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गुरुवार, अगस्त 11, 2011

खेल संघों की रुचि ही नहीं मदद लेने में


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल के बाद भी खेल संघों की रुचि उद्योगों से मदद लेने की नजर नहीं आ रही है। 32 खेल संघों में से महज तीन खेल संघों ने ही अब तक मदद लेने के लिए गोद लेने वाले उद्योगों को योजना बनाकर दी है। इनमें से प्रदेश तैराकी संघ को ही भिलाई स्टील प्लांट से 15 लाख की मदद मिली है।
खेल संघों को उद्योगों को गोद दिलाए हुए चार माह का समय हो गया है। इतना समय होने के बाद भी खेल संघों में से कुछ संघों को छोड़कर बाकी संघ चुप बैठ गए हैं। खेल संघों की रुचि न होने के कारण ही उद्योग भी शांत हैं और संघों को मदद नहीं मिल पा रही है। छत्तीसगढ़ की मेजबानी में होने वाले राष्ट्रीय खेलों को देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के खेल संघों को अलग-अलग उद्योग समूहों को गोद दिलाने का काम 13 मार्च को किया था। इस बैठक में ही यह तय किया गया था कि खेल संघों को गोद लेने वाले उद्योग के एक प्रतिनिधि को जहां संघ में उपाध्यक्ष बनाया जाएगा, वहीं संघ को पूरी योजना बनाकर देनी होगी, तभी उनको मदद मिल सकेगी। इस योजना में इस बात का पूरा विवतण होना चाहिए कि वे किस मद में क्या खर्च करेंगे। मसलन प्रशिक्षण शिविर पर, बाहर से बुलाए जाने वाले प्रशिक्षक पर, खेल सामानों पर और अन्य जो भी खर्च खेल संघ करना चाहते हैं उसका पूरा बजट बनाकर देना होगा।
इन शर्ता के बाद चार माह में अब तक महज तीन खेल संघों ने ही योजना बनाकर उद्योगों को देने के साथ इसकी प्रति खेल विभाग में दी है। जिन संघों ने योजना बनाकर दी है, उसमें तैराकी, हैंडबॉल और तलवारबाजी शामिल हैं। इन तीन संघों में से तैराकी संघ को ही भिलाई स्टील प्लांट से मदद मिली है। बाकी संघों को कोई मदद नहीं मिल सकी है। उद्योगों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष बनाने वाले संघों में वालीबॉल का नाम भी शामिल हैं। संघ के मो. अकरम ने बताया कि संघ ने हीरा ग्रुप के विनोद पिल्ले को उपाध्यक्ष बना दिया है और इस उद्योग ने 35 लाख रुपए देने के लिए मंजूरी भी दे दी है। उन्होंने बताया कि उनके संघ ने अभी योजना नहीं दी है, जिलों से योजना मंगाई गई है, अभी चार जिलों से ही योजना मिली है, बाकी जिलों से योजना आने पर पूरी योजना का विवरण दिया जाएगा।  हैंडबॉल संघ के बशीर अहमद खान ने बताया कि हमने पूरी योजना बनाकर एनएमडीसी को दे दी है। तलवारबाजी संघ ने लाफार्ज को 35 लाख की योजना बनाकर सौंपी है।
योजना के बिना मदद संभव नहीं: खेल संचालक
खेल संचालक जीपी सिंह का कहना है कि किसी भी खेल संघ को बिना योजना के मदद मिलना संभव नहीं है। जो उद्योग लाखों रुपए की मदद करेगा, उसे यह तो मालूम होना चाहिए कि वह किस काम के लिए पैसे दे रहा है। श्री सिंह ने बताया कि विभाग के पास तीन संघों की ही योजना आई है। उन्होंने बताया कि खेल संघ उद्योगों के प्रतिनिधियों को उपाध्यक्ष बनाने में भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जो दो शर्ते मदद के लिए रखी गई हैं, उनको तो पूरा करना अनिवार्य है।

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शनिवार, जुलाई 30, 2011

मुख्यमंत्री आज तय करेंगे उत्कृष्ट खिलाड़ियों के नाम

प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को तय करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक शनिवार को मंत्रालय में सुबह 11 बजे होगी। इस बैठक में 2009-10 के पात्र खिलाड़ियों के नाम तय किए जाएंगे। उत्कृष्ट खिलाड़ियों बनने के लिए 163 खिलाड़ियों ने दावा किया है।
खेल विभाग ने 2009-10 के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ियों के जो आवेदन मंगाए थे, उन आवेदनों पर फैसला करने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में बैठक होगी। इस बैठक में खेलमंत्री लता उसेंडी के साथ सामान्य प्रशासन की सचिव निधि छिब्बर, खेल सचिव सुब्रत साहू और वे शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि यह दूसरा मौका है जब राज्य के खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने का काम हो रहा है। पहली बार में चुने गए 70 खिलाड़ियों में से ज्यादातर खिलाड़ियों को नौकरी मिल गई है, बचे खिलाड़ियों को नौकरी देने का काम चल रहा है।
पंकज विक्रम वाले अभी पात्र नहीं
खेल संचालक ने पूछने पर बताया कि फिलहाल तो पंकज विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जब खिलाड़ियों से आवेदन मंगाने के लिए विज्ञापन दिया गया था, तब यह तय नहीं हुआ था कि पंकज विक्रम पुरस्कार वाले खिलाड़ी भी पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि अगर शासन स्तर पर इन खिलाड़ियों को पात्र माना जाता है तो अगली बार इनको शामिल किया जाएगा।

