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सोमवार, मार्च 30, 2009

हिन्दुत्व की बात करना यहां अपराध है जनाब

अपने भारत देश में जहां सबसे ज्यादा संख्या हिन्दुओं की है, उस देश में लगता है हिन्दुत्व की वकालत करना ही अपराध है। अगर कोई ऐसा करने की हिमाकत करता है तो उसका हश्र वरूण गांधी जैसा होता है। अगर ऐसा होता है तो इसके पीछे कानून नहीं बल्कि वह गंदी राजनीति है जिसमें हर विपक्षी दल दूसरे दल के नेताओं को फंसाने का मौका तलाशता रहता है। ऐसा ही एक मौका वरूण गांधी ने उप्र की सत्ता में बैठी मायावती की सरकार को दे दिया। वास्तव में वरूण ने ऐसा कोई अपराध नहीं किया था जिसके कारण उन पर रासुका लगाने का काम किया गया है। अगर वरूण पर रासुका लगाया गया तो फिर उन तमाम लोगों पर भी रासुका लगाने की हिम्मत दिखानी चाहिए जिन्होंने वरूण से ज्यादा न सिर्फ भड़काऊ बयान दिए हैं, बल्कि हत्या तक करने की बात कही है। ऐसे लोगों को इसलिए छोड़ दिया गया है क्योंकि वे अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और ये समुदाय जहां वोट बैंक है, वहीं इन पर हाथ डालने की हिम्मत कोई इसलिए नहीं करता है क्योंकि इनके पीछे पाकिस्तान जैसा वह आका बैठा है जिसके हाथ में पूरे विश्व में आतंकवाद फैलाने का ठेका है। देश में इस समय लोकसभा चुनाव की बयार बह रही है। और इस बयार के बीच अचानक वरूण गांधी के नाम की आंधी पूरे देश क्या विश्व में चलने लगी है। वरूण पर एक बयान को लेकर रासुका लगाने का काम किया गया है और देश के इस युवा नेता को जेल भेज दिया गया है। वरूण पर आरोप यह है कि उन्होंने भड़ाकाऊ बयान देने का काम किया है। सोचने वाली बात है कि क्या वास्तव में वरूण का बयान ऐसा था कि जिससे देश में दंगे फैल सकते थे। इस बयान को भड़काऊ कहने वालों की अक्ल पर तरस आता है। अगर एक हिन्दु अपने धर्म के प्रति आस्था रखता है और उस धर्म पर उंगली उठाने वाले की उंगली काटने की बात कहता है तो क्या गलत करता है। यहां पर इस बात को इस तरह से समझने की जरूरत है कि अगर कोई आपके घर पर हमला करेगा तो क्या आप तमाशा देखते रहेंगे, क्या आप उस हमला करने वाले को नेस्तोनाबूत नहीं करना चाहेंगे? वरूण ने भी जो कहा उसके पीछे भी बस यही अवधारणा थी कि हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई हमारे घर को तोडऩे का काम करे। इसमें कोई दो मत नहीं कि हिन्दुओं को कमजोर मानकर उनको तोडऩे का काम बरसों से किया जा रहा है। अब इसमें हमारे इस कौम की कमजोरी है कि हम दूसरों के बहकावे में आ जाते हैं, अगर हम दूसरों के बहकावे में आने वाले नहीं होते तो हमारा सोने की चिडिय़ा समझा जाने वाला यह देश अंग्रेजों का गुलाम नहीं होता और आज भी देखा जाए तो केन्द्र में बैठी सरकार के कारण एक तरह से देश अमरीका का गुलाम है। अमरीका के चाहे बिना भारत में पत्ता नहीं हिलता है। याद करें हम देश में हुए आतंकी हमलों को जिन हमलों में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत होने के बाद सरकार सिर्फ और सिर्फ यह कहती रही कि इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। भारत आज तक पाकिस्तान का क्या कर पाया है। इस मामले में पहले अमरीका ने भारत का साथ दिया, फिर पाकिस्तान जाकर अमरीकी मंत्री का सुर ही बदल गया। अगर भारत के स्थान पर पाकिस्तान में कोई आतंकी हमला होता और इसके पीछे भारत का हाथ होने का सबूत नहीं बल्कि पाकिस्तान को शक मात्र होता तो पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया होता। बहरहाल इस समय यह बहस का मुद्दा नहीं है, यह वक्त है वरूण गांधी पर चर्चा का। वरूण पर रासुका लगाने वालों को रासुका लगाने की इतनी ही हिम्मत है तो मप्र के उन विधायक किशोर समीरते पर रासुका लगवाएं जिन्होंने खुले आम राज ठाकरे की हत्या करने के लिए एक करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था। इसी तरह से याकूब कुरैशी ने सलमान रुशदी की हत्या की बात करते हुए उनके वजन के बराबर सोना देने की बात कही थी। इनका अपराध किसी को बड़ा नहीं लगता हो तो जरा इस बयान पर गौर फरमा लें जिनमें भारत माता को डायन कहने का साहस आजम खां ने किया था। क्या देश ने नेताओं का खून सूख गया है या फिर पानी हो गया है जो भारत माता को डायन कहने वाले पर रासुका लगाने की हिम्मत नहीं कर पाए और उल्टे उसको चुनाव तक लडऩे की इजाजत है। भारत माता को डायन कहने वाले का कुछ न कर पाने वाले नेताओं को क्या चुनाव लडऩे का अधिकार है या फिर देश में रहने का अधिकार है। जो अपने मां की रक्षा नहीं कर सकता है उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। अरे गर्व होना चाहिए हर हिन्दु को वरूण गांधी के बयान पर जिसमें उन्होंने कम से कम अपने धर्म पर उंगली उठाने वालों की उंगली काटने की बात कहने का साहस तो किया है। वरूण के इस बयान को हर भारतीय युवा सलाम करता है। इसी के साथ उनकी उस हिम्मत को भी सलाम है जिसमें उन्होंने खुद से होकर जेल जाने का साहस दिखाया। वरना उनके खिलाफ कोई वारंट नहीं था जो उनको गिरफ्तार किया जाता, लेकिन देश के कानून में आस्था रखने वाले इस युवा के साथ कानून ने नहीं बल्कि कानून को अपने हाथ का खिलौने बनाने वालों ने विश्वासघात किया है। लेकिन शायद वे भूल गए हैं कि उनका यह कदम उनके लिए धातक होगा। देश का हर युवा आज सिर्फ और सिर्फ वरूण गांधी के साथ है। और हो भी क्यों न उन्होंने काम ही ऐसा किया है कि आज देश का हर युवा उनका मुरीद हो गया है। निश्चित ही वरूण गांधी की एक ऐसी आंधी चलेगी जिसमें हिन्दुओं को कमजोर समझने वाले उड़ जाएंगे। वरूण ने जिस मकसद के साथ जेल जाने का काम किया है, उनका मकसद जरूर कामयाब होगा।

