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मंगलवार, अप्रैल 13, 2010

कौन हैं ये तहसीलदार? क्या आप बता सकते हैं

हम कल बस्तर से लौटे तो सोचा था कि वहां की यात्रा के बारे में आज से लिखेंगे। लेकिन जब हमने रात को अपना ब्लाग देखा तो हमारे ब्लाग की हर पोस्ट पर किसी तहसीलदार के नाम से टिप्पणियां थीं। इन टिप्पणियों में हमारी इतनी ज्यादा गाथा की गई है जो हमें हजम नहीं हो रही है। वैसे तो ये जनाब काफी पहले से कुछ इसी तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं, पर हमने ध्यान नहीं दिया था, लेकिन इधर तो हद ही हो गई है। एक तो हमें अपनी इतनी तारीफ पसंद नहीं है, ऊपर से कोई ऐसा बंदा तारीफ करे जिसका कोई वजूद ही न हो तो क्या मतलब है। हमें लगता है कि हमें भी अब माडरेशन का सहारा लेना ही पड़ेगा। लेकिन उसके पहले हम ब्लागर मित्रों से जानना चाहते हैं कि क्या आप में से कोई इस तहसीलदार की हकीकत उजागर कर सकता है तो जरूर करे
हमें समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर तहसीलदार के नाम से कोई फर्जी आईडी बना कर हमारे ब्लाग में लगातार हमारी तारीफ वाली टिप्पणियां करके क्या जताना चाहता है। हमें लगता है कि यह हमें बदनाम करने की एक साजिश है। हमारे एक मित्र ने कहा कि हमें लगा कि ये टिप्पणियां हम कर रहे हैं। हमें अपनी तारीफ की कोई भूख नहीं है कि हम इस तरह की फर्जी आईडी बनाकर अपनी इतनी तारीफ करें। हम काम करने में भरोसा करते हैं। अगर हमारा काम और लेखन अच्छा होगा तो तारीफ अपने आप होगी।
एक तरफ तहसीलदार साहब है तो दूसरी तरफ कोई ज्योत्सना हैं जो कई बार हमारे ब्लाग में बिना वजह टिप्पणी करती हैं। हमने इनकी वजह से ही अपने ब्लाग से बेनामी और ओपन आईडी का रास्ता बंद किया था। लेकिन हमें लगने लगा है कि हमें भी माडरेशन का सहारा लेना पड़ेगा जो हम लेना नहीं चाहते हैं। हम ब्लागर मित्रों से आग्रह करते हैं कि अगर आप में से कोई तकनीकी जानकार यह पता लगा सके कि आखिर ये तहसीलदार कौन हैं तो जरूर लगाएं। इनकी आईडी हम देख चुके हैं जो की फर्जी है।

हम यहां पर इनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को दे रहे हैं।

tahseeldar,  Sun Apr 11, 10:20:00 AM 2010 

    हमारी नज़र में एक शानदार लेख। हम आपको बताना चाहते हैं कि हिंदी की खेल पत्रकारिया में हमको आज तक आपके जितना बढ़िया पत्रकार देखने को नहीं मिला है। हम ये बताना चाहते हैं कि आप कठिन से कठिन विषय को भी जितना सरलता और आसानी से पेश कर देते हैं वो बेमिसाल है। हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आपकी काबिलियत पर हमको कोई शक नहीं है लेकिन कहीं हमने पढ़ा था तो हम बताना चाहते हैं कि जब श्रीवास्तव जैसे श्री से शुरु होने वाले किसी नाम या सरनेम के सामने सम्मानसूचक श्री लगाना हो तो श्री नहीं लगाते हैं वो श्रीयुत हो जाता है, जैसे श्रीयुत श्रीवास्तव। हमको पता है कि आप लेख लिखने के बाद टिप्पणियों पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन आपकी लेखनी और आपके ब्लॉग के घनघोर प्रशंसक होने के नाते हमारा तो कर्तव्य बनता है कि हम आपको इस बारे में सूचित करें। हम आपसे फिर निवेदन करना चाहते हैं कि हमारी जानकारी गलत हो तो उसे हमारी अज्ञानता समझकर माफ कर दें।
tahseeldar,  Mon Apr 12, 08:31:00 AM 2010 