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मंगलवार, जुलाई 12, 2011

पंकज विक्रम वाले भी हों उत्कृष्ट खिलाड़ी

शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को भी उत्कृष्ट खिलाड़ियों की श्रेणी में यथावत रखे जाने की मांग खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से की है। मुख्यमंत्री को खिलाड़ियों ने ज्ञापन सौंपकर बताया कि खेल विभाग उनकी घोषणा को बदलने की तैयारी में है।
प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ ब्रेवरेजेस कापोर्रेशन के पूर्व अध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने के साथ जाकर मुलाकात की। इन खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी 2008 में की गई घोषणा के बाद सामान्य प्रशासन ने शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को भी उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करके नौकरी का पात्र माना था।   लेकिन अब खेल विभाग इस नियम को बदलाव कराने की कवायद में लगा है। खेल विभाग खेल संघों की अवांछित गतिविधियोें का हवाला देकर नियमों में बदलाव चाहता है। खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब तक प्रदेश के 19 खिलाड़ियों को पंकज विक्रम पुरस्कार मिला है और ये खिलाड़ी एथलेटिक्स, जूडो, साफ्टबॉल, फुटबॉल, तीरंदाजी, कयाकिंग, तैराकी, क्रिकेट, कबड्डी, कैरम, हैंडबॉल, ताइक्वांडो से जुड़े हैं। इनमें से किसी भी खेल संघ की गतिविधियां अवांछित नहीं हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि किसी खेल संघ की गतिविधियां गलत हंै तो उस संघ पर प्रतिबंध लगाया जाए, इसके लिए खिलाड़ियों को रोजगार से वंचित करना उचित नहीं है। 
खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि खेल विभाग के नियम में बदलाव की प्रक्रिया को रोका जाए और पंकज विक्रम पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को भी उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करके उनको रोजगार दिलाने का पहल की जाए। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को आश्वासन दिया कि उनके साथ न्याय किया जाएगा और जो हो सकेगा नियमानुसार करेंगे। मुख्यमंत्री ने मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में अशोक कुमार पटेल, प्रवेश जोशी, प्रेरणा मिश्रा अमित कुमार, धर्मेन्द्र कुमार माण्डले, सचिन गोमास्ता, प्रदीप साहू, टी. निंगराज रेड्डी  शामिल थे।

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शनिवार, जुलाई 02, 2011

पदक जीतने अपने खिलाड़ी तैयार करेंगे

हमारी मेजबानी में होने वाले 37वें राष्ट्रीय खेलों के लिए अपने राज्य के खिलाड़ियों को ही पदक जीतने के लिए तैयार किया जाएगा। किसी भी कीमत पर खिलाड़ियों के आयात करने की इजाजत किसी भी खेल संघ को नहीं दी जाएगी। खिलाड़ियों को तैयार करने जिन सुविधाओं की दरकार होगी, वह सुविधा दिलाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तैयार हैं।
यह कहना है छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया का। श्री भाटिया कहते हैं कि भले राष्ट्रीय खेलों की पदक तालिका में टॉप में पहुंचने के लिए दूसरे राज्यों ने बाहर से खिलाड़ी बुलाए होंगे, लेकिन हम किसी भी कीमत पर ऐसा करने वाले नहीं हैं। अगर ऐसा किया गया तो इससे जहां अपने राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल गिरेगा, वहीं राज्य के खिलाड़ियों का हक भी मारा जाएगा। वे कहते हैं कि हमने तैयारी कर ली है कि हम अपने खिलाड़ियों को ही पदक तक पहुंचने की राह दिखाएंगे। उन्होंने बताया कि संघ के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भी बात हो गई है। उनका भी साफ कहना है कि खिलाड़ियों को पदक तक पहुंचने के लिए जिस भी तरह की सुविधाओं की दरकार होगी, सरकार वो सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने तैयार है। श्री भाटिया ने बताया कि हमने सभी खेल संघों से कह दिया है कि वे अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की सूची दें और बताएं कि उनको किस तरह की मदद की जरुरत है। वे कहते हैं कि जिस भी खेल में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की जरुरत होगी, प्रशिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे। वे बताते हैं कि हमने खेल संघों से खिलाड़ियों का ग्रेड भी बनाने कहा है। ग्रेड के हिसाब से खिलाड़ियों को तराशने का काम किया जाएगा।
श्री भाटिया कहते हैं कि प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह राष्ट्रीय खेलों के प्रति बहुत गंभीर हैं। यह राष्ट्रीय खेलों की तैयारी का पहला कदम है जिसमें खेलों को उद्योगों को गोद दिलाने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री की पहल पर ही राष्ट्रीय खेल सचिवालय का न सिर्फ गठन हो चुका है, बल्कि उसके सेटअप को भी मंजूरी मिल गई है। बहुत जल्द सेटअप में नियुक्तियों के बाद राष्ट्रीय खेलों के लिए काम प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि खेल संघों को जोड़ने के लिए ही ओलंपिक दिवस पर 23 जून को ओलंपिक दौड़ का ऐतिहासिक आयोजन किया गया था। इस दौड़ की सफलता ने बता दिया है कि हम राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किस तरह से करेंगे। उन्होंने खेल संघों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी योजनाएं बनाकर ओलंपिक संघ को सौंप दे ताकि खिलाड़ियों को तराशने की योजना पर अमल हो सके।

