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गुरुवार, अक्तूबर 22, 2009

जय ईमानदारी, जय रमन, जय छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एएसपी शशिमोहन सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पहल पर अपना इस्तीफा वापस लिया और काम पर लौट आए हैं। यह जीत है एक ईमानदार अफसर की। चलिए कम से कम मुख्यमंत्री ने एक ईमानदार अफसर की कद्र तो की। वैसे मुख्यमंत्री को इसी तरह से खुले अमित कटारिया की भी कद्र करनी चाहिए थी, पर संभवत: यह उनकी मजबूरी है कि नगर निगम के चुनाव को देखते हुए उनको अपनी पार्टी के दबाव के कारण अमित कटारिया को हटाना पड़ा। लेकिन यहां पर मुख्यमंत्री डॉ. सिंह की तारीफ करनी पड़ेगी कि उन्होंने अमित कटारिया के स्थान पर जिनको निगम का आयुक्त बनाया है, वे ओम प्रकाश चौधरी साहब भी अमित कटारिया से कम नहीं है। यानी मुख्यमंत्री ने ऐसा खेल खेला कि सांप भी मर गया और लाठी भी सलामत है। कुल मिलाकर अपने रायपुर में ईमानदारी की जीत हुई है। तो चलिए यही कहा जाए कि जय ईमानदारी, जय रमन, जय छत्तीसगढ़।

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से दो ईमानदार अफसरों के साथ की गई राजनीति को लेकर माहौल काफी गर्म रहा है। पहली बार आम जनता ने सामने आकर इन ईमानदार अफसरों के पक्ष में हस्ताक्षर अभियान तक चलाया। इसका नजीता यह रहा कि अंतत: मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को कम से कम एएसपी शशिमोहन सिंह के मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उनको मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अपना इस्तीफा वापस लेकर काम पर लौटना पड़ा। उनके काम पर लौटने से पुलिस विभाग का सिर ऊंचा हो गया है कि चलो यार अपने विभाग में ऐसे अफसर हैं जिनकी ईमानदारी की कद्र करना अपने सीएम जानते हैं।

सीएम ने जिस तरह की कद्र एएसपी की है, वैसी की कद्र उनको नगर निगम के आयुक्त अमित कटारिया की भी करनी चाहिए थी। वैसे सीएम ऐसा करते भी अगर सामने नगर निगम के चुनाव नहीं होते और उन पर पार्टी का दबाव नहीं होता। पार्टी के दबाव के चलते ही उनको अमित कटारिया को निगम से हटाने का काम करना पड़ा। लेकिन यहां पर सीएम ने एक ऐसा खेल खेला जिसके बारे कोई सोच नहीं सकता था। पार्टी के लोग चाहते थे कि निगम का आयुक्त ऐसे अफसर को बनाया जाए जो पार्टी के लोगों की बातें मानें। लेकिन सीएम ने यहां पर अपनी पसंद के एक ऐसे आयुक्त को अमित कटारिया के स्थान पर नियुक्त किया है जो किसी भी मायने में कटारिया से कम नहीं हैं। कटारिया और चौधरी में मित्रता भी है। इनकी मित्रता का कारण यह है कि दोनों के काम करने की शैली एक जैसी है और दोनों को ईमानदारी के कीड़े से काट रखा है।

एक तरह से देखा जाए तो अपने शहर के दोनों ईमानदारों अफसरों की जीत हुई है। कम से कम मुख्यमंत्री ने तो जरूर इनकी कद्र की है। एक की कद्र खुले रूप में तो दूसरे की परोक्ष रूप में ही सही कद्र तो की है। अगर ऐेसा नहीं होता तो निगम में पार्टी की पसंद का आयुक्त नियुक्त किया जाता।
तो चलो हम बोले जय ईमानदारी, जय रमन सिंह, जय भारत, जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़।

11 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari गुरु अक्तू॰ 22, 06:38:00 am 2009  

जय ईमानदारी तक तो एक कंग्रेसी सिपाही बोल ही सकता है जय छत्तीसगढ़ के साथ. :)

kavaljit गुरु अक्तू॰ 22, 08:18:00 am 2009  

जय ईमानदारी, जय रमन सिंह, जय भारत, जय हिन्द, जय छत्तीसगढ़।

saurabh गुरु अक्तू॰ 22, 08:43:00 am 2009  

ईमानदारों की अगर ऐसे ही कदर होने लगे तो देश में ईमानदारों की पूछ परख जरूर बढ़ जाएगी.

anu गुरु अक्तू॰ 22, 09:06:00 am 2009  

जय ईमानदारी, जय छत्तीसगढ़, जय रमन ही नहीं जय राजतंत्र भी

Anil Pusadkar गुरु अक्तू॰ 22, 09:11:00 am 2009  

और सबसे सीनियर आई ए एस अफ़सर बी के एस रे का बीना उचित प्रोमोशन के रिटायर हो जाना।जय ईमानदारी?

sanjana pal गुरु अक्तू॰ 22, 09:31:00 am 2009  

छत्तीसगढ़ ईमानदारी का अलख पूरे देश में जगाए यही कामना है

पी.सी.गोदियाल गुरु अक्तू॰ 22, 10:06:00 am 2009  

अब आप लोग उसे जो भी रंग चढा लो मगर मैं यह मानकर चलता हूँ कि अगर आप सचमुच सच्चाई के रास्ते पर काहल रहे है तो देर जरूर लगेगी मगर आपको लाभांश अवश्य मिलेगा !

हर्षवर्धन गुरु अक्तू॰ 22, 04:06:00 pm 2009  

ऐसी छोटी एकाध खबर भी आशा की किरण सी दिखती है

Rakesh Singh - राकेश सिंह शुक्र अक्तू॰ 23, 12:54:00 am 2009  

ऐसी इमानदारी की खबरें अब पढने को कहाँ मिलती है ...

छोटी सी ही किरण पर है तो आशा की ...

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