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रविवार, नवंबर 28, 2010

अबे ये चिट्ठा जगत क्या है?

हमारे एक मित्र ने अचानक हमसे कल पूछा लिया कि अबे ये चिट्ठा जगत क्या बला है जिसके पीछे तू नहा धोके पड़ा है। मैंने तेरे ब्लाग में अभी दो बार उसके बारे में पढ़ा है। मेरी तो समझ में कुछ आया नहीं कि आखिर माजरा क्या है।
हमने अपने उस मित्र को बताया कि यार चिट्ठा जगत एक एग्रीगेटर है जो ब्लागों को अपने एग्रीगेटर में स्थान देता है और साथ ही रेटिंग भी देता है।
तो इससे क्या हुआ?
अबे हुआ कुछ नहीं, साले तुझे सब कुछ विस्तार से समझाने पर ही समझ आएगा, वरना तू हमारा भेजा खाते रहेंगे। तो सुन जब किसी के ब्लाग की किसी पोस्ट की चर्चा दूसरे ब्लाग में होती है तो उससे उस ब्लाग का हवाला बढ़ता है।
मित्र से बीच में टोका साले लगता है कि इसी हवाले के चक्कर में लोग ब्लाग लिखते हैं।
हमने कहा साले उल्टी खोपड़ी, जब भी सोचेगा उल्टा ही सोचेगा। बेटा ये वो हवाला नहीं है जो तू सोच रहा है। ये हवाला ब्लाग की रेटिंग तय करने वाला है।
अबे चाहे ब्लाग की रेटिंग तय हो या फिर पैसों की क्या फर्क पड़ता है, हवाला तो हवाला होता है। आखिर इससे भी तो कुछ हो ही रहा है न।
हमने कहा कि अबे सुनना है तो सुन नहीं तो साले भाड़ में जा।
हमारे मित्र ने कहा कि चल ठीक है, बता।
हमने उसे बताया कि हवालों और प्रविष्ठियों (प्रविष्यिां उसे कहा जाता है जो किसी ब्लाग के पोस्ट की चर्चा दूसरे ब्लाग में होती है) के कारण ही चिट्टा जगत किसी भी ब्लाग की रेटिंग तय करता है। इसी से साथ और कुछ बातें भी रेटिंग तय करने में शामिल हैं। हमने जब से ब्लाग जगत में कदम रखा है, हमारे साथ एक बार नहीं कई बार ऐसा हुआ है कि हमारे ब्लाग के हवाले और प्रविष्ठियां गायब हो जाते हैं।
मित्र ने कहा- गायब हो जाते हैं का क्या मलतब है।
हमारा मतलब है कि चिट्टा जगत में वे किसी भी कारणवश नहीं जुड़ पाते हैं। ऐसे में हमें लगा कि कुछ गड़बड़ है इसलिए हमें चिट्ठा जगत के बारे में लिखना पड़ा। अब तू तो जानता है कि जब हम दूसरों के अन्याय के खिलाफ लड़ जाते हैं तो अपने साथ हो रही किसी गलत बात का विरोध न किया जाए तो गलत है न।
हमारे मित्र ने कहा- अबे तेरी बात ठीक तो है, पर एक बात बता तूझे रेटिंग में आगे-पीछे होने से क्या मिल जाएगा, क्या उससे तेरे को कोई हवाला मिल जाएगा। (हमारे मित्र के कहने का मतलब था कि क्या कोई फायदा हो जाएगा)
हमने कहा यार ऐसी कोई बात नहीं है।
उसने कहा- फिर क्यों किसी के पीछे पड़ा है। तू साले अपने लेखन पर ध्यान दे, क्यों कर ऐसे किसी चिट्ठा, विट्ठा जगत के बारे में सोचता है।  ये सब फालतू समय खराब करने के अलावा कुछ नहीं है। जब देखो कहता है कि तेरे पास समय नहीं, फिर से क्या है? समय है तभी तो फालतू में किसी के पीछे पड़ा है। मेरी मान तो वो जो भी जगत है जो कर रहा है, उसे करने दे तू अपना काम करें। अबे कदर करने वाले तेरे लेखन की कदर करेंगे और तूझे पढऩे वाले पढ़ेंगे ही फिर चाहे चिट्टा जगत हो या कोई भी जगत उसमें तेरी रेटिंग हो या न हो। अब तू बता कि तेरा ब्लाग हम लोग (हमारे मित्र मंडली) क्यों पढ़ते हैं, जबकि हम लोगों को इस साले ब्लाग-वाग से कुछ लेना-देना नहीं है। ऐसे ही जिनको तेरी लेखनी पसंद है, वे तेरा ब्लाग पढ़ते हैं, तू अपने पाठकों और प्रशंसकों के बारे में सोचा कर और उनको क्या अच्छा पढऩे के लिए दे सकता है, इस पर ध्यान लगाया कर, फालतू की बातें आज से बंद, ये मेरा ही नहीं हमारी मित्र मंडली का आदेश है, समझा कि नहीं।
हमने कहा ठीक है जहां-पनाह अब से ऐसा ही होगा।

3 टिप्पणियाँ:

अजय कुमार झा रवि नव॰ 28, 09:37:00 am 2010  

हमें भी अपनी मित्र मंडली में घुसा हुआ माना जाए राज भाई

Akhtar Khan Akela रवि नव॰ 28, 12:00:00 pm 2010  

jnaab aek aek gyaarh yani hm bhi aapke sath hen . akhtar khan akela kota rajsthan

ali रवि नव॰ 28, 07:09:00 pm 2010  

आप मस्त रहिये ! ये सारी चिंता क्यों करना ?

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