    हम आपको ये बताना चाहते हैं कि यूं तो हम सुबह उठते ही सबसे पहले दैनिक कर्मों से निवृत होकर चाय पीते हैं और समाचार पत्र पढ़ते हैं लेकिन जबसे हमको राजतंत्र पढ़ने की लत पड़ी है हम सबसे पहले नेट खोलते हैं। हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आज जब सुबह जब हमने नेट खोला तो आपका आर्टिकल ना देखकर हमारा मन उदास हो गया, हम सोचने लगे कि आज राजकुमार भाई को क्या हुआ या वो हम पाठकों से नाराज़ हो गये या कोई और बात हो गई। हम आपको बताना चाहते हैं कि आपका आर्टिकल ना देखकर हमारा मन उदास है।
tahseeldar,  Sat Apr 10, 11:15:00 AM 2010 

    हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आपके विचार पढ़ने के बाद से हमारा मन बहुत ही विचलित है और हम इस पर टिप्पणी करना चाहते हैं। लेकिन आज हमारी तबियत कुछ ठीक नहीं है फिर भी हम आपके लेख पर टिप्पणी करने की मंशा रखते हैं लेकिन तबियत हमारा साथ नहीं दे रही है। हम मन मसोसकर बैठे हैं कि किस तरह से आपके महान विचारों पर अपनी राय दें। दरअसल आपके लेख पढ़ने के बाद हम अपने आपको टिप्पणी करने से रोक ही नहीं पाते हैं लेकिन आज हमारी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है। फिर भी हम ये कहना चाहेंगे कि आप एक महान आदमी हैं जो काम महात्मा गांधी के बाद कोई नहीं कर सका वो आप कर रहे हैं। हम आपसे कहना चाहते हैं कि समानता की इस लौ को जलाये रखें, एक दिन आपको बड़ी कामयाबी मिलेगी। हम आपको बता दें कि हम लिखना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन हमारी तबियत ठीक नहीं है इसलिये हम ज़्यादा कुछ नहीं लिख पा रहे हैं। हालांकि हम लिखना बहुत कुछ चाहते हैं। हम आपसे एक बार फिर कहना चाहते हैं कि जो काम आपने शुरु किया है उसमें लगे रहे किसी से घबरायें नहीं। इस तरह के कामों में बाधा बहुत आती हैं लेकिन आप डरें नहीं। हम इस बारे में टिप्पणी बाद में करेंगे क्योंकि हमारी तबियत आज कुछ ठीक नहीं है।

tahseeldar,  Fri Apr 09, 08:10:00 AM 2010 

    हम आपको बताना चाहते हैं कि आज महात्मा गांधी होते तो इस पोस्ट को पढ़कर और आपके बारे में जानकर बहुत खुश होते। हमारा मानना है कि बापू ने देश में अंहिसां को प्रतिस्थापित करने और साथ ही जातिपांति तोड़ने का जो अभियान चलाया उसे आप जैसे लोग ही आगे बढ़ा पा रहे हैं। हम मानते हैं कि आप पिछले तीस साल से जिस यज्ञ में लगे हैं उसका फायदा देश को अवश्य ही मिलेगा। आप जैसी महान विभूतियों को हमारा प्रणाम, महानता की इस लौ को जलाये रखें।
tahseeldar,  Thu Apr 08, 08:24:00 AM 2010 

