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गुरुवार, अप्रैल 30, 2009

माता के दरबार में जसगीत की धूम-जो भी आता है जाता है झूम

देवी माता और जसगीत का चोली-दामन का साथ है। लेकिन माता के किसी दरबार में यह नियमित रूप से चले ऐसा देखने को काफी कम मिलता है। खल्लारी में माता के दरबार में साल भर हर मौसम में जसगीत की धूम मचाने का काम आस-पास के ग्रामीण करते हैं।

जब हमें खल्लारी जाने का मौका मिला तो वहां एक बात यह देखने को मिली कि माता के मंदिर के पास परिसर में पांच महिलाओं की एक मंडली जसगीत गाने में लीन थी। महिलाएं जस गीत गा रही थीं और एक कलाकार मादर बजा रहा था। वास्तव में जसगीत की धुन ऐसी होती जो किसी भी संगीत प्रेमी को झूमने पर मजबूर कर दे। ऐसे में हमारा मन भी मचल उठा और हम वहां पर बैठ गए जसगीत का रसपान करने के लिए। भरी गर्मी का समय ऊपर से आलम यह था कि वहां पर बिजली भी बंद थी। लेकिन इसके बाद भी उस जसगीत गाने वाली मंडली में उत्साह कम नहीं था। हमने जहां उनकी कुछ तस्वीर लीं, वहीं उनका जसगीत भी रिकॉर्ड किया। जब जसगीत समाप्त हुआ तो हमने मंडली से जानना चाहा कि वह कहां की है। उन्होंने बताया कि वह पास के गांव कसीबाहरा की है।

इस मंडली ने ही बताया कि वह सुबह को 8 बजे तक यहां पदयात्रा करते हुए पहुंच जाती है और शाम को यहां से वापस अपने गांव जाती है। इस मंडली से ही मालूम हुआ कि आस-पास के 28 गांवों की मंडलियां यहां नियमित आती हैं और हर मौसम में यहां पर जसगीत की धुनी लगती ही है। इन्होंने बताया कि उनकी मंडली यहां पर पिछले पांच साल से आ रही है। माता के दरबार में जसगीत का सिलसिला बरसों से चल रहा है। जसगीत सुनने का जो आनंद आता है उसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। अपने छत्तीसगढ़ के जसगीत की धूम का देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी है। कहने को भले यह हिन्दुओं का है, क्योंकि जसगीत का नाता माता से है लेकिन जसगीत गा कर यहां की एक मुस्लिम गायिका शहनाज अख्तर काफी लोकप्रिय हो गई है। जब वह जसगीत गाती हैं तो पूरे तरह से इसमें डूब जाती है। उनके गाए जसगीत की धूम देश-विदेश में है। अगर आपको भी जसगीत का आनंद लेना हो और साथ ही खल्लारी में भीम पांव सहित प्रकृति के नजारों से दो-चार होना हो तो आपका भी यहां स्वागत है।

3 टिप्पणियाँ:

anu गुरु अप्रैल 30, 11:37:00 am 2009  

जसगीत का अपना अलग ही मजा होता है। जसगीत तो छत्तीसगढ़ की शान हैं। यह एक ऐसा गीत होता है जिसमें देवी माता की महिमा का बखान होता है। आपने अच्छी जानकारी दी है, धन्यवाद

ajay गुरु अप्रैल 30, 11:39:00 am 2009  

ऐसे गांवों वालों को हम साधुवाद देते हैं जो लंबी दूरी तय करके माता दे दरबार में जसगीत का अलखा जगाने का काम कर रहे हैं।

बेनामी,  गुरु अप्रैल 30, 11:46:00 am 2009  

संगीत का कोई धर्म नहीं होता दोसत, गायिका शहनाज अख्तर को जसगीत गाने के लिए बधाई

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