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शनिवार, अक्तूबर 10, 2009

बापू के नाम पर करो भ्रष्टाचार


अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मा जरूर अब खून के आंसू रोते हुए यह सोच रही होगी कि क्यों कर उन्होंने भारत जैसी धरती पर जन्म लिया था। उनको क्या मालूम था कि जिस धरती को आजाद कराने के लिए उन्होंने इतनी मेहनत की, उसी धरती के वासी उनके नाम से भी भ्रष्टाचार करने का काम करेंगे। आपको लग रहा होगा कि आखिर बापू के नाम पर कैसे भ्रष्टाचार हो सकता है, तो हम बता दें कि भ्रष्टाचार हो नहीं सकता है, बल्कि हो रहा है और यह भ्रष्टाचार हो रहा है उस राष्ट्रीय रोजगार योजना में जिसका नाम अचानक इस बार गांधी जयंती पर बापू के नाम से कर दिया गया है। पता नहीं क्या सोच कर केन्द्र सरकार ने ऐसा किया है, जबकि उसको भी मालूम है कि इस योजना के नाम से पूरे देश में भ्रष्टाचार हो रहा है फिर क्यों ऐसा किया गया क्या केन्द्र सरकार बापू का मान करने की बजाए उनका अपमान नहीं कर रही है। इस योजना से बापू का नाम हटाने की मुहिम चलाने की जरूरत है।

विश्व में भारत का नाम भ्रष्टाचार के मामले में नंबर वन पर है। अपने देश में ऐसी कोई भी योजना नहीं होगी जिस योजना में भ्रष्टाचार न हो। ऐसे में जबकि हर योजना के साथ भ्रष्टाचार जुड़ा है तो फिर केन्द्र सरकार ने क्या सोचकर राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर कर दिया है। क्या केन्द्र सरकार बापू की आत्मा को खून के आंसू रूलाने पर तूली है। बापू का वैसे भी क्या अब अपमान होता है अपने देश में जो उनकी आत्मा को और दुखी करने का काम केन्द्र की उस सरकार ने किया है जो सरकार कांग्रेस समर्पित सरकार है। बापू का कांग्रेस से ही ज्यादा नाता रहा ऐसा माना जाता है। ऐसे में यह बात समझ से परे है कि ऐसा क्यों किया गया। वैसे देखा जाए तो कांग्रेसियों को ही सबसे ज्यादा बापू से मतलब नहीं रह गया है। क्या केन्द्र सरकार को यह लगता है कि इस योजना के साथ बापू का नाम जोड़कर इसमें हो रहे भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सकता है। अगर केन्द्र सरकार ऐसा सोचती है तो उसकी सोच पर तरस आता है। ऐसी कौन सी योजना है जिसमें होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सका है कि इस योजना पर अंकुश लगेगा। अंकुश तो तब लगता जब केन्द्र में बैठे लोग पाक साफ होते। यहां तो हर साख पर उल्लू बैठे हैं वाली बात है तो फिर कैसे किसी योजना का नाम बापू के नाम पर रखने से ही भ्रष्टाचार रूक सकता है।

हमें लगता है कि केन्द्र सरकार को अपनी गलती को सुधारने का काम करते हुए बापू के नाम को कलंकित होने से बचाने के लिए इस योजना से बापू का नाम हटा लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो बापू का नाम लगातार कंलकित होता रहेगा। इस योजना में हम अपने राज्य छत्तीसगढ़ की ही बात करें तो प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा मजदूरों को एक माह से मजदूरी ही नहीं मिली है। यही नहीं करीब 63 हजार मजबूरों को नियमित मजदूरी नहीं मिल पा रही है। यह बातें हवा में नहीं कही जा रही है बल्कि ऐसा सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट की माने तो प्रदेश में योजना के लिए जिन दो हजार बेरोजगारों के कार्ड सरकार ने बनाए हैं उनको अब तक रोजगार ही नहीं मिला है। जिस योजना में पूरी तरह से भ्रष्टाचार हो रहा है और गरीबों का शोषण किया जा रहा है, उसी योजना का नाम बापू के नाम पर करना वास्तव में शर्मनाक है। इस योजना से बापू का नाम हटवाने के लिए एक मुहिम चलानी चाहिए।

4 टिप्पणियाँ:

tina शनि अक्तू॰ 10, 09:12:00 am 2009  

भारत का भ्रष्टाचार बापू का नाम क्या बापू फिर से जन्म लेकर भी नहीं रोक सकते हैं।

guru शनि अक्तू॰ 10, 09:19:00 am 2009  

बिलकुल सही मुद्दा उठाया है गुरु

sam शनि अक्तू॰ 10, 10:35:00 am 2009  

बापू के नाम का ऐसी योजना में उपयोग करना शर्मनाक हरकत है। ऐसी हरकत के लिए केन्द्र सरकार को माफी मांगते हुए इस योजना से बापू का नाम हटा देना चाहिए।

pranav शनि अक्तू॰ 10, 04:03:00 pm 2009  

जिसका खुद मान हो वही तो दूसरे का मान करेगा, अपने नेता और मंत्रियों का मान ही नहीं है तो वे बापू का मान रखने के बारे में कैसे सोच सकते हैं।

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