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गुरुवार, फ़रवरी 04, 2010

मोहब्बत का पैगाम था हमारा गुप्त एजेंडा-क्यों किया जा रहा है ब्लागरों में जहर फैलाने का धंधा

रायपुर की ब्लागर मीट पर हमने कुछ भी न लिखने का फैसला किया था। इस फैसले पर हम कायम भी थे, कि कल अचानक अनिल पुसदकर जी की एक पोस्ट आ गई। इस पोस्ट को पढऩे के बाद हमें लगा कि अब लिखना जरूरी हो गया है। वैसे भी हम रायपुर ब्लागर मीट पर नहीं अनिल जी की पोस्ट पर लिख रहे हैं। यह बात समझ से परे है कि पंकज अवधिया जी को यह किसने कह दिया कि बैठक का कोई गुप्त एजेंडा था और इस एजेंडे के कारण ब्लागरों का एक समूह बैठक से अलग रहा। पहली बात तो यह है कि हमारी बैठक का एक मात्र एजेंडा छत्तीसगढ़ के ब्लागरों को एक करके मोहब्बत का पैगाम देना था। अब इसे कोई गुप्त एजेंडा माने या कुछ और, यह सोचने वाले की समझ पर छोड़ते हैं। हमें लग रहा है कि छत्तीसगढ़ के ब्लागरों की एकता किसी को रास नहीं आ रही है, इसलिए हम ब्लागरों के बीच में बैर का जहर घोलने का काम किया जा रहा है।

हमें यह बात बिलकुल समझ नहीं आ रही है कि क्यों कर रायपुर ब्लागर मीट को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा किया जा रहा है। जिस तरह से इस मीट को लेकर बखेड़ा खड़ा करने का किया जा रहा है, उससे एक बात साफ है कि हो न हो छत्तीसगढ़ के ब्लागरों की एकता से कोई न कोई वर्ग तो दहशत में है और हमें लगता है कि यह वर्ग ही छत्तीसगढ़ के ब्लागरों में फूट डालने के लिए सारा जोर लगा रहा है। हम एक बात साफ कर दें कि कोई कितना भी जोर लगा लें, हम इतना जानते हैं कि अगर छत्तीसगढ़ के ब्लागरों के बीच में मतभेद पैदा करने वाले चार होंगे तो यहां पर प्यार का पैगाम देने वाले 40 हैं। ऐसे में यह बात आसानी से समझ लें कि हमारी एकता को तोडऩे का कोई मंत्र काम आने वाला नहीं है। हो सकता है कि कुछ समय के लिए गलतफहमी पैदा हो जाए, लेकिन हम लोग एकता पर आंच नहीं आने देने वाले हैं।

जिस दिन रायपुर की ब्लागर मीट हुई थी और हम प्रेस क्लब पहुंचे थे, तभी अनिल जी ने हमें कहा था कि अबे राजकुमार इस बैठक का आयोजन तूने किया है और इसे प्रायोजित किए जाने की बात हो रही है कितना पैसा मिला है इसके लिए। उनकी बातों से हमारा माथा ठनका। अनिल जी भी जानते हैं कि हमें भी गुस्सा बहुत जल्दी आता है। हमने उनसे कहा हम अभी उनको फोन लगाते हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि इस बैठक को उन्होंने प्रायोजित किया है। इस पर अनिल जी ने हमें समझाया कि जिसको जो कहना है कहने दें क्या फर्क पड़ता है। लेकिन तब हमें नहीं मालूम था कि इस बात को लेकर भी कोई बखेड़ा खड़ा कर सकता है। हम यहां पर एक बात बता दें कि हम लोगों को किसी भी ब्लागर मीट के लिए किसी प्रायोजक की जरूरत नहीं है। अपने अनिल जी ही इतने सक्षम हैं कि वे 50 क्या 500 ब्लागरों को खिलाने का खर्च उठा सकते हैं, और उन्होंने हमेशा खर्च उठाया भी है। वैसे भी जब इस मीट की रूपरेखा तय की गई थी तब सोचा भी नहीं गया था कि इतने ज्यादा ब्लागर आ सकते हैं।

