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बुधवार, मई 12, 2010

1300 पोस्ट भी हो गई पूरी

हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर हमारी 1300 पोस्ट पूरी हो गई है। 1300 पोस्ट तक का सफर हमने एक साल और दो माह में  यानी करीब 14 माह में पूरा किया है।
हमने ब्लाग जगत में पिछले साल जब फरवरी से कदम रखा था तब हमें मालूम नहीं था कि हमें ब्लाग लेखन का ऐसा नशा लग जाएगा कि हम लिखते चले जाएंगे और ब्लाग बिरादरी हम पर प्यार बरसते जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ है और आज हमने ब्लाग लेखन में 1300 पोस्ट का आंकड़ा भी पार कर लिया है। हमने खेलगढ़ में जहां अब तक आठ सौ का आंकड़ा पार करते हुए 845 पोस्ट लिखी है, वहीं राजतंत्र में हमने आज की पोस्ट को मिलाकर 461 पोस्ट लिखी है। एक बार हम फिर बता दें कि हमारे ब्लाग राजतंत्र को एक साल में सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली है। कल की तारीख में हमारा यह ब्लाग चिट्ठा जगत की सक्रियता सूची में 33वें स्थान पर था। हमारे इस ब्लाग को 37,000  पाठक मिले हैं। हमने ब्लाग जगत में दो ब्लागों के साथ इस साल से ब्लाग 4 वार्ता में चर्चा करने का काम भी ललित शर्मा के साथ प्रारंभ किया है। हमें इस बात की खुशी है कि हमारी चर्चा को भी ब्लाग बिरादरी ने पसंद किया है और हमें ब्लागरों का पूरा स्नेह और प्यार मिला है। उम्मीद करते हैं कि आगे भी हमें ऐसा ही प्यार मिलते रहेगा। इसी उम्मीद के साथ लेते हैं विदा कल तक के लिए। कल फिर एक नई पोस्ट के साथ आप सबके सामने होंगे।

11 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari बुध मई 12, 07:39:00 am 2010  

अरे वाह जी, बहुतेरी बधाई!! गजब ढा रहे हो!! १३०० पोस्ट...जय हो!!



एक अपील:

विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

-समीर लाल ’समीर’

ललित शर्मा बुध मई 12, 09:21:00 am 2010  

वाह वाह वाह
आप तो ब्लाग जगत के सचिन तेन्दुलकर हैं
धुंवाधार 13 शतक लगा दिए।

बधाईयां जी बधाइयां

नरेश सोनी बुध मई 12, 10:12:00 am 2010  

बधाई हो राजकुमार जी।
बहुत जल्द 13,000 का आंकड़ा भी पार करें।
शुभकामनाएं।

ढपो्रशंख बुध मई 12, 11:32:00 am 2010  

ज्ञानदत्त ने लडावो और राज करो के तहत कल बहुत ही घिनौनी हरकत की है. आप इस घिनौनी और ओछी हरकत का पुरजोर विरोध करें. हमारी पोस्ट "ज्ञानदत्त पांडे की घिनौनी और ओछी हरकत भाग - 2" पर आपके सहयोग की अपेक्षा है.

कृपया आशीर्वाद प्रदान कर मातृभाषा हिंदी के दुश्मनों को बेनकाब करने में सहयोग करें. एक तीन लाईन के वाक्य मे तीन अंगरेजी के शब्द जबरन घुसडने वाले हिंदी द्रोही है. इस विषय पर बिगुल पर "ज्ञानदत्त और संजयदत्त" का यह आलेख अवश्य पढें.

-ढपोरशंख

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi बुध मई 12, 03:53:00 pm 2010  

ढेर सी बधाइयाँ,ऐसे ही गतिमान रहिए।

राजकुमार सोनी बुध मई 12, 04:17:00 pm 2010  

बधाई हो भाई।
सक्रियता में तुम्हारा कोई जवाब नहीं।

काजल कुमार Kajal Kumar बुध मई 12, 10:24:00 pm 2010  

1300 !!!!!!!!!!!
हे भगवान (भई आप दीन-दुनिया के बाक़ी काम कब करते हैं).
बहुत सी शुभकामनाएं :-)

ढपो्रशंख गुरु मई 13, 09:39:00 pm 2010  

ज्ञानदत्त और अनूप की साजिश को बेनकाब करती यह पोस्ट पढिये।
'संभाल अपनी औरत को नहीं तो कह चौके में रह'

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