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रविवार, मई 15, 2011

पात्र खिलाड़ियों को देंगे अच्छी नौकरी

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के पात्र खिलाड़ियों को हमारी सरकार अच्छी नौकरी देगी। मुख्यमंत्री के हाथों हैंडबॉल के उत्कृष्ट खिलाड़ी अजय त्रिवेदी को राजनांदगांव जिले का खेल अधिकारी बनाए जाने का नियुक्ति पत्र राष्ट्रीय खेलों के पदकवीरों के सम्मान समारोह में दिलाया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे निभा रही है और राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को जिला खेल अधिकारी जैसे पद पर नियुक्त कर रही है। डॉ. रमन सिंह ने साफ कहा कि अगर खिलाड़ियों में योग्यता है तो उनको किसी भी बड़े पद पर नियुक्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बाहर नौकरी करने वाले उत्कृष्ट खिलाड़ी भी अगर राज्य में नौकरी करने के इच्छुक हैं तो उनकी भावनाओं की कद्र की जाएगी।
ज्यादा पदक जीतने पर ध्यान दें
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के राष्ट्रीय खेलों में सात पदक तो एक शुरुआत है। अब समय आ गया है हमें अभी से छत्तीसगढ़ में होने वाले 37वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी करनी होगी ताकि राज्य को ज्यादा से ज्यादा पदक मिल सके। उन्होंने कहा कि अब मैं समय निकाल कर जल्द ही एक  एक करके सभी खेल संघों के अध्यक्ष, महासचिव के साथ उनके खेलों के प्रशिक्षकों के साथ बैठकर बात करूंगा। सभी खेल संघ योजना बनाने में जुट जाए कि हमें किस तरह से ज्यादा पदक मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बात बताने की जरूरत नहीं है कि हमारे पास अभी संसधानों की कमी है, हम धीरे-धीरे संसाधनों में इजाफा करेंगे। उन्होंने कहा कि दो साल के अंदर हम कई खेलों की अकादमी बना देंगे। मुख्यमंत्री ने सम्मान समारोह के बारे में कहा कि इसे करने में कुछ विलंब हो गया, पर हम खिलाड़ियों का सम्मान करके गर्व महसूस कर रहे हैं।
खेलों को उद्योगों से जोड़ने के अच्छे नतीजे होंगे
ओलंपिक संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के खेल संघों को उद्योगों से जोड़ने की जो पहल की है, उसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि खेलों में बजट की कमी आने नहीं देंगे खिलाड़ी बस पदकों की तरफ ध्यान दें। इसके पहले खेल संचालक जीपी सिंह ने स्वागत भाषणा दिया। इस अवसर पर संसदीय सचिव विजय बघेल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष सुभाष राव, ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल वर्मा, विधायक कुलदीप जुनेजा, लॉन टेनिस संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिसोदिया, पूर्व मंत्री विधान मिश्रा, एथलेटिक क्लब के अध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा, बास्केटबॉल संघ के राजेश पटेल, हैंडबॉल संघ के बशीर अहमद खान, नेटबॉल संघ के संजय शर्मा, टेबल टेनिस संघ के शरद शुक्ला सहित कई खेल संघों के पदाधिकारी और खिलाड़ी उपस्थित थे।
खिलाड़ियों का सम्मान
कार्यक्रम के अंत में पदक विजेता खिलाड़ियों का जिनमें टीम खेलों में स्वर्ण विजेता महिला हैंडबॉल टीम को पांच लाख की राशि, बास्केटबॉल में रजत जीतने वाली महिला टीम को तीन लाख,  निशानेबाजी में स्कीट वर्ग में छत्तीसगढ़ को पहला स्वर्ण पदक व्यक्तिगत वर्ग में दिलाने वाले परमपाल सिंह को एक लाख, कराते में स्वर्ण दिलाने वाले अंबर सिंह भारद्वाज को एक लाख, कुश्ती में कांस्य दिलाने वाले आनंद को पचास हजार,  निशानेबाजी में कांस्य पदक दिलाने वाले बाबा पीएस बेदी को पचास हजार, निशानेबाजी टीम वर्ग में परमपाल सिंह, बाबा पीएस बेदी और मेराज अहमद को स्वर्ण जीतने पर पांच लाख की राशि देकर सम्मानित किया गया।

