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गुरुवार, जुलाई 02, 2009

रंजन ने जवाब देने में फुर्ती दिखाई-पर साथ में विजेता बने विवेक भाई

प्रिंस पहेली-2 को फटाफट हल करने का कमाल अपने रंजन भाई ने दिखाया। ठीक उनके पीछे अपने विवेक सिंह जी भी लगे थे। लेकिन जिस तरह से एथलेटिक्स में दौड़ के समय दो धावकों की दौड़ में अंतिम धावक का फैसला फोटो फिनिस से होता है, उसी तरह से प्रिंस पहेली का भी फैसला फोटो फिनिस जैसा हो गया। दरअसल रंजन जी और विवेक जी ने एक ही समय पर जवाब चटकाया। आप देख सकते हैं कि दोनों का समय 9.23 का है। लेकिन यहां पर समय जरूर एक है, पर फुर्ती दिखाने में अपने विवेक भाई थोड़ा सा चूक गए। रंजन जी की टिप्पणी का चटका पहले लग गया और विवेक जी का उनके बाद में। ऐसे में पहले विजेता के रूप में रंजन जी और दूसरे विजेता के रूप में विवेक जी का नाम होना चाहिए। लेकिन हम कोई एथलेटिक्स की दौड़ नहीं करवा रहे हैं, ऐसे में हम तो रंजन जी और विवेक को संयुक्त विजेता मान रहे हैं। राजतंत्र परिवार की तरफ से हमारे इन दोनों ब्लागर भाईयों को बधाई के साथ अनगिनत शुभकामनाएं हैं कि वे ऐसे ही सवालों को हल करते रहे और विजेता बनते रहे।
अब थोड़ी की चर्चा कर ली जाए, उन मजेदार टिप्पणियों पर भी जो की गई हैं। हमारे आदरणीय समीरलाल जी यानी उडऩ तश्तरी ने सबसे पहले टिपियाते हुए कहा कि- क्या कहें..ईश्वर उसकी मदद करे कि तौल पाये. गणित यूँ भी कमजोर है इसलिये सी ए करना पड़ा वरना इंजिनियर होते.

इसके बाद आई आदरणीय निर्मला कपिला जिन्होंने कहा- राम राम सुबह सुबह इतना भारी सवाल अपने बस का नहीं और तुका् हम लगाते नहीं मगर आपको जन्म दिन की बहुत बहुत मुबारक आपके परिवार के लिये भी शुभकामनायें

गुरु ने हमेशा की तरह अपने अलग अंदाज में कहा- अरे कहां गणित के चक्कर में फंसे हैं गुरु अपना जन्म दिन मनाएं और सबको मिठाई खिलाएं

अजय जी ने समय न होने का हवाला देते हुए शाम को जवाब देने की बात कही और कहा कि- भाई फिलहाल समय नहीं है शाम को काफी -पेन लेकर बैठेंगे तो जवाब देने की कोशिश करेंगे अभी तो काम पर जाना है। चलते-चलते आपको जन्मदिन की बधाई

संगीता पुरी ने अंत में कहा कि- मेरी डायरी में भी यह पहेली और इसके जवाब लिखे हुए थे .. पर मुझसे पहले आपको हल मिल गए .. आपको जन्‍मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं ।


अपने दिनेशराय द्विवेदी ने कहा कि- आपका सवाल तो हल हो चुका! अब जन्मदिन पर बहुत बहुत बधाई।

नेहा जी से घर का काम करते हुए हल ढूंढने की बात कही, पर उनका काम समाप्त होने से पहले जवाब आ गया।


प्रिंस पहेली में ही काफी मित्रों ने हमें जन्मदिन की भी बधाई दी। ऐसा प्यार और स्नेह हमें पहले कभी नहीं मिला। हम सबके आभारी हैं।



