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शनिवार, नवंबर 20, 2010

उत्कृष्ट खिलाड़ी निराश, नौकरी की नहीं आश

प्रदेश के ७० उत्कृष्ट खिलाडिय़ों में घोर निराश आ गई है। इन खिलाडिय़ों को एक साल होने के बाद भी अब तक नौकरी नहीं मिल पाई है। अब तो इनकी आश टूट सी गई है। खिलाड़ी जब भी अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और खेलमंत्री लता उसेंडी के पास जाते हैं तो उनको सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिलता है। निराशा से घिरे कई खिलाडिय़ों ने तो उत्कृष्ट खिलाड़ी के प्रमाणपत्र वापस करने का मन बना लिया है। ये खिलाड़ी साफ कहते हैं कि ऐसे प्रमाणपत्र का हम क्या करें जिसके मिलने के एक साल बाद भी हम सब नौकरी के लिए भटक रहे हैं।
प्रदेश के खेल विभाग ने पिछले साल  प्रदेश के ७० उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के हाथों उत्कृष्ट खिलाड़ी होने के प्रमाणपत्र दिलवाए थे। इन प्रमाणपत्रों के मिलने के बाद खिलाड़ी बहुत खुश थे, कि अब उनका भविष्य सुरक्षित हो गया है और उनको जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन खिलाडिय़ों का ऐसा सोचना उनका भ्रम साबित हुआ और उनका यह भ्रम बहुत जल्दी तब टूट गया जब उनको प्रमाणपत्र मिलने के बाद मालूम हुआ कि अभी तो नौकरी के लिए नियम ही नहीं बने हैं। लगातार कोशिशों के बाद और मीडिया के सामने अपना दुखड़ा रोने के बाद जब मीडिया ने इस बात को लगातार प्रकाशित किया कि उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को नौकरी देने के नियम बनने में इतना विलंब क्यों हो रहा है, तब जाकर बड़ी मुश्किल से नियम बने। अब जबकि नियम बने ही करीब चार माह हो गए हैं तो भी खिलाडिय़ों को नौकरी नहीं मिल पा रही है।
खेल विभाग से भी टूटी उम्मीद
नौकरी के नियम बनने के बाद खिलाडिय़ों के लिए सबसे पहले नौकरी के दरवाजे खोलने का काम खेल विभाग ने किया था। खेल विभाग ने अगस्त में खिलाडिय़ों से आवेदन मंगवाए थे। ऐसे में खिलाडिय़ों को लगा था कि चलो देर से ही सही अब उनके अच्छे दिन प्रारंभ होने वाले हैं। लेकिन इसके पहले की खेल विभाग में किसी खिलाड़ी को नौकरी मिलती यह बात सामने आई कि खेल विभाग का सेटअप ही मंजूर नहीं हुआ है। जिसे खेल विभाग ने मंजूरी समङा लिया था वह दरअसल में सहमति थी। ऐसे में खेल विभाग वापस २००२ के सेटअप में आ गया। इस सेटअप में तो ज्यादा पद खाली नहीं हैं। वैसे इस बारे में खेल संचालक जीपी सिंह कहते हैं कि जितने पद खाली होंगे उतने पदों पर उत्कृष्ट खिलाडिय़ों की नियुक्ति की जाएगी। हमने सभी आवेदन मंजूरी के लिए खेल मंत्रालय को भेज दिए हैं। खिलाड़ी सवाल करते हैं कि नियुक्ति की जाएगी वह तो ठीक है, लेकिन नियुक्ति आखिर होगी कब?
दूसरे विभाग में पत्र ही नहीं गया
उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को पुलिस, वन, शिक्षा, आदिमजाति और कल्याण विभाग के साथ जिन भी विभागों में आवेदन करने के लिए खेल विभाग ने कहा है उन विभागों के बारे में खिलाड़ी बताते हैं कि वहां तो उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को नौकरी देने के नियमों वाला पत्र ही नहीं पहुंचा है। कई खिलाडिय़ों ने पुलिस के साथ वन विभाग और शिक्षा विभाग में भी आवेदन किए हैं लेकिन इनको वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
आश्वासन का हम क्या करें
खिलाड़ी बताते हैं कि वे अपनी नौकरी की फरियाद लेकर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ खेलमंत्री लता उसेंडी से भी कई बार मिल चुके हैं। लेकिन इनके पास से सिवाए आश्वासन के हमें कुछ नहीं मिलता है। खेलमंत्री लता उसेंडी से कई खिलाड़ी राज्य महिला खेलों के समापन में मिली थीं और उनसे पूछा था कि मैडम हमें नौकरी कब मिलेगी। खेलमंत्री ने इन खिलाडिय़ों से कहा कि एक-दो दिन में देखते है क्या कर सकते हैं। ऐसा ही जवाब हमेशा खिलाडिय़ों को मिलता है, लेकिन होता कुछ नहीं है। खिलाड़ी बार-बार एक ही सवाल करते हैं आखिर हमारी गलती कहां है? क्या हम लोगों ने राज्य और देश के लिए खेलकर गलती की है? खिलाड़ी साफ कहते हैं कि अगर सरकार नौकरी नहीं दे पा रही है तो ऐसे प्रमाणपत्रों का हम क्या करेंगे। कई खिलाडिय़ों ने प्रमाणपत्र वापस करने की भी मानसिकता बना ली है।

2 टिप्पणियाँ:

ali शनि नव॰ 20, 10:41:00 am 2010  

प्रतिभाओं को वक़्त पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए !

अशोक बजाज रवि नव॰ 21, 06:11:00 am 2010  

कार्तिक पूर्णिमा एवं प्रकाश उत्सव की आपको बहुत बहुत बधाई !

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