12 टिप्पणियाँ:

गुस्ताख़ सोम मार्च 30, 03:53:00 pm 2009  

हिंदुत्व की बात करने और उस पर घातक प्रतिक्रियाओं पर आपकी चिंता जायज़ है लेकिन हिंदुत्व का मतलब किसी का हाथ काट लेना नहीं है। अचानक हिंदु प्रेम उमड़ने पर आपको शक नहीं होता?

Suresh Chiplunkar सोम मार्च 30, 05:02:00 pm 2009  

बहुत खूब लिखा राजकुमार भाई, दर-असल देश इस समय छः "म" के चक्कर में फ़ँसा हुआ है, मिशनरी-मार्क्स-मुल्ला-मैकाले-माइनो-मीडिया और ये सभी के सभी हिन्दुओं के घोर विरोधी है…

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi सोम मार्च 30, 07:36:00 pm 2009  

इन में हिन्दुत्व की बात कौन कर रहा है? केवल उसे औजार बना रखा है। इन में से एक भी यदि हिन्दुत्व को समझता तो वह नहीं करता जो कर रहा है।

निशाचर सोम मार्च 30, 08:29:00 pm 2009  

गुस्ताख साहब, वैलेनटाइन डे , फादर्स डे, मदर्स डे के नाम पर जब अचानक प्रेमी -प्रेमिका, पिता, माता आदि के लिए मैकाले के वंशजों का प्रेम का परनाला फूट निकलता है तो फिर नवरात्रों में हिन्दुओं के हिंदुत्व प्रेम पर आपको ऐतराज क्यों??

बेनामी,  सोम मार्च 30, 09:24:00 pm 2009  

Guskhaat,

Aapki gustaakhi maafee ke kaabil nahin hai.
Hindu hone kaa yeh matalab nahin ki haath par haath dhar baithe rahen. Hindu dharm aur isake logon par yadi haath uthaa to use kaatane ko ham taiyaar hain.

Anil Pusadkar मंगल मार्च 31, 12:10:00 am 2009  

बहुत अच्छे राजकुमार।लिखते रहो।

paricharcha मंगल मार्च 31, 07:00:00 am 2009  

आखिर ऐसी बात किस सन्दर्भ में कही गयी. किसी ने डराया, धमकाया क्या? जो वरुण कर रहे हैं वह गलत है चुनाव के समय ऐसी भाषणों से वह हिन्दुओं का विश्वास जीतना चाहते हैं तो क्या बुरा हुआ कि उन्हें परेशान किया जा रहा है.

वो हमें बेवकूफ बना रहे थे अभी कोई उनको बकरा बना गया.

बवाल मंगल मार्च 31, 11:36:00 am 2009  

हिदुत्व की बात हिन्दुत्व के लहजे में की जाए तो अपराध नहीं है।

dhiru singh {धीरू सिंह} मंगल मार्च 31, 12:50:00 pm 2009  

किस वरुण की बात मे वक्त जाया कर रहे हो भाई ,वह तो कह रहा है उसने ऐसा कुछ कहा ही नहीं जो हमने सुना वह उसकी आवाज़ ही नहीं है .

बेनामी,  मंगल मार्च 31, 01:25:00 pm 2009  

ओये गजब!
धीरू सिंह भाई यहां वक्त जाया करने के लिये मना कर रहे हैं और अपने दरबार वरुण की बात में खुद के साथ साथ औरों का भी वक्त जाया कर रहे हैं..

शायद राजकुमार भाई की नासमझी आपकी समझ से अलग है इसलिये!

RAJIV MAHESHWARI मंगल मार्च 31, 04:39:00 pm 2009  

जे हो वरुण भइया की.

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif गुरु जुल॰ 16, 08:42:00 am 2009  

मैं दिनेश जी से सहमत हूं... पहली बात हिन्दु कोई धर्म नही है सिर्फ़ "सनातन" धर्म है!

और ये लोग जो हिन्दुत्व की बात करते है वो सिर्फ़ हिन्दुस्तानियों की भावनाओं से खिलवाड करते है...

वरुण को हिन्दुत्व का खयाल सिर्फ़ इलेक्शन से पहले ही आया ....उससे पहले तो उनको कभी कुछ कहते नही सुना!

उनके बडे होने के बाद से कितनी घट्नायें और दुर्घट्नायें हो चुकी है जिसमें हिन्दु लोगो की जानें गयी तब ये कहां थे इन्होने तो कोई "शोक सन्देश" भी जारी नही किया

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