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शुक्रवार, मई 28, 2010

समीर लाल और अजय झा ने नहीं निभाया वादा

अपने ब्लाग जगत के बिग-बी यानी समीर लाल और अजय कुमार झा जी ने नए साल में छत्तीसगढ़ आने का वादा किया था, पर ये वादा इन्न्होंने नहीं निभाया। समीर लाल जी तो जबलपुर आकर लौट गए पर छत्तीसगढ़ नहीं आएं। न जाने क्यों उन्होंने छत्तीसगढ़ के ब्लागरों का दिल तोड़ा।
जब पिछले साल हमारी समीर लाल जी के साथ दिल्ली वाले अजय कुमार झा से बात हुई थी तो दोनों ने नए साल में छत्तीसगढ़ आने का वादा किया था। नए साल में हमने समीर लाल जी से उनके उस फोन नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया था जिस नंबर से उन्होंने हमें एक बार फोन किया था, पर वह नंबर नहीं लगा और उनसे बात नहीं हो सकी। लेकिन हमारी एक पोस्ट में फिर से उन्होंने यह बात लिखी थी कि वे जल्द आने वाले हैं। समीर भाई कनाडा से भारत तो जरूर आएं पर वे छत्तीसगढ़ नहीं आएं। अब वे यहां क्यों नहीं आएं इसका जवाब तो वे ही दे सकते हैं। समीर जी के साथ ही अपने अजय झा भी आने वाले थे, पर वे भी नहीं आएं। हम अपने इन दोनों मित्रों से जानना चाहते हैं कि इन्होंने आखिर किस कारण से अपना वादा नहीं निभाया

14 टिप्पणियाँ:

अविनाश वाचस्पति शुक्र मई 28, 06:41:00 am 2010  

जो वादा किया है

वो निभाना पड़ेगा।


अगर यह गीत है तो गीत को और अगर मुहावरा है तो मुहावरे को झूठ साबित करने के लिए।

Udan Tashtari शुक्र मई 28, 07:24:00 am 2010  

आखिरी बार भारत मैं नवम्बर २००८ में आया था और वापस अप्रेल २००९ में कनाडा आ गया. उसके बाद अब तक भारत नहीं आया, ये कौन समीर लाल बीच में आकर चला गया. ईमेल आईदी हैक होते सुना था, ये तो पूरा मैं हैक हो गया दिखता हूँ. :)

चाहो तो पासपोर्ट का स्कैन लगा दूँ कि कब आखिरी बार लौटा. मगर दिसम्बर में आने का वादा है इस बरस. उसमें चूक हो, तो कहना.

आपसे बराबर और ज्यादा मुझे चाहत है आपके बीच आने की, यकीं जानिये.

हाँ, अजय की गलती है. उसे आना चाहिये था. चलो, मिल कर बैण्ड बजाई जाये उनकी. हा हा!!

'उदय' शुक्र मई 28, 09:05:00 am 2010  

....बम बम ... बम बम ...!!!

पी.सी.गोदियाल शुक्र मई 28, 09:55:00 am 2010  

राजकुमार जी, बड़े लोग वादे करते ही तोड़ने के लिए हैं !..............................हा-हा-हा-हा-हा मुझे भी यह सटीक मौक़ा लगा भड़ास निकलने का !

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari शुक्र मई 28, 11:54:00 am 2010  

भोंभरा तिपत हे अभी, बरसात म आही भाई मन, सुवागत हे उंखर.

राजकुमार सोनी शुक्र मई 28, 02:56:00 pm 2010  

संजीव भाई ने ठीक लिखा है अभी फटे तक गर्मी है। अभी मत बुलाओ यार। ठंड के दिनों में दिन चार दिनों की छुट्टी लेकर मौज करेंगे।
ललित भाई ने तुमसे कुछ बातचीत की होगी.. देखो उस पर आगे क्या कर सकते हैं।

बी एस पाबला शुक्र मई 28, 03:14:00 pm 2010  

अरे! नवम्बर से दिस्म्बर हो गए उड़न छू!

अजय झा के आने से पहले तो हम फिर जा रहे उनसे मिलने, अगले माह

बी एस पाबला

अजय कुमार झा शुक्र मई 28, 05:47:00 pm 2010  

राज भाई ,
हम तो अभी अभी पहुंचे दफ़्तर से इसलिए अभी देखा नहीं तो पहले ही बता दिया होता । उडन जी तो एलियन हैं , उनका पता नहीं कब कहां पधार जाएं । हम अपना वादा जरूर निभाएंगे राज भाई । बहुत जल्द ही हम आपको दिन महीना और तारीख भी बता देंगे । फ़िलहाल तो बस यही समझिए कि जो आग उधर लगी है वही आग इधर लगी है । हा हा हा दोनों जगह उतनी ही गर्मी है न इसलिए कहा

Mithilesh dubey शुक्र मई 28, 08:52:00 pm 2010  

Are bhaiya nahi aaye to phone kar ke puch liya hota ,post likhne ki kya jaroort aan padi , aise to mujhse bhi bahut se logono ke kaha tha milne ke liye parntu aaye nahin .

गिरीश बिल्लोरे शनि मई 29, 12:14:00 am 2010  

आखिरी बार भारत मैं नवम्बर २००८ में आया था और वापस अप्रेल २००९ में कनाडा आ गया. उसके बाद अब तक भारत नहीं आया,''''''''''''?. :)
मुझे कंपकंपी आ रही है,१४ मार्च २००९ के १० दिन पहले से १० दिन बाद तक हमारे साथ कौन थे... बवाल तो गश खाकर गिर गये हैं

गिरीश बिल्लोरे शनि मई 29, 12:15:00 am 2010  

अजय भाई आये थे रूप बदल के आपने नहीं देखा

सतीश चंद्र सत्यार्थी शनि मई 29, 04:23:00 am 2010  

अजय भाई, चले भी जाइए अब तो...

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