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सोमवार, नवंबर 08, 2010

हमारा एक ब्लाग शहीद होते-होते बचा

कल का दिन हमारे लिए बहुत खराब रहा। सुबह को उठते ही मालूम हुआ कि कम्प्यूटर पाजी का दम निकल गया है। कम्प्यूटर में जान डाली तो मालूम हुआ कि हमारा एक ब्लाग खेलगढ़ शहीद हो गया है। उसको बड़ी मुश्किल से रात को शहीद होने से बचाया गया। इस बीच हमने उसकी तलाश करने के लिए ललित शर्मा जी की भी मदद ली। वे भी लगे हुए थे इसकी तलाश करने में।
रविवार को कल छुट्टी का दिन था। कल ही हमारे एक सांझा ब्लाग ब्लाग चौपाल में 150 वीं पोस्ट लिखनी थी। सुबह को सोचकर उठे कि इसमें कुछ नया करेंगे। लेकिन जब कम्प्यूटर को चालु किया तो मालूम हुआ कि उनका तो दम ही निकल गया है। बहुत कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। विंडो करप्ट हो गया था। ऐसे में हमने अपने कम्प्यूटर के एक डॉक्टर मित्र को फोन लगाया, वे नहीं मिले हमने दूसरे मित्र को फोन लगाया, वे मिल गए। हम उनको घर लेकर आए और प्रारंभ हुआ हमारे कम्प्यूटर का परीक्षण। हमारे मित्र ने कोशिश की कि विंडो रिपेयर हो जाए ताकि हमारा डाटा बचा रहे, लेकिन कम्प्यूटर महाशय थे कि रिपेयर होने का नाम ही नहीं ले रहे थे, ऐसे में उनके पास भी कम्प्यूटर को फारमेड करने के अलावा कोई चारा नहीं था। उन्होंने फारमेड किया तो इसमें तीन घंटे का समय लग गया। एक बजे जाकर कम्प्यूटर ठीक हुआ। इसके बाद हम उनको छोडऩे गए और आकर सबसे पहले हमने ब्लाग चौपाल सजाने का काम किया। इसके बाद राजतंत्र में एक पोस्ट लिखी।
अब जब  खेलगढ़   की बारी आई तो मालूम हुआ कि वह खुल ही नहीं रहा है। हमने बहुत कोशिश की, मगर सफल नहीं हुए। कम्प्यूटर से बार-बार एक ही जवाब मिल रहा था कि या तो हमारा यूजर नेम गलत है या फिर पासवार्ड। लेकिन हमें लगा रहा था कि दोनों सही है। समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या कारण है जो ब्लाग नहीं खुल रहा है। हमने सारी कोशिश करके देख ली और अंत में जब सफल नहीं हुए तो हमने ललित शर्मा जी को फोन लगाया और उनको यूजर नेम और पासवार्ड बताकर कहा कि आप अपने कम्प्यूटर में जरा कोशिश करके देखें। उनको भी सफलता नहीं मिली। वे कोशिश करते रहे कि किसी भी तरह से मालूम हो जाए कि किस वजह से ब्लाग नहीं खुल रहा है। इधर हम भी कोशिश में थे। हमने कम्प्यूटर में सारे ड्राइव खंगाल डाले तब जाकर हमें वह फाइल मिली जिस फाइल में यूजर नेम और पासवार्ड थे। हम यूजर नेम गलत लिख रहे थे जिसकी वजह से ब्लाग नहीं खुल रहा था। हमने तत्काल ललित जी को खुशखबरी सुनाई की ब्लाग खुल गया है। उन्होंने भी राहत की सांस लेते हुए हमें बधाई दी। वरना हमने तो सोच लिया था कि हमारा एक ब्लाग शहीद हो गया। लेकिन फाइल मिलने से वह बच गया। वैसे ललित जी ने हमें आश्वासन दिया था कि हमारा ब्लाग वे शहीद होने नहीं देंगे। अगर यह ब्लाग शहीद हो जाता तो हमारे डेढ़ साल की मेहनत पर पानी फिर जाता।

8 टिप्पणियाँ:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra सोम नव॰ 08, 09:09:00 am 2010  

निश्चिन्त रहिये ग्वालानी जी, आपका कम्प्युटर यदि जलकर राख भी हो जायेगा (भगवान न करे कभी ऐसा हो) तो भी आपके ब्लौग का बाल बांका नहीं होगा क्योंकि ब्लौग आपके कम्प्युटर में नहीं रहता.

बी एस पाबला सोम नव॰ 08, 10:29:00 am 2010  

चलो, ठीक हुआ
अपनी मेहनत भी बच गई

Arshad Ali सोम नव॰ 08, 07:06:00 pm 2010  

Sir,
mehnat ke kamaya dhan..jaaya nahi hota.
sabki khusi ka khayaal rakhne waala man...dukhi nahi hota.
pasine se sicha gaya chaman...sukhta nahi.
Aap jaisa blooger...thodi pareshani se jhukta nahi.

Khushi hui yee jaan kar ki aapne apne blog ko bacha liya..

naya post dala hay aapki nazar pade to...himmat badhegi.

regards

Arshad Ali सोम नव॰ 08, 07:10:00 pm 2010  

Ek baat aur kahna chahunga aapka blog
AMAR hay..tiqniki tor par thoda pareshan kar jaaye to chinta fikr not..khulega zarur..bas taale ki chaabhi sambhal kar rakhiye..

संगीता पुरी सोम नव॰ 08, 07:32:00 pm 2010  

कंप्‍यूटर में यूजर नेम और पासवर्ड सेव रहने के कारण बहुत दिनों तक हमें इसकी जरूरत नहीं होती है .. इस कारण अक्‍सर हमें इसकी याद नहीं रहती .. कंप्‍यूटर फोरमैट होने के बाद सबकुछ नए सिरे से डालना पउता है .. जिसके कारण अक्‍सर समस्‍या हो जाती है .. वैसे तो ब्‍लॉग इंटरनेट में सुरक्षित होता है .. फिर भी अपने सभी ब्‍लॉग का बैकअप रखा करें !!

ali सोम नव॰ 08, 07:54:00 pm 2010  

निशांत मिश्र जी की बात में दम है :)

Udan Tashtari मंगल नव॰ 09, 07:24:00 am 2010  

ईश्वर का और ललित जी लाख लाख शुक्रिया.

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