अब अंत में उस जवाब पर नजरें दौड़ा लें जो जवाब रंजन जी ने काफी विस्तार से दिया है-
चार बाट बनाओ १, ३, ९ और २७ kg के१२ = ३-१३४ = ३+१५ = ९-३-१६ = ९-३७ = ९+१-३८ = ९-१९१०= १+९११ = ९+३-११२=९+३१३= ९+३+१और एसे ही ४० तक

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गुरुवार, जून 25, 2009

पंगेबाज बने प्रिंस पहेली के सरताज

प्रिंस पहेली का तिलस्म तोडऩे में पंगेबाज सफल रहे और वे प्रिंस पहेली के सरताज बने। हमें ऐसा लगता था कि इस पहेली का तिलस्म तोडऩे में शायद ही कोई सफल होगा। कारण साफ था आज से करीब 23 साल पहले जब हम कॉलेज में थे तो इस पहेली का हल अच्छे-अच्छे प्रोफेसर नहीं बता पाए थे। यही वजह रही कि हमने एक सप्ताह का समय दिया है, हल के लिए। चलो अच्छा है कि आज हमारी ब्लाग बिरादरी इतनी ज्यादा समझदार है कि किसी भी तिलस्म को तोडऩे में वक्त नहीं लगाती है। इस पहेली के कारण कुछ हंसी-मजाक का भी माहौल बना।


उडऩ तश्तरी के भाई समीर लाल जी ने कहा- सी बी आई का मामला दिखता है. हमारी तो यही सलाह है कि आप भी हाथ न डालो. सालों साल का चक्कर बैठ जायेगा और उपर से लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग का पंगा-पता चला पहेली के चक्कर में कोई दूसरा केस उगल आये तो अन्दर ही न हो जाओ.बात चीत करके मामला सलटा लो. कहाँ तौला ताली के चक्कर में पड़ रहे हो.

समीर लाल जी की इस बात का समर्थन किया अपने ताऊ रामपुरिया ने कहा कि- भाई जरा समीरजी की बात पर ध्यान दिया जाये.:)
अपने अनिवाश वाचस्पति ने हल करने के एवाज में एक सोने का हार ही मांग डाला। जब हमने उन्हें इससे ज्यादा कीमती प्यार और स्नेह का हार देने का ऑफर दिया तो उनका जवाब आया- मतलब चाहे जीतें पर आप देंगे हार ही फिर हम क्‍यों करें स्‍वीकार जी जीतकर पहनते तो क्‍या होता हमने हार कर पहन लिया हार जी जय हो मनता रहे रोजाना पहेलियों का त्‍योहार जी। कासिफ अरीफ ने कहा- क्या बात है आज कल सब पहेली ही पहेली पूछ रहें है...अभी मुड नही है बाद मे जवाब देंगे। और कई लोगों ने अपने-अपने अंदाज में अपनी बात कही।
गुरु ने हमेशा की तरह अपने अंदाज में कहा- बड़ी दूर की कौड़ी लाए हैं गुरु
भाई अनिल पुसदकर ने सबसे पहले यह कहते हुए किनारा कर लिया कि- तुम तो जानते हो राजकुमार गणितबाज़ी से अपन शुरू से ही दूर रहते आयें है।
वाकई अपने अनिल जी गणितबाजी से दूर ही रहने वाले प्राणी है। बहरहाल प्रिंस पहेली के कारण कुछ हंसी-मजाक का माहौल तो बना। वैसे भी हंसी की फसल आज के जमाने में उगती कहा है। और इंसान किसी को हंसाने का काम करे उससे अच्छा इंसान तो इस दुनिया में हो नहीं सकता है। चलिए फिर मौका मिला तो प्रिंस पहेली में ऐसा ही कोई सवाल फिर से दागा जाएगा और देखेंगे कि कौन तोड़ेगा उस सवाल का तिलस्म। फिलहाल तो पंगेबाज को दी जाए बधाई जिन्होंने एक सप्ताह से सस्पेंस को एक दिन में ही समाप्त कर दिया। बहुत-बहुत बधाई भाई पंगेबाज। उम्मीद है आप इसी तरह से पंगे लेते रहेंगे और मचलते रहेंगे।