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रविवार, अगस्त 01, 2010

मुख्यमंत्री पर किया सबने विश्वास, अब होगा खेलों का विकास

प्रदेश की खेल बिरादरी ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर विश्वास करते हुए उनको राज्य के खेलों का भी मुखिया बना दिया है। अब सभी खेल संघों को इस बात का भरोसा है कि जहां राज्य में खेलों का तेजी से विकास होगा, वहीं राष्ट्रीय खेलों का आयोजन ऐतिहासिक होगा। यह मानना है वालीबॉल संघ के महासचिव मो. अकरम खान का। उनसे की गई बातचीत के अंश प्रस्तुत हैं।
0 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ओलंपिक संघ के अध्यक्ष बन गए हैं।  अब इससे खेलों में क्या फायदा होगा?
00 राज्य के  सभी खेल संघों के पदाधिकारी काफी समय से यह चाह रहे थे कि राज्य के खेलों के मुखिया भी डॉ. रमन सिंह होंगे। अब यह सपना पूरा हो गया है तो सभी खेल संघों को इस बात का भरोसा है कि राज्य में खेलों का तेजी से विकास होगा।
0 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिली है, इसके बारे में क्या सोचते हैं?
00 छत्तीसगढ़ को आज अगर राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली है तो इसके पीछे भी मुख्यमंत्री की खेलों में विशेष रूचि ही प्रमुख कारण है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि छत्तीसगढ़ में होने वाले राष्ट्रीय खेल ऐतिहासिक होंगे।
0 क्या राष्ट्रीय खेल समय पर होंगे?
00 जिस तरह से छत्तीसगढ़ की तैयारी है और मुख्यमंत्री ने कहा भी है कि राष्ट्रीय खेलों का आयोजन समय पर होगा, उससे लगता है कि कम से कम छत्तीसगढ़ में यह आयोजन समय पर होगा।
0 क्या मुख्यमंत्री अब वालीबॉल संघ के भी अध्यक्ष बनेंगे?
00 मुख्यमंत्री को वालीबॉल संघ का अध्यक्ष बनाने का आफर बहुत पुराना है। पिछली बार भी हमारे संघ ने ऐेसा प्रयास किया था, पर उस समय मुख्यमंत्री सहमत नहीं हुए थे, अब जबकि वे ओलंपिक संघ के अध्यक्ष बने हैं तो उनके सामने एक बार फिर से वालीबॉल संघ का अध्यक्ष बनने का आफर रखा गया है, आशा है वे इस आॅफर को स्वीकार करेंगे।
0 आपको ओलंपिक संघ के सचिव पद का दावेदार कहा जा रहा है?
00 कई खेल संघों के पदाधिकारियो का ऐसा मानना है कि मैं इस पद के लिए उपयुक्त हो सकता हूं। अगर मुख्यमंत्री चाहेंगे और मुझे यह जिम्मेदारी दी जाएगी तो जरूर इस जिम्मेदारी को उठाने का काम करूंगा।
0 छत्तीसगढ़ में होने वाली बैटन रिले के बारे में क्या सोचते हैं?
00 इसमें कोई दो मत नहीं है कि छत्तीसगढ़ में जिस तरह की तैयारी चल रही है, वैसी तैयारी और किसी राज्य में नहीं की गई हैं। यहां पर बैटन रिले का आयोजन यादगार और ऐतिहासिक होगा।
0 खेल जगत में इन दिनों जिस तरह से यौन शोषण की खबरें आ रही हैं उसके बारे में क्या कहते हैं?
00 जिस किसी भी कोच पर इस तरह का आरोप साबित हो जाता है, उसको खेल जगत से हमेशा के लिए अलग कर देना चाहिए। इसी के साथ यह जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा महिला खिलाड़ी कोच बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
0 राज्य में वालीबॉल की क्या स्थिति है?
00 राज्य में वालीबॉल ही एक ऐसा खेल है जो हर गांव में खेला जाता है। हमारे संघ ने सरकार को अकादमी बनाने का प्रस्ताव दिया है, मंजूरी मिलते ही इसे प्रारंभ किया जाएगा। इसी के साथ साई से भी इस पर चर्चा चल रही है।
0 वालीबॉल में प्रशिक्षकों की क्या स्थिति है?
00 बहुत कम प्रशिक्षक हैं। हर जिले में एक महिला और एक पुरुष प्रशिक्षक का होना अनिवार्य है। सरकार को ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षक रखने पर ध्यान देना चाहिए। सीनियर खिलाड़ियों को सरकार एनआईएस करवाने भेजे और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रशिक्षक की नौकरी में रखे।
0 क्या कमी खलती है?
00 राजधानी में इंडोर स्टेडियम की कमी खलती है। इंडोर स्टेडियम के पूर्ण न हो पाने के कारण छत्तीसगढ़ के हाथ से एशियन चैंपियनशिप की मेजबानी चली गई?

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मंगलवार, नवंबर 17, 2009

छत्तीसगढ़ का खौफ पूरे देश में


प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह ने प्रदेश के खिलाडिय़ों की तारीफ करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम सुविधाएं होने के बाद भी हमारे खिलाडिय़ों में इतना दम है कि देश के बाकी राज्यों के खिलाडिय़ों में छत्तीसगढ़ के नाम से खौफ है।


श्री सिंह ने ये बातें यहां पर उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को दिए गए प्रमाणपत्र के समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है, ऐसे में खेलों के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने काफी कम समय में बहुत ज्यादा नाम कर लिया है। उन्होंने स्वीकारा की प्रदेश में खिलाडिय़ों को दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत कम सुविधाएं मिल रही हैं इसके बाद भी हमारे खिलाड़ी चाहे वह मुक्केबाजी हो या फिर कबड्डी, बास्केटबॉल, हैंडबॉल, कराते, भारोत्तोलन, नेटबॉल या कोई भी खेल सभी खेलों में हमारे खिलाड़ी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ जैसे दिग्गज राज्यों का पसीना निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने खेलों में जो प्रतिष्ठा अर्जित की है उससे हर छत्तीसगढ़वासी गौरव का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्र में खेलों की सुविधाएं देने की जरूरत है। हम वहां पर सुविधाएं देने का काम कर भी रहे हैं।


