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गुरुवार, फ़रवरी 11, 2010

तराशेंगे तो कई मृणाल मिल जाएंगे

भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर मृणाल चौबे जैसे ही सप्रे स्कूल के शेरा क्लब में पहुंचे राजधानी के खिलाडिय़ों ने उनका जोरदार स्वागत करते हुए नारे लगे दिए कि छत्तीसगढ़ का खिलाड़ी कैसा हो-मृणाल चौबे जैसा हो। एक तरफ नारे तो दूसरी तरफ जोरदार आतिशी हो रही थी। जोरदार स्वागत के बाद मृणाल चौबे ने कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं है कि अपने राज्य छत्तीसगढ़ में प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों की कमी नहीं है, इनको अगर तराशा जाए तो कई मृणाल यहां से निकल सकते हैं।

मृणाल ढाका में सैफ खेलों में भारतीय हॉकी टीम के साथ खेलकर लौटे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनको इस बात की खुशी है कि यहां के खिलाड़ी उनको रोल मॉडल समङाते हैं। बकौल मृणाल छत्तीसगढ़ में हॉकी के हीरे छुपे पड़े हैं, बस जरूरत है तो इनको तराशने की। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार यहां पर खिलाडिय़ों के लिए बाहर से प्रशिक्षक बुलाने के साथ राज्य में दो-तीन एस्ट्रो टर्फ लगा दे तो यहां से एक नहीं कई मृणाल निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मात्र हॉकी की अकादमी ही क्यों, हर खेल ही अकादमी होनी चाहिए। मप्र में कई खेलों की राज्य अकादमी है जिसका फायदा वहां के खिलाडिय़ों को मिल रहा है। उन्होंने पूछने पर कहा कि छत्तीसगढ़ में भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई का सेंटर होने से यहां के खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं खुद साई का छात्र रहा हूं, साई में जितनी सुविधाएं हैं और कहीं नहीं हैं। एक बार साई से जुडऩे के बाद किसी भी खिलाड़ी का खेल निखर जाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हॉकी के लिए सरकार की मदद के साथ ही यहां के उद्योगों को इसके साथ जोडऩा चाहिए। अगर उद्योग आगे आकर हॉकी की मदद करें तो छत्तीसगढ़ में हॉकी बहुत आगे जा सकती है।

पाक के खिलाफ सबसे अच्छा मैच सैफ खेलों में खेला

मृणाल ने एक सवाल के जवाब में बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ यूं तो अब तक ८-९ मैच खेले हैं, लेकिन इन सभी मैचों में ढाका के सैफ खेलों के फाइनल में पाकिस्तान के साथ खेला गया मैच सबसे अच्छा रहा है। उन्होंने बताया कि भले इस मैच में हमारी टीम पेनाल्टी शूट में ४-५ से हार गई, पर इस मैच में मेरे खेल से कोच को इतना ज्यादा प्रभावित किया कि उन्होंने मैच के बाद मुङो कहा कि आई लव यू मृणाल तुम्हारा खेल लाजवाब था। मृणाल ने पूछने पर कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं है कि पाकिस्तान के साथ मैच में हमेशा तनाव की स्थिति रहती है और फाइनल में भी ऐसा ही था, इस मैच में दोनों टीमों के खिलाडिय़ों को कार्ड दिखाए गए। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान के साथ मैच न खेलने समस्या का हल नहीं है। मृणाल ने बताया कि वहां सुरक्षा इतनी तगड़ी थी कि हम लोग घर भी बात नहीं कर पाते थे।


अनुभव स्थानीय खिलाडिय़ों में बांटता हू

मृणाल ने बताया कि वे जब भी अपने शहर राजनांदगांव आते हैं तो उनको जो भी अनुभव बाहर खेलने से मिलते हंै, उनको स्थानीय खिलाडिय़ों में बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया कि जब मलेशिया में विश्व कप में खेल कर आए तो वहां जिन नए नियमों की जानकारी मिली, उससे राजनांदगांव के खिलाडिय़ों को अवगत कराया। इसका फायदा यह हुआ कि जब राजनांदगांव की टीम अंतर साई स्पर्धा में खेलने गई तो वहां उसे इन नए नियमों के कारण फायदा मिला और टीम सफल रही।

हॉकी इंडिया भी उद्योगपतियों को जोड़े

हॉकी इंडिया के साथ खिलाडिय़ों के चल रहे विवाद के बारे में पूछने पर मृणाल कहते हैं कि हम लोग शुरू से अपने सीनियर खिलाडिय़ों के साथ है। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया की स्थिति को सुधारने के लिए हॉकी इंडिया को भी उद्योगपतियों को जोडऩा चाहिए।
स्वागत से अभिभूत
एक सवाल के जवाब में मृणाल ने कहा कि यह तो शेरा क्लब के संस्थापक मुश्ताक अली प्रधान का मेरे प्रति प्यार है जो वे हमेशा यहां बुलाकार जोरदार स्वागत करवाते हैं। मृणाल ने कहा कि मुङो भी किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा से लौटने के बाद मुश्ताक भाई के साथ शेरा क्लब के सदस्यों से मिले बिना चैन नहीं आता है। यहां यह बताना लाजिमी होगा किस मृणाल के शेरा क्लब में पहुंचे ही उनका स्वागत जोरदार आतिशीबाजी से किया गया। वैसे मृणाल को विमानतल पर लेने के लिए उनके माता-पिता के साथ उनके गुरुजन और राजनांदगांव में खेलों से जुड़े करीब ५०-६० लोग गए थे। मृणाल को हॉकी स्टिक पकड़ाने वाले मनीष गौतम और आरएन सिंह कहते हैं कि उनको आज खुशी होती है कि उनका एक शिष्य आज भारतीय टीम की शान है। वे कहते हैं कि हमारा भी ऐसा मानना है कि छत्तीसगढ़ से मृणाल जैसे और खिलाड़ी निकलने चाहिए। मृणाल ने अंत में बताया कि अब वे यहां से १४ फरवरी को दिल्ली जाएंगे जहां पर विश्व कप के लिए अभ्यास मैच की तैयारी चल रही है। मृणाल अपनी पढ़ाई भी कर रहे हैं और अभ्यास मैचों के बाद वे बीकाम की परीक्षा देने वापस आएंगे।

2 टिप्पणियाँ:

Dr Satyajit Sahu गुरु फ़र॰ 11, 11:36:00 am 2010  

मृणाल की सफलता मिसाल है

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