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रविवार, जनवरी 02, 2011

ओरिजनल चाय...

छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अधिकारियों के पास मिलने जाने वालों को ओरिजनल चाय का स्वाद तब नसीब होता है जब वहां के अधिकारी चपरासी को संकेत देते हैं कि जो मिलने आए हैं, वे खास हैं, इनके लिए ओरिजनल चाय लाए। इस ओरिजनल चाय का खुलासा एक अधिकारी ने इस तरह से किया कि शिक्षा विभाग के नीचे चाय दुकानों में जो चाय मिलती है, वह दो किस्म की होती है। एक चाय वह जिसकी कीमत पांच रुपए है, उसे ओरिजनल कहा जाता है। दूसरी चाय वह जिसकी कीमत तीन रुपए है, वह काम चलाऊ चाय है। यानी काम चलाऊ लोगों के लिए यह चाय आती है, और खास लोगों के लिए ओरिजनल चाय। एक जमाना वह था जब किसी भी दफ्तर में जब चाय नहीं मंगानी रहती थी तो चपरासी से कहा जाता था, चाय लाना ना। यानी चाय मंगवाने के लिए बस कहा गया है, लाने के लिए नहीं।

4 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा रवि जन॰ 02, 10:35:00 am 2011  

हा हा हा दादा-नाना की चाय वाला पुराना फ़ंडा ओरिजनल चाय में बदल गया।

शुभकामनाएं

yellow रवि जन॰ 02, 11:18:00 am 2011  

भाई साहब, स्वस्थ्य आलोचना को ये मानना छोड़ दें कि कोई आपको परेशान कर रहा है। जो टिप्पणी आपके पास आती है उसे छापिये फिर उसका जवाब दीजिये, दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। टिप्पणी आप छापते नहीं हैं, उसका जवाब छाप देते हैं ये तो ठीक बात नहीं हुई ना, भाई साहब।

राजकुमार ग्वालानी रवि जन॰ 02, 12:22:00 pm 2011  

मिस्टर यलो
हम वैसे तो आप जैसे छद्म नाम के इंसान की किसी बात का जवाब देना नहीं चाहता था, लेकिन लगता है कि आपको बिना वजह किसी को परेशान करने में मजा आता है। आपको अगर किसी भी बात का जवाब चाहिए तो पहले तो अपनी असली पहचान के साथ सामने आएं जिसको अपनी पहचान बताने में डर लगता है उससे क्या बात की जाए। जिस इंसान में दम होता है वह दमदारी से सामने आता है। अगर इतने ही सच्चे इंसान हो तो अपने असली नाम से सामने आओ हम आपकी हर बात का जवाब देने के लिए तैयार हंै। हम इतना तो जरूर जानते हैं कि आप हमसे उतने अंजान नहीं हैं। क्या बार-बार नाम बदल-बदल कर आते हैं। अपनी पहचान छुपाने वाले बुजदिल होते हैं। बिना वजह किसी की बात पर टिप्पणी करने वालों की मानसिकता घटिया होती है, जैसी आपकी है। दूसरे की हर बात को घटिया मानसिकता समझने वाले की मानसिकता घटिया होती है। वैसे यह बात भी तय है कि आप सिर्फ और सिर्फ हमें परेशान करने के लिए टिप्पणी करते हैं, आपकी टिप्पणी और किसी ब्लाग में किसी ने नहीं देखी है, हमने अपने ब्लागर मित्रों से पूछा है। हम भी कई ब्लाग देखते हैं। अब इससे साफ मालूम रहोता है कि आपका एक मात्र मकसद हमें परेशान करना है। हम इसीलिए आपकी किसी बात का जवाब नहीं देना चाहते थे, फिर हमें लगा कि अगर हम लगातार चुप रहे तो इसे आप जैसे कमजोर दिलवाले हमारा डर समझ सकते हैं। स्वास्थ्य आलोचना से किसी को परहेज नहीं होता है, लेकिन स्वास्थ्य आलोचना करने वाले की कोई तो पहचान होनी चाहिए। घटिया मानसिकता के साथ कोई अगर किसी के ब्लाग में छद्म नाम से जाता है तो ऐसे इंसान की आलोचना का क्या मलतब होता है।

राजकुमार ग्वालानी रवि जन॰ 02, 12:28:00 pm 2011  

हम जानते हैं कि यह यलो एक्सप्रेस कहां से चल रही है। हमारे ब्लाग के प्रहरी बता देते हैं कि कौन कहां से आता है। लेकिन इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कौन कहां से आता है। हम इतना जानते हैं कि हमने किसी के साथ कुछ गलत नहीं किया है। अगर किसी यलो की मानसिकता खराब है, हम क्या कर सकते हैं।

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