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बुधवार, अक्तूबर 28, 2009

नखरेवाली

दिल फिर मचलने लगा

प्यार का चिराग चलने लगा

अभी आए, वो अभी चल दिए

हम फिर अकेले रह गए

उनकी इस अदा को देखकर

हम दीवाने हो गए

लेना चाहा वादा कल का

पर वो मुकर गए

दिया जब प्यार का वास्ता प्रिंस

दिखाया उसने परसो का रास्ता

परसो जब हम उधर गए

जाने वो किधर गए

किया इंतजार दिन भर

पर हुआ ना दीदार

सुनाए क्या अब हाल

हम अपने दिल का यार

हमारे पल्ले पड़ गया है

एक नखरेवाली का प्यार

4 टिप्पणियाँ:

rohan बुध अक्तू॰ 28, 08:56:00 am 2009  

कहां नखरेवाली के चक्कर में पड़े हैं, कोई और क्यों नहीं ढंूढ लेते

asif ali,  बुध अक्तू॰ 28, 09:02:00 am 2009  

अब प्यार किया है तो झेलना ही पड़ेगा

Anil Pusadkar बुध अक्तू॰ 28, 09:32:00 am 2009  

लगता है कि नखरेवाली के चक्कर मे घरवाली से मार खाकर ही मानेगा तू।वैसे आजकल इसिलिये परेशान लग रहा है तू,क्यों ये सिर्फ़ कविता ही ना?

ganesh बुध अक्तू॰ 28, 09:37:00 am 2009  

अगर महबूबा नखरेवाली न हो तो वो महबूबा कैसे होगी

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