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रविवार, अप्रैल 11, 2010

दिल से करो काम-खेलों में होगा नाम

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ की दिल्ली में हुई कार्याशाला में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सहसचिव विष्णु श्रीवास्तव की प्रस्तुति को सराहा गया। उनकी थीम को ओलंपिक संघ ने अपनी वेबसाइड में भी स्थान दिया है। इस प्रस्तुति में बताया गया है कि अगर दिल से काम किया जाए तो खेलों में नाम होता है।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने ओलंपिक के सही रूप को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए दिल्ली में एक कार्यशाला का आयोजन २१ से २६ मार्च तक किया था। इस कार्यशाला में देश के कई राज्यों के ओलंपिक संघ से जुड़े डेढ़ दर्जन पदाधिकारियों को शामिल किया गया था। इनको कार्यशाला में छह दिनों तक बताया गया कि ओलंपिक संघ के सही रूप को कैसे दुनिया के सामने लाना है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ के विष्णु श्रीवास्तव लीडर होने के नाते एक प्रस्तुति देने का मौका दिया गया। उन्होंने करीब १५ मिनट तक अंग्रेजी में अपनी प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति के बारे में उन्होंने बताया कि अक्सर किसी भी प्रस्तुत में उस तरह की थीम पेश नहीं की जाती है जैसी मैंने की थी। बकौल विष्णु श्रीवास्तव उन्होंने एक दिल का आकर बनाकर बताया कि अगर कोई भी काम दिल से किया जाए तो वह जरूर सफल होता है। उन्होंने बताया कि उनका ऐसा मानना है कि अगर खेलों में कोई भी खिलाड़ी दिल से खेल से उसको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता है। उनकी इस थीम को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने इतना पसंद किया कि उनकी यह थीम फोटो के साथ ओलंपिक संघ की वेबसाइड में डाली गई है।
ओलंपिक का मकसद है विश्वबंधुत्व
एक सवाल के जवाब में श्री श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यशाला करवाने का मकसद यह है कि दुनिया में यह संदेश देना कि ओलंपिक का मतलब महज पदक जीतना या फिर पदक तालिका में अपने देश को ऊंचाई पर ले जाना नहीं है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक खेलों को प्रारंभ करने का एक मात्र मकसद यह था कि विश्व को एक सूत्र में बांध कर लड़ाई-ङागड़ों से दूर रखा जाए। लेकिन ओलंपिक के इस मकसद को भूलाकर हर देश आज पदक जीतने की होड़ में लगा है। पदक के लिए खिलाड़ी डोपिंग से लेकर हर तरह के पैतरे आजमाने लगे हैं जिसके चलते ओलंपिक का मकसद खो गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने फैसला किया है कि हर देश में कार्यशाला का आयोजन करके उस देश के लोगों को यह बताया जाए कि ओलंपिक का जो मकसद है उसकी तरफ लौटना है। अगर ओलंपिक संघ इसमें सफल होता है तो विश्व को भ्रष्टाचार,आतंकवाद और युद्ध से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की कार्यशाला में ओलंपिक के मकसद से दो-चार होने के बाद अब इसकी जानकारी देश में देने का जिम्मा इस कार्यशाला में शामिल होने वालों पर है। उन्होंने बताया कि देश के खिलाडिय़ों को यह भी बताना है कि पदक जीतने के लिए डोपिंग का सहारा लेना गलत है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में यह बात भी सामने आई कि भाई चारा ही क्यों बहन चारा भी क्यों नहीं हो। उन्होंने कहा कि बहन चारा का नारा देकर महिला खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करना है।

3 टिप्पणियाँ:

tahseeldar रवि अप्रैल 11, 10:20:00 am 2010  

हमारी नज़र में एक शानदार लेख। हम आपको बताना चाहते हैं कि हिंदी की खेल पत्रकारिया में हमको आज तक आपके जितना बढ़िया पत्रकार देखने को नहीं मिला है। हम ये बताना चाहते हैं कि आप कठिन से कठिन विषय को भी जितना सरलता और आसानी से पेश कर देते हैं वो बेमिसाल है। हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आपकी काबिलियत पर हमको कोई शक नहीं है लेकिन कहीं हमने पढ़ा था तो हम बताना चाहते हैं कि जब श्रीवास्तव जैसे श्री से शुरु होने वाले किसी नाम या सरनेम के सामने सम्मानसूचक श्री लगाना हो तो श्री नहीं लगाते हैं वो श्रीयुत हो जाता है, जैसे श्रीयुत श्रीवास्तव। हमको पता है कि आप लेख लिखने के बाद टिप्पणियों पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन आपकी लेखनी और आपके ब्लॉग के घनघोर प्रशंसक होने के नाते हमारा तो कर्तव्य बनता है कि हम आपको इस बारे में सूचित करें। हम आपसे फिर निवेदन करना चाहते हैं कि हमारी जानकारी गलत हो तो उसे हमारी अज्ञानता समझकर माफ कर दें।

tahseeldar सोम अप्रैल 12, 08:19:00 am 2010  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
tahseeldar सोम अप्रैल 12, 08:31:00 am 2010  

हम आपको ये बताना चाहते हैं कि यूं तो हम सुबह उठते ही सबसे पहले दैनिक कर्मों से निवृत होकर चाय पीते हैं और समाचार पत्र पढ़ते हैं लेकिन जबसे हमको राजतंत्र पढ़ने की लत पड़ी है हम सबसे पहले नेट खोलते हैं। हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आज जब सुबह जब हमने नेट खोला तो आपका आर्टिकल ना देखकर हमारा मन उदास हो गया, हम सोचने लगे कि आज राजकुमार भाई को क्या हुआ या वो हम पाठकों से नाराज़ हो गये या कोई और बात हो गई। हम आपको बताना चाहते हैं कि आपका आर्टिकल ना देखकर हमारा मन उदास है।

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