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गुरुवार, अक्तूबर 21, 2010

क्रिकेटरों के चयन में हो रही राजनीति

रायपुर जिले की क्रिकेट टीमों के चयन में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए खिलाडिय़ों ने इस मामले में प्रदेश संघ के हस्तक्षेप करने की मांग की है। खिलाडिय़ों का कहना है कि अंडर १६ के साथ १९ और २२ में भी चयनकर्ताओं का समिति एक ही होने की वजह की चयनकर्ता लगातार मनमर्जी कर रहे हैं। चयन समिति के एक ही होने को राज्य संघ के सचिव राजेश दवे अपना अधिकार मानते हुए कहते हैं कि यह संघ का अधिकार है कि वह चयन समिति में किसे रखता है। जिले के अध्यक्ष विजय शाह ने इस मामले में खिलाडिय़ों ने अन्याय न होने की बात कही है।
रायपुर जिले की अंडर १६ टीम के चयन में पक्षपात करने का आरोप यूं तो कई खिलाड़ी लगा रहे हैं, लेकिन सीधे तौर पर सामने आने की हिम्मत कोई नहीं दिखा रहा है, लेकिन एक खिलाड़ी के परिजन जरूर सामने आए हैं। इस खिलाड़ी के मामा जसपाल सिंह का सीधे तौर पर आरोप है कि चयनकर्ता लगातार उनके भांजे के साथ राजनीति करते हुए एक अच्छे खिलाड़ी को टीम में नहीं रखते हैं, जिसकी वजह के वह बहुत हताश और निराश हो गए हैं। उनका कहना है कि एक उनके भांजे के साथ ही नहीं और कई खिलाडिय़ों के साथ लगातार चयनकर्ता राजनीति कर रहे हैं लेकिन खिलाड़ी डर की वजह से सामने नहीं आ रहे हैं। यहां यह बताना लीजिमी होगा कि जब भी कोई खिलाड़ी सामने आकर शिकायत करता है तो चयनकर्ता उस खिलाड़ी को हमेशा के लिए किनारे लगा देते हैं। अपने भविष्य को देखते हुए ही खिलाड़ी सामने नहीं आ पाते हैं।
कोई पक्षपात नहीं हुआ
इस मामले में जिला संघ के सचिव अवधेश गुप्ता का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया गया है। श्री गुप्ता से जब पूछा गया कि अंडर १६ टीम के चयनकर्ता कौन-कौन हैं, तो वे उनके नाम भी नहीं बता सके। चयनकर्ताओं में रियाज अकादमी से जुड़े लोगों के ज्यादा होने होने की बात पहले उन्होंने कहीं, फिर उन्होंने कहा कि उनको ठीक से मालूम नहीं है कि चयनकर्ता कौन हैं।
हर वर्ग के लिए एक ही चयन समिति
जिले की अंडर १६, १९ और २२ की टीमों को चयन करने के लिए एक ही समिति बनाई गई है। इस समिति में भावेश चन्द्राणा, मुजाहिक हक, विजय नायडू, एचपी सिंह नोगी और रॉबिन को रखा गया है। क्रिकेट के जानकारों का साफतौर पर कहना है कि रायपुर में क्रिकेट के जानकारों की कमी नहीं है, फिर क्यों कर जिले के संघ ने सभी वर्गों के लिए एक ही चयन समिति रखी है, यह बात समङा से परे है। जानकारों की मानें तो एक ही चयन समिति होने की वजह से चयनकर्ताओं की हर वर्ग में मनमर्जी चल रही है।
समिति तय करना हमारा अधिकार
इस सारे में मामले में जब छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे से बात की गई और उनको चयन में गड़बड़ी की बात बताई गई तो पहले तो उन्होंने यह कहा कि यह जिले का मामला है, वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। जब उनको चयन समिति के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि चयन समिति तय करना हमारे संघ का अधिकार है, हम एक ही चयन समिति रखे या अलग-अलग इसके लिए हमें कोई बाध्य नहीं कर सकता है।
खिलाडिय़ों के साथ नहीं होगा अन्याय
इस मामले में जब जिला संघ के अध्यक्ष विजय शाह से बात की गई तो उन्होंने पूरी बात को गंभीरता से सुना और कहा कि अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उनके पास किसी भी खिलाड़ी के पालक बिना किस डर के आकर मिल सकते हैं। हम किसी भी खिलाड़ी के साथ अन्याय होने नहीं देंगे।
राज्य संघ से हस्तक्षेप का आग्रह
इस मामले में अब पक्षपात के शिकार हुए खिलाड़ी और उनके पालक चाहते हैं कि राज्य संघ को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। राज्य संघ को यह जानकारी होनी ही चाहिए कि किस तरह से जिले की प्रतिभाओं के साथ चयनकर्ता पक्षपात करके उनकी प्रतिभाओं को समाप्त करने का काम कर रहे हैं।

2 टिप्पणियाँ:

ali गुरु अक्तू॰ 21, 05:46:00 pm 2010  

इस मामले में आप ही बेहतर जानेंगे !

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif गुरु अक्तू॰ 21, 11:34:00 pm 2010  

ये तो हमेशा से होता आया है....एक छॊटे से क्लब की टीम से लेकर हमारे देश की टीम तक चाहे वो किसी भी खेल की क्यौं ना हो....

भेदभाव...राजनीति...वगैरह वगैरह

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