ओलंपिक के पदक विजेता को मैं ही नकद पुरस्कार दूंगा

मुख्यमंत्री ने अपनी घोषणा की याद दिलाते हुए कहा कि मैंने अपने पहले कार्यकाल में यह घोषणा की थी कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले को दो करोड़, रजत जीतने पर एक करोड़ पचास लाख और कांस्य जीतने पर एक करोड़ की राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि लगता है कि यह पुरस्कार राशि मेरे हाथों ही छत्तीसगढ़ के किसी खिलाड़ी को देना नसीब है, तभी तो मैं फिर से मुख्यमंत्री बना हूं। उन्होंने कहा कि वह दिन सबसे सुखद होगा जब छत्तीसगढ़ का कोई खिलाड़ी ओलंपिक में पदक लेकर आएगा। तब मुझे भी उसके साथ फोटो खींचवाते हुए गर्व होगा कि मैंने ओलंपिक के पदक विजेता के साथ फोटो खींचवाई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि वह दिन जरूर आएगा।


ओलंपिक में पदक का इंतजार है: लता

खेल मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने इस अवसर पर कहा कि जिस तरह से राज्य बनने के बाद ९ साल तक प्रदेश के खिलाडिय़ों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित होने का इंतजार था, उसी तरह से प्रदेश का कोई खिलाड़ी ओलंपिक में पदक लेकर आए इसका हम सबको इंतजार है। उन्होंने कहा कि खिलाडिय़ों को ओलंपिक के पदक तक जाने का रास्ता दिखाने के लिए हमारी सरकार हर तरह की मदद करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि हमारा विभाग ग्रामीण खिलाडिय़ों को भी निखराने की योजना पर काम कर रहा है।
गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने इस अवसर पर कहा कि अपना राज्य हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में खेल कैसे पीछे रह सकता है। खेलों में भी विकास करने का काम सरकार कर रही है। कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए खेल संचालक जीपी सिंह ने बताया कि राज्य में खेलों का अनोखा माहौल है। नक्सल प्रभावित बस्तर में भी खेल विभाग ने युवाओं को खेलों से जोडऩे का काम किया है। उन्होंने बताया कि जिनको उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया है, उनमें जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले हैं उनको पांच विभागों जिनमें वन, आबकारी, पुलिस और जेल विभाग शामिल हैं द्वितीय Ÿोणी में नौकरी दी जाएगी। इसी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वालों को तृतीय और चतुर्थ Ÿोणी में रखा जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में ७० उत्कृष्ट खिलाडिय़ों को अतिथियों ने प्रमाणपत्र दिए। कार्यक्रम में खाद्य मंत्री पुन्नुराम मोहले, विधायक नंद कुमार साहू, महिला आयोग की हेमलता चन्द्राकर और भाजयुमो के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव के साथ खेल विभाग के पूर्व आयुक्त राजीव श्रीवास्तव, सभी खेल संघों के पदाधिकारी और राज्य के पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ी बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम का आगाज वंदेमातरम् से किया गया था।

सीनियर चैंपियनशिप भी खेल विभाग के हवाले

मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह ने कार्यक्रम में खेल मंत्री लता उसेंडी की मांग पर खेल विभाग को ही राज्य की सीनियर चैंपियनशिप करवाने की जिम्मेदारी दे दी और इसके लिए अलग से बजट देने की भी घोषणा की। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि खेल विभाग राज्य की सब जूनियर और जूनियर चैंपियनशिप का आयोजन करता है और खेल संघ लंबे समय से सीनियर चैंपियनशिप भी खेल विभाग द्वारा करवाए जाने की मांग कर रहे थे। इस मांग के पूर्ण होने पर सभी खेल संघों में हर्ष है और सभी ने मुख्यमंत्री के साथ खेल मंत्री का आभार माना है।

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गुरुवार, अक्टूबर 22, 2009

जय ईमानदारी, जय रमन, जय छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एएसपी शशिमोहन सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर अपना इस्तीफा वापस लिया और काम पर लौट आए हैं। यह जीत है एक ईमानदार अफसर की। चलिए कम से कम मुख्यमंत्री ने एक ईमानदार अफसर की कद्र तो की। वैसे मुख्यमंत्री को इसी तरह से खुले अमित कटारिया की भी कद्र करनी चाहिए थी, पर संभवत: यह उनकी मजबूरी है कि नगर निगम के चुनाव को देखते हुए उनको अपनी पार्टी के दबाव के कारण अमित कटारिया को हटाना पड़ा। लेकिन यहां पर मुख्यमंत्री डॉ. सिंह की तारीफ करनी पड़ेगी कि उन्होंने अमित कटारिया के स्थान पर जिनको निगम का आयुक्त बनाया है, वे ओम प्रकाश चौधरी साहब भी अमित कटारिया से कम नहीं है। यानी मुख्यमंत्री ने ऐसा खेल खेला कि सांप भी मर गया और लाठी भी सलामत है। कुल मिलाकर अपने रायपुर में ईमानदारी की जीत हुई है। तो चलिए यही कहा जाए कि जय ईमानदारी, जय रमन, जय छत्तीसगढ़।

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से दो ईमानदार अफसरों के साथ की गई राजनीति को लेकर माहौल काफी गर्म रहा है। पहली बार आम जनता ने सामने आकर इन ईमानदार अफसरों के पक्ष में हस्ताक्षर अभियान तक चलाया। इसका नजीता यह रहा कि अंतत: मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को कम से कम एएसपी शशिमोहन सिंह के मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उनको मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अपना इस्तीफा वापस लेकर काम पर लौटना पड़ा। उनके काम पर लौटने से पुलिस विभाग का सिर ऊंचा हो गया है कि चलो यार अपने विभाग में ऐसे अफसर हैं जिनकी ईमानदारी की कद्र करना अपने सीएम जानते हैं।

