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रविवार, जुलाई 25, 2010

शोषण की शिकार लड़कियों को सामने आना चाहिए

खेल जगत में ज्यादातर महिला खिलाडिय़ों का किसी न किसी रूप में यौन शोषण हो रहा है, यह बात जग जाहिर है। लेकिन यहां पर सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन खिलाडिय़ों का यौन शोषण होता है उनमें से काफी कम खिलाड़ी ऐसी होती हैं जो खुले रूप में इसको सामने करने का साहस कर पाती हैं। भारत में ऐसे काफी कम मौके आए हैं, जब किसी खिलाड़ी ने ऐसे आरोप से अपने कोच या फिर साथी खिलाड़ी पर आरोप लगाए हैं। अपने पड़ोसी देश श्रीलंका की धाविका सुशांतिका ने जब काफी साल पहले एक मंत्री पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, तब काफी हंगामा हुआ था। जहां तक विदेशों की बात है तो वहां पर तो ऐसा होना आम बात है। फिर यहां पर एक बात यह भी है कि विदेशों में तो फ्री सेक्स वाली संस्कृति है। ऐसे में वहां पर ऐसे मामलों का कोई मतलब नहीं होता है, लेकिन ऐसे मामले जब सामने आते हैं तो यह जरूर सोचना पड़ता है कि जिस देश में सेक्स को गलत नहीं माना जाता है, वहां पर ऐसे मामलों का क्या मतलब। लेकिन कहते हैं कि अगर कोई भी काम किसी को डरा धमका कर या फिर उसकी सहमति के बिना किया जाए तो वह काम गलत होता है। और हर ऐसे काम का विरोध तो होना ही चाहिए। लेकिन जो खिलाड़ी यौन शोषण का शिकार होती हैं, उनमें से ज्यादातर अपने कैरियर के कारण इसका खुलासा नहीं कर पाती हैं। और यह बात जहां विदेशी खिलाडिय़ों पर लागू होती है, वहीं भारतीय खिलाडिय़ों पर भी। भारतीय खिलाडिय़ों पर तो यह बात ज्यादा लागू होती है। कारण साफ है यहां पर खिलाडिय़ों के चयन में जिस तरह की राजनीति होती है उससे किसी भी खिलाड़ी का किसी भी खेल की टीम में आसानी से चुना जाना आसान नहीं होता है। ऐसे में जब महिला खिलाडिय़ों को ज्यादातर उनके कोच इस बात का प्रलोभन देते हैं कि वे उनके कोच हैं और उनको राज्य ही नहीं देश की टीम से खिलाकर उनका भविष्य बना सकते हैं तो ऐसे में ज्यादातर महिला खिलाड़ी झांसे में आ जाती हैं और सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार हो जाती हैं।
यहां पर यह भी बताना लाजिमी होगा कि अपने देश में इतनी ज्यादा बेरोजगारी है कि रोजगार पाने के लिए हर कोई कुछ भी करने को तैयार रहता है। रोजगार के लिए आज पढ़ाई से ज्यादा महत्व खेल का हो गया है। ऐसे में जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल लेती हैं उनको नौकरी मिलने में आसानी हो जाती है। इन सबको देखते हुए ही जब किसी खिलाड़ी के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या फिर राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका सामने आता है और उसके लिए उसके सामने ऐसी कोई शर्त रखी जाती है जिससे उसका यौन शोषण हो तो भी खिलाड़ी इसके लिए तैयार हो जाती हैं। हमें याद है हमें एक बार एक खेल से जुड़े कुछ दिग्गजों ने बताया था कि उनके खेल में जिनके कहने पर भारतीय टीम का चयन होता है वे उसी लड़की को टीम में रखने को तैयार होते हैं जो कम से कम एक बार उनके साथ यौन संबंध बनाने को तैयार होती हैं। शायद यही कारण है कि इस खेल में अपने राज्य की ज्यादा महिला खिलाडिय़ों को देश से खेलने का मौका नहीं मिल पाया है। ऐसे और कई खेल हैं जिनके आका ऐसा ही काम करते हैं और महिला खिलाडिय़ों का यौन शोषण किए बिना उनको टीम में स्थान नहीं देते हैं। कई मामलों में यह भी होता है कि राज्य के खेल संघों के पदाधिकारी या फिर कोच राष्ट्रीय खेल संघों में अपने संबंधों के आधार पर उन खिलाडिय़ों का चयन करवाने का काम करते हैं जो उनके साथ यौन संबंध बनाने को तैयार रहती हैं। जानकार तो यहां तक बताते हैं कि भारतीय टीम में स्थान दिलाने के लिए कुछ खेलों के कोच और प्रदेश संघ के पदाधिकारी जहां खिलाडिय़ों का स्वयं यौन शोषण करते हैं वहीं खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय संघ के पदाधिकारियों के पास भी भेजने का काम करते हैं। खिलाडिय़ों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मोह में सब कुछ सहना पड़ता है। कुछ खिलाड़ी जहां समझौता कर लेती हैं, वहीं कुछ को डरा धमका कर भी ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है। अपने प्रदेश में कुछ खेलों की ऐसी खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने ऐसा काम करने से मना कर दिया तो जहां उनको राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा खेलने के मौके नहीं मिले, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की क्षमता होने के बाद भी उनको खेलने नहीं दिया गया। यही नहीं कई खिलाडिय़ों को तो अपने खेल से किनारा भी करना पड़ा। कुछ खेलों की खिलाडिय़ों से अपना मूल खेलकर छोड़कर दूसरे ऐसे खेलों से भी नाता जोड़ा है जिन खेलों में उनका यौन शोषण न होने की पूरी गारंटी है।

1 टिप्पणियाँ:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari रवि जुल॰ 25, 10:19:00 am 2010  

सहीं कह रहे हैं आप, लड़कियों को सामने आना चाहिए.

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