चलते-चलते सही जवाब पर नजरें डाल लें जो पंगेबाज ने दिया है-

पहले सुनार का एक, दूसरे के दो, तीसरे के तीन, चौथे के चार, पांचवे के पांच, छठवे के छ्ह, सातवें के सात, आठवे के आठ नवें के नौ और दसवें के दस हार लेकर एकसाथ तौल लोकुल हार हुए 55 यानी कुल वजन होना चाहिये 550 तोला...यदि इसका वजन 549 आये तो पहला, 548 तो दूसरा, 547 तो तीसरा, 546 तो चौथा, 545 तो पांचवा, 544 तो छठा, 543 तो सातवां, 542 तो आठवां, 541 तो नवां, 540 तो दसवां सुनार बेईमान है

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बुधवार, जून 24, 2009

प्रिंस पहेली....

हम राजतंत्र के रायपुर के अंतरराष्ट्रीय चैनल से इस चैनल के मेजबान राजकुमार यानी की प्रिंस लिख रहे हैं। हम आज आपको ले जाने वाले हैं पहेली की एक ऐसी दुनिया में जिसका नाम हमने काफी सोचने के बाद प्रिंस पहेली रखा है। यह पहेली हमारी तब की धरोहर है जब हम कॉलेज में पढ़ते थे। तब हमने इस पहेली को कई लोगों के सामने रखा था, पर इसका जवाब नहीं मिल पाया था। आज जब हम ब्लाग जगत से जुड़े हैं और देख रहे हैं कि यहां पर धड़ाधड़ पहेलियों का दौर चल रहा है तो सोचा क्यों न हम भी एक ऐसी पहेली सबके सामने रखे दें जो सबके दिमाग की दही जमा दे। तो तैयार हो जाएं अपने दिमाग के घोड़ों को दौडऩे के लिए क्योंकि अब आने वाली है आपके सामने प्रिंस पहेली जिसका हल बताना आसान नहीं है। हम पहेली के हल के लिए फिलहाल एक सप्ताह का समय तय कर रहे हैं। आपको अपने दिमाग के घोड़ों को एक सप्ताह तक दौडऩा है। जब आपके दिमागी घोड़े मंजिल तक नहीं पहुंच पाएंगे तब हम बताएंगे आपको प्रिंस पहेली का हल। तो चले सवाल की तरफ....हमारा सवाल है...

हमें सोने के 100 हार बनवाने हैं।

हर हार होगा 10-10 तोले का।

हमें हार चूंकि जल्द चाहिए ऐसे में हम हार एक सोनार के स्थान पर 10 सोनारों को बनाने देते हैं।

एक-एक सोनार को दिए जाते हैं 10-10 तोले के 10-10 हार बनाने के लिए।

लोचा तब होता है जब हारों की डिलवरी के एक दिन पहले पता चलता है कि एक सोनार चोरी कर रहा है और 10 की बजाए 9-9 तोले के हार बना रहा है।

अब आपको उस चोर को पकडऩा है। चोर को पकडऩे के लिए हर सोनारे के हारे तौलने से ही चोर को पकडऩे का आसान तरीका है। लेकिन चोर को पकडऩे के लिए आपको हारों को एक बार तोलकर ही उस चोर को पकडऩा है। याद रहे तोल सिर्फ एक बार होगी। और हारों को तोलना भी जरूरी है। अब आपको बताना यह है कि किस तरह से मात्र एक बार तोलकर चोर को पकड़ा जा सकता है।

तो शुरू हो जाए अपने दिमाग के घोडों को दौडऩे के लिए।

हमें इंतजार रहेगा आपके जवाबों का ।

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