सीएम ने जिस तरह की कद्र एएसपी की है, वैसी की कद्र उनको नगर निगम के आयुक्त अमित कटारिया की भी करनी चाहिए थी। वैसे सीएम ऐसा करते भी अगर सामने नगर निगम के चुनाव नहीं होते और उन पर पार्टी का दबाव नहीं होता। पार्टी के दबाव के चलते ही उनको अमित कटारिया को निगम से हटाने का काम करना पड़ा। लेकिन यहां पर सीएम ने एक ऐसा खेल खेला जिसके बारे कोई सोच नहीं सकता था। पार्टी के लोग चाहते थे कि निगम का आयुक्त ऐसे अफसर को बनाया जाए जो पार्टी के लोगों की बातें मानें। लेकिन सीएम ने यहां पर अपनी पसंद के एक ऐसे आयुक्त को अमित कटारिया के स्थान पर नियुक्त किया है जो किसी भी मायने में कटारिया से कम नहीं हैं। कटारिया और चौधरी में मित्रता भी है। इनकी मित्रता का कारण यह है कि दोनों के काम करने की शैली एक जैसी है और दोनों को ईमानदारी के कीड़े से काट रखा है।

एक तरह से देखा जाए तो अपने शहर के दोनों ईमानदारों अफसरों की जीत हुई है। कम से कम मुख्यमंत्री ने तो जरूर इनकी कद्र की है। एक की कद्र खुले रूप में तो दूसरे की परोक्ष रूप में ही सही कद्र तो की है। अगर ऐेसा नहीं होता तो निगम में पार्टी की पसंद का आयुक्त नियुक्त किया जाता।
तो चलो हम बोले जय ईमानदारी, जय रमन सिंह, जय भारत, जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़।

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सोमवार, अक्टूबर 12, 2009

छत्तीसगढि़हा सब ले बढिय़ा



मेजबान छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय शालेय खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढिहा सब ले बढिय़ा होते हैं। उन्होंने स्कूली खिलाडिय़ों के बीच नारे लगवाने के लिए कहा भी कि मेरे साथ कहें और फिर मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह ने जब कहा कि छत्तीसढि़हा॥ तो सभी खिलाडिय़ों ने एक स्वर में कहा सब ले बढिय़ा।


यह नजारा था पुलिस मैदान में जहां पर मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह पुरस्कार बांटने आए थे। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि प्रदेश में खेली गई राष्ट्रीय शालेय चैंपियनशिप में चार में से तीन खिताब जीतकर छत्तीसगढ़ ने वास्तव में यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ किसी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश में यह बात कही जाती है कि छत्तीसगढि़हा सब ले बढिय़ा तो यह गलत भी नहीं है। इस बात को हमारे राज्य के स्कूली बच्चों ने भी साबित कर दिया है।


उन्होंने खिलाडिय़ों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग ही भारत का भविष्य हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मेरे सामने यहां पर पूरा भारत बैठा है। यहां १९ राज्यों के खिलाडिय़ों ने अपना कौशल दिखाया है। उन्होंने कहा कि जैसे आप लोग राष्ट्रीय स्पर्धा में अपने राज्य का नाम रौशन कर रहे हैं वैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रौशन करें।


इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश भर से आए खिलाडिय़ों का खेल देखकर अपने राज्य के खिलाडिय़ों को भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। उन्होंने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि चार में से तीन खिताब मेजबान के हाथ लगे हैं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में आने से ही सफलता मिलती है। श्री अग्रवाल ने खिलाडिय़ों से कहा कि हर राज्य के खिलाड़ी अपने राज्य के राजदूत का काम करते हैं।


छत्तीसगढ़ को ओवरआल चैंपियनशिप

७ अक्टूबर से ११ अक्टूबर चत चली इस स्पर्धा में मेजबान छत्तीसगढ़ ने नेटबॉल में बालक के साथ बालिका वर्ग का भी खिताब जीता। इसी के साथ कबड्डी के बालक वर्ग का खिताब जीतकर अपने खिताबों की संख्या तीन कर ली। तीन खिताब जीतने के कारण ही छत्तीसगढ़ के हाथ ओवरआल चैंपियनशिप भी लगी। उद्घाटन के सा समापन में भी सबसे अच्छा मार्च पास्ट करने के लिए हिमाचल की टीम को विशेष पुरस्कार दिया गया। समापन समारोह में दानी स्कूल की छात्राओं ने जहां देश रंगीला-रंगीला पर नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं कटोरातालाब स्कूल की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी गीत पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महापौर सुनील सोनी के साथ जिला पंचायत के अध्यक्ष अशोक बजाज, शिक्षा सचिव नंद कुमार के साथ शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के अलावा कई खेल संघों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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रविवार, जून 28, 2009

