेल। संतोष के साथ बंसत रोज सुबह को गांव भर में यह ढिढ़ोरा पिट देते थे कि आज पैरावट में आग लगने वाली है। संतोष यह भी बताता था कि आज कितने पैरावट में आग लगेगी। वह अगर कहता था कि पांच पैरावट में आग लगेगी तो उतने में ही आग लगती थी। वह जिस दिशा के पैरावट के बारे में बताता था, उसी दिशा में आग लगती थी। योजना के मुताबिक वह जितने पैरावट और जिस दिशा के पैरावट की बात करता था उनमें रात को आग लगाने का काम जितेन्द्र करता था। आग लगाने का काम फटाकों वाले एक अलग किस्म के राकेट से किया जाता था ताकि ग्रामीणों को लगे कि आसमान से आग बरस रही है जिसके कारण पैरावट में आग लग रही है। जितेन्द्र ही आग लगाने के बाद गांव में हल्ला करता था कि आग लग गई। इसी के साथ वह यह भी बताता था कि आसमान से जलता हुआ राकेट गिरा जिससे आग लगी है।
गांव में यह घटनाक्रम प्रारंभ हुआ तो पूरा गांव वाले परेशान हो गए। इस आफत से मुक्ति के लिए सबसे पहले संतोष साहू ने ही ग्रामीण से कहा कि वह इससे मुक्ति दिला सकता है, पर इसके लिए पांच लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। पर ग्रामीण इतनी बड़ी रकम खर्च नहीं करना चाहते थे। ऐसे में ग्रामीणों ने कई तांत्रिकों और ओझाओं का सहारा लिया पर किसी भी तांत्रिक या ओझा को यह बात समझ ही नहीं आई कि आखिर ये सब कैसे हो रहा है। अगर वास्तव में किसी शैतानी शक्ति की करतूत होती तो कुछ पता चलता, पर यह तो सब इंसानी दिमाग की खुरापात थी।
ऐसे में सांसद चंदुलाल साहू के साथ कुछ वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों का भी सहारा लिया गया। पर बात नहीं बनी किसी की समझ में यह बात आ ही नहीं रही थी कि आखिर ये घटनाएं कैसे हो रही हैं। पुलिस और जिलाधीश से शिकायत के बाद दिन-रात गश्त भी की गई, पर कोई फायदा नहीं हुआ। गांव वालों ने गायत्री यज्ञ भी किया, पर नतीजा वहीं शून्य रहा। गांव वाले इससे और ज्यादा दहशत में आ गए कि आखिर वे करें तो क्या करें। इधर संतोष साहू ने फिर से एक बार गांव वालों से कहा कि वह इस सारी घटना से मुक्ति दिला सकता है इसके लिए पांच लाख का खर्च आएगा। संतोष साहू ने गांव वालों को शैतानी शक्ति का यकीन दिलाने के लिए गांव के 22 कुत्तों को जहर देकर मार डाला था। कुत्तों को मारने के दो कारण थे, एक तो यह कि जब भी जितेन्द्र पैरावट में आग लगाने जाता था तो कुत्ते भोंकते थे। ऐसे में उनको पकड़े जाने का खतरा था, दूसरे कुत्तों को मारकर वे लोग गांव वालों को यकीन दिलाना चाहते थे कि यह सब शैतानी शक्ति का काम है। संतोष साहू और जितेन्द्र साहू इतने ज्यादा शातिर थे कि वे भी शैतानी शक्ति का रहस्य जानने वाले उन ग्रामीण के साथ रहते थे जो रात को पहरा देते थे। वे सबकी नजरें बचाकर पैरावट में आग लगा देते थे। ऐसे में उन पर कोई संदेह ही नहीं करता था।

जब गांव वालों को कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था ऐसे में एक धमतरी के पत्रकार ने गांव का दौरा किया और सारे हालात को जानने के बाद उनको संदेह हुआ कि इस घटना के पीछे संतोष साहू का हाथ हो सकता है। हालांकि उसकी उम्र को देखते हुए ऐसा लग नहीं रहा था, पर पत्रकार ने अपनी खबर में यह संदेह जता दिया। तब हर तरफ से निराश हो चुके ग्रामीणों ने इस दिशा में भी सोचते हुए रात को चुप-चाप पहरा देने का विचार किया और जैसे ही रात को चुप-चाप पहरा दिया गया तो पैरावट में आग लगाने वाला जितेन्द्र पकड़ में आ गया और इसी के साथ यह बात भी सामने आ गई कि इस सारे शैतानी खेल के पीछे महज 13 साल के संतोष साहू का दिमाग काम कर रहा था। संतोष ने पैसों का लालच देकर जितेन्द्र और उसके पिता बंसत साहू को भी अपने साथ मिला लिया था। संतोष की, की गई भविष्यवाणी को बंसत ही गांव भर में फैलाने का काम करता था। इन तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। इस तरह से एक पत्रकार की सुझबुझ के कारण एक अनदेशी शैतानी शक्ति का खुलासा हुआ तो मालूम हुआ कि यह शैतानी शक्ति नहीं बल्कि इंसानी शक्ति है जो शैतानी शक्ति का रूप लेकर ग्रामीणों को डराकर ठगने का काम करने वाली थी।
(फोटो देशबन्धु में प्रकाशित खबर से मोबाइल द्वारा खींची गई है, साभार देशबन्धु)

