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बुधवार, जून 09, 2010

क्या हैं आपके विचार


यहां कोई नहीं करता किसी से प्यार
धोखे और फरेब का सजा है बाजार
हर किसी को है बस पैसों से ही प्यार
क्या हैं इस बारे में आपके विचार
हमें जरूर बताएं आप सभी
ब्लाग जगत के दोस्त-यार

3 टिप्पणियाँ:

मनोज कुमार बुध जून 09, 07:56:00 am 2010  

नफ़रत की तो गिन लेते हैं, रुपया आना पाई लोग,
ढ़ाई आखर कहने वाले, मिले न हमको ढ़ाई लोग।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari बुध जून 09, 09:33:00 am 2010  

क्‍या बतलायें भाई राजकुमार
जय जोहार जय जोहार
साधु संत सब मिल जुल के कडकत हें
भोला बनके मेवा सब झड़कत हें
नेता मन वार्ता के झुनझुना धरावत हें
अउ ब्‍लॉग लिखईया पप्‍पु मन ला खेलावत हें

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