मुख्यमंत्री से मिलना सहज-अधिकारी हैं निर्लज

त्तीसगढ़ के राजा यानी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निवास में पूरे प्रदेश से काफी दूर-दूर से गरीब और असहाय लोग अपनी फरियाद लेकर आए हैं और मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रख रहे हैं। मुख्यमंत्री उनको सुनने के बाद जिनका निवारण तत्काल हो सकता है कर रहे हैं बाकी के लिए संबंधित अधिकारियों तक कागज चले जाते हैं। यह नजारा हर गुरुवार को जनदर्शन कार्यक्रम में नजर आता है। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जो बड़ी सहजता से कम से कम सप्ताह में एक दिन प्रदेश की जनता को मिल तो जाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ अगर कोई अपनी शिकायत या फिर छोटा सा काम लेकर जिले के राजा यानी कलेक्टर के पास जाता है तो कलेक्टर से मिलना किसी के लिए आसान नहीं होता है। कलेक्टर के दफ्तरों में उन्हीं शिकायतों पर ध्यान दिया जाता है जिन शिकायतों के पत्रों में सांसदों या फिर विधायकों के हस्ताक्षर रहते हैं या फिर उनके पत्र रहते हैं। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में यह नजारा है कि मुख्यमंत्री से मिलना जितना सहज है अधिकारियों से मिलना उतना ही कठिन है, कारण साफ है कि अधिकारी तो पूरी तरह से निर्लज हो गए हैं। उनको अपने मुख्यमंत्री को देखकर भी शर्म नहीं आती है।

प्रदेश में एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनी है तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की वह छवि रही है जिसके कारण से भाजपा को सत्ता में वापस आने का मौका मिला है। यह बात भाजपा भी जानती थी कि अगर डॉ. रमन सिंह के स्थान पर और किसी को सीएम प्रमोट किया जाता तो भाजपा का यहां बाजा बज जाता। ऐसा नहीं हुआ और एक बार फिर से छत्तीसगढ़ के राजा डॉ. रमन सिंह हंै। रमन सिंह ने अपनी दूसरी पारी में भी अपना वह काम बरकरार रखा है जिसके कारण उनको प्रदेश की जनता ने फिर से अपना राजा माना है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि प्रदेश में रमन सिंह ने जिस तरह से ग्राम सुराज अभियान चलाया है और गांव-गांव जाकर पेड़ों के नीचे चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनीं हैं और उन समस्याओं का तत्काल निवारण भी किया है जिसके कारण उनकी छवि जनता के बीच में काफी अच्छी बनी है। रमन सिंह अपनी इस छवि को बनाए रखने का काम कर भी रहे हैं। आज उनके जनदर्शन कार्यक्रम में जितनी भीड़ लगती है और जिस सहजता से वे लोगों से मिलते हैं, उसकी तारीफ ही करनी होगी। वैसे अगर जनता ने आपको मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया है तो आपको जनता की फरियाद तो सुननी ही चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो जनता आपको नकारने से पीछे नहीं रहेगी। इस बात को कम से कम रमन सिंह जरूर अच्छी तरह से जानते हैं।

अब यह अपने राज्य का दुर्भाग्य है कि जिस राज्य के मुखिया इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि उनको राज्य की जनता की फरियाद सुननी चाहिए, उस राज्य के अधिकारी इस बात को बिलकुल नहीं मानते हैं कि उनको जनता के काम आना चाहिए। आज देश के हर विभाग का हर अधिकारी लगता है यह बात भूल गया है कि उनको जनता के भले के लिए ही किसी भी पद पर बिठाया गया है, लेकिन वे जनता का भला कम और अपना भला ज्यादा करने में लग गए हैं। अब अधिकारी अपना भला कैसे करते हैं यह अलग मुद्दा है और इस पर लंबी-चौड़ी बहस हो सकती है। फिलहाल बात यह है कि जिस राज्य का मुख्यमंत्री आम जनता को आसानी से उपलब्ध हो जाता है, उस राज्य में एक कलेक्टर से मिलना किसी भी आदमी के लिए काफी मुश्किल काम है। अगर कलेक्टर के पास आपको कोई काम कराने जाना है तो मजाल है कि वह आपको आसानी से मिल जाएं।

कलेक्टर सहित ऐसे किसी भी अधिकारी का जनता से मिलने का कोई समय नहीं है जिनका जनता से सीधेे सरोकार है। कई बार चक्कर लगाने के बाद यदि कलेक्टर महोदय दफ्तर में होंगे भी तो कोई आम गरीब आदमी उन तक अपनी फरियाद लेकर जा भी नहीं सकता है। प्रदेश के हर जिले के कलेक्टरों के दफ्तरों में शिकायतों का इतना अंबार रहता है जिसकी कोई सीमा नहीं है। इन शिकायतों में से महज चंद उन्हीं शिकायतों पर कार्रवाई हो पाती है जिन शिकायतों के पत्रों में सांसद या फिर विधायकों के हस्ताक्षर होते हैं या फिर उनके पत्र साथ रहते हैं। कुल मिलाकर यही बात लगती है कि अपने राज्य के सारे अधिकारी निर्लज हैं, उनको इस बात से शर्म भी नहीं आती है कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री सीधे जनता से बात करने का काम करते हैं, उसी राज्य में वे जनता से सीधे मुंह बात करना तो दूर उनको उपलब्ध भी नहीं होते हैं। मुख्यमंत्री को तो ऐसे सारे अधिकारियों को अपने जनदर्शन की तरह ही दरबार लगाने के निर्देश देने चाहिए ताकि किसी भी गरीब की समस्या का निवारण तत्काल हो सके। अगर ऐसा हो गया तो फिर छत्तीसगढ़ एक मिसाल कायम कर देगा।

