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मंगलवार, जून 01, 2010

समय देने से मिलेगी सफलता

छत्तीसगढ़ के टेबल टेनिस खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने आए बंगाल के कोच तन्मय डे का मानना है कि छत्तीसगढ़ के खिलाडि़य़ों में दम-खम की कमी है। राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने के लिए मैदान में ज्यादा से ज्यादा समय देना होगा।
छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ ने प्रदेश के खिलाडिय़ों को निखारने के लिए बंगाल के कोच तमन्य डे को यहां बुलाया है। वे यहां पर खिलाडिय़ों को १५ दिनों तक प्रशिक्षण देंगे। श्री डे ने आज शाम से सप्रे स्कूल के टेबल टेनिस हॉल में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। पहले ही दिन खिलाडिय़ों से बात करने और उनको देखने के बाद श्री डे ने बता दिया कि छत्तीसगढ़ के खिलाडिय़ों में दम-खम की कमी है। इसका कारण उन्होंने बताया कि यहां के खिलाड़ी मैदान में कम समय दे पाते हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने के लिए उतना समय पर्याप्त नहीं है जितने यहां के खिलाड़ी देते हैं। उनको जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी शाम के समय ही दो से तीन घंटे अभ्यास कर पाते हैं। श्री डे का कहना है कि कम से कम चार घंटे सुबह और चार घंटे शाम को अभ्यास करने से ही राष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिलेगी। उन्होंने पूछने पर बताया कि १५ दिनों का समय पर्याप्त है इतने समय में वे खिलाडिय़ों को सीखा कर जाएंगे उनको अगर उन्होंने साल भर नियमित जारी रखा तो उनको सफलता जरूर मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर कई बार खेलने वाले श्री डे पिछले तीन साल से प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे कई राज्यों में खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने जा चुके हैं। वे बताते हैं कि बंगाल के दो क्लबों में भीव वे नियमित प्रशिक्षण देकर खिलाड़ी तैयार करने का काम करते हैं।
इधर छत्तीसगढ़ के कोच विनय बैसवाड़े कहते हैं कि ज्यादातर खिलाड़ी स्कूलों- कॉलेजों के हैं। अगर स्कूलो-कॉलेजों में उनको आने-जाने के समय में छूट मिल तभी खिलाड़ी मैदान में ज्यादा समय दे पाएंगे। इसके लिए सरकार को पहल करनी होगी।

3 टिप्पणियाँ:

सूर्यकान्त गुप्ता मंगल जून 01, 08:51:00 pm 2010  

बिल्कुल सही कहा आपने। परिश्रम परिश्रम परिश्रम्। न बरतें कोताही और न करें शर्म्।

आचार्य जी बुध जून 02, 06:21:00 am 2010  

क्रोध पर नियंत्रण स्वभाविक व्यवहार से ही संभव है जो साधना से कम नहीं है।

आइये क्रोध को शांत करने का उपाय अपनायें !

पलक बुध जून 02, 05:15:00 pm 2010  

आज रात पढि़ए ब्‍लोग जगत के महारथी महामानव फुरसतिया सर को समर्पित कविता। दोबारा याद नहीं कराऊंगी। खुद ही आ जाना अगर मौज लेनी हो, अब तक तो वे ही लेते रहेंगे, देखिएगा कि देते हुए कैसे लगते हैं फुरसतिया सर।

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