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बुधवार, जून 23, 2010

अंजोर दास हो या मूलचंदानी हमें कोई फर्क नहीं पड़ता जानी-क्योंकि हम हैं राजकुमार ग्वालानी

हमने जब से ब्लाग जगत में भाई चारा लाने के लिए ब्लाग चौपाल का आगाज किया है तभी से कई अवांछित लोग हमारे पीछे पड़ गए हैं। कभी किसी नाम से तो कभी किसी नाम से फर्जी आईडी से टिप्पणी करके हमें डराने का काम करते हैं। लेकिन हम बता दें कि हमने जो काम अपने हाथ में लिया है उसे हम छोडऩे वाले नहीं है। अब कल की ही बात करें तो हमारे ब्लाग राजतंत्र के साथ ब्लाग चौपाल में पहले कोई अंजोर दास फिर मूलचंदानी अवतरित हुए। इनकी टिप्पणियों की तरफ हमारे मित्रों ने ध्यान दिलाया।
हम बता दें कि

अंजोर दास हो या मूलचंदानी
हमें कोई फर्क नहीं पड़ता जानी
क्योंकि हम हैं राजकुमार ग्वालानी
जिसके सामने ऐसे लोग भरते हैं पानी
ज्यादा तीन-पांच करने वालों को
हम याद दिला देते हैं नानी
जिसने भी हमसे पंगा लेना की ठानी
उसको है हमेशा मुंह की खानी
पहले तहलसीदार फिर पापा आए
हमारे एक ही फटके में जाने कहां गए
अब अंजोर दास और मूलचंदानी आए
क्या हम इनकी अब न बजाए
इसके पहले की हम इनकी बजाए
अच्छा है ये खुद ही भाग जाए

7 टिप्पणियाँ:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन बुध जून 23, 08:22:00 am 2010  

वाह जानी, लगे रहो! थक हार कर यह अंजोर्चम्दानी अपने आप चुप बैथ जायेंगे - वैसे आप मौडरेशन भी लगा सकते हैं! उस्की ज़रूरत ही ऐसे तत्वोन को छनने के लिये है.

Udan Tashtari बुध जून 23, 09:30:00 am 2010  

हम याद दिला देते हैं नानी


:)


बहुत सही परेड ग्राऊन्ड में परेड ली...

राजकुमार सोनी बुध जून 23, 01:20:00 pm 2010  

ऐसे तत्वों से किनारा करना ही बेहतर है। आखिर हम कब तक जवाब देते रहेंगे। ऐसे लोग हमारी ऊर्जा को नष्ट करने का काम ही करते हैं।
आप बगैर किसी चिन्ता के लगे रहे... आपका काम अभी जोरों पर है और उसकी खूश्बू धीरे-धीरे सभी जगह फैल रही है। अच्छे काम से कुछ लोग परेशान हो ही जाते हैं।

ललित शर्मा बुध जून 23, 08:41:00 pm 2010  

are! bhai aapne sahi kiya. jisko batti dete ho. vah gayab ho jata hai. lage raho rajkumar bhai.

kal hamare yahan bhi ye sajjan aaye the.

राम त्यागी बुध जून 23, 10:19:00 pm 2010  

हा हा ..नानी याद करवा दी आपने बेनामियों को ...
काम करते रहो, इनके मुहं ना लगो भाई

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari बुध जून 23, 11:51:00 pm 2010  

ये दोनों छद्मनामी और पूर्व छद्मनामी तहसीलदार आदि है तो आपके मित्र ही,वही नाम बदल बदलकर आपके पास आते हैं, क्‍योंकि वे आपसे घबराते हैं.

पोल खोल लगा लें, पाबला जी के सैनिक बैठा दें, हमारे सैनिक तो पता कर चुके हैं पर भाई चारा बना रहे.

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