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बुधवार, जून 03, 2009

रमन की लागी राष्ट्रीय खेलों से लगन

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की लगन अब राष्ट्रीय खेलों से लग गई है। वे चाहते हैं कि अपने राज्य में भी राष्ट्रीय खेलों का महाकुंभ हो। ऐसे में उन्होंने खेल विभाग के प्रस्ताव पर फटाफट अपनी सहमति की मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री के साथ खेलमंत्री सुश्री लता उसेंडी की मंजूरी के बाद अब खेल विभाग मेजबानी लेने की तैयारी में जुट गया है। जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर भारतीय ओलंपिक संघ के पास भेजा जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में लगातार कई खेलों की राष्ट्रीय चैंपियनशिप हुई है और यहां पर जिस तरह की सुविधाएं हैं उसको देखते हुए छत्तीसगढ़ को मेजबानी मिल ही जाएगी। छत्तीसगढ़ बनने के बाद से ही ऐसे प्रयास किए जाते रहे हैं, पर अब जाकर इसको मुर्त रूप मिलने की उम्मीद जागी है।

प्रदेश के खेल विभाग ने छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ बात करके राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने का मन बनाया और इसके लिए सारी जानकारी एकत्रित करके मुख्यमंत्री डॉ . रमन सिंह के सामने विभाग ने अपनी विभागीय मंत्री सुश्री लता उसेंडी के माध्यम से पूरी योजना रखी और उनसे इसके लिए मंजूरी मांगी। खेलों में विशेष रूचि लेने वाले मुख्यमंत्री ने योजना की जानकारी होने पर मेजबानी लेने के लिए मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों के लिए विकास के लिए कुछ भी करें कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि मेजबानी जरूर लें। यहां पर यह बताना लाजिमी है कि बिना प्रदेश सरकार की सहमति के राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी नहीं मिलती है। भारतीय ओलंपिक संघ के पास जो प्रस्ताव भेजा जाता है, वह प्रस्ताव प्रदेश सरकार के साथ प्रदेश ओलंपिक संघ का संयुक्त प्रस्ताव रहता है। प्रदेश सरकार की अनुमति इसलिए जरूरी होती है क्योंकि प्रस्ताव के साथ ५० लाख रुपए की राशि भी भेजनी पड़ती है और यह राशि प्रदेश सरकार देती है। मेजबानी मिलने के बाद एक करोड़ ५० लाख रुपए और देने पड़ते हैं।

खेलों का विकास ही पहली प्राथमिकता: लता- खेल मंत्री लता उसेंडी का कहना है कि प्रदेश में खेलों का विकास ही हमारी पहली प्राथमिकता है। यही वजह है कि खेल विभाग लगातार इस प्रयास में है कि किस तरह से प्रदेश के खेलों को आगे बढ़ाने का काम किया जाए। उन्होंने कहा कि यह बात तय है कि राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिलने से जहां छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय नक्शे पर आएगा वहीं खेलों के लिए मैदानों की कमी पूरी हो जाएगी। वैसे हमारी सरकार लगातार खेल मैदानों पर ध्यान दे रही है और ज्यादा से ज्यादा मैदान बनाने का काम प्रदेश में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के माध्यम से भी खेलों के विकास के लिए खेल विभाग काम कर रहा है। राजनांदगांव में ४० करोड़ की लागत से साई के माध्यम से खेल सेंटर बनाया जा रहा है।

प्रस्ताव जल्द भेजेंगे: सिंह- खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री से मंजूरी मिलने के बाद अब खेल विभाग इस दिशा में गंभीरता से जुट गया और प्रस्ताव भेजने की दिशा में काम प्रारंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि जितनी जल्दी हो सकेगा प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वे लगातार ऐसे राज्यों से संपर्क कर रहे हैं जहां पर राष्ट्रीय खेल होने हैं। उन्होंने बताया कि विभाग का एक प्रतिनिधि झारखण्ड का दौरा करके भी आ गया है। इसी के साथ गोवा के खेल संचालक से भी चर्चा की गई है। गोवा में २००९ के राष्ट्रीय खेल होने हैं। उन्होंने बताया कि एक पूरी योजना बनाकर प्रस्ताव भेजा जाएगा। हम चाहते हैं कि हमें किसी भी हालत में मेजबानी मिल जाए। मेजबानी मिलने से प्रदेश में खेलों के मैदानों का अंबार हो जाएगा जो जीवन भर काम आएगा।

मेजबानी मि जाएगी:बशीर- प्रदेश ओलंपिक संघ के महासचिव बशीर अहमद खान ने कहा कि अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए सहमति जता दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में २००२ में ओलंपिक संघ बनने के बाद से राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने के प्रयास किए जा रहे थे। एक बार अजीत जोगी के शासन काल में कोशिश की गई थी, पर सरकार ने इस दिशा में गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब युवा खेल मंत्री लता उसेंडी के साथ खेल सचिव सुब्रत साहू और संचालक जीपी सिंह खेलों के लिए काफी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इन्होंने काफी कम समय में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी पर मुख्यमंत्री से सहमति लेकर एक अच्छी पहल की है। उन्होंने कहा कि उनको विश्वास है कि राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि २००८ के राष्ट्रीय खेल झारखण्ड में, २००९ गोवा के, २०१० के केरल में और २०११ के उत्तर प्रदेश में होने हैं। २०१२ में ओलंपिक होने के कारण राष्ट्रीय खेल नहीं होंगे। ऐसे में छत्तीसगढ़ को २०१३ या २०१४ की मेजबानी मिल सकती है।

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