अब हम आते हैं पंकज अवधिया जी की बात पर जिसका उल्लेख अनिल जी ने अपने ब्लाग में किया है कि पंकज जी कहते हैं कि गुप्त एजेंडे के कारण ब्लागरों का एक समूह बैठक से दूर रहा। पहली बात वे किस समूह की बात कर रहे हैं इसका उनको खुलासा करना चाहिए। जहां तक हम समझते हैं कि ब्लागर मीट में छत्तीसगढ़ के लगभग सभी ब्लागर शामिल थे। हो सकता है जिनको हम लोग न जानते हों ऐसा कोई ब्लागर छूट गया हो, लेकिन कम से कम ऐसा कोई नामी ब्लागर तो नहीं छूटा। वैसे भी जिनको यह लग रहा था कि हमारी मीट में कोई गुप्त एजेंडा था और उनको यह एजेंडा रास आना नहीं था तो उनका मीट में न आना ही ठीक था। हमें मालूम है कि जिन्होंने भी इस मीट से दूरी बनाकर रखी थी दरअसल उनको भी छत्तीसगढ़ के ब्लागरों की एकता रास नहीं आ रही होगी।

हमारी मीट का एक मात्र लक्ष्य, मकसद और खुला या फिर गुप्त जो भी समझा जाए एजेंडा छत्तीसगढ़ के ब्लागरों में प्यार-मोहब्बत का पैगाम देना था। अब इससे कोई विचलित होता है तो होते रहे हमारी बला से। वैसे भी छत्तीसगढ़ के ब्लागरों ने जबसे एकता दिखाने का काम किया है ब्लाग जगत का एक वर्ग दहशत में है। और इस दहशत वाले वर्ग के लोग ही हमारे बीच में गलतफहमियां पैदा करने के लिए सारे हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन किसी का भी हथकंडा काम आने वाला नहीं है। बातें तो और भी हैं बहुत कुछ लिखने के लिए लेकिन फिलहाल इतना ही आगे हम और जरूर लिखेंगे। चलते-चलते हम एक बात और बता दें कि ब्लागर मीट में सबको बिना किसी भेदभाव के आमंत्रित किया गया था, इसमें कोई भी तेरा या मेरा वाली बात नहीं थी।

8 टिप्पणियाँ:

अविनाश वाचस्पति गुरु फ़र॰ 04, 06:12:00 am 2010  

जहर ही कहर को हरता है
झूठ बोलने वाला सदा ही
पानी भरता है और आप
समझ लीजिये उसी पानी
भीतर डूब तरता है
क्‍योंकि वो नहीं जानता
तरना न तैरना
सही कही न !

बी एस पाबला गुरु फ़र॰ 04, 06:46:00 am 2010  

यही बात मैं भी समझ नहीं पाया कि किसी ब्लॉगर मीट में पहली बार शामिल होने वाले साथी को कौन सा गुप्त एजेंडा दिख गया!?

बी एस पाबला

Udan Tashtari गुरु फ़र॰ 04, 06:49:00 am 2010  

बातें तो होती रहेंगी..आप लोग तो मेल मुलाकात जारी रखें. शुभकामनाएँ.

Arvind Mishra गुरु फ़र॰ 04, 07:01:00 am 2010  

अगर छत्तीसगढ़ ब्लागर्स एक सांस्कृतिक अवधारणा के रूप में घोषित हो तो हम भी इसके दामन को थाम लें .....
गुप्त वुप्त आप लोग फरियायिये

जी.के. अवधिया गुरु फ़र॰ 04, 08:19:00 am 2010  

"हमारी बैठक का एक मात्र एजेंडा छत्तीसगढ़ के ब्लागरों को एक करके मोहब्बत का पैगाम देना था।"

बिल्कुल सही बात कह रहे हो राजकुमार!

खुशी की बात है कि अब सारी गलतफ़हमियाँ दूर हो चुकी हैं और हमारे छत्तीसगढ़ की साफ सुथरी छवि में और भी निखार आ गई है!

Tarkeshwar Giri गुरु फ़र॰ 04, 08:28:00 am 2010  

Bloger Meet achhi bat hai, bate karne walo ko karne di jiye kya fark padta hai.

ललित शर्मा गुरु फ़र॰ 04, 09:23:00 am 2010  

अरे भाई! ये क्या किया पुरा गुप्त एजेंडा खोल कर धर दिया।
अब इसको दिजिए विराम
पहुँचे सबके पास मुहब्बत का पैगाम

Anil Pusadkar गुरु फ़र॰ 04, 05:58:00 pm 2010  

raajkumar khatam karo ye sab.
apne lekhan par dhyan do.

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