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मंगलवार, नवंबर 09, 2010

दस रुपए में खेलना, खाना और रहना

एक खिलाड़ी के खाते में महज दस रुपए ही आने हैं और इतने पैसों में ही खिलाड़ी के रहने के साथ खाने की व्यवस्था करनी है और उसे खेल में भी शामिल होना है। यह स्थिति बनी है खेल विभाग के उस बजट से जो बजट छत्तीसगगढ़ ओलंपिक के लिए जिलों को दिया गया है। इस बजट को खेल बिरादरी हास्याप्रद बजट मान रही है क्योंकि इतने बजट में आयोजन का होना संभव नहीं है। खेल विभाग ने एक खेल के लिए २० हजार का ही बजट दिया है और कई खेल ऐसे हैं जिनमें ५०० खिलाड़ी आने तय है।
छत्तीसगढ़ ओलंपिक में जिलों में जिन खेलों का आयोजन होना है, उन खेलों के लिए खेल विभाग ने हर खेल के हिसाब से बजट तय किया है। एक खेल के लिए २० हजार का बजट रखा गया है। इस बजट को सभी जिलों में ऊंठ के मुंह में जीरा माना जा रहा है। कारण साफ है इतने कम बजट में एक खेल का आयोजन कम से कम उन बड़े जिलों में होना संभव नहीं है जिन जिलों में १० से ज्यादा विकासखंड हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी में इस समय रायपुर जिला है जिस जिले में १५ विकासखंडों के साथ राजधानी के खिलाड़ी भी खेलने आने वाले हैं। रायपुर के आयोजन में कम से कम ३३ सौ खिलाडिय़ों के आने की संभावना है। इस लिहाज से यह बजट बहुत कम है।
खेलों के एक जानकार ने एक खेल कबड्डी का ही उदाहरण देते हुए बताया कि इस देशी खेल में यह बात तय है कि २० पुरुष और १५ महिला वर्ग की टीमें खेलने आएंगी। इन टीमों में कुल मिलाकर कर ५०० खिलाड़ी हो जाएंगे। अब २० हजार के बजट को बाटा जाए तो एक खिलाड़ी के खाते में ४० रुपए आते हैं और ये रुपए चार दिन के आयोजन के लिए होंगे। यानी एक दिन के लिए एक खिलाड़ी को महज १० रुपए मिलने हैं और इतने पैसों में खिलाड़ी के रहने और खाने का इंतजाम करना है। इसी के साथ उस खिलाड़ी को खेलना है। अगर रायपुर जिले के ३३ सौ खिलाडिय़ों के लिए दिए जा रहे तीन लाख के बजट की बात की जाए तो इस बजट के हिसाब से एक खिलाड़ी के खाते में ९० रुपए आते हैं। एक दिन के लिए २२ रुपए २५ पैसे होते हैं। अब यहां पर अगर खेल विभाग के उस फरमान को देखते हुए जिसमें कहा गया है कि हम १५ खेलों के आयोजन के लिए बजट दे रहे हैं तो इन खेलों में ही १७ सौ खिलाड़ी आएंगे। अब इनते खिलाडिय़ों में तीन लाख का बजट विभाजित किया जाए तो एक खिलाड़ी के खाते में १७६ रुपए आते हैं। एक दिन के ४४ रुपए होंगे। इतने रुपयों में भी एक खिलाड़ी के लिए एक दिन के रहने और खाने की व्यवस्था करना संभव नहीं है। खेल विभाग के बजट को लेकर हर जिले में खेल अधिकारी और खेल संघों से जुड़े लोग परेशान हैं, पर कोई कुछ कह नहीं पा रहा है।
बजट का आधार पायका
इतने कम बजट के बारे में खेल संचालक जीपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह बजट पायका योजना को आधार बनाकर तय किया गया है। पायका में ही विकासखंडों में एक खेल के लिए दस हजार और जिला स्तर के आयोजन के लिए २० हजार देने का प्रावधान है।

3 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा मंगल नव॰ 09, 09:07:00 am 2010  

और इस 10 रुपए में अपने लिए भी बचाना है आयोजकों को शाम की पार्टी के लिए।
मैनेजमैंट इनसे ही सीखना चाहिए।

निर्मला कपिला मंगल नव॰ 09, 10:21:00 am 2010  

10 रुपये मे सारा इन्तजाम? इस पर मुझे एक पंजाबी गीत याद आ गया शायद सरकार ने उसे सुन कर ही ये फैसला लिया है
" मेला हो वसाखी दा
लै जाई इक पैसा
हरीयाँ बोतलाँ
पीलियाँ बोतलाँ
काके दा छनकना
मेरियाँ चूडियाँ
अपनी बाँसुरी
रख के गड्डी विच
धर के गड्डी विच
आप गड्डी चढ आईयो जी
इक पैसा
धेला मोड लिआईयो जी
इक पैसा
{ अर्थाक एक पैसा ले जाना उसमे हरी पीली बोतलें काके का खिलौना मेरी चूडियाँ , अपनी बाँसुरी ले कर गाडी मे चडः कर आना फिर भी एक धेला वापिस लेते आना।}
शायद खिलाडिओं को भी इसी तरह की हिदायत हो। शुभकामनायें।

ali मंगल नव॰ 09, 03:08:00 pm 2010  

खिलाडियों के साथ मजाक ही है !

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