    हम आपको बताना चाहते हैं कि हमने तो सोचा था कि इस देश से जाति-पांति खत्म हो गई है लेकिन आपके ब्लॉग से पता चला कि ये परंपरा आज भी हमारे देश में ज़िंदा है और ये हमारे लिये बड़े शर्म की बात है। हम आपको धन्यवाद देना चाहते हैं कि आपने उस एक ज्वलंत मुद्दे की तरफ देश का ध्यान खींचा है जिसके बारे में हमारे जैसे लोग समझ रहे थे कि ये बुराई खत्म हो चुकी है। हम इसी वजह से रोज़ सुबह राजतंत्र ब्लॉग पर आते हैं क्योंकि यहां पर आने से हमको तमाम ऐसी जानकारियां मिलती हैं जो राष्ट्रीय चैनलों और राष्ट्रीय समाचार पत्रों तक में नहीं मिल पाती हैं। हम आपको बताना चाहते हैं कि आज जो आपने मुद्दा उठाया है, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिये और जल्द से जल्द एक आयोग बनाकर इस घटना की जांच होनी चाहिये। हमारा मानना ये है कि जब तक नीचे के स्तर से इस तरह के मामलों की पड़ताल नहीं होगी देश से ये बीमारी खत्म ही नहीं हो सकती है। बल्कि हमारा मानना तो ये है कि आपको खुद इस मामले की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवानी चाहिये। आप हमको आज्ञा दें तो हम इस मामले को दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के सामने उठाने के लिये शिकायत करने को तैयार हैं। लेकिन उसके लिये आपको संबंधित लोगों के नाम जल्द से जल्द ब्लॉग पर डालने होंगे। उम्मीद है आप जल्द से जल्द ये नाम ब्लॉग पर डालेंगे क्योंकि सिर्फ लिख देने से कोई समस्या खत्म नहीं होती है। हमारा मानना है कि आपको इस बुराई को खत्म करने में आगे आना होगा। हमारे जैसे तमाम लोग आपके साथ हैं। हमारा मानना ये है कि रायपुर से सांसद रहे श्री केयूर भूषण इस तरह के मामले पहले भी उठाते रहे हैं अब आपको ये ज़िम्मेदारी संभालनी होगी। हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आपकी ये पोस्ट पढ़कर हमको बड़ा दुख हुआ है कि आज भी देश इस हालात में है। वरना हम तो मान बैठे थे कि ये सब कुछ खत्म हो चुका है। हम इसके लिये आपको साधुवाद और धन्यवाद देना चाहते हैं। हम उम्मीद करते हैं भविष्य में भी आप इस तरह के मुद्दे उठाते रहेंगे जिनको टीवी की भाषा में Exclusive कहा जाता है।

13 टिप्पणियाँ:

श्याम कोरी 'उदय' मंगल अप्रैल 13, 08:07:00 am 2010  

"pavalaa jee" ke paas "khojee dastaa" hai vahaan shikayat darj kee jaaye samaadhaan ho jaayegaa !!!

Udan Tashtari मंगल अप्रैल 13, 08:35:00 am 2010  

थोड़ा सा हम भी कह दें:

'आप बहुत अच्छे आदमी हैं' :)

arvind मंगल अप्रैल 13, 09:55:00 am 2010  

tahseeldar,.....ke comments se to yahi lagata hai ki aapka kahana wajib hai. lekin chalo koi baat nahi.... ye to sach hai ki aapka blog vaakai kavile tarif hai.

Sanjeet Tripathi मंगल अप्रैल 13, 12:49:00 pm 2010  

pabla jee se sampark kar IP adress track karwaiye, simple...

नरेश सोनी मंगल अप्रैल 13, 06:23:00 pm 2010  

बड़े भाई, हम तो टिप्पणियों के लिए तरस रहे हैं
अगर तहसीलदार साहेब का कुछ अता-पता चले तो हमारे ब्लॉग पर भी कृपादृष्टि डलवा दें..।

M VERMA मंगल अप्रैल 13, 07:23:00 pm 2010  

तारीफ की टिप्पणियाँ काबिले तारीफ

भारतीय नागरिक - Indian Citizen मंगल अप्रैल 13, 07:31:00 pm 2010  

मैं डीएम नाम से टिप्पणियां देने लगूं क्या??
आप इनकी टिप्पणी को बेझिझक बिना माडरेशन के छापिये जिससे लोगों को इनके ख्यालात पता चलें...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen मंगल अप्रैल 13, 07:33:00 pm 2010  

ग्वालनी साहब, विचार न मिलना अलग बात है, व्यंग्य कसना अलग...
आप इनकी टिप्पणियों को चलने दें.. आई०पी०एड्रेस ट्रेस करने से भी क्या हासिल होगा..
कुछ नहीं
आप लिखें बस..