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गुरुवार, मई 07, 2009

ताबीज से भागा भूत

कल शाम की बात है हम अपने कजन की दुकान पर बैठे थे तभी एक बंदा आया और उन्होंने हमारे कजन को सूचना दी कि रिश्तेदारी में एक मौत हो गई है और उनका अंतिम संस्कार कल है जिसमें उनके परिवार के किसी को जाना है। उनके जाने के बाद हमारा कजन यह सोचकर परेशान हो रहा था कि यार कहीं उसको ही न जाना पड़े। उसने बताया कि एक बड़ा भाई बाहर गया है। ऐसे में हमने उनसे कहा कि सबसे बड़े भईया को पहले खबर कर दो फिर हमें बताओ कि आखिर तुम किसी के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं जाना चाहते हो। पहले उसने बड़े भाई साहब को खबर की, फिर उसने बताया कि उसके गले में एक ताबीज है जिसको पहनने के बाद वह कभी शमशान घाट नहीं गया। इस ताबीज के बारे में हमने जानना चाहा तो उसने बताया कि यह एक ऐसा ताबीज है जिसको पहनने के बाद उसको भूत से मुक्ति मिली है। इसके बाद उसने वह पूरा किस्सा सुनाया।



हमारे कजन जब वह भाटापारा में रहता था तब एक दिन रात को वह अपने घर की छत पर गया तो उनसे वहां पर टीवी के एंटिना के पास एक परछाई को खड़े देखा। उसके बाद से उसकी हालत खराब होने लगी। उसने बताया कि जब वह सोए रहता था तो लगता था कि कोई उसके ऊपर सवार है और जब उसकी आंखे खुलती थी तो लगता था कि वह मीलों दौड़कर आया है और पसीने-पसीने हो जाता था। यह सिलसिला काफी समय तक चला।



उसने बताया कि एक दिन वह अपने मित्र के घर पर बैठा था तो वहां एक पंडित आए थे। वे उसको बार-बार देख रहे थे और अंत में उन्होंने उससे पूछा कि क्या तुमको कोई परेशानी है। कजन ने पहले तो उनकी बात को टालने की कोशिश की लेकिन जब उन पंडित जी ने उससे साफ-साफ कहा कि उनके ऊपर किसी का साया है जो उसको लगातार परेशान कर रहा है, तब कजन ने सारी बातें उनको बताई। उसकी बात सुनने के बाद उन पंडित जी ने उसको अपने घर बुलाया और बिना कुछ लिए एक ताबीज दिया जिसको उसने गले में पहना। इस ताबीज को देते समय पंडित जी ने उसको एक ही हिदायत दी थी कि कभी शमशान घाट मत जाना, वह दिन है और आज का दिन है कजन फिर कभी किसी के अंतिम संस्कार में शमशान घाट नहीं गया। उसने बताया कि ताबीज पहनने के बाद अब कई साल हो गए है उसको वह भूत परेशान नहीं करता है। ताबीज पहनते ही उस भूत को भागना पड़ा।

यह एक सच्चाई है जो हमें कजन ने बताई है, हो सकता है इस बात पर किसी को यकीन हो और किसी को न हो। भले आज विज्ञान कितना भी आगे बढ़ गया है पर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि आज जहां एक तरफ दैवीय शक्ति है, वहीं भूत-प्रेत जैसी शैतानी शक्तियों का अस्तित्व भी है जिसको सब मानते हैं। शैतानी शक्तियों पर भारत में ही नहीं विदेशों में भी फिल्में बनती रही हैं और बनती रहेंगी। इन फिल्मों में भी तो कहीं न कहीं सच्चाई ही रहती है। ऐसे किस्से अखबारों में भी छपते रहते हैं। अब यह बात अलग है कि भूत भगाने के नाम पर कई तांत्रिक ठगी का धंधा भी करते हैं। लेकिन सच्चे साधु-संत ऐसी आत्माओं से लोगों को मुक्ति दिलाने का काम भी करते हैं। ऐसे ही एक पंडित ने हमारे कजन को भी भूत से मुक्ति दिलाई थी।

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