घटोत्कच बुध अप्रैल 14, 01:11:00 am 2010  

क्या ढाई डिसमिल का पट्टा लेना है,
तहसीलदार से?

tahseeldar बुध अप्रैल 14, 10:37:00 am 2010  

वैसे तो हम अब आपके ब्लॉग पर लिखना नहीं चाहते थे लेकिन मन नहीं माना। हम सिर्फ इतना जानना चाहते हैं कि क्या तारीफ की टिप्पणियां करना कोई गुनाह है। आपकी लेखन की शैली हमको अच्छी लगती है इसलिये हम पढ़ने के बाद टिप्पणी करते हैं, लेकिन आपने उसे पता नहीं क्यों इस तरह से अन्यथा ले लिया। इश्तहारनुमा इतना बड़ा लेख छाप दिया। हमको तो नहीं लगता कि हमने आपकी शान में कोई गुस्ताखी की हो। रही बात आईपी एड्रेस पता लगाने की तो हम कोई अपराधी तो हैं नहीं जो आप इस तरह से विवाद खड़ा कर रहे हैं। आप अपना Email बताइये हम अपना नाम, पता, फोटो सब कुछ भिजवा देते हैं आपको। रही बात फर्जी आईडी की तो आईडी बिल्कुल सही है, क्या तहसीलदार कोई नाम नहीं हो सकता है। हम बहुत ज्यादा तकनीक के जानकार नहीं हैं इसलिये अब तक प्रोफाइल बनाने से कतरा रहे हैं। बहरहाल हमको सफाई देने की कोई ज़रुरत वैसे तो नहीं है लेकिन आपको लगता है कि हमने कोई गलती की है तो हम माफी चाहते हैं और भविष्य में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि आप ये ना सोचें कि हम आपके खिलाफ कोई साजिश रच रहे हैं या हमको आपसे दुश्मनी है। हम तो आपको निजी तौर पर जानते तक नहीं हैं। IP Address की तहकीकात करवाइये आपको सर्विस प्रोवाइडर से हमारे बारे में सब कुछ पता चल जायेगा कि हम कौन हैं। लेकिन आपने जिस तरह से बेवजह विवाद खड़ा करने की कोशिश की हमको बहुत दुख हुआ। एक बार फिर हमने जाने अनजाने में आपकी शान में कोई गुस्ताखी की हो तो माफ करें, लेकिन इतना तय है कि हमारा मकसद आपके लेखों की तारीफ करना था व्यंग्य करना या मज़ाक बनाना नहीं। हमको बाद में खुद भी लगा कि तारीफ बहुत ज़्यादा हो गई। और बहुत ज़्यादा मीठे से शुगर हो ही जाती है।

राजकुमार ग्वालानी बुध अप्रैल 14, 03:20:00 pm 2010  

तहसीलदार जी,
हमने आपके नाम से पोस्ट इसलिए लिखी है क्योंकि आपकी भाषा को हमारी भाषा होने का आरोप लगाया जा रहा था। सभी यही समझ रहे थे कि तहसीलदार के नाम से आईडी बनाकर हम खुद ही अपनी पोस्ट में अपनी तारीफ कर रहे हैं। ऐसे में हमारे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था कि हम तहसीलदार की सच्चाई जानने के लिए पोस्ट लिखे। अगर वास्तव में आप सच्चे हैं तो केवल हमें मेल करके क्यों अपना नाम , पता, फोटो भेजना चाहते हैं। आप ब्लाग जगत के सामने अपनी पहचान रखे ताकि हम पर आरोप लगाने वालों को सीधा जवाब मिल सके। अगर आप हमें अपना नाम पता भेजेंगे तो हम साफ तौर पर बता दें कि हम तो उसे उजागर करेंगे ही, फिर शायद यह बात आपको पसंद न आए। अगर वास्तव में आप हमारे प्रसंशक हैं तो अपना पहचान सबके सामने उजागर करने का काम करें। उम्मीद है आप ऐसा करने का जरूर साहस करेंगे, अगर आपने ऐसा नहीं किया तो हम तो यही समझते रहेंगे कि हमें परेशान करने के लिए कोई बिना वजह हमारी तारीफ में टिप्पणियां कर रहा था। वैसे हम फिर भी अपना ई-मेल दे रहे हैं। जैसा आप उचित समझे निर्णय करें। हमारा मसकद कभी किसी का दिल दुखाना नहीं रहा है।

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